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कोण्डागांव : जिला पंचायत के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों का प्रथम सम्मेलन संपन्न

त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन-2025 के अंतर्गत जिला पंचायत कोण्डागांव के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों का प्रथम सम्मेलन आज जिला पंचायत के सभाकक्ष में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर जिला पंचायत की नव-निर्वाचित अध्यक्ष श्रीमती रीता शोरी, उपाध्यक्ष श्री हीरा सिंह नेताम तथा सभी सदस्यों ने अपने दायित्वों का पूर्ण निष्ठा एवं जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करने की प्रतिज्ञा ली ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए  अध्यक्ष श्रीमती रीता शोरी और उपाध्यक्ष श्री हीरा सिंह नेताम ने सभी नवनिर्वाचित सदस्यों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास जताया कि वे जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे और अपने-अपने क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
इस अवसर पर नगर पालिका परिषद कोंडागांव उपाध्यक्ष श्री जसकेतु उसेंडी, श्री दीपेश अरोरा, श्री मनोज जैन,  जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अविनाश भोई, उप संचालक पंचायत श्री बलराम मोरे सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण  एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन-2025 के अंतर्गत जिला पंचायत कोण्डागांव के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों का प्रथम सम्मेलन आज जिला पंचायत के सभाकक्ष में संपन्न हुआ।

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उत्तर बस्तर कांकेर : महिला कृषक उद्यमियों का किया गया सम्मान

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र तथा कृषक कल्याण विभाग कांकेर द्वारा कृषक संगोष्ठी का आयोजन कर महिला कृषक उद्यमियों का सम्मान किया गया। सम्मान समारोह मुख्य आतिथ्य जनपद पंचायत कांकेर की अध्यक्ष श्रीमती पूर्णिमा कावड़े एवं उपाध्यक्ष श्रीमती किरण ठाकुर की उपथिति में किया गया। उक्त कार्यक्रम में कांकेर तथा चारामा विकासखण्ड के लगभग 102 कृषकों ने भाग लिया। इस अवसर पर महिला स्व-सहायता समूहों ने अपने कार्यों तथा उपलब्धियां साझा की तथा परिचर्चा कर उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र तथा कृषक कल्याण विभाग कांकेर द्वारा कृषक संगोष्ठी का आयोजन कर महिला कृषक उद्यमियों का सम्मान किया गया। सम्मान समारोह मुख्य आतिथ्य जनपद पंचायत कांकेर की अध्यक्ष श्रीमती पूर्णिमा कावड़े एवं उपाध्यक्ष श्रीमती किरण ठाकुर की उपथिति में किया गया। उक्त कार्यक्रम में कांकेर तथा चारामा विकासखण्ड के लगभग 102 कृषकों ने भाग लिया। इस अवसर पर महिला स्व-सहायता समूहों ने अपने कार्यों तथा उपलब्धियां साझा की तथा परिचर्चा कर उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

उत्तर बस्तर कांकेर : जिले में ’विश्व ग्लूकोमा सप्ताह’ का आयोजन 15 मार्च तक

 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा अंधत्व एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत 09 से 15 मार्च तक ’’विश्व ग्लूकोमा सप्ताह’’ का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ आज जिला चिकित्सालय कांकेर में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. महेश शांडिया द्वारा किया गया।

क्या है ग्लूकोमा का लक्षणः-
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शांडिया ने बताया कि ग्लूकोमा एक (काला मोतिया) आंखों का रोग है, यह बीमारी 40 वर्ष से अधिक उम्र वालों को होती है। ग्लूकोमा धीरे-धीरे आंखां की रोशनी छीन लेता है। उन्होंने यह भी बताया कि दृष्टि में धीरे-धीरे कमी आना, आंखों में लालिमा, अचानक दृष्टि का जाना, तीव्र दर्द, धुंधली दृष्टि, तेज रोशनी के चारों तरफ इंद्रधनुष रंग के गोले नजर आना, चश्मा नम्बर में लगातार बदलाव होना यह ग्लूकोमा के लक्षण है। इस अवसर पर डॉ. वेदप्रकाश सिन्हा नेत्ररोग विशेषज्ञ द्वारा ग्लूकोमा के बारे में विस्तृत जानकारी भी दी गई। इसके अलावां छात्र-छात्राओं के द्वारा नुक्कड़ नाटक एवं पोस्टर प्रेजेंटेशन के माध्यम से जन चेतना हेतु प्रस्तुति दी गई। साथ ही शहर में विश्व ग्लाकोमा दिवस के अवसर पर जन-जगरूकता हेतु रैली निकाली गई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने जिलेवासियों से अपील किया है कि विश्व ग्लूकोमा सप्ताह में अपनी आंखो का जांच अवश्य करवाएं तथा अधिक से अधिक संख्या में इसका लाभ उठाएं। इस अवसर पर अंधत्व एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. सरिता कुमेटी, संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. विमल भगत, टीकाकरण अधिकारी डॉ. ओ.पी. शंखवार, निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. वासुदेव कुमेटी, नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. वेदप्रकाश सिन्हा उपस्थित थे।स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा अंधत्व एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत 09 से 15 मार्च तक ’’विश्व ग्लूकोमा सप्ताह’’ का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ आज जिला चिकित्सालय कांकेर में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. महेश शांडिया द्वारा किया गया।

क्या है ग्लूकोमा का लक्षणः-
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शांडिया ने बताया कि ग्लूकोमा एक (काला मोतिया) आंखों का रोग है, यह बीमारी 40 वर्ष से अधिक उम्र वालों को होती है। ग्लूकोमा धीरे-धीरे आंखां की रोशनी छीन लेता है। उन्होंने यह भी बताया कि दृष्टि में धीरे-धीरे कमी आना, आंखों में लालिमा, अचानक दृष्टि का जाना, तीव्र दर्द, धुंधली दृष्टि, तेज रोशनी के चारों तरफ इंद्रधनुष रंग के गोले नजर आना, चश्मा नम्बर में लगातार बदलाव होना यह ग्लूकोमा के लक्षण है। इस अवसर पर डॉ. वेदप्रकाश सिन्हा नेत्ररोग विशेषज्ञ द्वारा ग्लूकोमा के बारे में विस्तृत जानकारी भी दी गई। इसके अलावां छात्र-छात्राओं के द्वारा नुक्कड़ नाटक एवं पोस्टर प्रेजेंटेशन के माध्यम से जन चेतना हेतु प्रस्तुति दी गई। साथ ही शहर में विश्व ग्लाकोमा दिवस के अवसर पर जन-जगरूकता हेतु रैली निकाली गई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने जिलेवासियों से अपील किया है कि विश्व ग्लूकोमा सप्ताह में अपनी आंखो का जांच अवश्य करवाएं तथा अधिक से अधिक संख्या में इसका लाभ उठाएं। इस अवसर पर अंधत्व एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. सरिता कुमेटी, संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. विमल भगत, टीकाकरण अधिकारी डॉ. ओ.पी. शंखवार, निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. वासुदेव कुमेटी, नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. वेदप्रकाश सिन्हा उपस्थित थे।

 

एमसीबी : मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना से लोगों को मिल रहा है लाभ

जरूरतमंद व गरीब तबके के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने राज्य सरकार के द्वारा मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना की शुरुआत की गई है। इसके लिए नगर पालिक निगम चिरमिरी क्षेत्र के पूरे 40 वार्डों के लिए 02 मोबाईल मेडिकल यूनिट बस संचालित है। क्षेत्र के लोगों के द्वार तक पहुंचने वाली मोबाईल मेडिकल यूनिट वाली बसें स्वयं में एक अस्पताल है। जिसमें मेडिकल स्टाफ, मेडिकल उपकरण सहित मरीजों के लिए आवश्यक सुविधाएं व निःशुल्क दवा उपलब्ध है। इसी क्रम में सोमवार को नगर पालिक निगम चिरमिरी के अंतर्गत वार्ड क्रमांक- 01 पोड़ी, एवं वार्ड क्रमांक- 38 डोमनहिल फुटबॉल ग्राउण्ड के पीछे कैंप लगाया गया। पोड़ी में 30 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण व 10 मरीजों का लैब टेस्ट किया गया, वहीं सभी जांच कराने वाले मरीजों को निःशुल्क दवा का भी वितरण किया गया। आपको बता दे कि छत्तीसगढ़ सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं में लगातार बढ़ोत्तरी कर रही है, जिसके लिए आमजनों को स्वास्थ्य की जांच हेतु घर पहुंच सेवा मोबाईल मेडिकल युनिट बस की शुरूआत की गई है। जिसमें 42 प्रकार के स्वास्थ्य की जांच की जाती है। जिसमें मुख्य रूप से सी.पी.सी. मशीन से जांच, एल.एफ.टी., थायराइड, विटामिन बी-12, विटामिन डी-03, यूरिक एसिड जैसे अन्य कई प्रकार के जांच कर लोगों का घर पहुंच स्वास्थ्य सुविधाएं सरकार के द्वारा दिया जा रहा है। इस दौरान डॉ. किरण किशोर, डॉ. सुमन पाण्डेय, ए.एन.एम. सुनिता कारफारमा, लैब टेक्नीशियन सुशील यादव, फार्मासिस्ट नैन्सी, सुभाष, रोशन सिंह, लैब टेक्नीशियन अलमा एक्का व अन्य स्टाफ मौजूद रहे।जरूरतमंद व गरीब तबके के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने राज्य सरकार के द्वारा मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना की शुरुआत की गई है। इसके लिए नगर पालिक निगम चिरमिरी क्षेत्र के पूरे 40 वार्डों के लिए 02 मोबाईल मेडिकल यूनिट बस संचालित है। क्षेत्र के लोगों के द्वार तक पहुंचने वाली मोबाईल मेडिकल यूनिट वाली बसें स्वयं में एक अस्पताल है। जिसमें मेडिकल स्टाफ, मेडिकल उपकरण सहित मरीजों के लिए आवश्यक सुविधाएं व निःशुल्क दवा उपलब्ध है। इसी क्रम में सोमवार को नगर पालिक निगम चिरमिरी के अंतर्गत वार्ड क्रमांक- 01 पोड़ी, एवं वार्ड क्रमांक- 38 डोमनहिल फुटबॉल ग्राउण्ड के पीछे कैंप लगाया गया। पोड़ी में 30 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण व 10 मरीजों का लैब टेस्ट किया गया, वहीं सभी जांच कराने वाले मरीजों को निःशुल्क दवा का भी वितरण किया गया। आपको बता दे कि छत्तीसगढ़ सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं में लगातार बढ़ोत्तरी कर रही है, जिसके लिए आमजनों को स्वास्थ्य की जांच हेतु घर पहुंच सेवा मोबाईल मेडिकल युनिट बस की शुरूआत की गई है। जिसमें 42 प्रकार के स्वास्थ्य की जांच की जाती है। जिसमें मुख्य रूप से सी.पी.सी. मशीन से जांच, एल.एफ.टी., थायराइड, विटामिन बी-12, विटामिन डी-03, यूरिक एसिड जैसे अन्य कई प्रकार के जांच कर लोगों का घर पहुंच स्वास्थ्य सुविधाएं सरकार के द्वारा दिया जा रहा है। इस दौरान डॉ. किरण किशोर, डॉ. सुमन पाण्डेय, ए.एन.एम. सुनिता कारफारमा, लैब टेक्नीशियन सुशील यादव, फार्मासिस्ट नैन्सी, सुभाष, रोशन सिंह, लैब टेक्नीशियन अलमा एक्का व अन्य स्टाफ मौजूद रहे।

रायपुर : सफलता की नई इबादत लिख रहीं कोण्डागांव जिले की महिलाएं

महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ’’बिहान’’ ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। कोण्डागांव जिले की महिलाएं अब सिर्फ घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कृषि, पशुपालन, सिलाई, बुनाई, दुकान और अन्य छोटे व्यवसायों से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। जिले की कई महिलाएं अपनी मेहनत और लगन से शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर सफलता की नई कहानी लिख रही हैं। आज हम ऐसी ही महिलाओं की प्रेणादायक कहानी साझा कर रहे हैं, जिन्होंने बिहान से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की।
चंद्रिका मरकाम बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल
ऐसी ही कहानी माकड़ी विकासखंड के ग्राम पंचायत ओण्डरी की रहने वाली श्रीमती चंद्रिका मरकाम की है, जिन्होंने वर्ष 2014 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ’’बिहान’’ के अंतर्गत मां शक्ति स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने आत्मनिर्भर बनने की यात्रा शुरू की। उस समय उनकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी, और परिवार पूरी तरह से कृषि पर निर्भर था, जिससे होने वाली आय परिवार के जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं था।
स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। ’’बिहान’’ के तहत मिली वित्तीय सहायता से उन्होंने डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की। धीरे-धीरे व्यवसाय को बढ़ाया, जिससे अब उन्हें स्थायी आय प्राप्त हो रही है। वर्तमान में श्रीमती चंद्रिका मरकाम को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से 2,18,000 रुपये की वार्षिक आय हो रही है, जिसमें डेयरी व्यवसाय और कृषि से प्राप्त आय शामिल है। राज्य शासन की महतारी वंदन योजना की राशि सहित उन्हें महीने में कुल 18,166 रूपए की आमदनी हो रही है। अब उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो चुकी है और वे अपने परिवार की सभी आवश्यकताओं को आसानी से पूरा कर पा रही हैं। साथ ही बच्चों की शिक्षा में भी अब कोई बाधा नहीं है। श्रीमती चंद्रिका मरकाम ने बिहान से जुड़कर आत्मविश्वास और अपनी मेहनत के बल पर इस मुकाम पर पहुंची है, जो जिले के अन्य महिलाओं के लिए एक मिसाल है।
संतोषी ने कपड़ा व्यवसाय से परिवार को दी आर्थिक मजबूती
ग्राम पंचायत हीरापुर, विकासखंड माकड़ी की रहने वाली संतोषी देवांगन शादी के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं। उनके पति की एक छोटी सी दुकान थी, जिससे घर चलाना मुश्किल हो रहा था। पूंजी की कमी के कारण वे कोई नया काम नहीं कर पा रही थीं। वर्ष 2017 में उन्होंने 10 महिलाओं के साथ मिलकर जय मां धरती स्व-सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया।
समूह की बचत सामुदायिक निवेश कोष एवं बैंक लिंकेज से प्राप्त 8.51 लाख रुपये की सहायता से उन्होंने कपड़े की दुकान शुरू की। धीरे-धीरे उनकी दुकान में ग्राहकों की संख्या बढ़ी और अब वे हर महीने 18,000 रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। साथ ही संतोषी को राज्य सरकार के द्वारा महतारी वंदन योजना का भी लाभ मिल रहा है। इस तरह आज संतोषी न सिर्फ अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं, बल्कि अपने दो बच्चों को अच्छी शिक्षा भी दिला रही हैं। उनके पति को भी व्यापार में सहयोग मिल रहा है, जिससे उनका परिवार समृद्ध और आत्मनिर्भर बन चुका है।
मुर्गी एवं बटेर पालन से अनिता को मिली एक नई पहचान
कोंडागांव जिले के केशकाल विकासखंड के धनोरा गांव की अनिता मंडावी पहले केवल मजदूरी और कृषि पर निर्भर थीं। वर्ष 2018 में उन्होंने जय अम्बे स्व-सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया और वर्ष 2022 में मुर्गी एवं बटेर पालन का कार्य शुरू किया। उन्होंने बैंक एवं सामुदायिक निवेश कोष से 1.50 लाख रुपये की सहायता प्राप्त की और 1 लाख रुपये की लागत से व्यवसाय की शुरुआत की। आज उनकी मासिक आय 20,000 रुपये तक पहुंच गई है, अनिता को महतारी वंदन योजना के तहत एक हजार रूपये हर महीने मिल रहा है इसके साथ ही कृषि, मजदूरी भी करती हैं। इस तरह अनिता बिहान से जुड़ कर अब तक 3 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर चुकी हैं और उनका परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हो गया है। अब वे अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
उन्नत खेती से लखपति बनीं दयावती देवांगन
ग्राम पंचायत बफना की श्रीमती दयावती देवांगन ने कड़ी मेहनत और नई कृषि तकनीकों को अपनाकर आर्थिक समृद्धि की ओर कदम बढ़ाया है। उन्होंने आईएफसी क्लस्टर के तहत सब्जी उत्पादन शुरू किया और अब तक एक लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर लखपति दीदी बन गई हैं।
दयावती ने अपने एक एकड़ खेत में मिर्ची, बरबटी, प्याज और लौकी की खेती शुरू की। पहले परंपरागत खेती करने के कारण उत्पादन कम था, लेकिन ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाने से न केवल उत्पादन में वृद्धि हुई, बल्कि पानी की भी बचत हुई। उन्होंने जैविक खाद का उपयोग कर स्वास्थ्यवर्धक और ताजी सब्जियां उगा रही है।
दयावती जय मां शारदा स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं। पहले उनके परिवार की आय केवल खेती पर निर्भर थी, जिससे घर चलाना मुश्किल हो रहा था। समूह से जुड़ने के बाद वे कृषि सखी बनीं और आधुनिक खेती शुरू की, जिससे अच्छी आमदनी होने लगी। दयावती के परिवार को राज्य सरकार के महतारी वंदन योजना के तहत 3,000 रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि मिल रही है। साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत सालाना 6,000 की आर्थिक मदद मिल रहा है। आज दयावती का परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हुआ है और घर के बच्चों को बेहतर शिक्षा भी दे पा रही हैं।महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ’’बिहान’’ ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। कोण्डागांव जिले की महिलाएं अब सिर्फ घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कृषि, पशुपालन, सिलाई, बुनाई, दुकान और अन्य छोटे व्यवसायों से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। जिले की कई महिलाएं अपनी मेहनत और लगन से शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर सफलता की नई कहानी लिख रही हैं। आज हम ऐसी ही महिलाओं की प्रेणादायक कहानी साझा कर रहे हैं, जिन्होंने बिहान से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की।

चंद्रिका मरकाम बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल
ऐसी ही कहानी माकड़ी विकासखंड के ग्राम पंचायत ओण्डरी की रहने वाली श्रीमती चंद्रिका मरकाम की है, जिन्होंने वर्ष 2014 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ’’बिहान’’ के अंतर्गत मां शक्ति स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने आत्मनिर्भर बनने की यात्रा शुरू की। उस समय उनकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी, और परिवार पूरी तरह से कृषि पर निर्भर था, जिससे होने वाली आय परिवार के जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं था।
स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। ’’बिहान’’ के तहत मिली वित्तीय सहायता से उन्होंने डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की। धीरे-धीरे व्यवसाय को बढ़ाया, जिससे अब उन्हें स्थायी आय प्राप्त हो रही है। वर्तमान में श्रीमती चंद्रिका मरकाम को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से 2,18,000 रुपये की वार्षिक आय हो रही है, जिसमें डेयरी व्यवसाय और कृषि से प्राप्त आय शामिल है। राज्य शासन की महतारी वंदन योजना की राशि सहित उन्हें महीने में कुल 18,166 रूपए की आमदनी हो रही है। अब उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो चुकी है और वे अपने परिवार की सभी आवश्यकताओं को आसानी से पूरा कर पा रही हैं। साथ ही बच्चों की शिक्षा में भी अब कोई बाधा नहीं है। श्रीमती चंद्रिका मरकाम ने बिहान से जुड़कर आत्मविश्वास और अपनी मेहनत के बल पर इस मुकाम पर पहुंची है, जो जिले के अन्य महिलाओं के लिए एक मिसाल है।  
संतोषी ने कपड़ा व्यवसाय से परिवार को दी आर्थिक मजबूती
ग्राम पंचायत हीरापुर, विकासखंड माकड़ी की रहने वाली संतोषी देवांगन शादी के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं। उनके पति की एक छोटी सी दुकान थी, जिससे घर चलाना मुश्किल हो रहा था। पूंजी की कमी के कारण वे कोई नया काम नहीं कर पा रही थीं। वर्ष 2017 में उन्होंने 10 महिलाओं के साथ मिलकर जय मां धरती स्व-सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया।
समूह की बचत सामुदायिक निवेश कोष एवं बैंक लिंकेज से प्राप्त 8.51 लाख रुपये की सहायता से उन्होंने कपड़े की दुकान शुरू की। धीरे-धीरे उनकी दुकान में ग्राहकों की संख्या बढ़ी और अब वे हर महीने 18,000 रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। साथ ही संतोषी को राज्य सरकार के द्वारा महतारी वंदन योजना का भी लाभ मिल रहा है। इस तरह आज संतोषी न सिर्फ अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं, बल्कि अपने दो बच्चों को अच्छी शिक्षा भी दिला रही हैं। उनके पति को भी व्यापार में सहयोग मिल रहा है, जिससे उनका परिवार समृद्ध और आत्मनिर्भर बन चुका है।
मुर्गी एवं बटेर पालन से अनिता को मिली एक नई पहचान
    कोंडागांव जिले के केशकाल विकासखंड के धनोरा गांव की अनिता मंडावी पहले केवल मजदूरी और कृषि पर निर्भर थीं। वर्ष 2018 में उन्होंने जय अम्बे स्व-सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया और वर्ष 2022 में मुर्गी एवं बटेर पालन का कार्य शुरू किया। उन्होंने बैंक एवं सामुदायिक निवेश कोष से 1.50 लाख रुपये की सहायता प्राप्त की और 1 लाख रुपये की लागत से व्यवसाय की शुरुआत की। आज उनकी मासिक आय 20,000 रुपये तक पहुंच गई है, अनिता को महतारी वंदन योजना के तहत एक हजार रूपये हर महीने मिल रहा है इसके साथ ही कृषि, मजदूरी भी करती हैं। इस तरह अनिता बिहान से जुड़ कर अब तक 3 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर चुकी हैं और उनका परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हो गया है। अब वे अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
उन्नत खेती से लखपति बनीं दयावती देवांगन
    ग्राम पंचायत बफना की श्रीमती दयावती देवांगन ने कड़ी मेहनत और नई कृषि तकनीकों को अपनाकर आर्थिक समृद्धि की ओर कदम बढ़ाया है। उन्होंने आईएफसी क्लस्टर के तहत सब्जी उत्पादन शुरू किया और अब तक एक लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर लखपति दीदी बन गई हैं।
दयावती ने अपने एक एकड़ खेत में मिर्ची, बरबटी, प्याज और लौकी की खेती शुरू की। पहले परंपरागत खेती करने के कारण उत्पादन कम था, लेकिन ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाने से न केवल उत्पादन में वृद्धि हुई, बल्कि पानी की भी बचत हुई। उन्होंने जैविक खाद का उपयोग कर स्वास्थ्यवर्धक और ताजी सब्जियां उगा रही है।
    दयावती जय मां शारदा स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं। पहले उनके परिवार की आय केवल खेती पर निर्भर थी, जिससे घर चलाना मुश्किल हो रहा था। समूह से जुड़ने के बाद वे कृषि सखी बनीं और आधुनिक खेती शुरू की, जिससे अच्छी आमदनी होने लगी। दयावती के परिवार को राज्य सरकार के महतारी वंदन योजना के तहत 3,000 रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि मिल रही है। साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत सालाना 6,000 की आर्थिक मदद मिल रहा है। आज दयावती का परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हुआ है और घर के बच्चों को बेहतर शिक्षा भी दे पा रही हैं।

रायपुर : छत्तीसगढ़ में ऊर्जा क्रांति! 3 लाख करोड़ का निवेश, चार तरह के पावर प्लांट से बनेगी अपार ऊर्जा

छत्तीसगढ़ अब ऊर्जा क्रांति की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आज रायपुर में हुए ‘छत्तीसगढ़ एनर्जी इंवेस्टर्स समिट’ में कई बड़ी कंपनियों ने 3 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश का ऐलान किया है. इस निवेश से राज्य में परमाणु, थर्मल, सौर और पंप्ड स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में बिजली उत्पादन के नए प्रोजेक्ट शुरू होंगे। इससे न केवल उद्योगों को फायदा मिलेगा, बल्कि आम लोगों को भी सस्ती और निरंतर बिजली मिल सकेगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि छत्तीसगढ़ में ऊर्जा के क्षेत्र में यह निवेश राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देकर हरित भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ न केवल ऊर्जा में आत्मनिर्भर बने, बल्कि पूरे देश के लिए एक ऊर्जा हब के रूप में स्थापित हो।

छत्तीसगढ़ पहले से ही 30,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है, जो देश के औसत से ज्यादा है। अब हर व्यक्ति को 2048 किलोवाट-घंटे बिजली मिल रही है, जिससे राज्य की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो रही हैं।

परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एनटीपीसी ने 80,000 करोड़ रुपये की लागत से 4200 मेगावाट क्षमता का न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट लगाने की योजना बनाई है। इससे छत्तीसगढ़ में परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन की शुरुआत होगी।

थर्मल पावर क्षेत्र में भी बड़े निवेश की घोषणा हुई है। अदानी पावर 66,720 करोड़ रुपये खर्च कर कोरबा, रायगढ़ और रायपुर में 1600-1600 मेगावाट के तीन थर्मल पावर प्लांट लगाएगा। जिंदल पावर रायगढ़ में 1600 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए 12,800 करोड़ रुपये का निवेश करेगा, जबकि सरदा एनर्जी रायगढ़ में 660 मेगावाट क्षमता के प्लांट के लिए 5,300 करोड़ रुपये लगाएगी। इसके अलावा, सरकारी कंपनियां एनटीपीसी और सीएसपीजीसीएल 41,120 करोड़ रुपये की लागत से 4500 मेगावाट बिजली उत्पादन करेंगी।

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ को बड़ी सफलता मिली है। जिंदल पावर और एनटीपीसी ग्रीन मिलकर 10,000 करोड़ रुपये खर्च कर 2500 मेगावाट सौर बिजली का उत्पादन करेंगे। इसमें डोलेसरा में 500 मेगावाट और रायगढ़ में 2000 मेगावाट के सौर प्लांट शामिल होंगे।

किसानों के लिए भी खुशखबरी है। पीएम कुसुम योजना के तहत 4100 करोड़ रुपये की लागत से 675 मेगावाट सौर बिजली का उत्पादन किया जाएगा और 20,000 सोलर पंप लगाए जाएंगे। इससे किसानों को सिंचाई के लिए सस्ती बिजली मिलेगी और डीजल पंपों की जरूरत कम होगी।

इसके अलावा, 57,046 करोड़ रुपये की लागत से 8700 मेगावाट क्षमता के पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट भी शुरू होंगे। इसमें एसजेएन कोटपाली में 1800 मेगावाट और जिंदल रिन्यूएबल द्वारा 3000 मेगावाट के प्रोजेक्ट शामिल हैं।

इन सभी निवेशों के जरिए छत्तीसगढ़ जल्द ही देश के सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल हो जाएगा। इससे उद्योगों, किसानों और आम लोगों को फायदा होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

प्रमुख निवेश और योजनाएं

1. परमाणु ऊर्जा: साफ और कुशल ऊर्जा उत्पादन के लिए ₹80,000 करोड़ का निवेश।
2. ताप विद्युत: राज्य की ताप विद्युत क्षमता को मजबूत करने के लिए ₹1,07,840 करोड़।
3. सौर ऊर्जा: सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के लिए ₹10,000 करोड़।
4. पीएम कुसुम योजना: किसानों के बीच सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ₹4,100 करोड़।
5. पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं (PSP): ग्रिड स्थिरता के लिए ऊर्जा भंडारण में ₹57,046 करोड़।
6. क्रेडा सौर पहल: सौर ऊर्जा विस्तार के लिए ₹3,200 करोड़।
7. पीएम सूर्य योजना: राष्ट्रीय सौर छत परियोजना के तहत ₹6,000 करोड़।
8. सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा: सरकारी इमारतों में सौर ऊर्जा अपनाने के लिए ₹2,500 करोड़।
9. बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS): ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए ₹2,600 करोड़।
10. पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क: बिजली पारेषण नेटवर्क को उन्नत करने के लिए ₹17,000 करोड़।
11. RDSS (वितरण क्षेत्र योजना): वितरण बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए ₹10,800 करोड़।छत्तीसगढ़ अब ऊर्जा क्रांति की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आज रायपुर में हुए ‘छत्तीसगढ़ एनर्जी इंवेस्टर्स समिट’ में कई बड़ी कंपनियों ने 3 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश का ऐलान किया है. इस निवेश से राज्य में परमाणु, थर्मल, सौर और पंप्ड स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में बिजली उत्पादन के नए प्रोजेक्ट शुरू होंगे। इससे न केवल उद्योगों को फायदा मिलेगा, बल्कि आम लोगों को भी सस्ती और निरंतर बिजली मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि छत्तीसगढ़ में ऊर्जा के क्षेत्र में यह निवेश राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देकर हरित भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ न केवल ऊर्जा में आत्मनिर्भर बने, बल्कि पूरे देश के लिए एक ऊर्जा हब के रूप में स्थापित हो।

छत्तीसगढ़ पहले से ही 30,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है, जो देश के औसत से ज्यादा है। अब हर व्यक्ति को 2048 किलोवाट-घंटे बिजली मिल रही है, जिससे राज्य की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो रही हैं।

परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एनटीपीसी ने 80,000 करोड़ रुपये की लागत से 4200 मेगावाट क्षमता का न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट लगाने की योजना बनाई है। इससे छत्तीसगढ़ में परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन की शुरुआत होगी।

थर्मल पावर क्षेत्र में भी बड़े निवेश की घोषणा हुई है। अदानी पावर 66,720 करोड़ रुपये खर्च कर कोरबा, रायगढ़ और रायपुर में 1600-1600 मेगावाट के तीन थर्मल पावर प्लांट लगाएगा। जिंदल पावर रायगढ़ में 1600 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए 12,800 करोड़ रुपये का निवेश करेगा, जबकि सरदा एनर्जी रायगढ़ में 660 मेगावाट क्षमता के प्लांट के लिए 5,300 करोड़ रुपये लगाएगी। इसके अलावा, सरकारी कंपनियां एनटीपीसी और सीएसपीजीसीएल 41,120 करोड़ रुपये की लागत से 4500 मेगावाट बिजली उत्पादन करेंगी।

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ को बड़ी सफलता मिली है। जिंदल पावर और एनटीपीसी ग्रीन मिलकर 10,000 करोड़ रुपये खर्च कर 2500 मेगावाट सौर बिजली का उत्पादन करेंगे। इसमें डोलेसरा में 500 मेगावाट और रायगढ़ में 2000 मेगावाट के सौर प्लांट शामिल होंगे।

किसानों के लिए भी खुशखबरी है। पीएम कुसुम योजना के तहत 4100 करोड़ रुपये की लागत से 675 मेगावाट सौर बिजली का उत्पादन किया जाएगा और 20,000 सोलर पंप लगाए जाएंगे। इससे किसानों को सिंचाई के लिए सस्ती बिजली मिलेगी और डीजल पंपों की जरूरत कम होगी।

इसके अलावा, 57,046 करोड़ रुपये की लागत से 8700 मेगावाट क्षमता के पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट भी शुरू होंगे। इसमें एसजेएन कोटपाली में 1800 मेगावाट और जिंदल रिन्यूएबल द्वारा 3000 मेगावाट के प्रोजेक्ट शामिल हैं।

इन सभी निवेशों के जरिए छत्तीसगढ़ जल्द ही देश के सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल हो जाएगा। इससे उद्योगों, किसानों और आम लोगों को फायदा होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

प्रमुख निवेश और योजनाएं

1. परमाणु ऊर्जा: साफ और कुशल ऊर्जा उत्पादन के लिए ₹80,000 करोड़ का निवेश।
2. ताप विद्युत: राज्य की ताप विद्युत क्षमता को मजबूत करने के लिए ₹1,07,840 करोड़।
3. सौर ऊर्जा: सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के लिए ₹10,000 करोड़।
4. पीएम कुसुम योजना: किसानों के बीच सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ₹4,100 करोड़।
5. पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं (PSP): ग्रिड स्थिरता के लिए ऊर्जा भंडारण में ₹57,046 करोड़।
6. क्रेडा सौर पहल: सौर ऊर्जा विस्तार के लिए ₹3,200 करोड़।
7. पीएम सूर्य योजना: राष्ट्रीय सौर छत परियोजना के तहत ₹6,000 करोड़।
8. सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा: सरकारी इमारतों में सौर ऊर्जा अपनाने के लिए ₹2,500 करोड़।
9. बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS): ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए ₹2,600 करोड़।
10. पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क: बिजली पारेषण नेटवर्क को उन्नत करने के लिए ₹17,000 करोड़।
11. RDSS (वितरण क्षेत्र योजना): वितरण बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए ₹10,800 करोड़।

बसना ग्राम कोलिहादेवरी एवं ग्राम सिरपुर के 125 पशुपालकों ने लिया हिस्सा विकासखण्ड स्तरीय पशु मेला एवं प्रदर्शनी का आयोजन

महासमुंद, 10 मार्च 2025 विकासखण्ड सरायपाली के ग्राम  कोलिहादेवरी स्थित पशु चिकित्सालय बलौदा में विकासखण्ड स्तरीय पशु मेला उत्सव प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ग्राम कोलिहादेवरी और ग्राम सिरपुर के कुल 125 पशुपालकों ने भाग लिया।

 

कार्यक्रम में ग्राम सरपंच श्री सन्नी नायक और ग्राम के वरिष्ठ नागरिकों की उपस्थिति रही। पशु प्रदर्शनी के तहत उन्नत दुधारू गाय-बैल, उन्नत बछड़ा-बछिया, भैंस-भैंसा, पड़िया-पड़ुवा, उन्नत नस्ल बकरी-बकरा, कृत्रिम गर्भाधान से उत्पन्न वत्स एवं पक्षी वर्ग में कुल 48 पशुपालकों ने अपने पशुओं का पंजीयन कराया। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

पशुधन विकास विभाग, विकासखण्ड सरायपाली के पशु चिकित्सालय

 

बलौदा के पशु चिकित्सक डॉ. हिमांशु वैश्य एवं उनकी 11 सदस्यीय टीम ने मेला से पूर्व ग्राम में टीकाकरण शिविर का आयोजन किया। इसमें 73 गौवंशी, भैंसवंशी पशुओं का खुरहा-चपका रोग से बचाव हेतु टीकाकरण किया गया।कार्यक्रम के समापन पर कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें ग्राम वासियों को पशुधन विकास विभाग की योजनाओं, संक्रामक बीमारियों से बचाव, पशुओं के रखरखाव एवं उनके पोषण संबंधी आवश्यक जानकारी प्रदान की गई।

महासमुंद, 10 मार्च 2025 विकासखण्ड सरायपाली के ग्राम कोलिहादेवरी स्थित पशु चिकित्सालय बलौदा में विकासखण्ड स्तरीय पशु मेला उत्सव प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ग्राम कोलिहादेवरी और ग्राम सिरपुर के कुल 125 पशुपालकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में ग्राम सरपंच श्री सन्नी नायक और ग्राम के वरिष्ठ नागरिकों की उपस्थिति रही। पशु प्रदर्शनी के तहत उन्नत दुधारू गाय-बैल, उन्नत बछड़ा-बछिया, भैंस-भैंसा, पड़िया-पड़ुवा, उन्नत नस्ल बकरी-बकरा, कृत्रिम गर्भाधान से उत्पन्न वत्स एवं पक्षी वर्ग में कुल 48 पशुपालकों ने अपने पशुओं का पंजीयन कराया। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
पशुधन विकास विभाग, विकासखण्ड सरायपाली के पशु चिकित्सालय

बलौदा के पशु चिकित्सक डॉ. हिमांशु वैश्य एवं उनकी 11 सदस्यीय टीम ने मेला से पूर्व ग्राम में टीकाकरण शिविर का आयोजन किया। इसमें 73 गौवंशी, भैंसवंशी पशुओं का खुरहा-चपका रोग से बचाव हेतु टीकाकरण किया गया।कार्यक्रम के समापन पर कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें ग्राम वासियों को पशुधन विकास विभाग की योजनाओं, संक्रामक बीमारियों से बचाव, पशुओं के रखरखाव एवं उनके पोषण संबंधी आवश्यक जानकारी प्रदान की गई।

महासमुंद दाम्पत्य जीवन एक साथ निर्वाह करने हुए सहमत आपसी सुलह एवं समझौते के आधार पर किया गया प्रकरण का निराकरण

महासमुंद 8 मार्च 2025आज जिला मुख्यालय महासमुंद के जिला न्यायालय में आयोजित नेशनल लोक अदालत में खंडपीठ क्रमांक-02, के समक्ष दाम्पत्य जीवन निर्वहन के पुर्नस्थापन संबंधित मामला जो कि महासमुंद कुटुम्ब न्यायालय में लंबित था। जिसमें पीठासीन अधिकारी श्री प्रफुल्ल कुमार सोनवानी द्वारा समझाईश दिया गया जिससे प्रेरित होकर दोनों दंपत्ति एक साथ रहने के लिए सहमत होते हुए अपना दाम्पत्य जीवन एक साथ निर्वाह करने हेतु तैयार हो गया। उक्त प्रकरण खल्लारी थाना अंतर्गत ग्राम खल्लारी (भीमखोंज) निवासी प्रमिला बाई निषाद उम्र-24 वर्ष (परिर्वर्तित नाम) का है, जिसका विवाह ग्राम बाना थाना खरोरा निवासी सत्यनारायण निषाद (परिर्वर्तित नाम) उम्र-27 वर्ष के साथ रिती रिवाजो के साथ 17 मार्च 2023 में हुआ था। शादी के बाद दोनों दाम्पत्य जीवन अच्छा था, बाद में उसके पति द्वारा गाली-गलौज, मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। जिसके कारण वे दोनो जून 2024 से अलग-अलग रहने लगे। जिसका प्रकरण परिवार न्यायालय में लंबित था। जिसे आज 8 मार्च 2025 को आयोजित नेशनल लोक अदालत के खंडपीठ के माध्यम से समझाईश एवं आपसी सुलह के माध्यम से निराकरण किया गया।

इसी प्रकार खंडपीठ क्रमांक-04, के पीठासीन अधिकारी श्री अनिल कुमार पाडेण्य द्वारा घेरलु हिंसा से संबंधित प्रकरण क्रमांक 49/2024 जो कि मामला बागबाहरा थाना का है। यह कि हाडाबंद निवासी हेमलता (परिवर्तित नाम) का विवाह 17 फरवरी 2016 को हिन्दू रितीरिवाज के साथ ग्राम पोड़ गोबरा नयापारा निवासी मोहन (परिवर्तित नाम) के साथ हुआ था। वर्तमान में उनके एक पुत्र और एक पुत्री है। उन दोनों के विवाह के दो-तीन वर्ष बाद उनके रिस्ते में अनबन होने लगा। उसके पति द्वारा उसके चरित्र में संदेह कर मारपीट गाली गजौज करने लगा था। जिस पर उनके द्वारा सामाजिक बैठक भी कराई गई थी। इस प्रकार 25 सिंतबर 2024 को मामला न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हुआ जो आज अपील प्रकरण के रूप में खंडपीठ अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। जिसे समझाईश के बाद आपसी सुलह के माध्यम से पति पत्नी के साथ दाम्पत्य जीवन निर्वाह और हसी-खुशी रहने को तैयार हुए। इसके अलावा खंडपीठ क्रमांक-5 के पीठासीन अधिकारी श्री आनंद बोरकर द्वारा घरेलु हिंसा के अंतर्गत प्रकरण 131/2022 में आज आयोजित नेशनल लोक अदालत में खंडपीठ के माध्यम से समझाईश एवं आपसी सुलह के माध्यम से प्रकरण का निराकरण किया गया।महासमुंद 8 मार्च 2025आज जिला मुख्यालय महासमुंद के जिला न्यायालय में आयोजित नेशनल लोक अदालत में खंडपीठ क्रमांक-02, के समक्ष दाम्पत्य जीवन निर्वहन के पुर्नस्थापन संबंधित मामला जो कि महासमुंद कुटुम्ब न्यायालय में लंबित था। जिसमें पीठासीन अधिकारी श्री प्रफुल्ल कुमार सोनवानी द्वारा समझाईश दिया गया जिससे प्रेरित होकर दोनों दंपत्ति एक साथ रहने के लिए सहमत होते हुए अपना दाम्पत्य जीवन एक साथ निर्वाह करने हेतु तैयार हो गया। उक्त प्रकरण खल्लारी थाना अंतर्गत ग्राम खल्लारी (भीमखोंज) निवासी प्रमिला बाई निषाद उम्र-24 वर्ष (परिर्वर्तित नाम) का है, जिसका विवाह ग्राम बाना थाना खरोरा निवासी सत्यनारायण निषाद (परिर्वर्तित नाम) उम्र-27 वर्ष के साथ रिती रिवाजो के साथ 17 मार्च 2023 में हुआ था। शादी के बाद दोनों दाम्पत्य जीवन अच्छा था, बाद में उसके पति द्वारा गाली-गलौज, मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। जिसके कारण वे दोनो जून 2024 से अलग-अलग रहने लगे। जिसका प्रकरण परिवार न्यायालय में लंबित था। जिसे आज 8 मार्च 2025 को आयोजित नेशनल लोक अदालत के खंडपीठ के माध्यम से समझाईश एवं आपसी सुलह के माध्यम से निराकरण किया गया।
इसी प्रकार खंडपीठ क्रमांक-04, के पीठासीन अधिकारी श्री अनिल कुमार पाडेण्य द्वारा घेरलु हिंसा से संबंधित प्रकरण क्रमांक 49/2024 जो कि मामला बागबाहरा थाना का है। यह कि हाडाबंद निवासी हेमलता (परिवर्तित नाम) का विवाह 17 फरवरी 2016 को हिन्दू रितीरिवाज के साथ ग्राम पोड़ गोबरा नयापारा निवासी मोहन (परिवर्तित नाम) के साथ हुआ था। वर्तमान में उनके एक पुत्र और एक पुत्री है। उन दोनों के विवाह के दो-तीन वर्ष बाद उनके रिस्ते में अनबन होने लगा। उसके पति द्वारा उसके चरित्र में संदेह कर मारपीट गाली गजौज करने लगा था। जिस पर उनके द्वारा सामाजिक बैठक भी कराई गई थी। इस प्रकार 25 सिंतबर 2024 को मामला न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हुआ जो आज अपील प्रकरण के रूप में खंडपीठ अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। जिसे समझाईश के बाद आपसी सुलह के माध्यम से पति पत्नी के साथ दाम्पत्य जीवन निर्वाह और हसी-खुशी रहने को तैयार हुए। इसके अलावा खंडपीठ क्रमांक-5 के पीठासीन अधिकारी श्री आनंद बोरकर द्वारा घरेलु हिंसा के अंतर्गत प्रकरण 131/2022 में आज आयोजित नेशनल लोक अदालत में खंडपीठ के माध्यम से समझाईश एवं आपसी सुलह के माध्यम से प्रकरण का निराकरण किया गया।