बालोद। बालोद में बोर्ड परीक्षा परिणाम को लेकर जिला प्रशासन की कार्रवाई अब प्रदेशव्यापी विवाद का रूप लेती जा रही है। 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के कमजोर परिणाम को आधार बनाकर 8 प्राचार्यों को निलंबित और 14 प्राचार्यों की वेतनवृद्धि रोकने के आदेश के खिलाफ अब शिक्षक संगठनों के बाद छत्तीसगढ़ प्राचार्य फेडरेशन भी खुलकर मैदान में उतर आया है। फेडरेशन ने बालोद कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए कार्रवाई को एकपक्षीय बताते हुए तत्काल आदेश वापस लेने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द बहाली नहीं हुई तो पूरे प्रदेश में आंदोलन किया जाएगा।
दरअसल इस वर्ष जारी हुए 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम में प्रदेश के कई जिलों में गिरावट देखने को मिली लेकिन सख्त कार्रवाई सिर्फ बालोद जिले में देखने को मिली जहां कलेक्टर द्वारा 7 मई को 8 प्राचार्यों को निलंबित करने और 14 प्राचार्यों की वेतनवृद्धि रोकने के आदेश जारी किए गए थे। प्रशासन का तर्क था कि पिछले वर्ष की तुलना में परिणाम कमजोर रहे वहीं स्थानीय स्तर पर भी शिक्षा गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे क्योंकि वर्ष 2013 के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब बालोद जिले से 10वीं और 12वीं बोर्ड की टॉप-10 सूची में एक भी छात्र-छात्रा जगह नहीं बना सके।
इसी कार्रवाई के विरोध में अब छत्तीसगढ़ प्राचार्य फेडरेशन ने मोर्चा खोल दिया है। फेडरेशन का कहना है कि परीक्षा परिणाम केवल प्राचार्य या शिक्षक के भरोसे तय नहीं होते बल्कि इसके पीछे विद्यार्थियों की क्षमता, संसाधन, गैर-शैक्षणिक कार्य और प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी जिम्मेदार होती हैं। फेडरेशन ने ज्ञापन सौंपते हुए साफ कहा कि पूरे प्रदेश में परिणाम प्रभावित हुए है। लेकिन केवल बालोद जिले में निलंबन और वेतन रोकने जैसी कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं है।
फिलहाल कलेक्टर की ओर से फेडरेशन को केवल आश्वासन मिला है। लेकिन यदि जल्द कार्रवाई वापस नहीं ली गई। तो छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी एवं प्राचार्य फेडरेशन के बैनर तले पूरे प्रदेश में आंदोलन की चेतावनी दी गई है।अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन अपने फैसले पर कायम रहता है, या बढ़ते विरोध के बीच आदेश में बदलाव किया जाता है।



