पिथौरा/वनाधिकार पत्र मिलने से बद्रिका कमल सिंह बने आत्मनिर्भर कृषक ट्रैक्टर खरीदा, बोर खुदवाया और अब लेने लगे है दो फसल
महासमुंद/ पिथौरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम सुखीपाली के कृषक श्री बद्रिका कमल सिंह पटेल वर्षों से वन भूमि पर कृषि कार्य कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे, लेकिन भूमि पर वैधानिक अधिकार न होने के कारण उन्हें कई शासकीय योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था। वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत ग्राम स्तर पर उनका दावा फॉर्म भरवाया गया, जिसे उपखंड स्तरीय वन अधिकार समिति द्वारा परीक्षण के पश्चात पारित किया गया और जिला स्तरीय वन अधिकार समिति से अनुमोदन मिलने के बाद उन्हें 2.35 हेक्टेयर भूमि का वनाधिकार पत्र प्रदान किया गया।
वनाधिकार पत्र मिलने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हुई। अब उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिलने लगा है, साथ ही शासन द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य का भी लाभ प्राप्त हो रहा है। इसके अतिरिक्त उन्हें खाद, बीज तथा किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधाएं सहज रूप से मिलने लगी हैं और वे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से भी लाभान्वित हो रहे हैं।
कृषि को और सुदृढ़ बनाने के लिए उन्होंने अपने खेत में बोरवेल खुदवाया, जिससे सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था हो गई। पानी की उपलब्धता बढ़ने से अब वे दो फसलें लेने लगे हैं, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आर्थिक स्थिति में सुधार होने के साथ उन्होंने ट्रैक्टर भी खरीदा, जिससे कृषि कार्य सरल और आधुनिक हो गया है।
आज श्री बद्रिका कमल सिंह पटेल आत्मनिर्भर किसान बन चुके हैं, साथ ही उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाकर अन्य किसानों के लिए प्रेरणा भी बन रहे हैं। वनाधिकार पत्र ने उन्हें एक नई पहचान, स्थायित्व और आत्मसम्मान प्रदान किया है। शासन की इस योजना से लाभान्वित होकर वे पूरी तरह संतुष्ट हैं और अपने जीवन में आए इस परिवर्तन को गर्व के साथ अनुभव कर रहे हैं।



