बस्तर संभाग से ब्लैकमेलिंग और डिजिटल फ्रॉड का एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां अमान वीरानी (25) नाम के आरोपी ने दोस्ती और शादी का झांसा देकर करीब 43 लड़कियों को अपने जाल में फंसाया। आरोपी लड़कियों के निजी फोटो और वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करता था और मोटी रकम वसूलता था। जुलाई 2025 में एक केंद्रीय सरकारी अधिकारी की शिकायत पर कोंडागांव पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था। पुलिस और साइबर टीम द्वारा जब्त किए गए आरोपी के मोबाइल से जो खुलासे हुए, वे हैरान करने वाले हैं। गैलरी में 40 से अधिक लड़कियों के आपत्तिजनक फोटो-वीडियो मिले और कांटेक्ट लिस्ट में दर्ज 43 लड़कियों के नंबरों की जांच करने पर पता चला कि इनमें 20 नाबालिग, 10 शादीशुदा और 8 ऐसी युवतियां थीं जिनकी शादी होने वाली थी। इस मामले में अब तक तीन पीड़िताओं (एक अधिकारी, एक कॉलेज छात्रा और एक नवविवाहिता) की शिकायत पर कुल 3 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इस मामले की पहली पीड़िता, जो एक सरकारी अधिकारी है, ने बताया कि आरोपी ने कार्यालय में जान-पहचान बढ़ाई और धोखे से फोटो-वीडियो बनाकर 30 हजार रुपए ऐंठ लिए। विरोध करने पर मारपीट की और फोन तोड़ दिया। पीड़िता ने हिम्मत दिखाकर एफआईआर तो कराई, लेकिन डर और भारी दबाव के कारण उसे छत्तीसगढ़ से ट्रांसफर लेना पड़ा। दूसरी पीड़िता एक नवविवाहिता है, जो आरोपी के साथ पहले काम करती थी। शादी के बाद आरोपी ने उसके पति को वीडियो भेजने और रिश्ता तुड़वाने की धमकी दी, जिसके बाद उसके पति ने एफआईआर दर्ज कराई। लापरवाही और ढीला रवैया सामने आया है। गिरफ्तारी के 10 महीने बीत जाने के बाद भी आरोपी के मोबाइल की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट साइबर लैब (नवा रायपुर) से नहीं आ पाई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर केस की जांच ‘साइबर क्राइम’ के नजरिए से की ही नहीं गई। वर्तमान में आरोपी अमान वीरानी जमानत पर बाहर घूम रहा है। पीड़िता का आरोप है कि जेल से छूटने के बाद आरोपी उस पर केस वापस लेने का लगातार दबाव बना रहा है। हाल ही में पीड़िता का एक एक्सीडेंट भी हुआ, जिसके पीछे उसने आरोपी का हाथ होने की आशंका जताई है। पीड़िता ने बिस्तर पर होने के कारण पुलिस को ई-मेल के जरिए शिकायत भेजी, लेकिन पुलिस ने दोबारा बयान दर्ज करने तक की जहमत नहीं उठाई। यही नहीं, जमानत पर आने के बाद आरोपी ने पीड़िता के इंस्टाग्राम का आईडी-पासवर्ड इस्तेमाल कर अन्य पीड़िताओं को केस रफा-दफा करने के लिए मैसेज भी भेजे, जिसकी शिकायत पर भी कोई ठोस एक्शन नहीं हुआ। साइबर क्राइम एक्सपर्ट मुकेश चौधरी के अनुसार, ऐसे मामलों में ‘पैटर्न ऑफ क्राइम’ को समझना बेहद जरूरी है। इसमें बैंक ट्रांजैक्शन, सोशल मीडिया चैट, ब्राउज़र हिस्ट्री और डिजिटल उपकरणों की गहन जांच होनी चाहिए, जो इस केस में अब तक अधूरी है। “प्रकरण मेरी जॉइनिंग के पहले का है, लेकिन बेहद संवेदनशील है। मैं साइबर लैब इंचार्ज से बात करके जल्द से जल्द मोबाइल की जांच रिपोर्ट मंगवाता हूं। पीड़िताओं की शिकायतों को मैं स्वयं देखूंगा।”— पंकज चंद्रा, एसपी, कोंडागांव इस मामले में 10 महीने बाद भी मोबाइल फॉरेंसिक रिपोर्ट न आना और साइबर एंगल से जांच न होना पुलिस की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। आरोपी जमानत पर छूटकर पीड़िताओं को डरा रहा है। महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखने के लिए इस संवेदनशील केस में त्वरित और कड़ी कानूनी कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है।
40 से ज्यादा लड़कियां, झूठी मोहब्बत और ब्लैकमेलिंग का गंदा खेल…
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