सरायपाली/ “किसान की बेटी, खेत की नेता : धान रोपती सभापति कुमारी भास्कर बनीं महिला सशक्तिकरण की मिसाल”
महासमुंद | 14 जुलाई 2025
“किसान की बेटी हूँ, खेती करना मेरा कर्म है, अपने साथ दूसरों का पेट भरना मेरा धर्म है।” – ये शब्द हैं महासमुंद जिला पंचायत की सभापति श्रीमती कुमारी भास्कर के, जो इन दिनों नारी शक्ति और किसान जीवन दोनों की सशक्त पहचान बन चुकी हैं।
बारिश का मौसम शुरू होते ही महासमुंद जिले के खेतों में हरियाली लौटने लगी है। किसानों ने खेतों का रुख कर दिया है और धान रोपाई का कार्य तेजी से किया जा रहा है। लेकिन इस बार चर्चा का केंद्र सिर्फ फसल नहीं, बल्कि वह महिला नेता हैं, जो खुद खेत में उतरकर कंधे से कंधा मिलाकर मेहनत कर रही हैं – कुमारी भास्कर।
जहां राजनीति में महिलाएं अक्सर दफ्तरों और सभाओं तक सीमित रहती हैं, वहीं कुमारी भास्कर ने परंपराओं की दीवार तोड़ते हुए खेती किसानी में भी सहभागिता दिखाई है। ट्रैक्टर चलाना हो या धान की रोपाई – वह हर काम खुद करती हैं और अपने क्षेत्र की महिलाओं को भी इसके लिए प्रेरित करती हैं।
कुमारी भास्कर की यह छवि केवल एक नेता की नहीं बल्कि एक जिम्मेदार बेटी, मेहनती किसान और सच्ची जनप्रतिनिधि की बन चुकी है। उन्होंने यह साबित किया है कि कुर्सी पर बैठकर फैसले लेने के साथ-साथ धरती से जुड़कर भी सेवा की जा सकती है।
माटी की महक, नारी का स्वाभिमान
उन्हें समर्पित कविता की कुछ पंक्तियाँ उनकी भावना और कर्मठता को दर्शाती हैं –
“हाथ मं ट्रेक्टर, दिल मं सेवा,
हर खेत-खार मं भर देथें मेवा।
ना साज-श्रृंगार, ना राज गुमान,
किसानी मं दिखथे नेता के पहचान।”
कुमारी भास्कर आज ग्रामीण महिलाओं के लिए न केवल प्रेरणा हैं, बल्कि यह संदेश भी देती हैं कि महिला सशक्तिकरण सिर्फ भाषणों में नहीं, ज़मीनी कार्यों में दिखना चाहिए।
नारी सशक्तिकरण की सजीव मिसाल
पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को एक नई ऊँचाई देने वाली कुमारी भास्कर यह दिखा रही हैं कि महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में नेतृत्व कर सकती हैं – चाहे वह पंचायत कार्यालय हो या पकी धान की क्यारी।
आज जब महिलाएं खुद को पिछड़ा और सीमित समझती हैं, तब कुमारी भास्कर जैसी शख्सियत उनके लिए रोल मॉडल बनकर खड़ी हैं। उनकी कार्यशैली, मेहनत और सादगी आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बन सकती है।
जय हो किसान बेटी के हौंसले को,
जो धरती मां की सेवा में जुटी है।



