महिला के पेट से निकाला 8 किलो का विशाल ट्यूमर, रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने बचाई जान
रायपुर, 7 सितंबर 2026। रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने एक जटिल और हाई-रिस्क ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर 46 वर्षीय महिला को नई जिंदगी दी। लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति चिकित्सालय, रायगढ़ में झलमला निवासी चंपा यादव के पेट से करीब 8 किलोग्राम वजनी विशालकाय फाइब्रॉएड ट्यूमर निकाला गया।
ट्यूमर का आकार लगभग 24.2 × 23.1 × 17 सेंटीमीटर था, जो आकार में एक बड़े फुटबॉल के बराबर बताया गया। महिला पिछले एक महीने से पेट में तेज दर्द, अत्यधिक सूजन और उल्टी की समस्या से परेशान थीं। 22 अगस्त को उन्हें गंभीर हालत में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में भर्ती कराया गया।
जांच में उनका हीमोग्लोबिन महज 7.5 ग्राम/डेसीलीटर पाया गया। सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड में सामने आया कि विशाल ट्यूमर के दबाव से गर्भाशय विस्थापित हो गया था, जबकि बायीं मूत्रवाहिनी पर भी दबाव पड़ रहा था। इसके कारण किडनी प्रभावित होने के साथ लिवर के पैरामीटर भी बिगड़ गए थे।
पहले मरीज को किया गया स्थिर
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन करने के बजाय पहले उन्हें सर्जरी के लिए स्थिर किया। खून की कमी दूर करने के लिए कई यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल (PRBC) चढ़ाए गए। साथ ही एंटीबायोटिक्स और आवश्यक उपचार देकर उनके ऑर्गन फंक्शन को बेहतर किया गया।
तीन विभागों की संयुक्त टीम ने किया ऑपरेशन
मरीज की स्थिति स्थिर होने के बाद 1 सितंबर 2026 को जनरल एनेस्थीसिया के तहत हाई-रिस्क एक्सप्लोरेटरी लेपरोटॉमी की गई। ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि विशाल ट्यूमर आंतों से गहराई तक चिपका हुआ था।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जनरल सर्जरी यूनिट की सहायता ली गई। स्त्री रोग, जनरल सर्जरी और निश्चेतना विभाग की संयुक्त टीम ने बेहद सावधानी से ट्यूमर को आंतों से अलग किया। दोनों मूत्रवाहिनियों को सुरक्षित रखते हुए जटिल सर्जरी पूरी की गई। इसके बाद गर्भाशय सहित विशाल ट्यूमर को सफलतापूर्वक शरीर से बाहर निकाला गया।
अब महिला की हालत स्थिर
सफल ऑपरेशन के बाद चंपा यादव को रिकवरी रूम में रखा गया, जहां उन्हें आवश्यक आईवी फ्लूइड्स और दर्द निवारक दवाएं दी जा रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार उनकी स्थिति अब स्थिर है और वे स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं।
इस जटिल ऑपरेशन की सफलता को रायगढ़ मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के चिकित्सकों की टीम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।



