बसना सरायपाली पिछले साल की बची किताबों से शाला प्रवेशोत्सव , पहले दिन व्यवस्था पर उठे सवाल, स्कूलों में नहीं पहुंचीं किताबें ,भीषण गर्मी के बीच स्कूल खुलने से अभिभावकों की चिंता आगे बढ़ाने की मांग
बसना हेमन्त वैष्णव महाजनपद न्यूज / छत्तीसगढ़ में मंगलवार को नए शिक्षा सत्र की शुरुआत शाला प्रवेशोत्सव के साथ हुई। प्रदेशभर के शासकीय स्कूलों में विद्यार्थियों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया और शिक्षा को जनअभियान बनाने का संदेश दिया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अपील पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने विभिन्न स्कूलों में पहुंचकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। लेकिन प्रवेशोत्सव के पहले ही दिन शिक्षा विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए।
जानकारी के अनुसार, बसना सरायपाली विकासखंड सहित के कई शासकीय स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक अध्ययनरत विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकीं। इसमें स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में भी किताबों की आपूर्ति नहीं होने से बच्चों और अभिभावकों में निराशा देखी गई वही कल पिछले सालों के बची हुई पुराने किताबो को बाटकर प्रवेशोत्सव मनाया गया है
शासन स्तर पर शाला प्रवेशोत्सव के दौरान निःशुल्क किताबें वितरित करने की घोषणा की गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका लाभ विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पाया। बसना ब्लॉक शिक्षा अधिकारी बद्री विशाल जोल्हे ने बताया कि, “शासन की ओर से अभी तक प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की किताबें प्राप्त नहीं हुई हैं। जैसे ही किताबों की खेप पहुंचेगी, विद्यार्थियों को तत्काल वितरित किया जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि हाई स्कूल स्तर की पुस्तकों की आपूर्ति पहुंचने की जानकारी मिली है और उनका वितरण किया जा रहा है। वहीं सरायपाली ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को दूरभाष के माध्यम से संपर्क किया गया घंटी बजती रही फोन नहीं उठाए
इधर, भीषण गर्मी के बीच स्कूल खुलने से अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है। कई पालकों ने मांग की है कि वर्तमान मौसम को देखते हुए स्कूलों के संचालन समय में बदलाव किया जाए, ताकि छोटे बच्चों को तेज धूप और गर्मी से राहत मिल सके। उनका कहना है कि सुबह के समय स्कूल संचालित होने से विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका कम होगी।
शाला प्रवेशोत्सव के उत्साह के बीच कक्षा 1 से 8वीं तक के विद्यार्थियों को किताबें नहीं मिलना और भीषण गर्मी के बीच स्कूल संचालन को लेकर उठे सवालों ने शिक्षा विभाग की तैयारियों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब अभिभावकों और विद्यार्थियों की नजर शासन और शिक्षा विभाग पर टिकी है कि आखिर बच्चों को उनकी जरूरी पाठ्यपुस्तकें कब तक उपलब्ध कराई जाएंगी और मौसम को देखते हुए स्कूल समय में बदलाव को लेकर क्या निर्णय लिया जाएगा



