बसना के अग्रवाल नर्सिंग होम मे नवजात शिशु एवं बच्चों के सभी ऑपरेशन पुरी तरह निशुल्क 29 जून को                                 

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नवजात शिशु एवं बच्चों के सभी ऑपरेशन पूरी तरह निःशुल्क

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डॉ. अमित अग्रवाल डॉ. रितेश रंजन  शिशु रोग विशेषज्ञ

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29 जून 2025 – सुबह 10 बजे से

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फ्री कैंप का फायदा उठायें, बच्चे को दें एक स्वस्थ भविष्य

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अग्रवाल मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल धानमंत्री जन

प्रारोग्य यो PM JAY बसना, जिला- महासमुंद (छ.ग.)84618-11000, 77708-68473, 77730-86100

रायपुर : तहसीलदार संजय राठौर निलंबित, शिकायतकर्ता को मृत दिखाकर किया गया था भूमि का अनुचित नामांतरण

रायपुर : तहसीलदार संजय राठौर निलंबित, शिकायतकर्ता को मृत दिखाकर किया गया था भूमि का अनुचित नामांतरण

शिकायत की जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर सरगुजा संभागायुक्त ने किया सख्त करवाई

जिला सूरजपुर के ग्राम कोयलारी, तहसील भैयाथान की निवासी शैल कुमारी दुबे द्वारा की गई गंभीर शिकायत पर कार्यवाही करते हुए, संभागायुक्त श्री नरेन्द्र कुमार दुग्गा ने तहसीलदार श्री संजय राठौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आवेदिका शैल कुमारी दुबे ने 26 मई 2025 को शिकायत प्रस्तुत कर बताया कि तहसीलदार संजय राठौर द्वारा सांठगांठ कर उन्हें मृत दर्शाते हुए उनकी निजी स्वामित्व की भूमि (खसरा क्रमांक 45/3, रकबा 0.405 हे.) जिसका रिनंबरिंग में नया खसरा नंबर 344 है, जिसका अनुचित नामांतरण और विक्रय किया गया।

आवेदिका की शिकायत पर अपर कलेक्टर सूरजपुर एवं तहसीलदार लटोरी की संयुक्त टीम द्वारा जांच की गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार श्री संजय राठौर द्वारा जीवित आवेदिका को मृत बताकर उनकी भूमि का नामांतरण सौतेले पुत्र श्री वीरेन्द्रनाथ दुबे के पक्ष में किया गया, जो कि प्रथम दृष्टया अनैतिक एवं नियम विपरित पाया गया।

प्रारंभिक जांच में श्री राठौर को अपने पदीय दायित्वों के प्रति गंभीर लापरवाही और स्वेच्छाचारिता का दोषी पाए जाने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 का उल्लंघन माना गया है। फलस्वरूप कमिश्नर श्री दुग्गा ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत नियम 9(1)(क) के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। निलंबन अवधि में श्री राठौर को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी, तथा निलंबन अवधि के लिए उनका मुख्यालय कार्यालय कलेक्टर, बलरामपुर-रामानुजगंज नियत किया गया है।

महासमुंद:घोड़ारी में अवैध उत्खननकर्ता के विरूद्ध 595 घनमीटर में समझौता राशि 2,88,000.00 रूपये का अर्थदण्ड / समझौता राशि अधिरोपित करने प्रस्ताव*

महासमुंद *घोड़ारी में अवैध उत्खननकर्ता के विरूद्ध 595 घनमीटर में समझौता राशि 2,88,000.00 रूपये का अर्थदण्ड / समझौता राशि अधिरोपित करने प्रस्ताव*

*कलेक्टर के निर्देश पर अवैध उत्खनन,परिवहन पर सतत कार्रवाई जारी*

महमाननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ के द्वारा पारित अंतरिम आदेश तथा छत्तीसगढ़ शासन, खनिज साधन विभाग के परिपत्र के परिपालन में खनिजों के अवैध उत्खनन / परिवहन / भण्डारण पर प्रभावी रोकथाम करने हेतु आदेशित किया गया है। कलेक्टर श्री विनय लंगेह के निर्देशानुसार राजस्व एवं खनिज विभाग द्वारा ग्राम घोड़ारी में अवैध उत्खनन की शिकायत प्राप्त होने पर संयुक्त रूप से आज शुक्रवार को ग्राम घोड़ारी पहनं. 33 रानिमं. तुमगांव तहसील महासमुंद स्थित खसरा नं. 06 रकबा 0.24 हेक्टेयर में क्षेत्र में श्रीमती सुभ्रदा यादव पति श्री रामाश्रय यादव के पक्ष में गौण खनिज फर्शीपत्थर हेतु स्वीकृत उत्खनिप‌ट्टा का पंच गवाहो के समक्ष जांच किया गया। मौके पर स्वीकृत क्षेत्र को दर्शाने वाले कोआर्डीनेट के साथ सीमा स्तंभ लगे हुये पाया गया एवं तार फेसिंग होना पाया गया। खदान में उत्खनन कार्य स्थापित सीमा स्तंभ के एवं स्वीकृत नक्शे में चिन्हांकित भाग पर ही होना पाया गया।

उपरोक्त के अलावा स्वीकृत खदान के पश्चिम दिशा में 15 मीटर की दूरी पर नदी क्षेत्र के शासकीय भूमि पर फर्शीपत्थर का अवैध उत्खनन लगभग लंबाई 35 मीटर, चौड़ाई 17 मीटर एवं उंचाई 01 मीटर कुल 595 घनमीटर क्षेत्र में किया जाना पाया गया। उक्त अवैध उत्खनन ग्रामवासियों के अनुसार श्री संतोष यादव पिता श्री रामाश्रय यादव ग्राम घोड़ारी जिला महासमुंद के विरूद्ध द्वारा किया जाना बताया गया अवैध फर्शीपत्थर उत्खनन में अवैध उत्खननकर्ता के विरूद्ध खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियमन 1957 की धारा 21 के 35 मीटर × 17 मीटर 01 मीटर = 595 घनमीटर में बाजार मूल्य एवं समझौता राशि सहित कुल 2,88,000.00 रूपये का अर्थदण्ड / समझौता राशि अधिरोपित किया जाना प्रस्तावित किया गया है।

खनिज अधिकारी श्री योगेंद्र सिंह ने बताया कि अवैध उत्खनन / परिवहनकर्ताओ के विरूद्ध इसी प्रकार कृत्य करने पर दण्डात्मक/एफआईआर की कार्यवाही की जायेगी। कलेक्टर श्री लंगेह के निर्देशानुसार जिले में अवैध उत्खनन / परिवहन/भण्डारण पर प्रभावी नियंत्रण हेतु खनिज अमला द्वारा विशेष अभियान चलाकर निरंतर जांच किया जावेगा।

रायपुर : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी रामगढ़ महोत्सव में हुए शामिल aa

रायपुर : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी रामगढ़ महोत्सव में हुए शामिल

एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत किया रुद्राक्ष का पौधरोपण

सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड में आयोजित एतिहासिक रामगढ़ महोत्सव में प्रदेश के वित्त मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने एक दिवसीय प्रवास किया। इस दौरान उन्होंने राम वनगमन पर्यटन परिपथ परिसर में “एक पेड़ मां के नाम 2.0” अभियान के अंतर्गत रुद्राक्ष का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण और मातृ स्मरण का संदेश दिया।

मंत्री श्री चौधरी ने महोत्सव स्थल का निरीक्षण कर आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि रामगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में ऐसे उत्सवों की अहम भूमिका होती है। “एक पेड़ मां के नाम” अभियान को उन्होंने एक भावनात्मक और पर्यावरणीय पहल बताया, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति से जोड़ने का कार्य करता है। रामगढ़ महोत्सव में स्थानीय लोक कला, संस्कृति, पारंपरिक व्यंजन और हस्तशिल्प की विविध झलक देखने को मिली, जिससे क्षेत्रीय प्रतिभाओं को मंच और पहचान मिल रही है।

इस अवसर पर सरगुजा सांसद श्री चिंतामणि महाराज, अंबिकापुर विधायक श्री राजेश अग्रवाल एवं लुंड्रा विधायक श्री प्रबोध मिंज ने भी चंदन के पौधे लगाए। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निरुपा सिंह, महापौर श्रीमती मंजूषा भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री देवनारायण यादव, श्री भरत सिंह सिसोदिया, आलोक दुबे सहित अनेक जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

 

रायपुर : नक्सल प्रभावित और कमजोर तबके के बच्चों के लिए प्रयास विद्यालय का प्रयास हो रहा सार्थक

रायपुर : नक्सल प्रभावित और कमजोर तबके के बच्चों के लिए प्रयास विद्यालय का प्रयास हो रहा सार्थक

इस वर्ष 10वीं के 13 बच्चों ने मेरिट में बनाया स्थान

राज्य सरकार द्वारा  नक्सल प्रभावित और कमजोर तबके के बच्चों को उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से प्रयास आवासीय विद्यालयों के प्रयास से इस वर्ष 13 बच्चों ने मेरिट में स्थान बनाया है। वहीं प्रयास विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे 10वीं बोर्ड का ओवरऑल परीक्षा परिणाम शत् प्रतिशत रहा है। इसमें 98.35 प्रतिशत विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी में परीक्षा उत्तीर्ण की है। इससे प्रयास विद्यालय संचालन का उद्देश्य सार्थक हो रहा है।

उल्लेखनीय है कि प्रयास योजना मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना का एक महत्वपूर्ण घटक है। योजनांतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्र के प्रतिभावान विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराते हुए विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने हेतु सक्षम बनाकर व्यावसायिक उच्च शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश कराकर उनके जीवन में स्थयित्व प्रदान करना इस योजना का प्रमुख लक्ष्य है।

गौरतलब है कि प्रयास आवासीय विद्यालय में रहकर पढ़ने वाले बच्चे बहुत ही सामान्य पृष्ठभूमि से आते हैं एवं अधिकतर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से संबंधित हैं। इन्होंने अपनी मेहनत, दृढ़ इच्छाशक्ति तथा विद्यालय के कड़े अनुशासन एवं अध्यापकों द्वारा दिए गए बेहतर मार्गदर्शन के बल पर बड़ी सफलता प्राप्त की है। अब इनके सपनों को मानों पंखों की उड़ान मिल गई है इनमें किसी का लक्ष्य आईएएस बनने का है, तो कोई आईपीएस बनना चाहता है कोई डॉक्टर तो कोई इंजींनियर, तो कोई सीए बनना चाहता है। टॉप 10 में जगह बनाने वाले बच्चों का कहना है कि प्रयास विद्यालय में प्रवेश से पहले इनके मन में पढ़ाई के प्रति इतना जुनून नहीं था। यहां आने के बाद विद्यालय के अच्छे वातावरण, अच्छे शिक्षकों द्वारा दिए गए मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन तथा उनके द्वारा कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने यह सफलता प्राप्त की है।

आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने इन विद्यार्थियों की सफलता पर कहा है कि प्रयास विद्यालयों के अच्छे परीक्षा परिणाम, प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रदर्शन उम्मीदवारी के कारण अब इसकी गिनती प्रदेश के सबसे अच्छे विद्यालयों के रूप में होने लगी है। प्रयास विद्यालय में प्रवेश हेतु प्राक्चयन परीक्षा में बच्चों की लगातर बढ़ती संख्या इसका उदाहरण है। मंत्री श्री नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रयास विद्यालय के सफलता को देखते हुए राजनांदगांव एवं बलरामपुर में एक-एक नए प्रयास आवासीय विद्यालय खोलने की स्वीकृति प्रदान की है। इससे अब प्रयास विद्यालय की संख्यां बढ़कर 17 हो जाएगी।

 

रायपुर : बिहान योजना से बदली पासल गांव की तस्वीर

रायपुर : बिहान योजना से बदली पासल गांव की तस्वीर

बिहान योजना से बदली पासल गांव की तस्वीर महिलाएं बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचल में महिलाओं की भूमिका अब सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं रही। बिहान योजना के माध्यम से आज वे आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। सूरजपुर जिले के भैयाथान जनपद की ग्राम पंचायत पासल की महिलाएं इस परिवर्तन की सशक्त मिसाल बनकर उभरी हैं। गौरी महिला स्वयं सहायता समूह ने ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत अपनी लगन और मेहनत से एक नई पहचान बनाई है।

गौरी महिला स्वयं सहायता समूह में 10 महिलाओं ने साथ मिलकर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया। प्रारंभ में ये महिलाएं खेतिहर मजदूरी और दिहाड़ी पर आश्रित थीं, लेकिन बिहान योजना के अंतर्गत सीआरपी दीदियों द्वारा मार्गदर्शन मिलने के बाद इन्होंने आजीविका गतिविधियों में हाथ आजमाने का निर्णय लिया। नियमित बैठकें, बचत और आपसी सहयोग ने इस समूह को मजबूत नींव दी।

समूह को शासन द्वारा रिवॉल्विंग फंड के रूप में 15 हजार रूपए सामुदायिक निवेश निधि से 60 हजार रूपए तथा बैंक लिंकेज के माध्यम से 3 लाख रूपए की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इन संसाधनों से समूह की महिलाओं ने अलग-अलग व्यवसाय शुरू किए, जिसमें श्रृंगार और मनिहारी दुकान प्रमुख रही।

समूह की सदस्य श्रीमती सीमा ने वर्ष 2019 में बैंक से 75 रूपए का ऋण प्राप्त कर श्रृंगार एवं मनिहारी दुकान की शुरुआत की। प्रारंभ में सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने दृढ़ निश्चय से व्यवसाय को आगे बढ़ाया। आज वह प्रतिमाह लगभग 13 हजार 800 की आय अर्जित कर रही हैं और अपने व्यवसाय के विस्तार की दिशा में सक्रिय हैं। सीमा की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि आत्मविश्वास और योजना की मदद से कोई भी महिला अपने जीवन को बेहतर बना सकती है। गौरी महिला समूह न केवल अपने सदस्यों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर रहा है। समूह की महिलाएं अब दूसरे गांवों की महिलाओं को भी समूह से जुड़ने और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।

विहान योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव का माध्यम बन रही है। प्रशिक्षण, सहयोग और अवसर मिलने पर महिलाएं किस प्रकार समाज की धुरी बन सकती हैं, यह पासल गांव की गौरी महिला स्वयं सहायता समूह की सफलता से स्पष्ट होता है। जब नीयत साफ हो और मार्गदर्शन सटीक, तो ग्रामीण महिलाएं भी अपने सामर्थ्य से नए मुकाम हासिल कर सकती हैं। पासल गांव की गौरी महिला स्वयं सहायता समूह की कहानी केवल एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे राज्य की ग्रामीण महिला शक्ति का प्रतिबिंब है।

 

 

रायपुर : छत्तीसगढ़ में 16 जून से शुरू होगा शाला प्रवेश उत्सव

रायपुर : छत्तीसगढ़ में 16 जून से शुरू होगा शाला प्रवेश उत्सव

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जनप्रतिनिधियों से की सहभागिता की अपील

शिक्षा को जनअभियान बनाने की दिशा में राज्य सरकार की नई पहल

छत्तीसगढ़ में आगामी 16 जून 2025 से नया शिक्षा सत्र प्रारंभ होने जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के समस्त जनप्रतिनिधियों को  पत्र लिखकर “शाला प्रवेश उत्सव” में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। यह आयोजन राज्य में शिक्षा के क्षेत्र को सशक्त बनाने और शत-प्रतिशत बच्चों का विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि प्रदेश को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण अवश्य है, परंतु यह असंभव नहीं है। उन्होंने कहा कि “असंभव को संभव” बनाने के लिए समाज के हर वर्ग को मिलकर सार्थक प्रयास करने होंगे। इसके लिए सबसे पहले यह जरूरी है कि कोई भी बच्चा विद्यालय से वंचित न रहे और सभी बच्चों का समय पर प्रवेश सुनिश्चित हो।

मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य में शिक्षा का अधिकार अधिनियम प्रभावशील है, तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि कक्षा 12वीं तक शाला त्याग दर को धीरे-धीरे शून्य किया जाए। इसके लिए शैक्षणिक अवरोधों को पहचानकर उन्हें दूर करने की जिम्मेदारी सभी हितधारकों की साझा है।

मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियानरू एक ठोस पहल मुख्यमंत्री श्री साय ने जानकारी दी कि राज्य सरकार द्वारा “मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान” की शुरुआत की जा रही है, जिसका उद्देश्य शासकीय विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता को सुधारना है। इसके साथ ही, सरकार द्वारा शिक्षकों एवं विद्यालयों का युक्तियुक्तकरण करते हुए शिक्षकविहीन और एकल शिक्षकीय विद्यालयों में शिक्षकों की प्राथमिकता से पदस्थापना की गई है, जिससे शिक्षा का अधिकार हर बच्चे तक पहुंच सके।

अधोसंरचना विकास सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में स्कूल शिक्षा क्षेत्र की अधोसंरचना और मूलभूत सुविधाओं के विकास को सरकार ने अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में रखा है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे शाला प्रवेश उत्सव के दौरान अपने-अपने क्षेत्रों में व्यक्तिगत सहभागिता करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा विद्यालय से बाहर न रहे।

सामाजिक सहभागिता से संवरता भविष्य

मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे” इस परिकल्पना को साकार करने के लिए हम सभी को मिलकर परिणाममूलक कार्य करने होंगे। उन्होंने आशा जताई कि सभी जनप्रतिनिधि इस अभियान का नेतृत्व कर सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करेंगे और छत्तीसगढ़ को एक शिक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

शाला प्रवेश उत्सव को बनाएं जनअभियान मुख्यमंत्री के इस पत्र को राज्य में शिक्षा को लेकर एक जनांदोलन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल बच्चों की स्कूल तक पहुंच बढ़ेगी, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और सामाजिक सहभागिता को भी एक नई दिशा मिलेगी। प्रदेश सरकार के इस प्रयास से उम्मीद की जा रही है कि छत्तीसगढ़ शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम करेगा और शिक्षा के माध्यम से सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण को गति मिलेगी।

 

रायपुर : छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किया नाम रोशन 

रायपुर : छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किया नाम रोशन

जूनियर नेशनल सॉफ्टबॉल और एशियाई चैंपियनशिप सॉफ्टबॉल प्रतियोगिता में शाामिल बीजापुर जिले के खिलाड़ियों का हुआ सम्मान

राज्य के सुदूर वनांचल बीजापुर के खिलाड़ियों ने चंडीगढ़ में आयोजित जूनियर नेशनल सॉफ्टबॉल प्रतियोगिता में विजय प्राप्त कर राज्य का नाम देश मे रोशन किया है। बीजापुर की गर्ल्स टीम ने इस प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल प्राप्त किया है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य के लिए गठित टीम में बीजापुर जिले से 6 खिलाड़ियों का चयन हुआ था। इन खिलाड़ियों में अनुराधा कोवासी ,अस्मिता मरपल्ली, ज्योति ओयाम ,रिंकी हेमला, लक्ष्मी बघेल और पूजा कोरसा शामिल है। इन सभी 6 खिलाड़ी ने छत्तीसगढ़ को पदक प्राप्त करने में उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन कर जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

बीजापुर की इन खिलाड़ियों को कलेक्टर के द्वारा पदक  पहनाकर  स्वागत किया गया। इसी तरह बैंकॉक में आयोजित हुई एशियाई चौंपियनशिप सॉफ्टबॉल प्रतियोगिता में भारतीय टीम में शामिल राकेश पुनेम और राकेश कड़ती का भी सम्मान किया गया। इस दौरान जिले के कलेक्टर श्री संबित मिश्रा द्वारा खिलाड़ियों से खेलने की बारीकियों से लेकर देश-विदेश से आए टीमों के बारे उनके परफॉर्मेंस तथा भारतीय टीम का रेंक इत्यादि के बारे में जानकारी ली। कलेक्टर ने खिलाड़ियों  हौसला बढ़ाया और उनके उज्वल भविष्य की कामना करते हुए अच्छे खेल के प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया। इस दौरान जिला खेल अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे

 

रायपुर : राज्यस्तरीय विशेष लेख : ‘धरती आबा’ से संवरेगी ज़मीन और जीवन

रायपुर : राज्यस्तरीय विशेष लेख : ‘धरती आबा’ से संवरेगी ज़मीन और जीवन

आदिवासी समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का ऐतिहासिक अभियान

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की पहल पर देशभर में आदिवासी समुदायों के समग्र विकास के लिए शुरू किया गया ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ अब ज़मीन पर असर दिखाने लगा है। यह राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम 2 अक्टूबर 2024 को प्रारंभ किया गया था, जिसका उद्देश्य है आदिवासी बहुल ग्रामों को समावेशी विकास की राह पर आगे बढ़ाना।

अभियान के अंतर्गत 15 जून से 30 जून 2025 तक देश के 63,843 चयनित ग्रामों में लाभ- संतृप्ति शिविरों का आयोजन किया जाएगा। ये शिविर 26 राज्यों और 4 केंद्रशासित प्रदेशों के 546 जिलों में लगाए जाएंगे, जहाँ आदिवासी समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाया जाएगा।

छत्तीसगढ़ राज्य में भी इस अभियान की शुरुआत जोर-शोर से की जा रही है। राज्य के 32 जिलों के 6,691 चयनित ग्रामों में शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान लाखों अनुसूचित जनजाति परिवारों को विकास योजनाओं से जोड़ा जाएगा।

शिविरों के माध्यम से आदिवासी नागरिकों को आधार कार्ड पंजीयन एवं सुधार, आयुष्मान भारत, स्वास्थ्य बीमा कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, जनधन बैंक खाता, सिकल सेल जांच, विद्युत कनेक्शन, पक्के मकानों की स्वीकृति, वन अधिकार अधिनियम से संबंधित प्रशिक्षण के अलावा अलग-अलग योजनाओं से लाभ दिलाया जाएगा।

सरकार द्वारा इस अभियान के तहत आदिवासी बहुल क्षेत्रों, आकांक्षी जिलों, ब्लॉकों और वन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में सामाजिक ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका में सुधार लाकर समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा देना है। अभियान के तहत आदिवासी समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए स्थायी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा, आदिवासी होमस्टे योजना के अंतर्गत पर्यटन से जोड़ा जाएगा, आदिवासी बहुउद्देश्यीय विपणन केंद्र स्थापित किए जाएंगे,विद्यालयों एवं छात्रावासों के बुनियादी ढांचे में सुधार होगा, ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और विद्युतीकरण जैसी सेवाएं भी दी जाएंगी।

आदिवासी बहुल राज्य छत्तीसगढ़ के लिए यह अभियान समाजिक न्याय, भागीदारी और समानता की दिशा में एक मजबूत कदम है। इससे न केवल आदिवासी समाज को उनके हक और अधिकार मिलेंगे, बल्कि उनकी पहचान, संस्कृति और आजीविका को भी मजबूती मिलेगी। निश्चित ही देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच के कारण ही विगत 11 वर्षों में देश की ‘विश्वास और विकास’ की एक नई तस्वीर आई है। ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ सरकार की एक ऐतिहासिक पहल है, जो आदिवासी समाज को गांवों को विकास, विश्वास और आत्मनिर्भरता के पथ पर अग्रसर करेगी। यह अभियान निश्चित ही भारत को समावेशी राष्ट्र की दिशा में आगे ले जाएगा और ‘धरती आबा’ से ‘जमीन और जीवन संवरेगी’।

रायपुर : सीमा की सुरक्षा प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य: राज्यपाल श्री रमेन डेका

रायपुर : सीमा की सुरक्षा प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य: राज्यपाल श्री रमेन डेका

राज्यपाल दरभंगा में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में हुए शामिल

राज्यपाल श्री रमेन डेका गत दिवस बिहार राज्य के दरभंगा में राष्ट्रीय सनातनी सेवा संघ द्वारा ‘‘सीमा सुरक्षा हम सब की जिम्मेदारी‘‘ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत एक विशाल और विविधतापूर्ण देश है, जिसकी सीमाएँ हिमालय की ऊंचाइयों से लेकर हिंद महासागर की गहराइयों तक फैली हुई हैं। सीमा की सुरक्षा केवल सैनिकों और सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

राज्यपाल श्री डेका ने अपने उद्बोधन में कहा कि सीमा की रक्षा राष्ट्रीय एकता, अखंडता और संप्रभुता को बनाए रखने का आधार है। सीमा की सुरक्षा, देश की आंतरिक और बाह्य स्थिरता के लिए आवश्यक है। यह न केवल बाहरी खतरों जैसे आतंकवाद, घुसपैठ और तस्करी से रक्षा करती है, बल्कि देश की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को भी संरक्षित करती है। भारत की सीमाएँ, पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों के साथ साझा की जाती हैं, और प्रत्येक सीमा की अपनी अनूठी चुनौतियाँ हैं।

श्री डेका ने कहा कि हमारे सैनिक, प्राणों की बाजी लगाकर सीमा की सुरक्षा करते हैं लेकिन उनकी यह जिम्मेदारी तब और प्रभावी होती है, जब समाज और नागरिक उनका साथ देते हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं और स्थानीय प्रशासन या सुरक्षा बलों को सूचित कर सकते हैं। असामान्य गतिविधियों, जैसे तस्करी या घुसपैठ, की जानकारी देना, देश की सुरक्षा को मजबूत करता है। आज के युग में सीमा सुरक्षा में तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है। ड्रोन, सैटेलाइट निगरानी, और स्मार्ट फेंसिंग जैसे उपकरण सीमा पर निगरानी को और प्रभावी बना रहे हैं। श्री डेका ने कहा कि नागरिक के रूप में, हम तकनीकी नवाचारों को समर्थन दे सकते हैं और सरकार के डिजिटल सुरक्षा प्रयासों में सहयोग कर सकते हैं। इस अवसर पर राष्ट्रीय सनातनी सेवा संघ के पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।