बसना : मानसिक रोगों के प्रति बढ़ती जागरूकता: 25 सितम्बर को अग्रवाल नर्सिंग होम में विशेषज्ञ डॉ. बी. त्रिवेदी देंगे उपचार और परामर्श

बसना : मानसिक रोगों के प्रति बढ़ती जागरूकता: 25 सितम्बर को अग्रवाल नर्सिंग होम में विशेषज्ञ डॉ. बी. त्रिवेदी देंगे उपचार और परामर्श

महासमुंद। आधुनिक जीवनशैली, भागदौड़ और तनावपूर्ण वातावरण के कारण मानसिक रोगों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पहले जहाँ लोग मानसिक बीमारियों को लेकर खुलकर बात करने से कतराते थे, वहीं अब समाज में इस विषय पर जागरूकता बढ़ रही है। चिंता, तनाव, अवसाद, अनिद्रा, नशे की लत, चिड़चिड़ापन और अनावश्यक डर जैसी समस्याएं अब आम हो चुकी हैं। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए अग्रवाल नर्सिंग होम मल्टीस्पेशियलिटी सेंटर ने मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेष परामर्श शिविर का आयोजन किया है।

यह शिविर गुरुवार, 25 सितम्बर 2025 को शाम 6 बजे से रात 7 बजे तक आयोजित होगा। इसमें प्रसिद्ध मानसिक एवं यौन रोग विशेषज्ञ डॉ. बी. त्रिवेदी (एम.बी.बी.एस., डी.एन.बी.) मरीजों को उपचार और मार्गदर्शन देंगे।

मानसिक रोगों के प्रमुख लक्षणवि शेषज्ञों के अनुसार मानसिक बीमारियों की पहचान कई बार मुश्किल हो जाती है क्योंकि इनके लक्षण शारीरिक नहीं, बल्कि व्यवहार और सोच में दिखाई देते हैं।घबराहट, बेचैनी और एक ही विचार बार-बार मन में आना।तनाव, फोबिया, चिड़चिड़ापन और अत्यधिक क्रोध।किसी कार्य में मन न लगना, अनिद्रा, आलस्य, आत्मविश्वास की कमी।अकेले में बड़बड़ाना, अनावश्यक डर महसूस होना।याददाश्त की समस्या, बार-बार चीज़ें भूलना।नशे की लत जैसे शराब, गांजा, तंबाकू, सिगरेट, मादक पदार्थों का सेवन।यौन संबंधी विकार, थकान, शारीरिक कमजोरी, व्यवहार में बदलाव आदि।यदि समय रहते इन समस्याओं का इलाज न किया जाए तो यह गंभीर मानसिक विकारों का रूप ले सकती हैं।

समाज में मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतीतेजी से बदलती जीवनशैली ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है। आजकल बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक इस समस्या से जूझ रहे हैं। पढ़ाई का दबाव, बेरोजगारी, कार्यस्थल का तनाव, पारिवारिक कलह और नशे की प्रवृत्ति मानसिक रोगों को जन्म दे रहे हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इन बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

कई बार लोग शर्म या सामाजिक दबाव के कारण अपनी समस्या छिपाते हैं और इलाज नहीं करवाते। यही वजह है कि अवसाद या अन्य विकार गंभीर स्तर तक पहुँच जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक रोग भी अन्य बीमारियों की तरह सामान्य हैं और इनका इलाज पूरी तरह संभव है।

शिविर की विशेषता

अग्रवाल नर्सिंग होम द्वारा आयोजित इस शिविर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मरीजों को विशेषज्ञ से व्यक्तिगत रूप से मिलने और परामर्श लेने का अवसर मिलेगा।

डॉ. बी. त्रिवेदी मरीजों की जांच कर सही उपचार और दवाइयों की जानकारी देंगे।

मानसिक व यौन रोगों से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास करेंगे।

मरीजों को स्वस्थ जीवनशैली और सकारात्मक सोच अपनाने के लिए मार्गदर्शन देंगे।

अस्पताल प्रशासन ने बताया कि इस शिविर के लिए अग्रिम पंजीयन अनिवार्य है। इससे मरीजों को समय पर सुविधा मिल सकेगी और उन्हें अधिक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी।

अस्पताल प्रबंधन का संदेश

अग्रवाल नर्सिंग होम के प्रबंधन ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता फैलाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। शारीरिक बीमारियों की तरह ही मानसिक रोगों का भी समय पर इलाज बेहद ज़रूरी है।

प्रबंधन ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति में उपरोक्त लक्षण दिखाई दें तो उसे नज़रअंदाज़ न करें और तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें। समय रहते उपचार मिलने पर मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है।

पंजीयन और संपर्क विवरण

इस विशेष शिविर में परामर्श के लिए मरीजों को पूर्व पंजीयन कराना होगा।
📞 संपर्क नंबर: 77708-68473, 84618-11000

मध्य प्रदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस में जिला अध्यक्षों के बदलेंगे चेहरे, चयन के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त

मध्य प्रदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस में जिला अध्यक्षों के बदलेंगे चेहरे, चयन के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त

 

रायपुर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) का गुजरात से शुरू हुआ ‘संगठन सृजन अभियान’ अब हरियाणा और मध्य प्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ में भी लागू होगा। प्रदेश में कई जिलों के अध्यक्षों को बदला जाएगा। इसके लिए एआईसीसी ने 17 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी है।

ये पर्यवेक्षक जिलों का दौरा कर स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से चर्चा करेंगे और जिला अध्यक्ष पद के दावेदारों की सूची तैयार कर साक्षात्कार लेंगे। इसके बाद गोपनीय रिपोर्ट एआईसीसी को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर नए जिलाध्यक्ष नियुक्त होंगे। अक्टूबर में पर्यवेक्षकों के आने की संभावना है।

महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता

जिलाध्यक्ष के लिए तीन से पांच नाम प्रस्तावित किए जाएंगे। इनमें 50 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे, जबकि शेष पदों में 50 वर्ष से कम आयु के युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। एआईसीसी चाहती है कि नए जिलाध्यक्ष केवल संगठनात्मक जिम्मेदारी ही न संभालें बल्कि चुनाव लड़ने योग्य भी हों।

संगठन को मजबूत करने की कोशिश

गुजरात और अन्य राज्यों की तरह यहां भी पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की योजना बना रही है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मार्च में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 14 जिलाध्यक्षों की सूची जारी की थी, लेकिन 27 जिलाध्यक्षों की नियुक्तियां लंबित रहीं। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि आगे और भी पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। यह कदम आगामी विधानसभा, लोकसभा और नगरीय निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है।

जिलाध्यक्षों को मिलेंगी अधिक शक्तियां

इस बार जिलाध्यक्षों को संगठन में पूरी शक्तियां दी जाएंगी। टिकट वितरण में भी उनकी रिपोर्ट को अहम माना जाएगा। अब तक जिलाध्यक्षों पर किसी विशेष नेता या गुट का दबाव रहता था और स्थानीय कार्यकर्ताओं की उपेक्षा होती थी। नए बदलाव से पार्टी को जमीनी कार्यकर्ताओं को जोड़ने में मदद मिलेगी।

नियुक्त पर्यवेक्षकों की सूची

सप्तगिरि उलाका, अजय कुमार लल्लू, सुबोध कांत सहाय, उमंग सिंगर, आरसी खुंटिया, राजेश ठाकुर, विवेक बंसल, डॉ. नितिन राउत, श्याम कुमार बरवे, प्रफुल्ल गुदाढे, चरण सिंह सापरा, विकास ठाकरे, हीना कांवरे, रीता चौधरी, रेहाना रेयाज चिश्ती, अजमतुल्लाह हुसैनी और सीताराम लांबा।

मंडल और ब्लॉक कमेटियां

प्रदेश कांग्रेस में मंडल और ब्लॉक कमेटियों का गठन भी पूरा हो गया है। सूची जल्द जारी होगी। बताया जा रहा है कि प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज ने सूची एआईसीसी को भेज दी है। 7 जुलाई को राजधानी के राजीव भवन में हुई राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने निर्देश दिए थे कि बूथ से लेकर जिलाध्यक्षों की नियुक्ति 30 सितंबर तक पूरी कर ली जाए।

पहली बार प्रदेश में ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों के नीचे मंडल कमेटियों का गठन किया जा रहा है। पूरे प्रदेश में करीब 1,300 मंडल कमेटियां बनाई जाएंगी, जिनमें प्रत्येक में 21 सदस्य होंगे। इनमें अध्यक्ष, तीन उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, तीन सचिव, तीन सहसचिव, एक इंटरनेट मीडिया समन्वयक और नौ कार्यकारिणी सदस्य शामिल होंगे।

महासमुंद : छत्तीसगढ़ रजत जयंती महोत्सव एवं सेवा पखवाड़ा 2025 जिले में ‘पर्पल फेयर’ का आयोजन 26 सितम्बर को

महासमुंद : छत्तीसगढ़ रजत जयंती महोत्सव एवं सेवा पखवाड़ा 2025 जिले में ‘पर्पल फेयर’ का आयोजन 26 सितम्बर को

 

महासमुंद समाज कल्याण विभाग द्वारा रजत जयंती महोत्सव एवं सेवा पखवाड़ा 2025 के अंतर्गत 02 अक्टूबर 2025 तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिले में दिव्यांगजनों, वरिष्ठजनों तथा विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए विविध गतिविधियाँ संचालित होंगी।

इसी कड़ी में 26 सितम्बर 2025 को जिला मुख्यालय स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर मांगलिक भवन, खैरा महासमुंद में जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग एवं सी.आर.सी. राजनांदगांव संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में “पर्पल फेयर” (दिव्यांगजनों हेतु, दिव्यांगजनों द्वारा) का आयोजन किया जा रहा है। इस मेले के माध्यम से दिव्यांगजनों को अपनी प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन करने, कौशल विकास के अवसर प्राप्त करने एवं विभिन्न हितधारकों से जुड़ने के लिए एक समावेशी मंच प्रदान किया जाएगा, ताकि उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल सके।

पर्पल फेयर में दिव्यांगजनों हेतु रोजगार मेला, सहायक उपकरणों का वितरण, सरकारी योजनाओं एवं प्रकाशनों की प्रदर्शनी, दिव्यांग कला गैलरी, मनोरंजक खेल एवं गतिविधियाँ, संचालित पाठ्यक्रमों की जानकारी, भोजन स्टॉल, सांस्कृतिक एवं खेलकूद प्रतियोगिताओं के साथ ही दिव्यांगजनों के लिए, दिव्यांगजनों द्वारा गतिविधियां आयोजित की जाएगी। समाज कल्याण विभाग की उप संचालक श्रीमती संगीता सिंह ने जिले के अधिक से अधिक दिव्यांगजन, वरिष्ठजन एवं स्कूली/महाविद्यालयीन दिव्यांग छात्र-छात्राओं से इस आयोजन में शामिल होकर इसे सफल बनाने की अपील की है।

CG Weather Update: बंगाल की खाड़ी में उठा खतरनाक बंवडर, आज छत्तीसगढ़ के इन इलाकों में होगी भारी बारिश

CG Weather Update: बंगाल की खाड़ी में उठा खतरनाक बंवडर, आज छत्तीसगढ़ के इन इलाकों में होगी भारी बारिश

 

छत्तीसगढ़ में विदाई की ओर बढ़ रहा मानसून एक बार फिर बरसने की तैयारी में है। मौसम विभाग ने बुधवार से जिले में रिमझिम वर्षा की संभावना जताई है। इस बीच मंगलवार को दोपहर कुछ क्षेत्रों में हल्की वर्षा भी हुई। पिछले कुछ दिनों से वातावरण अनुकूल रहने से तापमान में कमी आई है और उमस भरी गर्मी से राहत मिली है।

मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने बताया कि पूर्व-मध्य और सीमावर्ती उत्तरी बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से 24 सितंबर से मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ में भारी वर्षा और मेघ गर्जन की गतिविधियों में वृद्धि हो सकती है। इस दौरान आकाशीय बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है।

खरीफ फसलों के लिए राहत

फिलहाल खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त पानी मौजूद है। इन दिनों धान की फसल गर्भ अवस्था में है और कई जगह दाने भरने की स्थिति में भी पहुंच चुकी है। खेतों में हरियाली छाई हुई है और फसलें लहलहा रही हैं। हालांकि दानों को पकने के लिए अंतिम दिनों में पानी की और जरूरत पड़ेगी। ऐसे में भादो के अंतिम दिनों में होने वाली वर्षा फसलों के लिए लाभकारी साबित होगी।

सबसे अधिक वर्षा नांदगांव में

चालू मानसून सत्र में जिले में अब तक सबसे अधिक वर्षा राजनांदगांव तहसील में 1191.2 मिमी दर्ज की गई है, जबकि सबसे कम वर्षा छुरिया तहसील में 681 मिमी दर्ज हुई। भू-अभिलेख शाखा के अनुसार जिले की सातों तहसीलों में अब तक कुल 6197.8 मिमी वर्षा दर्ज हुई है। इसका औसत 885.4 मिमी रहा।

डोंगरगढ़ तहसील – 989.9 मिमी

लाल बहादुर नगर – 866.5 मिमी

घुमका – 759.5 मिमी

कुमरदा – 819.1 मिमी

डोंगरगांव – 890.6 मिमी

छुरिया – 681.0 मिमी

राजनांदगांव – 1191.2 मिमी

प्रमुख शहरों का मौसम (डिग्री सेल्सियस)

राजनांदगांव : अधिकतम 34.0, न्यूनतम 24.5

रायपुर : अधिकतम 34.0, न्यूनतम 24.6

बिलासपुर : अधिकतम 33.7, न्यूनतम 26.0

दुर्ग : अधिकतम 34.2, न्यूनतम 24.6

सरायपाली : तोषगांव–सिंघनपुर मार्ग का पुल पानी के उफान में डूबकर आवागमन बाधित / बसना के बंसुला स्कूल मे जलभराव से परेशान आज परीक्षा देखें वीडियो

सरायपाली : तोषगांव–सिंघनपुर मार्ग का पुराना पुल पानी के उफान में डूबकर आवागमन बाधित बसना के बंसुला स्कूल मे जलभराव से परेशान आज परीक्षा देखें वीडियो

 

पिथौरा विकासखंड के अंतर्गत कांतारा नाल तूफान पर

 

बसना/महासमुंद, 24 सितंबर 2025।
लगातार हो रही बारिश ने एक तरफ शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है तो दूसरी तरफ यातायात व्यवस्था को भी ठप कर दिया है। नवीन प्राथमिक शाला बंसुला डीपा में कक्षाओं तक पानी घुस गया है, वहीं तोषगांव–सिंघनपुर मार्ग का पुराना पुल पानी के उफान में डूबकर आवागमन बाधित कर रहा है। दोनों घटनाओं ने ग्रामीणों को गहरी चिंता में डाल दिया है।

📌 बंसुला डीपा स्कूल: पढ़ाई पर संकट

बसना जनपद मुख्यालय और शिक्षा विभाग कार्यालय से महज 500–700 मीटर की दूरी पर स्थित बंसुला डीपा प्राथमिक शाला बुधवार को पूरी तरह जलभराव से घिर गई। रात से लगातार हो रही बारिश के बाद स्कूल का परिसर, कक्षाएँ और कार्यालय तालाब में बदल गए।

बुधवार को पहली से पाँचवीं तक की परीक्षाएँ निर्धारित थीं, लेकिन जलभराव के कारण न तो बच्चों के बैठने की व्यवस्था हो सकी और न ही शिक्षक पढ़ाई करा पाए। नतीजतन बच्चों की परीक्षा स्थगित करनी पड़ी।

हर साल दोहराई जाती है समस्या

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि यह समस्या नई नहीं है। पिछले कई वर्षों से बरसात होते ही स्कूल परिसर डूबान क्षेत्र में बदल जाता है। बारिश के पानी की निकासी का कोई पुख्ता इंतजाम न होने से यह स्थिति हर साल बनती है।

टीवी चैनलों और राष्ट्रीय अखबारों में यह मुद्दा बार-बार उठ चुका है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार बदली, अधिकारी बदले, मगर बच्चों की परेशानी वैसी ही बनी रही।

बच्चों का भविष्य दांव पर

अभिभावकों का कहना है कि जलभराव की वजह से बच्चों की पढ़ाई पर गहरा असर पड़ रहा है। “बरसात आते ही हमें डर लगता है कि कहीं स्कूल फिर से डूब न जाए। हमारे बच्चों की पढ़ाई बार-बार रुक जाती है। परीक्षा के समय तो और भी बड़ी दिक्कत होती है,” एक अभिभावक ने चिंता जताई।

प्रशासन से अपील

ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द स्कूल परिसर से पानी निकासी की व्यवस्था कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा और शिक्षा का अधिकार केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।

📌 तोषगांव पुल: आवागमन पर रोक

उधर, तोषगांव से सिंघनपुर मार्ग पर बना पुराना पुल भी बुधवार को बारिश के पानी में डूब गया। सुबह से ही पुल के ऊपर तेज़ बहाव होने लगा, जिससे बस, ट्रक और छोटे वाहन रुक गए। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पैदल पुल पार करते देखे गए।

हादसे का खतरा

ग्रामीणों ने बताया कि यह पुल काफी पुराना और जर्जर हो चुका है। बरसात के दिनों में अक्सर पानी ऊपर से बहने लगता है और राहगीर फँस जाते हैं। “कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। बच्चों और बुज़ुर्गों को पार कराने में जान जोखिम उठानी पड़ती है,” ग्रामीणों ने कहा।

नया पुल निर्माण की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि अब समय आ गया है कि इस मार्ग पर नया पुल बनाया जाए। लगातार बाधित यातायात न केवल ग्रामीणों की रोजमर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करता है, बल्कि आपात स्थिति में भी बड़ी दिक्कतें पैदा करता है। स्कूल–कॉलेज जाने वाले बच्चे, किसान और मज़दूर सभी को परेशानी झेलनी पड़ती है।

प्रशासन की जिम्मेदारी

स्थानीय लोगों ने जिला कलेक्टर से माँग की है कि इस गंभीर समस्या का जल्द समाधान किया जाए। उनका कहना है कि जब तक नया पुल स्वीकृत और निर्मित नहीं होता, तब तक हर साल यही स्थिति दोहराई जाएगी।

छत्तीसगढ़ में अब पांच डिसमिल से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री नहीं होगी, पढ़ें क्या है नया नियम

छत्तीसगढ़ में अब पांच डिसमिल से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री नहीं होगी, पढ़ें क्या है नया नियम

 

छत्तीसगढ़ में अब पांच डिसमिल (लगभग 2200 वर्गफीट) से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी। विधानसभा में पारित छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) अधिनियम 2025 को राज्यपाल की मंजूरी मिल गई है और इसके साथ ही यह कानून प्रदेशभर में लागू हो गया है।

अवैध प्लाटिंग पर रोक

नए प्रावधान के तहत कृषि भूमि का ऐसा कोई उपखंड नहीं बनाया जा सकेगा, जिसका क्षेत्रफल 0.05 हेक्टेयर (पांच डिसमिल) से कम हो। सरकार का मानना है कि इस कदम से अवैध प्लाटिंग और कालोनियों पर प्रभावी रोक लगेगी।

पहले डॉ. रमन सिंह सरकार ने भी इसी तरह का नियम लागू किया था, लेकिन भूपेश बघेल सरकार ने इसमें संशोधन कर दिया था। इसके बाद बड़े पैमाने पर कृषि भूमि के छोटे-छोटे हिस्सों में कटाई कर अवैध कॉलोनियां बसाने के मामले बढ़ गए थे। अब नए संशोधन के बाद 2200 वर्गफीट से कम के प्लॉट की रजिस्ट्री पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है।

शहरी क्षेत्रों को मिलेगी छूट

यह नियम केवल ग्रामीण कृषि भूमि पर लागू होगा। शहरी क्षेत्रों में डायवर्टेड भूमि पर व्यावसायिक और आवासीय उपयोग के लिए पांच डिसमिल से कम के प्लॉट की रजिस्ट्री पहले की तरह जारी रहेगी।

सीमांकन विवाद खत्म करने का प्रयास

संशोधन अधिनियम में एक और बड़ा बदलाव किया गया है। अब किसी भी ग्राम का सर्वे या री-सर्वे होने के बाद केवल अधिसूचित जियो-रेफरेंस नक्शे ही मान्य होंगे। इसे भू-राजस्व संहिता की धारा 107 की उपधारा (5) के रूप में जोड़ा गया है। सरकार का कहना है कि इससे सीमांकन और बटांकन से जुड़े विवादों का निपटारा आसान होगा।

हिन्दी साहित्य के जादुई यथार्थवादी विनोद कुमार शुक्ल को मिलेगा ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’

हिन्दी साहित्य के जादुई यथार्थवादी विनोद कुमार शुक्ल को मिलेगा ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’

 

छत्तीसगढ़ के मशहूर लेखक विनोद कुमार शुक्ल को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए 16वें ‘लिटरेचर लाइव! मुंबई लिटफेस्ट 2025’ में ‘गोदरेज लिटरेचर लाइव! लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया जाएगा। 88 वर्षीय शुक्ल अपनी खास ‘जादुई यथार्थवादी’ शैली के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी रचनाएं ‘नौकर की कमीज़’ और ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ दुनियाभर में पसंद की जाती हैं।

शुक्ल का साहित्यिक सफर कई बड़े पुरस्कारों से सजा है। 1999 में ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। 2023 में वे भारत के पहले लेखक बने, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय पेन नबोकोब अवार्ड मिला। 2024 में छत्तीसगढ़ के पहले लेखक के रूप में उन्हें 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया।

क्या कहा विनोद कुमार शुक्ल ने

हाल ही में हिंद-युग्म प्रकाशन ने उनकी पुस्तकों की छह महीने में 30 लाख रुपये की रायल्टी की घोषणा की, जो हिंदी साहित्य में एक बड़ी उपलब्धि है। अवार्ड लेते हुए शुक्ल ने कहा, “लेखन अपनी आवाज ढूंढने का सफर है, जो कविता से शुरू होकर कविता पर खत्म होता है।”

छत्तीसगढ़ ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी 23 सितंबर को किया धरना प्रदर्शन 7 सूत्रीय मांगों पर अड़े

छत्तीसगढ़ ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी 23 सितंबर को किया धरना प्रदर्शन 7 सूत्रीय मांगों पर अड़े

छत्तीसगढ़ कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र नाग के नेतृत्व में 7 सूत्रीय लंबित मांगों की पूर्ति के लिए एक बार फिर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है

संघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र नाग ने बताया कि 15 सितंबर 2025 को जिले के कलेक्टर अनुभाग्य अधिकारी एवं तहसीलदार के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपा था उसके बावजूद आज तक मांगों का कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई इसी के तहत आंदोलन के तृतीय चरण में दिनांक 23 सितंबर 2025 को एक दिवसीय अवकाश लेकर जिला मुख्यालय में प्रातः 11:00 बजे से अपराह्न 2:00 बजे तक धरना प्रदर्शन किया

*ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी की प्रमुख 7 सूत्रीय मांगे-*

1. वेतनमान संशोधन – 4300 ग्रेड पे की स्वीकृति

2. कर क्षेत्र का पुननिर्धारण ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी एवं उद्यान विकास अधिकारी

3. मासिक स्थाई भता fix TA त में वृद्धि 2500 तक

4. संसाधन भता मोबाइल इंटरनेट लैपटॉप एवं स्टेशनरी हेतु

5. अतिरिक्त क्षेत्र भत्ता विभागीय अम्लों की कमी के कारण दिए गए अतिरिक्त प्रभार पर

6. पदनाम संशोधन- मध्य प्रदेश शासन की तर्ज पर ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी का नाम बदलकर उद्यान विस्तार अधिकारी किया जाए

7. पदोन्नति प्रक्रिया प्रारंभ ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी से उद्यान विकास अधिकारी पद पर लंबित पदोन्नति तत्काल किया जाए एवं समय पर किया जाए।

CG News: मूंगफली खाने को लेकर हुए विवाद में पिता-पुत्रों को बोलेरो से कुचला, दो की मौत – पुलिस की लापरवाही पर उठे सवाल

CG News: मूंगफली खाने को लेकर हुए विवाद में पिता-पुत्रों को बोलेरो से कुचला, दो की मौत – पुलिस की लापरवाही पर उठे सवाल

 

छत्तीसगढ़ सूरजपुर जिले के तिवरागुड़ी गांव में मूंगफली खाने को लेकर हुए विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया। बोलेरो सवारों ने मोटरसाइकिल से घर लौट रहे पिता और दो पुत्रों को कुचल दिया। हादसे में पिता और बड़े बेटे की मौत हो गई, जबकि छोटा बेटा गंभीर रूप से घायल है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

खेत से थाने और फिर सड़क तक पहुंचा विवाद

जानकारी के अनुसार, तिवरागुड़ी निवासी त्रिवेणी रवि ने अपने खेत में मूंगफली की फसल बोई थी। सोमवार शाम को उसका छोटा बेटा करण रवि खेत की रखवाली कर रहा था। इसी दौरान रिश्तेदार नर्मदा सोनवानी और उसके बेटे बोलेरो से पहुंचे और करण पर मूंगफली उखाड़कर खाने का आरोप लगाया। विवाद बढ़ा तो करण की पिटाई की गई, मोबाइल तोड़ा गया और लोहे की रॉड से हमला भी किया गया।

बीच-बचाव के लिए पहुंचे पिता त्रिवेणी रवि और बड़े बेटे राजा बाबू के साथ भी मारपीट हुई। तीनों घायल हो गए और उन्होंने थाने जाकर शिकायत दर्ज करानी चाही। पुलिस दोनों पक्षों को थाने लाई, मगर कार्रवाई करने के बजाय समझाइश देकर छोड़ दिया। इस दौरान आरोपितों ने थाने में ही बोलेरो से कुचलने की धमकी दी थी।

पुलिस को फोन किया, पर मदद नहीं मिली

रात को त्रिवेणी रवि और उसके दोनों बेटे थाने से घर लौट रहे थे। नकना चौक के पास बोलेरो सवार आरोपित पहले से घात लगाए बैठे थे। उन्होंने बाइक पर सवार पिता-पुत्रों को रौंदने का प्रयास किया। पीड़ित पक्ष ने घटना से कुछ मिनट पहले ही पुलिस को फोन कर जान बचाने की गुहार लगाई थी, लेकिन कथित तौर पर पुलिसकर्मियों ने फोन काटते हुए कहा कि वे हर विवाद सुलझाने के लिए नहीं बैठे।

कुछ देर बाद बोलेरो ने पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में पिता त्रिवेणी रवि (41) और बड़े बेटे राजा बाबू (21) की मौत हो गई, जबकि छोटा बेटा करण गंभीर रूप से घायल है और सूरजपुर जिला अस्पताल में भर्ती है।

मौत के बाद हरकत में आई पुलिस

मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि यदि पुलिस ने समय रहते कार्रवाई की होती, तो यह घटना रोकी जा सकती थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि मृतक परिवार ने बार-बार मदद मांगी, लेकिन थाने ने मामले को हल्के में लिया। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपितों की तलाश जारी है।

थाना प्रभारी राजेंद्र साहू का कहना है कि दोनों पक्ष एक ही परिवार से जुड़े हैं और थाने में समझौते की बात कही गई थी। इसके बाद ही उन्हें छोड़ा गया था। लेकिन घटना के बाद गंभीर अपराध दर्ज कर आरोपितों की खोजबीन की जा रही है।

सवालों के घेरे में पुलिस

यह पूरा घटनाक्रम पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।थाने में मिली धमकी को नजरअंदाज क्यों किया गया? पीड़ित पक्ष के फोन कॉल को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया? समझौते की आड़ में आरोपितों को छोड़ने का निर्णय किस आधार पर लिया गया? ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की होती, तो दो जानें नहीं जातीं।

बसना : प्रशासन से मदद की गुहार जीराडबरी में तीन घर धंसने की कगार पर, पानी निकासी रोकने का आरोप; इधर ढालम क्षेत्र मे कई एकड़ धान की फसलें बर्बाद

महासमुंद।लगातार झमाझम हो रही बारिश ने महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत जीराडबरी के हालात बिगाड़ दिए हैं। गांव के तीन घरों में पानी घुस गया है और मिट्टी से बने ये घर धंसने की कगार पर पहुँच गए हैं। देखें वीडियो

घरों में रखा राशन, कपड़े और अन्य जरूरी सामान पूरी तरह भीग चुका है। इतना ही नहीं, इनमें से एक परिवार ने आजीविका के लिए घर से सटा छोटा ठेला दुकान खोल रखा था, लेकिन वहां भी पानी भर जाने से दुकान का पूरा सामान खराब हो गया है। पीड़ित परिवार अब बर्तन और बाल्टी के सहारे रात-दिन घर से पानी बाहर निकालने की मशक्कत कर रहे हैं ताकि मिट्टी की दीवारें अचानक ढह न जाएं।

ग्रामीणों का आरोप – निकासी मार्ग को पाट दिया गया
पीड़ितों ने इस पूरी स्थिति के लिए गांव के ही एक व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि संजय साहू नामक व्यक्ति ने गांव के पानी निकासी के रास्ते को मुरूम डालकर पाट दिया। यही कारण है कि अब पूरे गांव का पानी सीधे उनके घरों में घुस रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब यह निकासी मार्ग पाटा जा रहा था, तब उन्होंने इसका विरोध भी किया था। उस समय ग्राम पंचायत के सरपंच और उपसरपंच ने भरोसा दिलाया था कि जल्द ही नाली बनवाकर पानी की निकासी की उचित व्यवस्था की जाएगी। लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद न तो नाली बनी और न ही पानी की निकासी की कोई व्यवस्था की गई। नतीजा यह हुआ कि आज तीनों घर संकट के मुहाने पर आ खड़े हुए हैं।

“जल्दी व्यवस्था नहीं हुई तो घर पूरी तरह ध्वस्त हो जाएंगे”
प्रभावित ग्रामीण लुगरू कुमार, जुगरू कुमार और पूजा कुमार ने बताया कि वे बीते 24 घंटे से लगातार पानी बाहर निकाल रहे हैं। लेकिन बारिश थमने का नाम नहीं ले रही और पानी की निकासी का रास्ता बंद होने के कारण हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया तो उनके घर पूरी तरह ध्वस्त हो जाएंगे और रहने के लिए भी कोई जगह नहीं बचेगी। ऐसे में उनके परिवार खुले आसमान के नीचे आ जाएंगे।

क्षेत्र में फसलें भी बर्बाद
गांव के घर ही नहीं, बल्कि खेत भी इस बारिश की चपेट में आ गए हैं। लगातार हो रही बारिश से ढालम और चनाट क्षेत्र की कई एकड़ धान की फसलें पानी में डूब चुकी हैं। कई खेतों में धान की पौधियां गिर गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीण किसानों का कहना है कि बारिश अगर कुछ दिन और जारी रही तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी। ऐसे हालात में खेती-किसानी करने वाले परिवारों पर आजीविका का बड़ा संकट मंडरा रहा है।

प्रशासन से मदद की गुहार
पीड़ित परिवारों और किसानों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि तत्काल गांव में पानी निकासी की उचित व्यवस्था कराई जाए। साथ ही, जिन परिवारों के घर पानी से भर चुके हैं, उन्हें राहत सामग्री और अस्थायी निवास की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने बार-बार पंचायत और जनप्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन किसी ने भी ठोस कदम नहीं उठाया। अब जब स्थिति गंभीर हो चुकी है, तब प्रशासनिक मदद ही उनकी आखिरी उम्मीद बची है।

ग्रामीणों में नाराजगी
गांव के लोगों का कहना है कि अगर पंचायत स्तर पर समय रहते नाली निर्माण की व्यवस्था कर दी जाती तो आज यह नौबत नहीं आती    । पंचायत और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही के कारण आज तीन परिवार बेघर होने की स्थिति में पहुँच गए हैं। वहीं किसान भी अपनी बर्बाद होती फसलों को देखकर हताश हैं। गांव में चर्चा है कि यदि प्रशासन और पंचायत तुरंत सक्रिय नहीं हुए तो आने वाले दिनों में और भी घर और खेत पानी की चपेट में आ सकते हैं।

 

ग्राम पंचायत जीराडबरी की यह घटना बताती है कि छोटी-सी लापरवाही किस तरह से ग्रामीण परिवारों और किसानों के लिए बड़ा संकट खड़ा कर सकती है। एक तरफ लगातार बारिश से फसलें चौपट हो रही हैं, तो दूसरी तरफ पानी निकासी की व्यवस्था न होने से ग्रामीणों के घर डूबने लगे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कितनी जल्दी इस समस्या पर संज्ञान लेकर पीड़ित परिवारों और किसानों को राहत दिलाता है।