महासमुन्द / धर्मांतरण जैसे विषयो को लेकर भीड़ के जरिए थाना घेराव धार्मिक उन्माद और साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के प्रयास के पर 2 शिक्षिक निलंबित ।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के महासमुन्द जिले के बागबाहरा में सर्व समाज द्वारा लव जिहाद और धर्मांतरण जैसे विषयों को लेकर बागबाहरा थाना का घेराव किया था अब इस मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है. संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा विभाग संभाग रायपुर ने 2 शिक्षकों को निलंबित किया है. बता दें कि
, 3 अगस्त को सर्व समाज द्वारा लव जिहाद और धर्मांतरण जैसे विषयो को लेकर बागबाहरा थाना का घेराव किया था जिसमें ये लोग सम्मलित होकर भीड़ को थाना और अन्य दूसरे स्थानों में ले गए थे भीड़ के जरिए धार्मिक उन्माद और साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का प्रयास करने पर शिक्षक विनोद यादव (एलबी)और विद्या प्रसाद चन्द्राकर( एलबी ) को निलंबित किया गया है यह आदेश 6 सितंबर को जारी हुवा है ।
सरायपाली -/ सफलता की कहानी कसडोल प्राथमिक शाला में बच्चों के अधिगम स्तर को सुधारने विशेष पहल
पुस्तकालय, रीडिंग कार्नर, आकर्षक चित्र और खिलौनों से होती है कसडोल स्कूल में पढ़ाई
अब बच्चों का ड्राप आउट दर शून्य
16 सितंबर 2023/प्राथमिक स्कूल में बच्चों के अधिगम स्तर को सुधारने कई तरह के नवाचार किए गए हैं।इसके सुखद परिणाम भी सामने आए हैं। शासकीय प्राथमिक शाला कसडोल विकासखंड सरायपाली के शिक्षकों द्वारा एक ऐसे ही नवाचार और पहल से यहां के शिक्षा स्तर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सरायपाली से 14
किलोमीटर दूर ग्रामीण परिवेशीय गांव कसडोल है ।यहां की 80% आबादी बुनकर का काम करती है ।हथकरघा से सूती साड़ी का निर्माण करते हैं, बच्चे भी उनके काम मे हाथ बटाते हैं। गांव के मध्य में शासकीय प्राथमिक शाला भवन स्थित है । हर गांव की तरह यहां भी बच्चे खेल कूद में मग्न रहते थे। पढ़ाई उन्हें बोरिंग लगता था।इसलिए बच्चे पढ़ाई को प्राथमिकता नहीं देते थे स्वच्छता का स्तर न्यून था जिसके कारण कई बच्चे बीच मे ही शाला छोड़ देते थे। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन और सरायपाली बीआरसीसी सतीश स्वरूप पटेल के विशेष पहल से सभी शिक्षकों ने मिलकर रोचक नवाचार गतिविधियों से अध्यापन शुरू किया ।हर कक्षा में रीडिंग कॉर्नर बनवाएं गए
और बच्चों को मनोरंजक और रुचिकर पुस्तकें वितरण किया गया ।जिससे बच्चे बड़ी रुचि के साथ पुस्तक पढ़ने लगे I बच्चों की रुचि बढ़ाने समुदाय को भी स्कूल से जोड़ा गया। कुछ माताओं को भी पुस्तक पढ़ने हेतु प्रेरित किया। जिससे गांव के लोग भी पुस्तक पढ़ने आने लगे। कई बार पुस्तक घर पर भी ले जाकर पढ़ने लगे। इस नवाचार और शिक्षकों के प्रयास से पढ़ाई के स्तर में सुधार दिखाई स्पष्ट परिलक्षित होने लगे।इस पुस्तकालय को मुस्कान पुस्तकालय का नाम दिया गया
इसका संचालन शासकीय प्राथमिक शाला कसडोल में नियमित रूप से किया जा रहा है ।मुस्कान पुस्तकालय के साथ ही साथ बच्चों को शाला के प्रति आकर्षित करने हेतु शाला भवन की दीवारों पर बहुत सुंदर प्रिंट रिच बनवाए गए। जिससे बच्चों की उपस्थिति में सुधार हुआ ।अब इस स्कूल में ड्रॉप आउट बच्चों की संख्या शून्य है।साथ ही साथ अब
बच्चों में पढ़ने के प्रति रुचि बढ़ी है ।बच्चों के लिए एक खिलौना कॉर्नर का निर्माण किया गया है। इस खिलौने कार्नर में अलग-अलग तरह के खिलौने के साथ ही साथ पारंपरिक खिलौने को भी स्थान दिया गया है ।कक्षा पहली और दूसरी के बच्चों के लिए स्मार्ट क्लास रूम बनाया गया है और सभी पहली और दूसरी के बच्चों को गतिविधि के द्वारा पढ़ाया जा रहा है। आज यहां बच्चे हंसते खेलते पढ़ाई कर रहे हैं।पालक भी इस बदलाव से खुश हैं।
छत्तीसगढ़ -/ जिन स्कूलों से गोलियों की आवाज आती थीं, वहाँ अब बच्चे गा रहे पोयम – मुख्यमंत्री बघेल
बीजापुर जिले में 457 करोड़ रुपए के लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यों की सौगात देने के मौके पर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा
पहले आम जनता को मीटिंग आदि के बाद शाम होने पर घर पहुँचने में डर लगता था अब सुरक्षित महसूस कर रहे
जिला अस्पताल बीजापुर का नामकरण महादेव राणा शासकीय जिला चिकित्सालय बीजापुर करने की घोषणा
रायपुर, 18 सितंबर, 2023
जिला स्तरीय भेंट मुलाकात के लिए बीजापुर जिले के प्रवास में पहुँचे मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने 457 करोड़ 58 लाख रुपए के विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमिपूजन के अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि नक्सल प्रभावित जिन क्षेत्रों के बंद स्कूलों से पहले गोलियों की आवाज आती थीं वहां अब बच्चे पोयम गा रहे हैं। अभी कुछ बच्चों से बात की। वे फर्राटेदार इंग्लिश बोल रहे थे। यह बीजापुर का बदलाव है। पहले मीटिंग आदि होने पर आम जनता को शाम होने पर घर पहुँचने में डर लगता था वे अब सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
बीजापुर जिले में 457 करोड़ रुपए के लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यों की सौगात
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 123 करोड़ रुपए की राशि से निर्मित संरचनाओं का लोकार्पण किया एवं 334 करोड़ रुपए से बनने वाली अधोसंरचनाओं का भूमिपूजन किया। साथ ही उन्होंने हितग्राहीमूलक सामग्री का वितरण भी किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ईंटपाल में नवनिर्मित बीजापुर गारमेंट फैक्ट्री का लोकार्पण भी किया एवं यहां कार्यरत महिलाओं से बातकर फैक्ट्री में चल रही गतिविधियों की जानकारी ली। साथ ही उन्होंने रूरल इंडस्ट्रियल पार्क का भी अवलोकन किया। साथ ही उन्होंने जिले में 4 करोड़ रुपए से निर्मित सेंट्रल लाइब्रेरी का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कलेक्ट्रेट परिसर में छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा का अनावरण भी किया।
बीजापुर जिले में 457 करोड़ रुपए के लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यों की सौगात
उन्होंने इस अवसर पर जापान एवं चीन में आयोजित एशिया कप प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बीजापुर स्पोर्ट्स अकादमी के साफ्ट बाल के पांच खिलाड़ियों सहित भुवनेश्वर में आयोजित प्रथम जनजातीय खेलो इंडिया नेशनल प्रतियोगिता का हिस्सा रही फुटबाल टीम के सदस्य प्रमिला तेलम, कमला तेलम एवं ईशा कुड़ियम को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर जिला अस्पताल बीजापुर का नामकरण महादेव राणा शासकीय जिला चिकित्सालय बीजापुर करने की घोषणा की। उन्होंने बीजापुर जिले के आवापल्ली स्थित उसूर चौक को नागुर दोरला चौक के नाम से नामकरण करने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने नवीन शासकीय आदर्श महाविद्यालय जावंगा( गीदम) का नामकरण वीरांगना मासक देवी नाग शासकीय आदर्श महाविद्यालय के नाम पर करने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने चेरपाल, वरदली, संकनपल्ली और पापनपाल में नवीन धान उपार्जन केंद्र एवं मादेपुर तथा जारपल्ली में नवीन प्राथमिक शाला खोलने की घोषणा की।
बीजापुर जिले में 457 करोड़ रुपए के लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यों की सौगात
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि बीजापुर अब कितना बदल गया है। 5 साल पहले जब यहां मुझे बुलाया जाता था तो सड़क मार्ग से आते थे, कार्यक्रम में भाषण देते हुए धीरे से कोई कहता था भैया ! जल्दी खत्म करो वापस जाना है। लेकिन आज बीजापुर में सभी सुरक्षित महसूस करते हैं। बीजापुर के लोगों में विश्वास बढ़ा है। बड़ी संख्या में कैंप खुले हैं जो इससे पहले कभी नहीं खुले थे। इतनी सड़कें बनी हैं जो पहले कभी नहीं बने थे। बहुत सारे मोटरसाइकिल खरीदे गए, जो पहले नहीं थे। 1000 से अधिक ट्रैक्टर खरीदे गए हैं, जो पहले नहीं थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले जब मैं भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में आया था कि पहले जब मैं भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में आया था, यहां के लोग दो ही चीज मांगते थे। या तो हमारे यहां धान खरीदी केंद्र, बैंक खोल दो और दूसरा स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोल दो। मुझसे धान खरीदी केंद्रों की माँग की जाती है क्योंकि पहले की तुलना में दो से ढाई गुना ज्यादा धान का उत्पादन हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजापुर जिले में बंद पड़े 200 स्कूल पुनः आरंभ हो चुके हैं। बीजापुर जिले में 14 स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल खोले गये हैं। आज बस्तर फाइटर में अकेले बीजापुर से 300 नौजवानों को नौकरी मिली है। शिक्षकों की भर्ती हुई है। इन 5 वर्षों में अंदरूनी क्षेत्रों में भी 20 हजार से अधिक राशन कार्ड बने। आज 20 से अधिक अस्पताल खुल गए हैं। इलाज हो रहा है, डॉक्टर तैनात हैं। हमारे आदिवासियों को पट्टा नहीं मिल पाता था हमने व्यक्तिगत, वनाधिकार और सामुदायिक पट्टे दिए। देवगुड़ी का भी हमने सामुदायिक पट्टा दिया। देवताधामी के लिए भी हमने पट्टा दे दिया। पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति के लोगों के लिए पट्टा जारी किया है। सोलर पंप लगे हैं। लाइट पहुंच रही हैं। पिछले साल भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में आए थे, ऐसे तालाब जो पुराने राजा, महाराजाओं के समय में बने थे सबके संधारण कार्य के लिए पैसा मांगा गया। हमने सभी तालाबों के संधारण की स्वीकृति दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले यहां साइकिल का शोरूम भी दुर्लभ था, वहां आज आठ-आठ ट्रैक्टर के शोरूम हैं। मोटरसाइकिल के शोरूम खुल रहे हैं, क्योंकि आज बिक्री हो रही है। हर पंचायत में आज ट्रैक्टर हैं। बहुत बड़ी बात है। 5 साल में यहां सरकार ने जो परिवर्तन लाया है वह बहुत बड़ी बात है। पहले ढाई हजार में तेंदूपत्ता बेचते थे आज 4000 में बेच रहे हैं, महुआ, कोदो-कुटकी रागी आज बेचा जा रहा है। पहले कपड़े बाहर से आते थे। इन पांच वर्षों में यहां कपड़े बनने लगे, प्रोसेसिग यूनिट्स लगे। लोगों की आय में वृद्धि हुई है। हमने पेसा कानून लागू किया। इस प्रकार से दुर्गम से दुर्गम क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा हम लोग उपलब्ध करा रहे हैं। हास्टल के बच्चों की आदान राशि में हमने वृद्धि की। ओल्ड पेंशन लागू किया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि की। सभी वर्गों के लिए हमने काम किया है। बस्तर विकास की ओर चल पड़ा है। आदिवासियों की जमीन आपसे छीनी गई थी। इसे वापस किया गया है।
इस मौके पर जिले के प्रभारी मंत्री एवं उद्योग मंत्री श्री कवासी लखमा ने भी अपना संबोधन दिया। श्री लखमा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ तेजी से आगे बढ़ रहा है। बीजापुर में भी तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। आजीविका के बेहतर अवसर निर्मित हो रहे हैं।
इस मौके पर बस्तर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री विक्रम शाह मंडावी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री शंकर कुड़ियम, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कमलेश कारम, जिला पंचायत सदस्य श्री बसंत राव ताटी ,जिला पंचायत सदस्य श्रीमती नीना रावतिया उद्दे, एडीजी नक्सल आपरेशन श्री विवेकानंद सिन्हा, बस्तर संभागायुक्त श्री श्याम धावड़े, आईजी पी सुंदरराज, डीआईजी श्री कमलोचन कश्यप, कलेक्टर श्री राजेन्द्र कुमार कटारा, पुलिस अधीक्षक श्री आंजनेय वाष्णैर्य भी मौजूद रहे।
मांदर की थाप देते हुए खुद झूमने लगे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री जब भेंट मुलाकात कार्यक्रम स्थल पर पहुँचे तो यहां उनके स्वागत के लिए लोक कलाकार पारंपरिक धुनों में प्रस्तुति दे रहे थे। इसी समय मुख्यमंत्री भी उनके साथ शामिल हो गये और स्वयं भी मांदर को थाप देते हुए उनके साथ झूमने लगे।
सीता फल का भी लिया स्वाद जिला स्तरीय भरोसे का सम्मेलन में लगे विभिन्न स्टालों के अवलोकन के बीच मुख्यमंत्री महिला एवं बाल विकास विभाग के स्टाल पर पहुँचे जहां पर आंगनबाड़ी की पोषणवाटिका में तैयार की गई फल-सब्जी प्रदर्शित की गई थी। मुख्यमंत्री ने यहां पोषण वाटिका में ही फले सीताफल का भी स्वाद चखा।
बसना -/ आकाशीय बिजली गिरने से 17 मौत क्षेत्र में हुवा झमाझम बारिश ।
महासमुन्द जिले में पिछले 4 दिनों से लगातार झमाझम बारिश हो रहा है जिसके बाद लोगो ने राहत की सांस ली है इसके पहले गर्मी और उमस से लोग काफी परेशान थे खेतो में भी पानी की काफी जरूरत थी किसान अपने बोर से पानी सिचाई कर रहे थे खबर है की आज बसना के ग्राम लम्बर कांसी पाली में आज आकाशिय बिजली गिरने से ग्रामीणों के लगभग 17 बकरियों की मौत की खबर है ।
छत्तीसगढ़ में बारिश थमते ही उमस भरी गर्मी से लोग परेशान हो रहे हैं। प्रदेश में अधिकतम तापमान बढ़ रहा है और नमी तेजी से घट रही है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 20 सितम्बर से फिर एक बार मानसून के एक्टिव होने की संभावना है। हालांकि आज उत्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों में हल्की बारिश के आसार हैं। रायपुर और जगदलपुर में गरज चमक की संभावना है।
रविवार को प्रदेश में सबसे ज्यादा तापमान 35.1 डिग्री सेल्सियस धमतरी में था। इसके बाद रायगढ़ में 34.5 और जांजगीर जिले में 33.5 डिग्री टेम्परेचर रहा। इसी तरह रायपुर में 33.4, मुंगेली में 33.8, महासमुंद में भी 33.8, राजनांदगांव में 33 और जगदलपुर में 31.8 डिग्री तापमान रहा। जगदलपुर में अधिकतम तापमान सामान्य से 2 डिग्री और राजनांदगांव का 5 डिग्री ज्यादा रहा। रविवार को दिनभर धूप निकली रही। नमी जो सुबह 86 प्रतिशत थी, वो शाम होते तक 62 प्रतिशत हो गई।
24 घंटे में कैसा रहा मौसम
रविवार को प्रदेश के ज्यादातर जिलों में तेज धूप रही। उत्तर छत्तीसगढ़ यानी बस्तर संभाग और दक्षिण यानी सरगुजा संभाग के कुछ जिलों में बादल छाए रहे लेकिन बारिश कहीं भी नहीं हुई। मौसम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश में केवल बलरामपुर जिले के राजपुर में ही 11 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है।
4 जिलों में हुई औसत से ज्यादा बारिश बीते दिनों हुई बारिश के बाद प्रदेश के ज्यादातर जिलों में मानसून का कोटा फुल हो गया है। 1 जून से 17 सितम्बर तक छत्तीसगढ़ के 4 जिलों में इस सीजन में औसत से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। जबकि 9 जिले ऐसे हैं जहां कम बारिश हुई है।
ज्यादा बारिश वाले जिले बीजापुर 29 फीसदी ज्यादा बारिश, मुंगेली 24 फीसदी ज्यादा बारिश, रायपुर 20 फीसदी ज्यादा बारिश, सुकमा 22 फीसदी ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई।
कम बारिश वाले जिले बलरामपुर -24, दंतेवाड़ा -23, जांजगीर -21, जशपुर -45, कोंडागांव -24, कोरबा -27, कोरिया -22, सूरजपुर -32, सरगुजा -59
कैसे रहेंगे अगले 24 घंटे
इन जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना सरगुजा, जशपुर, सूरजपुर, बलरामपुर में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं।
इन जिलों में होगी हल्की बारिश कोरिया, पेण्ड्रा, रायगढ़, कोरबा, गरियाबंद, धमतरी, बस्तर, कोंडागांव, दंतेवाड़ा, सुकमा, कांकेर, बीजापुर, नारायणपुर
इन शहरों में रहेगी धूप बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर, रायपुर, बलौदाबाजार, महासमुंद, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम, राजनांदगांव
क्या कहते हैं मौसम विशेषज्ञ मौसम विशेषज्ञ एचपी चंद्रा के मुताबिक मानसून द्रोणिका माध्य समुद्र तल पर जैसलमेर, दक्षिण-पूर्व राजस्थान के ऊपर स्थित निम्न दाब के केंद्र, सागर, डाल्टनगंज, जमशेदपुर, दीघा और उसके बाद पूर्व-दक्षिण-पूर्व की ओर उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ है। इसके असर से आज कुछ स्थानों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। मानसून के फिर से एक्टिव होने की संभावना 20 सितम्बर से है। इस बीच प्रदेश में अधिकतम तापमान बढ़ सकता है।
देवदरहा नाम कैसे पड़ा क्या है वह शक्ति की रायफल से गोली भी इस पार से उस पार नही जा पाया , बैल की मूर्ति को जिंदा समझकर रात्रि में शेर ने पंजा भी मारा ओडिशा और छत्तीसगढ़ की सीमा पर छोटी पर्वत श्रृंखलाओं के बीच ।
ओडीसा छत्तीसगढ़ / हेमन्त वैष्णव 9131614309
छत्तीसगढ़ से लगे ओडीसा बॉर्डर पर सरायपाली पदमपुर मार्ग से निकट यह देवदरहा नामक स्थल लगा हुवा है आस पास के हजारो ग्रामीणों का समय समय पर आना जाना लगा रहता है जंगलों से घिरे होने के कारण ज्यादातर लोग यहां पिकनिक मनाने आते है और कई लोग रहस्य जानने के लिए ही आते है बता दें कि इस देवदरहा नामक जगह की किस्से कहानिया बड़ा ही रोमांचक है और दिल चस्प है देव दरहा से जुड़ी कई कहानियां क्षेत्रों में प्रचलित है जिसका कई सबूत साक्ष अभी मौजूद है और आप भी एक चीज का परीक्षण कर सकते है ।
बता दें कि यहां दहरे के ठीक उपर लघु जल प्रपात है जिसे देखकर हम मिनी भेड़ाघाट कहते हैं यहां करीब 25 फीट उपर से दरहे में गिरने से सफेद धुंध बनती है। आसपास के पत्थरों में बैठकर जल से उठते फव्वारे से हल्की बरसाती फुहार का आनंद मिलता है। चारों तरफ चटटा्न ही चटटान हैं इनका रंग मटमैला गुलाबी है। पानी के तेज से घीस घीस कर चट्टाने गोल और कोमल दिखाई देती है फूलों की तरह इन्हें भी छूने का मन करता है इन्हें भी यहां आकर्षण माना जाता है।
बरसात में यहां पानी का बहाव तेज होता है और गर्मी में यहां एक ठहराव सा नजर आता है। इतने सुंदर पर्यटन स्थल की उपेक्षित क्यों है यह आश्चर्य की बात है।
ऐतिहासिक पंचमुखी शिव पार्वती मंदिर
झरना व नदी के किनारे पहाड़ी में एक तरफ मंदिर है जिसमें पंचमुखी शिव जी पार्वती के साथ स्थापित है जिसे पदमपुर के जमींदार नटवरसिंह बरिहा द्वारा 1922 में बनवाया गया था। इसके बरामदे में संगमरमर के नंदी बैल स्थापित है। जिसका मुख मंदिर के द्वार की ओर है।
बैल इतना सजीव लगता है कि सालों पहले इसे जिंदा बैल समझकर रात्रि में शेर ने इस पर पंजा भी मारा था जिसका निसान आज भी मौजूद है ।
मंदिर के बाहरी दीवार में विभिन्न देवी देवताओं की मूर्ति भी लगी है। प्रति वर्ष शिवरात्रि में यहां भारी संख्या में श्रद्धालुओं का आना होता है। इस अवसर पर यहां सराईपाली और पदमपुर के कुछ श्रद्धालुओं द्वारा भण्डारे का भी आयोजन किया जाता है।
छोटी-छोटी गुफाएं भूलभुलैया
इन पहाड़ियों में छोटी-छोटी गुफाएं एवं भूलभुलैया होने की बात ग्रामीण बताते हैं बताया जाता है कि कई सालों पहले दरहा में कुछ लोग मछली पकड़ रहे थे और एनसीसी के छात्रों को देख पुलिस वाले समझकर मछुआरे कहीं लुप्त हो गए उन्हें एनसीसी के छात्र नहीं खोज पाए क्योंकि वे पहाड़ी की भूल भुलैया में छुप गए थे। कहा तो यह भी जाता है राजा युद्ध के दौरान अपनी सुरक्षा के लिए इसे उपयोग करता था।
पहले यहां नक्सलियों ने डेरा रहता था हालांकि अब तक किसी भी पर्यटक को परेशान किए जाने की बात सामने नहीं आई है मगर साम 5-6 बजे के बाद कोई भी इस तरफ जाने से डरता है।
हालांकि इसके पिछले यह तर्क भी है वहां जंगली जीव जंतु भी निकलते हैं।
क्यों नाम पड़ा देवदरहा
गहराई को क्षेत्रीय भाषा में दरहा कहते हैं। दरहा की गहराई को अनेक गोताखोर नापने में असफल रहे। ग्रामीणों की मान्यता है इस दरहा में राजा का खजाना छिपा है। दरहे के उपरी कटाव वाली पहाड़ी से सामने वाली पहाड़ी पास नजर आती है मगर इस कोने से उस कोने कुछ भी फेंकने पर वह दरहे में ही जाकर गिरता है। बताया जाता है कि वर्षों पूर्व एनसीसी कैंप के विद्यार्थी भी रायफल से गोली इस पार से उस पार मारने का प्रयास किए मगर असफल रहे। मान्यता है की दरहे में देव शक्ति है जो भी वस्तु इसके उपर से गुजरती है वह उसे खींच लेता है। यह शोध का विषय है कि वहां पर गुरूत्वाकर्षण शक्ति कहीं ज्यादा तो नही है, स्थानीय लोगों का मानना है निश्चय ही ज्यादा है। गहरे दरहा उसमें गुरूत्वाकर्षण शक्ति के कारण इसका नाम देवदरहा पड़ा।
किंवदंती है कि एक लकड्हारा इस दरहा के किनारे लकड़ी काट रहा था उसकी कुल्हाड़ी छुट कर दरहे में गिर गई वह दुखी होकर देवताओं को कोसने लगा तब दरहा से देव प्रकट हुए उन्होने लकड़हारा को सोने फिर चांदी की कुल्हाड़ी देनी चाही लेकिन वह लोभ न करते हुए अपनी ही कुल्हाड़ी लेने पर अड़ा रहा। तक देवता ने प्रसन्न होकर उसकी कुल्हाड़ी के साथ सोने चांदी की कुल्हाड़ी भी दे दी। तब से इसे देवदरहा के नाम से ही माना जाने लगा।
सराईपाली. पदमपुर रोड पर स्थित झरना और यहां के मनोरम दृश्य के कारण लोग यहां पिकनिक मनाने पहुंचते है ।
पदमपुर रोड़ पर सिरपुर के पास ओडिशा और छत्तीसगढ़ की सीमा पर छोटी पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित नदी और उसमें गिरता झरना देखकर सहज ही मन कह उठता है, यह है मिनी भेड़ाघाट। तीन तरफ पहाड़ियों से घिरे झरने का शांत बहता जल, छांव के नाम पर छिटके-छिटके वृक्ष और जमीन पर पसरी हुई सुहानी धूप।
पथरीली जगह होने के कारण घने वृक्षों का अभाव है, फिर भी प्राकृतिक छांव पिकनिक मनाने वालों को मिल ही जाती है। इन पहाड़ियों के नीचे उतरकर बाई ओर पहाड़ी कटाव के छांव में बैठकर बहाव के हरित जल को देखना उस पर बहकर आने वाली शीतल वायु मन को सुखद करती है। झरने का उफनता गिरता जल बहकर ठहर सा जाता है। ऐसा लगता है जैसे तूफान को कोई ठोस आधार मिल गया है और जल का संपूर्ण क्रोध शांत झील में समाहित हो गया है।
जाने के लिए सुगम
बस मार्ग पर एनएच 53 में सराईपाली से पदमपुर रोड़ पर मात्र 21 किमी की दूरी सराईपाली तक बस में आकर यहां से टेक्सी द्वारा जाया जा सकता है लेकिन वहां रूकने के लिए कोई जगह नही सराईपाली ठहरने के लिए उत्तम रहेगा। दूसरी तरफ पदमपुर ओड़िसा से भी 21 किमी की दूरी पर स्थित मगर लखमरा नदी के कारण बारहमहिनों आवागमन संभव नहीं। गर्मी के दिनों में उधर से भी पहुंचा जा सकता है।
CG-/ हिंदुस्तान जिंदाबाद पाकिस्तान मुर्दा बाद के नारे पर हत्या का मामला गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान के बेटे की हत्या के मामले गदर फ़िल्म देखते हुवा उत्साहित पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है ।
भिलाई में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान के बेटे की हत्या के मामले पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। घटना से नाराज सिख समाज के लोगों ने खुर्सीपार थाने का घेराव किया था। गुरुदारा प्रधान का बेटा कल रात आईटीआई ग्राउंड में मोबाइल में गदर फिल्म देख रहा था इस दौरान मृतक ने हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगा दिया। जिससे पास में बैठे कुछ युवक नाराज हो गए और उसके साथ जमकर मारपीट कर घायल कर फरार हो गए । इलाज के दौरान घायल युवक की मौत हो गई।
घटना से नाराज सिख समाज के लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आक्रोशित होकर खुर्सीपार थाने का घेराव कर दिया। और आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार किए जाने की मांग करते रहे। दरअसल खुर्सीपार गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान कुलवंत सिंह का बेटा मलकीत सिंह कल रात पावर हाउस आईटीआई ग्राउंड में अपने दोस्त के साथ गदर 2 फिल्म देख रहा था इसी दौरान मृतक द्वारा कुछ टिप्पणी कर दिया। जिससे नाराज हो गए और ग्राउंड में पहले से ही मौजूद कुछ नशेड़ी युवकों ने उसे गली गलौज मृतक के साथ जमकर मारपीट की।
गंभीर हालत में युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने 50 लाख मुआवजा और मृतक के परिवार के एक सदस्य को शासकीय नौकरी देने की मांग को लेकर थाने के सामने ही धरने पर बैठे हैं। सिख समाज के समर्थन में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव, पूर्व कैबिनेट प्रेम प्रकाश पांडेय, दुर्ग सांसद विजय बघेल, भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव भी खुर्सीपार धरनास्थल पहुंचे।
पुलिस ने उसके दोस्त से पुछताछ करने के बाद आरोपियों की पतासाजी में जुट गई थी। पुलिस पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है जिसमे तुषार निषाद, तसव्वुर खान,शुभम लहरे, फैसल कुरैशी समेत एक नाबालिग शामिल है। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी में पुलिस जुटी हुई है।
महासमुन्द बसना सरायपाली सहित जिले भर के लगभग 32 विधुत केंद्रों के नाम और पता ।
महासमुन्द जिले भर में यहां से संचालन हो रहा है बिजलिया लगभग सभी विधुत केंद्र और पता है यह जानकारी महासमुन्द जिले के शासकीय वेबसाइट से लिया गया है जहां कई विधुत केंद्रों का फोन नम्बर अपडेट नही हुवा है जो कि बहुत जी जरूरी ।
Mahasamund district : महासमुंद जिले को जानिए :महासमुंद जिले का इतिहास और सामान्य परिचय
महासमुंद जिला छत्तीसगढ़ के पूर्वी हिस्से में स्थित है। यह जिला 6 जुलाई 1998 को स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में आया। पहले यह रायपुर जिले का हिस्सा हुआ करता था। छत्तीसगढ़ को प्राचीन काल में दक्षिण कौशल के नाम से जाना जाता था। दक्षिण कौशल की तत्कालीन राजधानी श्रीपुर या सिरपुर वर्तमान महासमुंद के अंतर्गत ही आती है। यहाँ के खल्लारी में महाभारत कालीन साक्ष्य मिलने का दावा किया जाता है। महासमुंद को मेलों की धरती भी कहा जाता है। यहाँ के सिरपुर मेला, चंडी मेला, खल्लारी मेला में दूर-दराज से लोग जुटते हैं। विश्व प्रसिद्ध ‘लक्ष्मण मंदिर’ के दर्शनों के लिए देशी-विदेशी पर्यटक यहां आते है।
जिले की प्रशासनिक जानकारी
महासमुंद जिला 6 जुलाई 1998 को अस्तित्व में आया। जिले का क्षेत्रफल 4790 वर्ग किमी है। 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की जनसंख्या 10, 32, 754 है। महासमुंद जिला मुख्यालय भी है। इसके अंतर्गत 5 तहसील, 5विकासखंड ,1 नगर पालिका 5 नगर पंचायत और 491 ग्राम पंचायत हैं।
कृषि
गेहूं, मक्का, ज्वार, बाजरा, धान, मूंगफली, तिलहन यहां की प्रमुख फसलें हैं।
अर्थव्यवस्था
महासमुंद खनिजों के लिहाज से संपन्न जिला है। इस क्षेत्र में महत्वूपर्ण एवं आर्थिक रूप से कीमती खनिज पाये जाते हैं। यहां सोना, टिन अयस्क, सीसा अयस्क, फ्लोराइड, फीरोज़ा, ग्रेनाइट, चूने के पत्थर और फ्लोराइड आदि पाया जाता है। जिले में डेढ़ सौ से अधिक राइस मिल और ब्लैक स्टोन व पॉलिशिंग फैक्ट्री हैं। इन सब ने मिलकर जिले को मजबूत आर्थिक आधार दिया है। इसके अलावा यहां लकड़ी चीरने का उद्योग, दाल मिल आदि भी हैं।
जिले के प्रमुख शिक्षण संस्थान
प्रमुख काॅलेज
प्रतिभा काॅलेज ऑफ एजुकेशन,सरायपाली
जयहिन्द महाविद्यालय, महासमुन्द
रामचण्डी काॅलेज, सरायपाली
शासकीय महाप्रभु वल्लभाचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय, महासमुन्द
स्व.राजा वीरेन्द्र बहादूर सिंह शासकीय महाविद्यालय, सरायपाली
स्व. श्री जयदेव सतपथी शासकीय महाविद्यालय, बसना
श्याम बालाजी काॅलेज, महासमुन्द
शासकीय माता कर्मा, कन्या महाविद्यालय, महासमुन्द
शासकीय चन्द्रपाल डडसेना महाविद्यालय, पिथौरा
इंडियन काॅलेज ऑफ एजुकेशन, महासमुन्द आदि
प्रमुख स्कूल
गवर्नमेंट डीएमएस स्कूल महासमुंद केंद्रीय विद्यालय
स्वामी आत्मानंद गवर्नमेंट इंग्लिश मीडियम स्कूल
आसी बाई गोलछा गर्ल्स हायर सेकंडरी स्कूल
आदिवासी कन्या आश्रम
सरस्वती शिशु मंदिर
ड्रीम इंडिया स्कूल
महासमुंद वन विद्यालय
सेंट फ्रांसिस स्कूल
कार्मेल कान्वेंट स्कूल बागबहरा
सेंट स्टीफेंस माॅडल स्कूल सरायपाली
महर्षि विद्या मंदिर
हेड एंड हार्ट स्कूल आदि
जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल
लक्ष्मण मंदिर सिरपुर
सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर महासमुन्द जिले का प्रमुख आकर्षण है। इस मंदिर का निर्माण पांडु वंशीय शासक महाशिवगुप्त बालार्जुन के काल में हुआ। उनकी माता वासटा देवी ने अपने पति हर्षगुप्त की पुण्य स्मृति में इस मंदिर का निर्माण करवाया। लाल ईंटों पर जिस नफ़ासत और बारीकी से नक्काशी की गई है, वह इस मंदिर को अनोखा बनाती है। नागर शैली में बने इस मंदिर का हर कोना सुंदर है फिर चाहे वह प्रवेश द्वार हो, मंडप हो या गर्भगृह। ईंटों पर हाथी, सिंह, पशु-पक्षी और कामुक मूर्तियां उत्कीर्ण की गई हैं।
मंदिर के तोरण के ऊपर शेषशैय्या पर लेटे भगवान विष्णु की अद्भुत प्रतिमा है। इस प्रतिमा की नाभि से ब्रह्मा जी के उद्भव को दिखाया गया है और साथ ही भगवान विष्णु के चरणों में माता लक्ष्मी विराजमान हैं। इसके साथ ही मंदिर में भगवान विष्णु के दशावतारों को चित्रित किया गया है। हालाँकि यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है लेकिन यहाँ मंदिर के गर्भगृह में पांच फनों वाले शेषनाग पर लक्ष्मण जी की प्रतिमा विराजमान है। इसलिए इसे लक्ष्मण मंदिर के नाम से पुकारा जाने लगा।
बम्हनी स्थित श्वेत गंगा कुंड
sweth ganga bamhini
यह महासमुन्द से 10 किमी पश्चिम में बम्हनी गांव में स्थित है, जहां नदी में निरंतर प्रवाहित होने वाला कुंड ‘श्वेत गंगा’ प्रसिद्ध है। इस कुंड के समीप भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर स्थापित है। यहां मांघ पूर्णिमा तथा महाशिवरात्रि के दौरान मेला लगता है। सावन माह के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं।
खल्लारी माता मंदिर
khallari mata mandir bhimkhoj
खल्लारी माता मंदिर महासमुंद से लगभग 25 किलोमीटर दक्षिण में खल्लारी गांव की पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। खल्लारी माता का यह मंदिर कल्चुरि काल का है। मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 800 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। ऐसा माना जाता है कि महाभारत काल के दौरान पांडव इस पहाड़ी की चोटी पर आए थे। कहते हैं कि इस चोटी पर भीम के कदमों की छाप है।
आनंद प्रभु कुटी विहार
महासमुंद में आनंद प्रभु कुटी विहार को बुद्ध विहारों में प्रमुख विहार माना जाता है। यह विहार तत्कालीन सुंदर शिल्प कौशल का एक उदाहरण है। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार भगवान गौतम बुद्ध के प्रिय शिष्यों में से एक भिक्षु आनंद प्रभु ने इसका निर्माण करवाया था। यहां भगवान बुद्ध की एक विशाल मूर्ति भी है।
चंडी मंदिर
CHANDI MATA TEMPLE BAGBAHRA MAHASAMUND
चंडी माता मंदिर महासमुंद का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मंदिर बिरकोनी ग्राम में स्थित है। महासमुंद से 12 किमी दूर स्थित इस मंदिर में हर साल नवरात्रि के समय विशाल मेले का आयोजन होता है जिसमें दूर-दूर से लोग आते हैं और मां चंडी के दर्शन करते हैं। कहते हैं मां के दरबार में मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है।
सिसुपाल पर्वत बूढ़ा डोंगर
सिसुपाल पर्वत की ऊंचाई तल से हजारो फिट ऊपर है जहां तक आज पिकनिक स्पॉट है लेकिन उसके ऊपर और कई किलोमीटर क्षेत्र में सिसुपाल पर्वत फैला जो राजाओं और सैनिकों के लिए एक अभेद किला था और किले में सस्त्र और सैनिक और इस पर्वत में भी गुप्त सुरंगे और रास्ते थे राजा और रानियां भाग भी सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नही किया अंग्रेजी सल्तनत द्वारा आक्रमण के बाद जब अंतिम राजा और सैनिकों द्वारा अंग्रेजो के मध्य भयंकर लड़ाई लड़ा गया था युद्ध मे अंतिम राजा के मारे जाने के बाद ही 7 रानियों ने मर्यादा की रक्षा के लिए 1 हजार फीट की चोटी से घोड़ो पर पट्टी बांधकर छलांग लगा दिए और इसी का नाम घोड़ा धार पड़ा ।
सरायपाली से 20 दूर पहाडों और चट्टानो के बिच कर सकते है मां रूद्रेष्वरी का दर्शन सिंघोडा
सरायपाली से सम्बलपुर जाने वाले राजमार्ग क्रमांक 53 में सरायपाली से 20 किलोमीटर दूर ओडिसा सीमा से लगे ग्राम सिंघोडा में स्थित है माता रुद्रेस्वरी का मंदिर। पहाडों और चट्टानो को काटकर बनाया है माता रुद्रेश्वरी देवी का भव्य मंदिर स्वर्गीय स्वामी शिवानंद जी महाराज के द्वारा तीन दषक पहले सन 1977 में बनाया गया था. बताया जाता है कि स्वामी शिवानंद आसाम से द्वारीकापुर की पैदल तीर्थ यात्रा पर जा रहे थे और यात्रा के दौरान इसी पहाडी पर शांत वातावरण ने उन्हे कुछ देर रूकने पर विवष कर दिया, उन्हे विश्राम के दौरान माता के भव्य मंदिर बनाने की आत्म प्रेरणा मिली।
छछान माता नवागांव वाली भी आदि शक्ति मां भवानी जगतजननी जगदम्बा का रूप और नाम है। छछान माता छत्तीसगढ़ प्रान्त के जिला महासमुंद मुख्यालय से तुमगांव स्थित बम्बई कलकत्ता राष्ट्रीय राजमार्ग पर महासमुंद से लगभग 22 किलोमीटर दूरी पर सीधे हाथ की ओर लगभग 300 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित हैं। माता जी दर्शन करने सार्वजनिक बस से या निजी सड़क वाहन से पहुंचा जाता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर ही महासमुंद से मंदिर जाते समय दाहिने तरफ माताजी का नाम लिखा हुआ भव्य स्वागत द्वार है। स्वागत द्वार से ही सामने देखने पर सीमेंट निर्मित बहुत बड़ा गोलाकार ग्लोब निर्मित है। उसके उपर चार भुजाधारी शिवजी की मूर्ति बनाई गई है। स्वागत द्वार से ही मंदिर की अध निर्मित सीढियां दिखाई पड़ती हैं। सीढियां ऐसी है जिसमें खुले पत्थर रखे गए हैं जिससे माताजी के मंदिर तक पहुंचा जा सके।पहाड़ी से घूमकर एक और मार्ग है जो ढलान नुमा है जिस पर सीढ़ी नहीं है। पहाड़ी के नीचे ही शिवलिंग की चौड़ी है और भैरव बाबा का छोटा सा मंदिर है। पहाड़ी के ऊपर दानदाताओं के आर्थिक सहयोग से वर्तमान में भव्य मंदिर निर्माणाधीन है।
माता छछान माता मंदिर के आसपास पहाड़ी पर माता जी के विभिन्न रूप की मूर्ति छोटे छोटे मंदिर में स्थापित किये गये हैं। जिनमें काली माता, विंध्यवासिनी माता, पाताल भैरवी माता, बिलई माता, माता चंडी, भोलेनाथ, नाथल दाई, रतनपुर महामाया प्रमुख हैं। कई माताएं पहाड़ी के गुफाओं में विराजमान हैं। पहाड़ी पर बेल, कर्रा, भिरहा, सेनहा, धौरा के वृक्षों के प्राकृतिक जंगल विद्यमान हैं।
कैसे पहुँचे
प्लेन से
महासमुंद के लिए निकटतम हवाई अड्डा रायपुर में है, जो 36 किलोमीटर दूर है।
ट्रेन से
महासमुंद में एक छोटा स्टेशन है लेकिन
देश के अन्य प्रमुख शहरों से महासमुंद के लिए नियमित ट्रेन नहीं है। निकटतम रेलवे स्टेशन रायपुर में है, जो 50 किलोमीटर दूर है।
सड़क मार्ग से
NH 53 और NH 153 महासमुंद से होकर गुजरते हैं। अन्य सड़कें भी नजदीकी शहरों से अच्छी तरह जुड़ी हुई हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य का क्षेत्रफल लगभग एक लाख 35 हजार 361 वर्ग किलोमीटर है। क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का 9वां और जनसंख्या की दृष्टि से 16 वां बड़ा राज्य है।
छत्तीसगढ़ की भाषा कौन सी है?
छत्तीसगढ़ी भारत के छत्तीसगढ़ राज्य में बोली जाने वाली भाषा है। यह हिन्दी के अत्यन्त निकट है और इसकी लिपि देवनागरी है। छत्तीसगढ़ी का अपना समृद्ध साहित्य व व्याकरण है।
छत्तीसगढ़ का मुख्य धर्म कौन सा है?
इसके मुताबिक छत्तीसगढ़ में दो करोड़ 55 लाख 45 हजार 198 लोग हैं। इनमें से 93.24 फीसदी हिंदू हैं। मुस्लिम 0.02 और ईसाई 0.019 प्रतिशत हैं। जबकि सिख 0.0027 प्रतिशत व जैनधर्म को मानने वाले 0.00240 प्रतिशत हैं।
छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु कौन सा है?
सही उत्तर जंगली भैंसा है। छत्तीसगढ़ का राज्य पशु जंगली भैंसा
छत्तीसगढ़ का राष्ट्रीय वृक्ष कौन सा है?
साल के पेड़ को आदिवासियों का कल्प वृक्ष और बस्तर को साल वनों का द्वीप भी कहा जाता है। कहने को तो साल छत्तीसगढ़ का राजकीय वृक्ष है, लेकिन इससे विकास व संरक्षण में मदद नहीं मिल पाई है। साल को बस्तर में सरई भी कहा जाता ।
छत्तीसगढ़ का चिन्ह क्या है?
यह प्रतीक एक गोलाकार मुहर है जिसमें चावल की बालियों से घिरे अशोक के सिंह स्तंभ को दर्शाया गया है । राजधानी के नीचे भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रंगों में तीन लहरदार रेखाएं हैं, जो राज्य की नदियों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिनके किनारे दो बिजली के बोल्ट हैं जो ऊर्जा अधिशेष राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
छत्तीसगढ़ का सबसे घना जंगल कौन सा है?
नंदनवन जंगल सफारी का पूरा 800 एकड़ क्षेत्र सुंदर इलाकों के साथ हरे भरे हरे रंग का है। कई स्वदेशी पौधों की प्रजातियां भी वनस्पति को जोड़ती हैं, जो जानवरों के लिए प्राकृतिक आवास बनाते हैं।
छत्तीसगढ़ में कौन से जानवर पाए जाते हैं?
आप तेंदुए, सियार, बाघ, उड़ने वाली गिलहरी, जंगली बिल्ली, बाइसन, चार सींग वाले मृग, साही, धारीदार लकड़बग्घा, चिंकारा, स्लॉथ भालू, नीलगाय, जंगली सूअर, बंदर, बार्किंग हिरण, ब्लैक बक, मंटजैक जैसे जंगली जानवरों को देख सकते हैं। , सांबर, जंगली कुत्ते, गौर, चीतल और अन्य।
छत्तीसगढ़ में प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान कौन सा है?
इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान छत्तीसगढ़ का सबसे बेहतरीन और सबसे प्रसिद्ध वन्यजीव पार्क है। यह उदंती-सीतानदी के साथ छत्तीसगढ़ में दो बाघ परियोजना स्थलों में से एक है, इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित है।
सरायपाली में लगातार एक के बाद एक निजी अस्पताल खुलते जा रहा है लेकिन 100 बिस्तर का अस्पताल 50 और इसके बाद 30 बिस्तरों में सिमट गया विधायक ने आज एक्सरे मशीन का सौगात देते हुए क्या कहा ।
सरायपाली हेमन्त वैष्णव
सरायपाली बसना स्वास्थ्य क्षेत्र में किस तरह से जूझ रहा है यह बात तो सबको मालूम ही है लेकिन राज्य के अंतिम छोर पर बसे सरायपाली को कांग्रेस के कार्यकाल से 100 बिस्तर वाला अस्पताल का सौगात तो मिला लेकिन आज सुविधाओं के नाम पर कई मसीनो का अभाव है जब यह 100 बिस्तर अस्पताल का उद्घटान हुवा तब लगा था की अब राजधानी जैसे निःशुक्ल इलाज का सुविधाएं मिलेंगी लोगो को निजी और रायपुर बरगढ़ जैसे सहरो की और जाना नही पड़ेगा लेकिन ऐसा नही हुवा भाजपा के कार्यकाल में 50 बेड से सुरु हुवा अस्पताल बढ़ने के बजाय 30 बिस्तर में तब्दील हो चुका है ।
वही सरायपाली में निजी अस्पतालों और क्लीनक की संख्या लगातार बढ़ रही है आपको तो पता ही होगा कुछ दिनों पहले सरायपाली कुमकुम हॉस्पिटल को सील कर दिया गया इस अस्पताल पर बिना पंजीयन और फर्जी डिग्रीधारी सहित कई आरोप लगे थे किस तरह लोगो
को इलाज के नाम पर ठगा गया और क्या कार्यवाही हुवा लोग जानना चाहते है बता दें कि सरायपाली बसना के जनसंख्या के हिसाब से एक बड़ी अस्पताल की जरूरत तो है लेकिन ये जरूरतें अब निजी अस्पताल पूरे कर रहे है बसना सरायपाली क्षेत्र में झोला छाप डॉक्टरों की संख्या भी लगातार बढ़ रहा है ।
आज मोहनलाल चौधरी शासकीय अस्पताल सरायपाली विधायक किस्मतलाल नंद उपाध्यक्ष अनुसूचित विकास प्राधिकरण द्वारा डिजिटल एक्सरे मशीन का पूजा अर्चना कर फीता काट कर क्षेत्र के लोगो को बड़ी सौगात दी विधायक जी ने अपने उद्बोधन में कहा की आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित एक्सरे की मशीन लग जाने से क्षेत्र के लोगों का इसका सीधा लाभ मिलेगा चिकित्सा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। आने वाले 6 माह के भीतर हमर लैब, ब्लड बैंक की भी शुरवात होनी है और कई सुविधाएं उपलब्ध होगी। इस अवसर पर सरायपाली खंड चिकित्सा अधिकारी डा हीरालाल जांगडे ,
विवेक अग्रवाल विधायक प्रतिनिधि स्वास्थ्य विभाग, रामनारायण आदित्य जी अध्यक्ष ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सरायपाली शहर, श्री पुष्पेंद्र पटेल अध्यक्ष ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सरायपाली ग्रामीण, विद्या सतपति जी, वाहिद नियरिया जी सहादत हुसैन जी, शुरू पाणिग्रही जी, फिरोज खान , सौरभ सतपति जी, डॉ कुणाल नायक शिशु रोग विशेषज्ञ, डॉ रमेश साहू पैथोलांजिस्ट, bpm श्रीमती शीतल सिंग, beto पी आरघीतलहरे,अधिकारी कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए
सरायपाली -/क्या जीत दिला पाएंगी भाजपा उम्मीदार सरला कोसरिया कांग्रेस प्रतिद्वंदी के रूप में किसको उतारेगी मैदान में ,सरला कोसरिया गांव गांव में जाकर कर ही है आम लोगो से भेंट मुलाकात मिल रहा है भारी जनसमर्थन ।
छत्तीसगढ़ में आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव है दोनों दल के नेता और कार्यकर्ताओं ने अपने अपने पसंदिता नेता और नेत्रियों के साथ गांव गांव में जाकर जनसम्पर्क कर रहे है बता दें कि सरायपाली से भाजपा BJP ने श्रीमती सरला कोसरिया को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुका है वही महासमुन्द से अलका चन्द्राकर को भी टिकट फायनल कर चुकी है दोनों उम्मीदवारो के पास अपना प्रचार प्रसार करने के लिए पर्याप्त समय है सरायपाली से बीजेपी के उम्मीदवार सरला कोसरिया भी गांव गांव जाकर जनसंपर्क कर रही है सरला कोसरिया केंद्र सरकार के योजनाओँ और राज्य सरकार के विफलताओ के माध्यम से आम लोगो को रिझा रही है और भाजपा की सरकार बनाने की अपील कर रही है ।
बता दें कि सरला कोसरिया कई सालों के बीजेपी से जुड़ी हुई है और गायत्री परिवार के माध्यम से काफी पकड़ है वे पूर्व में जिला सदस्य और अध्यक्ष का कमान भी सम्हाल चुकी है और भाजपा ने प्रदेश स्तर में भी सरला कोसरिया को कमान दिए है ऐसे में कांग्रेस उनके सामने किस दिग्गज नेता को अपना सीट देगी देखने वाली बात होगी ।
बता दें कि सरला कोसरिया को काफी वक्त से राजनीति में जुड़े हुए के कारण गांव गांव में जनसमर्थ सरला कोसरिया को मिल रहा है बता दें कि सरला कोसरिया को भाजपा से टिकट मिलने के बाद गाड़ा समाज ने विरोध किया था जिसके बाद गाडा समाज से जुड़े भाजपा के पूर्व mla प्रत्यासी श्याम तांडी सहित कई कार्यकर्ताओ ने रायपुर जाकर कांग्रेस प्रवेश कर लिए लेकिन कई कार्यकर्ताओ ने बीजेपी का साथ नही छोड़ा जिसके बाद सरला कोसरिया लगातार गांव गांव में जाकर जनसम्पर्क कर रही है ।
अब कांग्रेस किसके नाम पर खोलेगा पत्ता सरायपाली पर एक नजर
वही छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने अपना एक भी टिकट का फायनल नही किए है जिन सीटो पर सिंगल नाम है उन्ही का फायनल माना जा रहा है मीडिया रिपोर्ट की माने तो छ्ग कांग्रेस लगभग 40 ऐसे सीटों को काटने जा रही है जहां कांग्रेस लहर में जीते थे लेकिन बात करें हम सरायपाली विधानसभा सीट की तो क्या वर्तमान विधायक किस्मत लाल नंद क्या कांग्रेस लहर में जीते थे या नही
चुकी किस्मत लाल नंद भी टीआई से लेकर एसडीओपी के पद पर पदस्थ थे उनके पोस्टिंग नक्सल क्षेत्र में भी हुए थे वे कई इनकाउंटर में शामिल रहे है फिर राजनीति में किस्मत आजमाने चाहे और कांग्रेस ने किस्मत लाल नंद को टिकट भी दिया और भाजपा के उम्मीदवार श्याम तांडी को हराया और 1 लाख से भी अधिक मत प्राप्त हुए थे वही श्याम तांडी भी बीजेपी के
जाने माने नेता थे यूआओ वर्ग उनको काफी पसंद करते है जिला सदस्य भी रह चुके थे इनको लगभग 48 हजार वोट मिले थे बता दें कि किस्मत लाल नंद कोरोना काल मे भी लगातार एक्टिव रहे है और लगातर छ्ग सरकार के योजनाओँ सभा और उद्घाटन में शामिल रहते है स्थानीय नेता बताते है कि किस्मत लाल नंद का नाम सबसे ऊपर है और उन्ही को टिकट मिलना चाहिए बता दें कि किस्मत लाल नंद अभी भी पद में है और लगातार जनसम्पर्क कर रहे है जाहिर सी बात है विधायक है भारी जनसमर्थ मिल रहा है ।
क्या कांग्रेस दोबारा किस्मत पर दांव लगाएगी या कोई नया चेहरा ढूंढ रही है अब तो टिकटों के घोषणा के बाद ही पता चलेगा चुकी सरायपाली से कई नाम कांग्रेस से सामने आ रहे है , किस्मत लाल नंद, चातुरी नंद , कामपाल नंद, रतन बंजारा दुगली बाई तांडी सहित कई दिग्गज नेताओं ने आवेदन किया था जिनमे लगभग 46 नाम शामिल है ।
वही चातुरी नंद भी गांव गांव में जाकर लगातार जनसम्पर्क कर रही है बता दें चातुरी नंद पेसे से एक शिक्षिका है और पिछले कई सालों से छ्ग चौहान सेना के प्रदेश अध्यक्ष है और वे कांग्रेस को अपना टिकट मांग रही है और लगातार जनसम्पर्क कर रही है चातुरी नंद का तैयारियां जोरों सोरों पर है वे अपने समर्थको के साथ लागातर जनसम्पर्क कर रही है ।