बसना धान फसल के औसत उत्पादन आंकड़ों पर संदेह, 8 गाँव के फसल बीमा योजना की जांच की मांग, पटवारियों पर है आरोप
बसना | प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत फसलों के प्रयोगों में हुई अनियमितता की जांच करने एवं दोषी पाए जाने पर मौके में ही दोषी के विरुद्ध कार्यवाही करने बाबत अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बसना, जिला महासमुंद (छ.ग.) को शिकायत पत्र सौंपा गया है।
उपरोक्त विषयांतर्गत लेख है कि जिला महासमुंद के ब्लॉक बसना के कई गांवों में खरीफ वर्ष 2025–26 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की लाभ दिलाने के लिये भारी अनियमितता बरती गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार फसल प्रयोग हेतु गठित कमेटी के अधिकारी कर्मचारी द्वारा फसल प्रयोग फसल का नाम धान सिंचित में ग्राम भैंसाखुरी, पिताईपाली, सोनामुदी अंकोरी बड़ेडाभा, रूपापाली,छिराचुवा, बंसूली डीह, मे प्रति हेक्ट. केजी में औसत उत्पादन क्रमशः 1165.164, 1935.987, 1527.464, 1946.840, 1620.000, 1733.499, 1334.880 एवं 1877.760 वही फसल का नाम धान असिंचित में क्रमशः 851.400, 1583.988, 1396.048, 882.868, 522.360, 1151.280, 803.160 एवं 969.441 बताया गया है जो कि जांच का विषय है।
उपरोक्त औसत उत्पादन को देख के ऐसा प्रतीत होता है कि फसल प्रयोग में सम्मिलित अधिकारी कर्मचारी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से मिलने वाली से राशि में किसानों को लाभ पहुंचाने के बजाय कमीशन लेकर स्वयं को लाभ पहुंचाने रास्ता बना रहे है जो कि अपने कर्तव्य निष्ठा के विपरीत है।, फसल उपज औसत उत्पादन में यदि सत्यता है तो उपरोक्त क्षेत्र में रकबा समर्पण कितना किया गया साथ ही उक्त क्षेत्र के किसानों द्वारा प्रति हेक्टेयर धान का विक्रय कितना किया जा रहा है यह भी जांच का विषय है।
विषय को गंभीरता से जांच की जाये तो पता चलेगा की कुछ फसल प्रयोग में सम्मिलित कुछ पटवारियों द्वारा खरीफ वर्ष 2024–25 में अपने क्षेत्र में औसत उत्पादन कम बताकर फसल बीमा राशि दिलवाया गया था। ये चुनिंदा पटवारी जहां भी जाते है वहां के किसानों का फसल उपज कम हो जाता है और क्यों हो जाता है यह भी जांच के दायरे में है।
मामले मे बसना एसडीएम हरी शंकर पैकरा को दूरभाष के माध्यम से कई बार सम्पर्क करने का प्रयास किया गया घंठी बजती रही लेकिन फोन नहीं उठाये।



