महासमुंद / किन गुणों की वजह से इन पेड़ों पर वन माफिया की नजर, छत्तीसगढ़ सरायपाली ओडिशा सीमा तेजी से सिमट रहा जंगल क्यों लगातार हो रहा है इस प्रजाती के पेड़ो का परिवहन इस बार फिर ट्रक सहित आरोपियों के खिलाप बड़ी कार्यवाही!
। इन्हीं में खैर का नाम भी शामिल है। इस पेड़ का इस्तेमाल औषधि बनाने से लेकर पान और पान मसाला में इस्तेमाल होने वाले कत्था, चमड़ा उद्योग में इसे चमकाने के लिए किया जाता है। प्रोटीन की अधिकता के कारण ऊंट और बकरी के चारे के लिए इसकी पत्तियों की काफी मांग है। चारकोल बनाने में भी इस लकड़ी का उपयोग होता है। आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल डायरिया, पाइल्स जैसे रोग ठीक करने में होता है। मांग अधिक होने की वजह से खैर के पेड़ों को अवैध रूप से जंगल से काटा जाता है।
देशभर से आए दिन खैर की लकड़ी तस्करी की खबरें आती रहती हैं। औषधीय गुण, कत्था बनाने और चमड़ा उद्योग में उपयोगिता के लिए मांग तेज होने की वजह से खैर की प्रजाति पर संकट आ गया है । मांग अधिक होने की वजह से वन तस्कर बेहताशा इस पेड़ को काटते हैं। बाजार में लकड़ी की कीमत 5000 से 10 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक है। इस तरह एक वयस्क पेड़ से 5 से 7 लाख रुपए तक का फायदा हो जाता
छत्तीसगढ़ ओडिशा सीमा से तस्करों द्वारा अवैध रूप से खैर प्रजाति की लकड़ी की तस्करी लगातार की जा रही है! एक बार फिर से पुलिस विभाग और वन विभाग की संयुक्त कार्यवाही में लाखों रुपये कीमत की खैर लकड़ी जप्त की गई है! विभाग की मुस्तैदी से तस्करों में हड़कंप मचा हुआ है!
वनमंडलाधिकारी पंकज राजपुत के निर्देशन में उप वनमंडलाधिकारी अनिल भास्करन के मार्गदर्शन में वन परिक्षेत्र अधिकारी सरायपाली प्रत्युष टाण्डेय के कुशल नेतृत्व में परिक्षेत्र सरायपाली के कर्मचारियों का टीम गठित कर मुखबीर की सूचना के आधार पर दिनांक 10.04.2024 को एक ट्रक 12 चक्का वाहन में अवैध रूप से खैर लकड़ी सागरपाली से सरसीवां की और जा रही है! सूचना के आधर पर, मौके में पहुंचने पर पुलिस विभाग द्वारा मुखबीर द्वारा बताये गये ट्रक का पिछा करते हुए मेन रोड़, ग्राम माधोपाली (लम्बर) बजरंगबली मंदिर नाका, सरसीवा रोड़ के पास उक्त ट्रक को हमराह स्टाफ के द्वारा रोककर ट्रक क्रमांक सी.जी. 06 जी.वाय. 1454 के चालक को रोका और पूछ ताझ किया गया!
उक्त व्यक्ती से नाम पूछने पर अपना नाम मकरध्वज भोई, पिता बनमाली भोई, उम्र 40 वर्ष साकिन जाडामुडा, थाना बसना, जिला महासमुन्द छ.ग. का रहने वाला बताया, एवं ट्रक में क्या लोड है पूछने पर गोल मोल जवाब देने लगा। गंभिरता से पुछने पर अवैध खैर लकड़ी को बसना से जांजगीर चापा ले जाना बताया। उक्त ट्रक की पुलिस एवं वन विभाग के द्वारा संयुक्त रूप से तलाशी करने पर भारी मात्रा में खैर लकड़ी पाया गया।
ट्रक वाहन को खैर लकड़ी मय वजन करवा कर थाना सरायपाली लाया गया एवं रात 7:15 बजे वन विभाग को सुपुर्द किया गया।
उक्त कार्यवाही में खैर प्रजाति के लट्ठा 1073 नग 11.360 घ.मी. एवं एक 12 चक्का ट्रक वहान कमांक सी.जी. 06 जी. वाय. 1454 खैर लठ्ठा मय जप्त की गई, जिसका पी.ओ.आर. नं. 19920/09 दिनांक 10.04.2024 जारी की गई है। जप्त वनोपज की कीमत 1.25 लाख है, आरोपी से पुछताछ कर भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा धारा 41, 42 के साथ धारा 76, छ.ग. अभिवहन (वनोपज) नियम 2001 की धारा 03, 04, 05, 14 एवं धारा 22 के अंतर्गत कार्यवाही की जा रही है। प्रकरण की विवेचना जारी है।
उपरोक्त कार्यवाही में थाना प्रभारी, थाना सरायपाली एवं स्टाफ तथा वन परिक्षेत्र अधिकारी सरायपाली प्रत्युष टाण्डेय, स.प.अ. सिंघोडा संतोष कुमार पैकरा, स.प.अ. सरायपाली योगेश्वर निषाद, स.प.अ. बलौदा रविलाल निर्मालकर, स.प.अ. पालीडीह योगेश्वर कर एवं सरायपाली परिक्षेत्र के समस्त वनरक्षक और सुरक्षा श्रमिकों का सहयोग रहा।



