Sunday, May 31, 2026
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हरी खाद, नील हरित काई एवं वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने दिए निर्देश

महासमुंद / कृषि विभाग महासमुंद में आज संयुक्त संचालक कृषि श्री गयाराम की अध्यक्षता में रबी वर्ष 2025-26 तथा खरीफ वर्ष 2026 के कार्यक्रम निर्धारण एवं तैयारियों की जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं खरीफ सीजन की तैयारियों की एजेंडावार समीक्षा की गई।
बैठक में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को वितरित किए जाने वाले बीज एवं उर्वरकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु नियमित नमूना जांच कराने के निर्देश दिए गए। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थियों के लंबित फार्मर आईडी (एग्रीस्टैक) प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने के लिए सुशासन तिहार एवं शिविरों के माध्यम से शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए, ताकि किसानों को ऑनलाइन माध्यम से उर्वरक प्राप्त करने में सुविधा हो सके।

खरीफ वर्ष 2026 के लिए रासायनिक उर्वरकों के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हरी खाद, मूंग, ढेंचा, सनई, नील हरित काई एवं नैनो उर्वरकों के उपयोग एवं उनके लाभों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान शासकीय कृषि प्रक्षेत्र बरंतुगा के प्रक्षेत्र प्रबंधक द्वारा जानकारी दी गई कि 22 टैंकों में नील हरित काई उत्पादन का कार्य प्रारंभ किया जा रहा है। वहीं, विकासखंड बसना के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ने प्रगतिशील कृषक अर्तयामी प्रधान द्वारा स्वयं के दो टैंकों में नील हरित काई उत्पादन किए जाने की जानकारी दी।

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संयुक्त संचालक कृषि ने बैठक में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को क्षेत्र स्तर पर सतत मॉनिटरिंग करते हुए किसानों के बीच हरी खाद एवं नील हरित काई के उपयोग को अधिक से अधिक बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत 10 वर्ष के भीतर विकसित उन्नत किस्मों के चयन एवं अधिकाधिक बीज उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु प्रशिक्षण एवं प्रचार-प्रसार के माध्यम से किसानों को जोड़ने पर जोर दिया।
बैठक में खरीफ वर्ष 2026 हेतु जिले में रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता, भंडारण, वितरण एवं शेष स्टॉक की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने बताया कि जिले में वर्तमान में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है। किसानों को अग्रिम उर्वरक उठाव एवं डीएपी खाद के वैकल्पिक उपयोग के प्रति जागरूक करने के निर्देश मैदानी अमले को दिए गए। इसके अलावा महासमुंद जिले के प्रगतिशील कृषकों द्वारा उत्पादित सुगंधित एवं फोर्टिफाइड चावल की पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं निर्यात को बढ़ावा देने पर भी विशेष चर्चा की गई। बैठक में उप संचालक कृषि महासमुंद, अनुविभागीय कृषि अधिकारी महासमुंद, सरायपाली, सहायक मृदा परीक्षण अधिकारी महासमुंद, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी एवं संबंधित शाखाओं के प्रभारी अधिकारी उपस्थित रहे।
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