महासमुंद : मास्टरमाइंड निकला जिला खाद्य अधिकारी सिंघोडा से ही बना लिया था प्लानिंग 80 लाख रुपये की डील कर 6 कैप्सूल ट्रकों से करीब 92 टन गैस निकाल ली गई 3 गिरफ्तार
महासमुंद। जिले में जब्त एलपीजी गैस कैप्सूल ट्रकों से करोड़ों रुपये की गैस गबन मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को पूरे षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार बताया है। पुलिस जांच में सामने आया कि खाद्य अधिकारी अजय यादव, गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर और रायपुर निवासी मनीष चौधरी ने मिलकर करीब 1.5 करोड़ रुपये कीमत की एलपीजी गैस के गबन की पूरी पटकथा तैयार की थी।
पुलिस के अनुसार 80 लाख रुपये की डील कर 6 कैप्सूल ट्रकों से करीब 92 टन गैस निकाल ली गई। मामले में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने इसे आपराधिक न्यास भंग, आपराधिक षड्यंत्र, कूटरचना और शासकीय प्रक्रिया के दुरुपयोग का बड़ा मामला बताया है।
कैसे शुरू हुई पूरी साजिश
पुलिस के मुताबिक थाना सिंघोड़ा के अपराध क्रमांक 96/25 में दिसंबर 2025 में 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों को जब्त किया गया था। इन ट्रकों में CG 07 CX 7245, CG 07 CX 7244, CG 07 CS 1663, CG 07 CX 7472, KA 01 AH 4318 और CG 12 BS 4295 शामिल थे।
भीषण गर्मी और थाना परिसर में सुरक्षा संसाधनों की कमी को देखते हुए पुलिस अधीक्षक महासमुंद द्वारा जिला कलेक्टर को पत्र लिखा गया था। इसके बाद कलेक्टर ने खाद्य विभाग को कैप्सूलों को सुरक्षित स्थान पर रखने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे।
30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में इन कैप्सूल ट्रकों को ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स, ग्राम उरला थाना अभनपुर जिला रायपुर के संचालक संतोष सिंह ठाकुर को सुपुर्दनामा पर सौंपा गया था। बाद में जांच में सामने आया कि सुपुर्दनामा मिलने के बाद ट्रकों से भारी मात्रा में गैस निकाल ली गई।
23 मार्च को हुई पहली षड्यंत्रकारी बैठक
पुलिस जांच के अनुसार पुलिस अधीक्षक कार्यालय से कलेक्टोरेट को पत्र भेजे जाने के कुछ दिन बाद ही 23 मार्च को षड्यंत्र की पहली बैठक हुई थी। इस बैठक में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर शामिल थे।
यहीं से 1 करोड़ रुपये की गैस गबन योजना की पटकथा लिखी गई। अजय यादव ने पंकज चंद्राकर को पूरी योजना के क्रियान्वयन और उपयुक्त एजेंसी खोजने की जिम्मेदारी दी। पंकज ने पहली बैठक में ही रायपुर निवासी मनीष चौधरी का नाम सुझाया, जिसे विभिन्न एजेंसियों से संपर्क करने का जिम्मा सौंपा गया।
गैस का आंकलन कर तय हुई करोड़ों की उगाही
पुलिस के अनुसार 26 मार्च को खाद्य अधिकारी अजय यादव और पंकज चंद्राकर स्वयं सिंघोड़ा थाना पहुंचे। यहां उन्होंने 6 कैप्सूल ट्रकों में मौजूद गैस की मात्रा का आंकलन किया। जांच में सामने आया कि करीब 102 से 105 मीट्रिक टन गैस होने का अनुमान लगाया गया था।
इतनी बड़ी मात्रा देखकर तुरंत 1 करोड़ रुपये उगाही की योजना को अंतिम रूप दिया गया। उसी रात करीब 11 बजे तीनों षड्यंत्रकारियों की एक गैस एजेंसी संचालक के साथ बैठक हुई, लेकिन उसने शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके बाद मनीष चौधरी ने अन्य एजेंसियों से संपर्क किया और अंततः ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के साथ 80 लाख रुपये में डील फाइनल हुई।
किसे कितना पैसा मिलना था
जांच में पुलिस को पैसों के बंटवारे की पूरी जानकारी मिली है। पुलिस के अनुसार 80 लाख रुपये की डील में सबसे बड़ा हिस्सा जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव का था।
अजय यादव — 50 लाख रुपये
पंकज चंद्राकर — 20 लाख रुपये
मनीष चौधरी — 10 लाख रुपये
पुलिस के मुताबिक सुपुर्दनामा के अगले ही दिन 31 मार्च को अजय यादव को उसके हिस्से के 50 लाख रुपये पहुंचा दिए गए थे।
बाकी 30 लाख रुपये की व्यवस्था होने में देरी हो रही थी। ऐसे में संतोष ठाकुर द्वारा मनीष चौधरी के खाते में “श्योरिटी” के तौर पर 30 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। बाद में नकद भुगतान होने पर राशि वापस लौटा दी गई।
कर्मचारियों को हस्ताक्षर नहीं करने के दिए निर्देश
जांच में यह भी सामने आया कि पूरी योजना पहले से तय थी। पुलिस के अनुसार खाद्य अधिकारी अजय यादव ने खाद्य विभाग के कर्मचारियों को सुपुर्दनामा के दस्तावेजों में हस्ताक्षर नहीं करने के निर्देश दिए थे।
इतना ही नहीं, कैप्सूलों का वास्तविक वजन नहीं करने और पुलिस कर्मचारियों को गुमराह करने के भी स्पष्ट निर्देश दिए गए थे।
सुपुर्दनामा के बाद करीब एक सप्ताह में कैप्सूलों से 92 टन गैस निकाल ली गई। इसके बाद खाली कैप्सूलों का वजन कराया गया।
फर्जी पंचनामा बनाकर कलेक्टोरेट में जमा
पुलिस जांच में सबसे बड़ा खुलासा वजन पंचनामा को लेकर हुआ। पुलिस के अनुसार 6 और 8 अप्रैल को कैप्सूलों का वजन कराया गया, लेकिन उससे पहले ही पंचनामा तैयार कर लिया गया था।
जांच में सामने आया कि वजन पंचनामा खाद्य अधिकारी के कार्यालय में बैठकर तैयार किया गया। उसमें वही लोग गवाह बनाए गए जो खुद पूरी साजिश में शामिल थे।
आश्चर्यजनक रूप से यह पंचनामा 8 अप्रैल की दोपहर में ही कलेक्टोरेट में जमा हो गया था, जबकि वजन कांटा रजिस्टर के अनुसार एक कैप्सूल का वजन उसी दिन रात 8 बजे के बाद हुआ था। पुलिस ने इसे गंभीर आपराधिक कूटरचना माना है।
पुलिस पर दोष डालने की बनी थी योजना
जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि 20 अप्रैल की रात आरंग के एक ढाबे में पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और संतोष ठाकुर की बैठक हुई थी।
इस बैठक में पूरे मामले का दोष पुलिस पर डालने, दबाव बनाने और सभी आरोपियों को अपने-अपने बयान पर कायम रहने की रणनीति तैयार की गई थी।
तकनीकी जांच से खुला पूरा राज
महासमुंद पुलिस की 40 सदस्यीय टीम ने 15 दिनों तक लगातार तकनीकी विश्लेषण, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) जांच, वैज्ञानिक पूछताछ और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद मामले का खुलासा किया।
तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि सभी कैप्सूल तकनीकी रूप से पूरी तरह सुरक्षित थे और उनमें किसी प्रकार का लीकेज नहीं था। पुलिस के अनुसार 100 टन गैस का प्राकृतिक रूप से लीकेज होना व्यावहारिक रूप से असंभव था।
गिरफ्तार आरोपी
अजय कुमार यादव, जिला खाद्य अधिकारी
पंकज चंद्राकर, गौरव गैस एजेंसी संचालक
मनीष चौधरी, रायपुर निवासी
जप्त सामग्री
पंकज चंद्राकर से मोबाइल और 13 हजार रुपये नकद
मनीष चौधरी से 5.11 लाख रुपये के होम अप्लायंस सामान, मोबाइल और 8 हजार रुपये नकद
अजय यादव से मोबाइल, 78,800 रुपये नकद और एक बैग
कुल जप्त संपत्ति करीब 6.11 लाख रुपये बताई गई है।
इन धाराओं में हुई कार्रवाई
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 316(3), 316(5), 61, 238, 336(3), 338, 340(2) बीएनएस तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 और 7 के तहत मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।



