महासमुंद : मस्जिद के पीछे बजरंग बली मंदिर के पास महासमुंद मे एक व्यक्ति को गली गलौज कर हाथ मुक्का से मार पीट और चाकू से चोट पहुंचाने पर मामला दर्ज
मैं हेमन्त दास मानिकपुरी वार्ड नं 08 मस्जिद के पीछे नयापारा महासमुंद का निवासी हूं कक्षा 8 वी तक पढाई किया हूं शाही बिरयानी सेंटर तुमगांव रोड महासमुंद में काम करता हूं कि दिनांक 23.04.2024 के सुबह 08.00 बजे अपने नानी घर से पैदल अपने घर आ रहा था
कुछ देर के लिए मस्जिद के पीछे बजरंग बली मंदिर में बैठा था उसी समय लगभग 08.30 बजे दुर्गेश डीजे और मखनू स्वीपर मुझे देखकर अपना मोटर सायकल रोककर मेरे पास आया और मखनू मेरा कालर पकड़ा और दोनो मिलकर गंदी गंदी मां बहन की गली गलौज कर हाथ मुक्का से मारपीट करने लगा मैं बोला क्यो मार रहे हो
तब दुर्गेश डीजे उस दिन मुझे अपने भाई के साथ आकर चमका रहे थे कहकर गाली गलौज कर मारपीट करने लगा और अपने जेब में रखे चाकू से मेरा बांये पैर के पीछे भाग में जांघ के पास चाकू से वार कर दिया जिससे मुझे जांघ में चोट लगा है फिर मैं किसी तरह वहां से भागकर अपने घर चला गया।
घर पहुंचकर घटना के बारे में अपने बड़े पिताजी डुड्डु रहीम व बड़ा भाई नईम कुरैशी को बताया हूं फिर बड़े पिताजी के साथ थाना आकर मुलाहिजा कराने जिला अस्पताल महासमुंद गया मुलाहिजा बाद थाना आकर रिपोर्ट दर्ज करा रहा हूं रिपोर्ट पढकर देखा मेरे बताये अनुसार लिखा है। थाना में धारा 294-IPC, 323-IPC, 324-IPC, 34-IPC पर मामला दर्ज किया गया।
महासमुंद : ग्राम शेर एफसीआई चावल गोदाम के पास मोटर साइकल और एक्टीवा मे हुई टक्कर
मैं योगेश्वर ध्रुव ग्राम कप्सीडीह थाना राजिम जिला गरियाबंद का निवासी हूं, कालेज की पढाई किया हूं, खेती किसानी काम करता हूं। कि दिनांक 21.04.24 को मेरा बडा भाई त्रिलोकी ध्रुव पिता मदनु ध्रुव उम्र 29 वर्ष साकिन कप्सीडीह ने अपने घर का मोटर सायकल स्पलेण्डर क्र0 CG 04 KT 8254 से अकेले ग्राम कप्सीडीह से सरायपाली तेदुकोना जाने निकला था,
त्रिलोकी ने फोन कर बताया कि दिनांक 21.04.24 के 02.30 बजे से 03.00 बजे के मध्य ग्राम शेर एफसीआई चावल गोदाम के पास पहुचा था कि सामने से एक्टीवा वाहन का चालक तेजी एवं लापरवाही पूर्वक चलाते हुये सामने से मोटर सायकल को ठोकर मारकर एक्सीडेन्ट कर दिया है।
एक्टीवा चालक के पिछे बैठा आदमी ने बताया कि एक्टीवा चालक का नाम गोलु दीवान ग्राम शेर का है, मुझे ईलाज के लिये 108 वाहन से जिला अस्पताल महासमुंद में भर्ती किया है। तब घटना सुन कर मै और मेरा पिता जी मदनु ध्रुव के साथ जिला अस्पताल महासमुंद आये देखा तो त्रिलोकी ध्रुव अस्पताल में भर्ती था
जिसका दाहिना पैर , कमर, छाती, सिर में गंभीर चोट आने से जिला अस्पताल महासमुंद द्वारा उचित ईलाज हेतु रायपुर रिफर किया था हम लोग घायल त्रिलोकी ध्रुव को रायपुर अस्पताल न ले जाकर आरएलसी अस्पताल महासमुंद में भर्ती किये जिसका ईलाज चल रहा है। अपने बडे भाई के ईलाज मे व्यस्त होने से दिनांक 23.04.24 को थाना आकर रिपोर्ट करता हूं रिपोर्ट पढकर देखा मेरे बताये अनुसार लिखी गई है, कार्यवाही चाहता हूं। थाना महासमुंद में धारा 279-IPC, 337-IPC पर मामला दर्ज किया गया।
बसना थाना : ग्राम खम्हन में पुरानी रंजीश और जमीन विवाद पर खेत मे हुए मार पीट पर मामला दर्ज
मैं नवीन कुमार प्रधान ग्राम खम्हन में रहता हू खेती किसानी का काम करता हू कि मैं करीब साढे पांच एकड के ग्राम खम्हन स्थित खेत को खेत मालिक बाला राम बिंझवार से पांच वर्षो के लिये रेगहा में लेकर धान फसल का खेती करता हू उक्त खेत का पूर्व स्वामी फिरतिन बाई थी जो हमारे गांव के शिवलाल पटेल, फिरतिन बाई से रेगहा लेकर खेती करता था। उक्त जमीन को फिरतिन बाई ने बालाराम बिंझवार के पास बिक्री कर दिया है। तब से उक्त साढे पांच एकड जमीन खेत को बाला राम से मैं रेगहा अधिया में पिछले 02 वर्षो से कमा खा रहा हू। कि दिनांक 23/04/2024 को मेरा लडका करूण प्रधान हमारे गांव से बसना काम से मो0सा0 से जा रहा था जो बसना जाते समय देखा कि हमारे खेत में कोई व्यक्ति ट्रेक्टर से जोताई कर मेड बना रहा था तब उक्त बात को मेरा लडका करूण ने बताया
तब मैं मेरा लडका करूण व हमारे गांव के अशोक प्रधान, किशोर प्रधान हमारे खेत में गये जहां पर मेरे खेत में शिवलाल पटेल, रामजीत पटेल, नीलकुमार पटेल पूर्व से मौजूद थे जो मेरे द्वारा शिवलाल पटेल, रामजीत पटेल एवं नीलकुमार पटेल को बोले कि तुम लोग हमारे खेत में क्यो मेड बना रहे हो कहने पर उक्त तीनो ने मुझे ये हमारा खेत है कहकर मुझे मां बहन की गंदी गंदी गाली गलौज कर तीनो ने खेत में पडे डंडा को उठाकर मेरे सिर, कान, पेट, हाथ में मारपीट कर चोट पहुंचाया एवं मौके पर उपस्थित मेरा लडका करूण प्रधान बीच बचाव करने लगा तो उन्हे नीलकुमार पटेल ने करूण के सिर में मारकर चोट पहुंचाया है और उक्त तीनो ने मुझे जान से मारने की धमकी दिये तब हम लोग डर से वहां से चले गये। घटना को साथ में गये अशोक प्रधान, किशोर प्रधान देखे सुने है। रिपोर्ट पढकर देखा मेरे बताये अनुसार सही लिखा गया है रिपोर्ट करता हू कार्यवाही की जावे। थाना में धारा 294-IPC, 323-IPC, 34-IPC, 506-IPC पर मामला दर्ज किया गया।
मैं नील कुमार पटेल ग्राम खम्हन में रहता हू खेती किसानी का काम करता हू कि दिनांक 23/04/2024 को मैं अपने खेत में काम कर रहा था उसी समय गांव के 01 नवीन प्रधान 02 करूण प्रधान 03 किशोर प्रधान सभी साकिनान खम्हन आये और पुरानी रंजीश को लेकर गंदी गंदी गाली देकर हाथ मुक्का से ढेला से मारपीट किये है तुम लोग बसना थाना जाकर क्या कर लोगे कहकर जान से मारने की धमकी दिये कि रिपोर्ट पर थाना बसना में अपराध सदर का पाये जाने से धारा 294, 323, 506, 34 भादवि कायम कर विवेचना में लिया गया। आवेदन नकल जैल है प्रति श्रीमान थाना प्रभारी महोदय, थाना-बसना विषय अनावेदकगण नवीन प्रधान पिता गणेशराम एवं करूण प्रधान ग्राम खमुन्द पोस्ट पथरला एवं किशोर प्रधान पिता त्रिलोचन के द्वारा गदी गंदी गाली गलौज कर मारपीट किये एवं जान से मारने की धमकी दिये जाने बाबत्।
महोदय, निवेदन है कि मैं नील कुमार पिता रामजीत पटेल ग्राम खमुन्द थाना बसना जिला महासमुन्द छ.ग. अवगत है कि दिनांक 23/04/2024 को सुबह लगभग 10.00 बजे के आस पास अनावेदकगण एक राय होकर पुरानी रजीस लेकर गदी गदी गाली देकर हाथ मुक्का से अनावेदकगण मारपीट और जान सहित मारने की धमकी दिया। इस घटना को देखे देव कुमार पटेल, निरपति एवं रामजीत सेतकुमार है। अनावेदकगण बोले कि तुम लोग क्या करोगे ज्यादा से ज्यादा थाना बसना जाओगे इस तरह भयभीत है भविष्य में कोई अप्रिय घटना घटित कर सकते है। अतः महोदय से निवेदन है कि अनावेदकगण के विरूद्ध शीघ्र कार्यवाही किये जाने की कृपा हो।
बसना : मंदिर दर्शन बाद पैदल घर आ रही एक महिला को मोटर साइकल चालक लापरवाही पूर्वक चलते हुए पीछे से ठोकर मारी
इस प्रकार है कि प्रार्थी सचिन अग्रवाल थाना आकर जुबानी रिपोर्ट दर्ज करवाया कि मेरी चाची पुष्पा अग्रवाल पति अशोक अग्रवाल उम्र 50 साल निवासी वार्ड नंबर 12 बसना जो कि शाम करीबन 07 बजे सिद्धेश्वर शिव मंदिर गयी थी मंदिर दर्शन बाद पैदल करीबन 07-30 बजे से 08-00 बजे के मध्य घर वापस आ रही थी कि मंदिर के सामने पहुंची थी
उसी समय गुणमणी साहू पिता विनोद साहू के द्वारा शराब पीकर तेज रफ्तार एवं लापरवाही पूर्वक अपने मो0सा0 क्रमांक CG06GL0208 सुपर स्प्लेंडर गाडी चलाते हुये पुष्पा अग्रवाल को पीछे से ठोकर मारकर एक्सीडेंट कर दिया जिससे पुष्पा अग्रवाल के कमर, सिर एवं शरीर के अन्य अंगो में गंभीर चोटे आई है। एक्सीडेंट की घटना देखकर आसपास के लोग इकट्ठा हुये
तो मो0सा0 का चालक मौके पर भागने की कोशिश किया गया एवं बसना थाना की बोलेरो गाडी से मौके से फरार हो गया है जब उनके परिजन थाना आये तब वहां के स्टाफ द्वारा कहा गया कि उसी सरकारी अस्पताल बसना मुलाहिजा हेतु ले जाया गया है।
परंतु जब उनके परिजन वहां पहुंचे तब वहां बसना थाना का कोई नही मिला। उक्त मो0सा0 का चालक थाना बसना में आरक्षक के पद पर है कि रिपोर्ट पर अपराध धारा 279, 337 भादवि का अपराध कायम कर विवेचना में लिया गया है। रिपोर्ट पढकर देखा मेरे बताये अनुसार सही लिखा गया है रिपोर्ट करता हू कार्यवाही की जावे।
बसना : निःशुल्क यूरोलॉजी कैंप मूत्र एवं पथरी जांच, परामर्श एवं ऑपरेशन!बसना अग्रवाल नर्सिंग होम में 27 अप्रैल 2024 शाम 5 बजे से
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मूत्र एवं पथरी जांच, परामर्श एवं ऑपरेशन
किडनी की पथरी का समुचित इलाज एवं सर्जरी , प्रोस्टेट का इलाज एवं सर्जरी
किडनी में सूजन एवं सिकुडन का इलाज
पुरुषों में बाँझपन एवं नपुंसकता का उपचार कोषका संक्रमण एवं मूत्र नली का सिकुडन
किडनी, प्रोस्टेट और टेस्टिस के कैंसर का इलाज • पेशाब का रुक रुक कर आना, लीक करना या खून आने का उपचार
पीडियाट्रिक यूरोलॉजी की सेवाएं
इमरजेंसी यूरोलॉजी की सेवाएं, ट्रामा से लेकर
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27 अप्रैल 2024
शाम 5 बजे से
डॉ. योगेश बारापात्रे
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किडनी, मूत्र रोग, प्रोस्टेट एवं पथरी के ऑपरेशन पूर्णतः निःशुल्क
मरीज की जांच, परामर्श, रहना, खाना, दवाइयां एवं सम्पूर्ण इलाज पूर्णतः निःशुल्क
ऑपरेशन के इच्छुक मरीज अपनी सभी जांच रिपोर्ट के साथ 26 अप्रैल को भर्ती हो जाएं
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एक्स-रे जांच 50% की छूट
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बसना, जिला महासमुंद (छ.ग.) अग्रिम पंजीयन अनिवार्य
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बसना : छत्तीसगढ़ के बेहतरीन सर्जन्स की टीम बसना अग्रवाल नर्सिंग होम में 27 अप्रैल 2024
सुबह 9 बजे से
AGRAWAL NURSING HOME
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मात्र ₹25,000
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दिनाँक : 27 अप्रैल 2024
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महासमुंद/हेलीकॉप्टर से मतदान दल हो रहे है रवाना।
लोकसभा निर्वाचन 2024 के द्वितीय चरण में महासमुंद लोकसभा सीट पर होंगे मतदान के गरियाबंद अंतर्गत जिला के दूरस्थ एवं संवेदनशील मतदान केंद्रों में मतदान कराने हेतु हेलीकॉप्टर से मतदान दल हो रहे है रवाना।
बसना / विशाल ऑपरेशन शिविर जिसमे विभिन्न प्रकार के हर्निया, गॉलब्लैडर पथरी अपेंडिक्स,बच्चेदानी संबंधित, किडनी स्टोन,प्रोस्टेट, हाइड्रोसील,अंडाशय गठान, ओवेरियन सिस्ट,पॉलिप, परफोरेशन,पाइल्स, फिशर ,दूरबीन द्वारा पेट की जांच, स्तन की गठान, कैंसर संबंधित ऑपरेशन का दूरबीन एवं लेजर पद्धति से भारत के प्रसिद्ध सर्जन की टीम द्वारा किया जायेगा
27 अप्रैल 2024 को देश के प्रख्यात सर्जन डॉक्टर संदीप दवे एवं प्रदेश का ख्याति प्राप्त हॉस्पिटल रामकृष्णकेअर की टीम अग्रवाल नर्सिंग होम बसना में.
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इस विशाल ऑपरेशन शिविर जिसमे विभिन्न प्रकार के हर्निया, गॉलब्लैडर पथरी अपेंडिक्स,बच्चेदानी संबंधित, किडनी स्टोन,प्रोस्टेट, हाइड्रोसील,अंडाशय गठान, ओवेरियन सिस्ट,पॉलिप, परफोरेशन,पाइल्स, फिशर ,दूरबीन द्वारा पेट की जांच, स्तन की गठान, कैंसर संबंधित ऑपरेशन का दूरबीन एवं लेजर पद्धति से भारत के प्रसिद्ध सर्जन की टीम द्वारा किया जायेगा |अग्रवाल नर्सिंग होम बसना के संचालक डॉक्टर एन के अग्रवाल ने बताया की 27 अप्रैल को हमने विशाल आपरेशन शिविर रखा है जिसमें भारत के प्रख्यात डॉक्टरों की टीम *डॉ. संदीप दवे* – दूरबीन पद्धति शल्य चिकित्सक (रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल, रायपुर),डॉ. सिद्धार्थ तामस्कर – जनरल एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन (रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल, रायपुर), (अग्रवाल नर्सिंग होम बसना) से डॉक्टर भारती अग्रवाल स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ शिविर का संचालन करेंगे |
राशन कार्ड,आयुष्मान कार्ड एवम बीजू कार्ड के अंतर्गत उपलब्ध आपरेशन निःशुल्क किया जायेगा एवं कुछ आपरेशन आयुष्मान के अंतर्गत नहीं है जैसे बच्चे दानी सम्बंधित ,हाइड्रोसिल, पाईल्स ,फिशर इत्यादि का आपरेशन बहुत कम दरों में किया जायेगा।
साथ ही साथ रहना, खाना, दवाइयां सभी पॅकेज में सम्मलित है |
ऑपरेशन के इच्छुक मरीज दिनांक 25/04/24को अपनी पुरानी रिपोर्ट के साथ अग्रवाल नर्सिंग होम बसना में पंजीयन कराये। एवं इस शिविर का अधिक से अधिक लाभ उठायें |
ज्ञात रहे डॉक्टर संदीप दबे एवं टीम भारत के प्रख्य्स्त लेप्रोस्कोपिक एवं रोबोटिक सर्जरी में विशेष ख्याति प्राप्त है, जो की 50000 से अधिक सफल सर्जरी का अपना कीर्तिमान रचा है |
संपर्क: 7773086100=9303623130=9039645760
पारंपरिक लोक कथाओं के अनुसार – अघरिया राजपूत हैं, जो आगरा के निकट निवासरत थे जो लगभग 1550 ई0 में उड़ीसा व वर्तमान छत्तीसगढ़ में आए । तब वे दिल्ली के तत्कालीन शासक सिकंदर लोधी व आदिलशाह के अत्याचार से प्रताडि़त थे। अघरिया सोमवंशी राजपूत थे जो स्वभाव से स्वाभिमानी थे। वे राजा को भी बिना सिर झुकाए सलाम करते थे। जिससे राजा ने सबक सिखाने के लिए तीन तरीका चुना पहला – उन्हें कांधार युद्ध में झोंक दिया जाए, दूसरा –
आदिल साह का मकबरा
उन्हें धर्मातंरित कर मुस्लिम बना दिया जावे, तीसरा – उनका सर कलम दिया जावे। इस आशय की पूर्ति के लिए मुगल शासक ने दरवाजा में गर्दन की ऊंचाई तलवार को आढ़े लटका कर बांध दिया ताकि सिर नहीं झुकाने पर गर्दन कट जावे और उनका वंश समाप्त हो जावे। परन्तु बुद्धिमान अघरिया ने राजा के चाल को भांप लिया और राजा के बुलावे में खुद न जाकर अपने दलित जाति के नौकर को अपने बदले राजा के दरबाज में भेजा, जहाॅं पर राजा ने नौकर के सिर को कलम कर दिया। राजा की अपने प्रति खराब मंशा को भाप कर अपने व उस दलित नौकर के परिवार को साथ लेकर अघरिया परिवार तत्कालीन उड़ीसा रियासत (वर्तमान छत्तीसगढ़ राज्य के रायगढ़ व बिलासपुर जिले) के पश्चिमी क्षेत्र में आ गये। तब से अघरिया अपने रक्षा के लिये बलिदान देने वाले दलित परिवार के वंशजों को समर्पण व सहानुभूति के साथ उनका भरण पोषण व देखभाल करते आ रहे है।
अघरिया उसी समय से वर्तमान छत्तीसगढ़ व पश्चिमी उड़ीसा के सीमांत क्षेत्रों में निवासरत है। अघरिया का 84 परिवार वहां पर निवासरत थे जिन्हें 84 घर अघरिया कहा गया जिनके वंशजों में 6 परिवार ने चैधरी, 60 परिवार ने पटेल तथा 18 ने नायक का उपनाम धारण किया। इसमें 44 परिवारों ने पश्चिमी उड़ीसा तथा शेष परिवारों ने छत्तीसगढ़ के तत्कालीन बिलासपुर तथा रायगढ़ के सीमांत अंचलों में बस गए। उस समय उड़ीसा में हिंदू शासक राज्य करते थे। तत्कालीन शासक गजपती राजा मुकुंददेव के पास अघरिया परिवार के मुखिया ने यहां बसने व जीवकोपार्जन को लेकर जगह की मांग की । तब राजा ने उसके सामने दो विकल्प रखा, प्रथम रजत जडि़त तलवार व दूसरा – स्वर्णजडि़त लकड़ी का डंडा रखकर एक चुनने को कहा। तब अघरिया परिवार के मुखिया ने स्वर्णजडि़त लकड़ी के डंडे को चुना जिसके कारण राजा ने लकड़ी के हल के विकल्प के रूप में कृषि कार्य अर्थात हल चलाने का आदेश दिया। जब से अघरिया समाज ने जीवनयावन के लिए खेती को चुना जिसका परिणाम स्वरूप मेहनती अघरिया को वर्तमान में श्रेष्ठ किसान की ख्याति प्राप्त है।
अघरिया परिवारों को राजा मुकुंददेव ने सर्व प्रथम वर्तमान झारसोगड़ा जिले के ग्राम लैदा की जमीनदारी सौंप दिया। कालान्तर में उनके उधमी एवं परिश्रमी स्वभाव के कारण विभिन्न गांवों की मालगुजारी (पटेल, नायक और चैधरी उपनाम) मिलती गई। अघरिया गुजरते समय के साथ उड़ीसा के साथ ही वर्तमान छत्तीसगढ़ के पूर्व अंचल में अपना विस्तार करते गए, परिणामस्वरूप आज वर्तमान छत्तीसगढ़ के रायगढ़, महासमुन्द, जांजगीर-चाम्पा, बिलासपुर जिलों के अतिरिक्त जशपुर, रायपुर आदि जिलों प्रभावशाली समाज के रूप में विद्यमान है। जो अखिल भारतीय अघरिया समाज नामक संगठन के तहत अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा व मान-सम्मान के साथ सामाजिक मान्यताओं के रक्षण पोषण करती हुई विशाल समाज का परिचय दे रही है। उड़ीसा के कई जिलों में निवासरत अघरिया बंधु भी इसी सामाजिक संगठन से जुड़कर नियम परंपराओं का पालन कर रहे है। अघरिया वेश भूषा-संस्कार, विसौंधी परंपरा-अघरिया तन ढ़कने के लिए शुरूआती तौर पर ब्राम्हणों की तरह पोतिया तथा कंधे पर गमछा रखते थे, साथ ही जनेऊ धारण करते रहे थे । जिसे कालांतर में खेती के कार्य में संलग्न होने से आ रही कठिनाइयों के मद्दे नजर अपने ही एक परिवार को अघरिया परंपरा व संस्कृति को अक्षुण्य बनाए रखने के आशय से यह कह कर – कटार व जनेउ को सौंप दिया कि वे वह अघरिया सभ्यता व संस्कृति के अनुरूप संस्कारों का पालन करते हुए उनका रक्षण करे जिसके एवज में प्रत्येक अघरिया परिवार अपने आय के 20 अंश में से 01 अंश उसे देकर उसके व परिवार के जीवन यापन की व्यवस्था करेगा। फलस्वरूप उस परिवार को विसौंधी उपनाम दे दिया गया। जिनके वंशज आज भी रायगढ़ जिले में निवास कर रहे हैं । जो पूर्व में अघरिया परिवार के बीच शादी विवाह के रस्मों को संपादित कराते रहे हैं । यद्यपि वर्तमान में यह व्यवस्था गुजरते समय के साथ समाज में कमतर दिखाई दे रहा है। फिर भी हमें उन्हें समाज के मुख्य धारा में लाकर अपने वर्तमान पीढ़ी से परिचय कराना हमारे संगठन का सामाजिक दायित्व है।
अघरिया स्वभाव-अघरिया प्रारंभ से ही स्वाभिमानी होने के साथ ही ईमानदार, निष्ठावार व्यक्ति रहा है, जिसके मन में हमेशा अपने सहयोगियों व निष्ठावान व्यक्ति रहा है, जिसके मन में हमेशा अपने सहयोगियों व मातहतों के लिए आदर के साथ सहानुभूति कूट-कूट भरी रही है परिणाम स्वरूप वह हमेशा अपनों की बीच मुखिया बना रहा है जो कि उनके द्वारा धारित उपनाम चैधरी, पटेल, नायक के विश्लेषण से दर्षित होता है जिसका अर्थ है नेतृत्व करने वाला याने मुखिया । जिससे कालांतर में गांव के गौंटिया के नाम से आज भी संबोधित किया जाता है। अघरिया ने अपने 84 परिवारों में से 6 ने चैधरी, 60 ने पटेल व 18 ने नायक का उपनाम स्वीकार कर अपने गोत्र को धारण किया जो आज भी सामाजिक संस्कारों में मान्यता के साथ ही उसके वंशज अपनाए हुए हैं।
अघरिया के आराध्य देव व पितृ पुरूष:- अघरिया महाभारत के विदुर के दो पुत्र बैरानु एवं पुरामने के वंशज माने जाते है जिसके कारण अघरिया अपने आप के विदुर बंशीय क्षत्री भी कहते हैं । कहीं कहीं पर सोमवश्ंाी क्षत्रीय भी कहा जाता है। यह बात स्पष्ट रूप से स्थापित है कि अघरिया जाति स्पष्ट रूप से स्थापित है कि अघरिया जाति स्वभाव से क्षत्रीय हैं जो किसी के समक्ष सिर झुकाना स्वीकार नहीं करते थे तथा अपने स्वभाव व प्रकृति के अनुरूप कटार रखते थे।
विदुर वशीय होने के कारण भगवार श्री कृष्ण ही अघरिया के आराध्य देव के रूप में आज भी स्वीकार कर पूजनीय है । अघरिया शुरू से ही धर्म, वेद-पुराण के साथ आस्थावान है तथा तीर्थाटन, धर्म गुरूओं के प्रति समर्पण के साथ हिन्दु धर्मावलम्बी रहा है।
अघरिया का व्यवसाय – अघरिया मूलतः उन्नत कृषक के रूप में प्रतिष्ठित है । परन्तु अब खेती में आ रही कठिनाई को देखते हुए भावी पीढ़ी ने शिक्षा की ओर अग्रसर होकर शासकीय सेवाओं के साथा व्यवसायिक जगत में भी अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज कराया है। वर्तमान में उच्च प्रशासनिक सेवा, न्यायिक सेवा, विदेश सेवा के साथ ही अघरिया चिकित्सा, वकालत, यांत्रिकी व विभिन्न निजी व्यवसाय में भी सफल है।
अघरिया में विवाह – अघरिया में बहुत से परिवारों के बीच जागरूकता के अभाव में वास्तविक गोत्र, जो कि मूलतः परिवार के रक्त समूह पर आधारित रहा है, का ज्ञान नहीं होने के कारण रक्त प्रतिकूलता की वजह से समाज में अघरिया समाज में सिकल सेल एनीमिया नामक घातक बिमारी के लक्षण पाए जा रहे है। फलस्वरूप वर्तमान समय में सभी अघरिया जनों से आग्रह है कि गोत्र के साथ ही विवाह तय करने के पूर्व वर-वधु के रक्त समूह का परीक्षण अनिवार्य रूप से कराएं ताकि घातक रोग के प्रकोप से भावी पीढ़ी को बचाया जा सके । वर्तमान में अघरिया समाज में सगोत्रीय व विजातीय विवाह पूर्णत प्रतिबंधित है जिसके उल्लंघन पर सामाजिक दंड का प्रावधान है।
विवाह संस्कार – अघरिया में शादी वैदिक रीति रिवाज से ब्राम्हण के द्वारा मंत्रों एवं सप्तपदी संस्कार से संपन्न कराया जाता है। जिसमें पारंपरिक देव वृक्ष महुआ के डाल से मंडपाच्छादन, मातृका पूजन, ग्रामदेव पूजन, पाणिग्रहण के बेला पर कन्यादान की जाती है। विवाह में कन्या के परिजनों के द्वारा वर-वधु को नव जीवन प्रवेश पर भावी जीवन-यापन की मंगल कामनाओं के साथ पारंपरिक रूप से वस्त्र, आभूषण, फर्नीचर, बर्तन, वाहन आदि वस्तुएं भेंट स्वरूप प्रदान की जाती है।
दहेज एक अभिशाप – अघरिया समाज में दहेज को कभी भी सामाजिक मान्यता नहीं दी गई, परंतु आज तथाकथित सभ्य व शिक्षित वर्ग के बीच इसके विकृत स्वरूप का प्रदर्शन चिंतनीय है, जिसका समाज का आमजन अनुशरण करते हैं, अतः हर स्तर इसका पूर-जोर विरोध अपरिहार्य है। तभी दहेज रूपी अभिशाप के चंगुल से भावी पीढ़ी को बचा पायेंगे।
अघरिया-प्रकृति व व्यक्तिगत सजावट – अघरिया समुदाय के लोग शुरू से ही सुंदर, आकर्षक व मजबूत व्यक्ति के धनी रहे हैं। इनकी महिलाएं अपनी सुंदरता को निखारने के लिए नाक-कर्ण छेदन कर सोने-चांदी के गहनों से सुसज्जित हो, सर से पांव तक विभीन्न प्रकार के आभूषण् पहनती हैं वे साड़ी चोली पहनती रही हैं। जबकि पुरूष धोती व साफा धारण करते रहे हैं। वर्तमान में समाज के लोग पारंपरिक वेश-भूषा के अतिरिक्त सभी प्रकार के नवीन शैली के वस्त्र पहनते हैं। महिलाएं अपने से रिश्ते बड़े पुरूष के सामने आंचल से घूंघट करती है।
अघरिया की मातृ भाषा व बोल चाल शैली-अघरिया परिवारों के बीच उडि़या हिंदी छत्तीसगढ़ी हिंदी मिश्रित छत्तीसगढ़ी बोली जाती है तथा बोल चाल में अपने से बड़ों के प्रति आदर सूचक शब्दों का प्रयोग संस्कारित माना जाता है। वर्तमान परिवेष में शिक्षा प्रसार से प्रायः राष्ट्र भाषा हिंदी का प्रचलन अधिक होने के साथ यदा कदा परिवारों में अंग्रेजी का चलन भी है। इन परिस्थितियों में हमारी पहचान मूल भाषा छत्तीसगढ़ी विलुप्त हो रही है, जिसके प्रति चिंतन के साथ इसके संवर्धन व संरक्षण की अपेक्षा सामाजिक जन खासकर युवा पीढ़ी से है।
अखिल भारतीय अघरिया समाज-प्रतिनिधि संगठन-इस संगठन की नीवं सन् 1926 में चंद्रपुर – डभरा क्षेत्र के ग्राम रेडा में पड़ी, जहां पर सर्वप्रथम अघरिया महासभा का आयोजन कर पूर्वजों ने समाज को संगठित करने के लिए अखिल भारतीय अघरिया समाज का गठन कर सामाजिक एकता मशाल जलाया। यह संगठन सन् 1977 में पंजीकृत होकर अपने वर्तमान वैधानिक स्वरूप को प्राप्त किया! पूरी जानकारी https://aghariasamaj.in
अखिल भारतीय अघरिया समाज
अखिल भारतीय अघरिया समाज: से लिया गया है!
CG / स्कूलों में गर्मी की छुट्टी आज से, जानिए- कब से खुलेंगे विद्यालय लेकिन शिक्षकों के लिए क्या आदेश है,!
छत्तीसगढ़ में पड़ रही भीषण गर्मी को देखते हुए राज्य शासन ने ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दिया है। यह अवकाश 15 जून तक रहेगा। 22 अप्रैल से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा। प्रदेश में लगातार तापमान बढ़ रहा है। इसको देखते हुए शासकीय, अनुदान प्राप्त और निजी स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया है। इससे पहले एक मई से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया था, जिसमें आंशिक संशोधन किया गया है।
पहले एक मई से होनी थी छुट्टी
दरअसल, छत्तीसगढ़ में शासकीय और गैर शासकीय स्कूलों में एक मई से गर्मी की छुट्टी होनी थी। सरकार ने भीषण गर्मी को देखते हुए इसमें बदलाव का निर्णय लिया है। अब सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में 22 अप्रैल से गर्मी की छुट्टी हो गई है। सभी स्कूल 15 जून तक बंद रहेंगे। वहीं, सरकारी आदेश में कहा गया है कि यह आदेश शिक्षकों के लिए नहीं है। शिक्षक सरकारी कार्यों में लगे रहेंगे। आदेश की कॉपी सभी जिलों में कलेक्टर्स को भेज दी गई है।
छत्तीसगढ़ में अब सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूल अब 16 जून से खुलेंगे। सरकार के निर्देशों के बाद स्कूलों ने बच्चों को होम वर्क भेजने शुरू कर दिए हैं। वहीं, सरकार के फैसले से बच्चों को बड़ी राहत मिली है। अभी बच्चे को स्कूल से लौटने में काफी दिक्कत हो रही थी। भीषण गर्मी की वजह से बच्चे बीमार भी हो रहे थे। बड़े शहरों में सूर्य का प्रचंड रूप था।
छत्तीसगढ़ में रविवार को दुर्ग सबसे गर्म शहर रहा है। वहां अधिकतम तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस रेकॉर्ड किया गया है। वहीं, रायपुर में 41.2 और बिलासपुर 41.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रेकॉर्ड किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार अभी छत्तीसगढ़ में तपिश और बढ़ेगी। हालांकि रविवार को कुछ हिस्सों में मौसम में बदलाव आया है। कुछ जगहों पर बारिश हुई है, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिली है।