महासमुंद -/ राज्य स्तरीय वुशू मार्शल आर्ट चैम्पियनशिप 9 पदक जीत कर जिले का बढ़ाया गौरव महासमुंद ,बसना सराईपाली के खिलाडियों का शानदार प्रदर्शन,!

महासमुंद -/ राज्य स्तरीय वुशू मार्शल आर्ट चैम्पियनशिप 9 पदक जीत कर जिले का बढ़ाया गौरव महासमुंद ,बसना सराईपाली के खिलाडियों का शानदार प्रदर्शन,!

जिले के खिलाड़ियों ने राज्य स्तरीय सब जूनियर,जूनियर एवं सीनियर वुशू मार्शल आर्ट चैंपियनशिप खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 गोल्ड 5 कास्य पदक जीतकर महासमुंद जिले का गौरव बढ़ाया। खिलाड़ियों मे मुख्य खिलेश बरिहा एवं हेमराज साहू के निर्देशक में कु.राजमोती मुंडा ,अश्विनी भोई,आकाश डहरिया ,गजेंद्र मेहेर ने गोल्ड मेडल,व 2 सिल्वर मेडल, वही पूनम सिदार, राजनन्दिनी साव ,उमा सिदार,विशाल मुंडा,ओमप्रकाश सिदार , ने ब्रोंज मेडल हासिल किए ।

छत्तीसगढ़ शासन खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा वुशू एसोसिएशन के तत्वावधान में राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में 9 मई से 12 मई को आयोजित चैंपियनशिप में 9 खिलाड़ियों को चयनित कर देहरादून (उत्तराखंड) नेशनल वुशू चैंपियनशिप के लिए किया गया है। छत्तीसगढ़ वूशु एसोसिएशन के (जनरल सेक्रेटरी) डी. कोंडईया , कमल किशोर धीवर,भरत कुमार

(टेक्निकल डायरेक्टर) , मनोज ठाकुर ( ताऊलु कोच) ने हर्ष व्यक्त कर सभी खिलाड़ियों को उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए आशीर्वाद प्रदान किया। वूशु एसोसिएशन के प्रमुख निर्देशक खिलेश बरिहा एवं हेमराज साहू के नेतृत्व में बच्चे खेलने गए थे।

CG / news शिवा साहू का सुचना देने वालो को इनाम की खबर सारंगढ़-बिलाईगढ़ रायपुर सरायपाली क्षेत्र मे घूम घूम कर शेयर मार्केट के नाम से ठगी करने वाले छत्तीसगढ़ पुलिस की गिरफ्त से बहार / गृह मंत्री का बड़ा बयान , सूत्र बताते है सरायपाली के कुटेला मे खुल चूका था इनका कार्यलय!

CG / news शिवा साहू का सुचना देने वालो को इनाम की खबर सारंगढ़-बिलाईगढ़ रायपुर सरायपाली क्षेत्र मे घूम घूम कर शेयर मार्केट के नाम से ठगी करने वाले छत्तीसगढ़ पुलिस की गिरफ्त से बहार गृह मंत्री का बड़ा?

सूत्र बता रहे है की  सरायपाली के कुटेला मे खुल चूका था इनका कार्यलय!मिडिया रिपोर्ट के अनुसार सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले के रायकोना के रहने वाला ठग शिवा साहू लगातार फरार चल रहा हैं। पुलिस पिछले दो महीने से उसकी तलाश में अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर रही लेकिन कामयाबी नहीं मिल रही। गौरतलब हैं कि शिवा साहू पर करीब 2 करोड़ 26 लाख रूपये की ठगी किये जाने के सम्बन्ध में प्राथमिकी दर्ज हैं। इस मामले में पूर्व में उसके कई साथियों को हिरासत में लिया गया था। खुद के खिलाफ मामला कायम होने के बाद से शिवा फरार चल रहा है। पुलिस को उम्मीद हैं

 

कि ईनाम के ऐलान के बाद उसके बारें में जल्द किसी तरफ का सुराग मिल सकेगा। गृहमंत्री बोले – पाताल से भी ढूंढ निकालेंगे गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि कोई भी ठग हो उसे पुलिस पाताल से खोज कर निकाल लेगी. बता दें कि बीते दिन ही शिवा साहू के मामले एक नई शिकायत दर्ज कराई गई है. उस पर 26 लाख रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगा है. ठगी का मामला उजागर होने के बाद से शिवा साहू कई दिनों से फरार चल रहा है.

छत्तीसगढ़ महासमुंद / सिसुपाल पर्वत की 7 रानियों द्वारा जौहर किया गया या सतीप्रथा इतिहास जान खड़े हो जाएंगे आपके रोंगटे, बसना के पिरदा मे रानी की सुंदरता के कारण राजा की हत्या की कहानी!

महासमुंद -/ राजा और अंग्रेजो में भयंकर युद्ध अंतिम राजा के प्राणांत के बाद 7 रानियों ने मर्यादा की रक्षा के लिए घोड़ा धार में कूद गए पढ़िए शिशुपाल पर्वत पर जौहर का इतिहास जान खड़े हो जाएंगे आपके रोंगटे,

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जीले के सरायपाली विधानसभा अंतर्गत आने वाले ( बूढ़ा डोंगर ) सिसुपाल पर्वत को आज पिकनिक स्पॉट और ट्रैकिंग पॉइंट के बारे में तो सब जानते है लेकिन बहुत ही कम ही लोग है जो उस सिसुपाल की गौरवशैलीइतिहास को जानते है , कुछ दिनों पहले महाजनपद न्यूज़ मे

गढफुलझर के श्रापित महल और राजा रानियों को जलमग्न होने की किवदंती का प्रकाशन किया गया था जिसमे आखिर राजमहल और राजारानी कैसे श्रापित हो गए थे क्या है वह कारण अगला भाग में विस्तृत जानकारी के साथ

वर्तमान में सिसुपाल पर्वत एक पिकनिक स्पॉट और ट्रैकिंग पॉइंट बनते जा रहा है लेकिन कभी यहाँ एक गौरवशाली इतिहास घटित हुवा है जो बहुत कम लोग इन घटनाओं के बारे में जानते है अभी यही बात सामने आता है कि राजा रानियों ने अंग्रेजो द्वारा आक्रमण के बाद घेरे जाने के बाद सिसुपाल पर्वत के ऊपर से घोड़ो में सवार होकर घोड़ो के आंख में पट्टी बांधकर सिसुपाल पर्वत से छलांग लगा दिए थे और इसी का नाम घोड़ा धार पड़ा लेकिन ऐसा नही है ,

भैना राजाओं का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है अक्सर सोसल मीडिया प्रिंट और वेबसाइटों में पढ़ने मिल रहा है कि राजा सिसुपाल और रानी को द्वारा अंग्रेजो द्वारा घेर लिए जाने पर पर्वत से घोड़ो के आंख में पट्टी बांधकर कूद गए थे लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नही बता दें कि सिसुपाल पर्वत पर अंग्रेजो द्वारा विजय पाना इतना भी आसान नही था ।

सिसुपाल पर्वत की ऊंचाई तल से हजारो फिट ऊपर है जहां तक आज पिकनिक स्पॉट है लेकिन उसके ऊपर और कई किलोमीटर क्षेत्र में सिसुपाल पर्वत फैला जो राजाओं और सैनिकों के लिए एक अभेद किला था और किले में सस्त्र और सैनिक और इस पर्वत में भी गुप्त सुरंगे और रास्ते थे राजा और रानियां भाग भी सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नही किया अंग्रेजी सल्तनत द्वारा आक्रमण के बाद जब अंतिम राजा और सैनिकों द्वारा अंग्रेजो के मध्य भयंकर लड़ाई लड़ा गया था युद्ध मे अंतिम राजा के मारे जाने के बाद ही 7 रानियों ने मर्यादा की रक्षा के लिए 1 हजार फीट की चोटी से घोड़ो पर पट्टी बांधकर छलांग लगा दिए और इसी का नाम घोड़ा धार पड़ा ।

 

सिसुपाल पर्वत की 7 रानियों द्वारा जौहर किया गया या सतीप्रथा

 

 

 

महाजनपद न्यूज़ ने कुछ और जानकारी इक्कट्ठा किया तो छग शासन द्वारा भैना जनजातीय का मानवशास्त्रीय अध्ययन आदिमजाति अनुसंधान क्षेत्रीय इकाई बिलासपुर में उल्लेख किया गया है की

भानुवंश प्रकाश सहिता के अनुसार मितध्वज मिथिला का राजा
के राजा कृतध्वज के माहामंत्री थे मितध्वज के पुत्र खण्डिक माहामंत्री बने जब इसी क्रम में मिथिला के राजा कृति देव हुए
उसने इस परम्परा को बदल दिया जिसके बाद माहामंत्री पद के उत्तराधिकारी देवमणि ने मिथिला राज दरबार का ग्याग कर दिया वे अपनी पत्नी भानु मति के साथ अमर कंटक के पुण्य क्षेत्र सोड़कुण्ड आ गए

भैना जाती फुलझर राज के प्राचीनराजवंश रहा है ,

महादेव के पुत्र जोहान साय के पुत्र मंडल नाग वंश के पुत्र का नाम जगतसाय था जो मानिकपुर में रहते थे यही जगतसाय रतनपुर के राजा जाजल्लदेव के सेनापति थे जिसने जाजल्लदेव
के राज्य की सीमा का विस्तार किया था एवं भैना राज की नींव डाली थी भानुवंश प्रकाश संहिता के अनुसार भैना जाति में बहुत से राजा प्रमुख हुए थे जो शुद्ध वैदिक आचरण करते थे दान पुण्य करते थे कुछने वैदिक आचरण के विपरीत कार्य किया था सोनसाय राजा धार्मिक विचार के थे

भैना जाति का इतिहास पूर्व से ही गौरवपूर्ण रहा है
भैनो के पूर्वजों में भानुमान के कार्य कार्य में कुछ विकृति का उल्लेख मिलता है किंतु उनकी पत्नी चंद्रकुवरी के कारण उनमें सद विचारों का समावेश हुआ भानुमान अपने कृत्यों से पश्चाताप करने लगे उन्हें अपने पुत्रों की दशा देखकर बहुत चिंता हुई उनके पुत्रों में मात्र सोनसाय योग्य निकले शेष तीनों पुत्र मदिरा मास में लिप्त थे कालांतर में भैना जाती भानुमान के नाम से भानुवंशी कहने कहलाने लगे

 

 

भैना जाती का प्राचीन इतिहास विशेषकर फुलझर में गौरावपूर्व रहा है यह जाती गोंड़ राज के पूर्व धमतरी बिलासपुर पेंड्रा बिलाईगढ़ रायगढ़ सारँगढ़ फुलझर भटगांव आदि राज्यो में राज किया इनका शासन काल फुलझर राज्य में लगातार 18 पीढ़ियों तक था

 

भैना इतिहास जौहर या सतीप्रथा

किवदंतियों के अनुसार बूढा डोंगर सिसुपाल पर्वत पर फुलझर के अंतिम प्रमुख राजा की सात रानियां थी राजा के युद्ध मे प्राणांत होने पर उनकी रॉनियो ने भयंकर घोड़ा धार झरने से कूदकर सती धर्म का पालन किया था वर्तमान में प्राचीन गढ केना में उक्त ग्राम के मध्य सती दाई नामक एक देवी की सामान्य प्रस्तर खण्ड के रूप में पूजा की जाती है उक्त सती दाई भी पूर्व कालीन किसी सामन्त राजा की रानी रही होगी जिसने अपनी पति के मृत्यु के पश्चात सती धर्म का पालन किया होगा ।

पिरदा गढ में हीराचंद भैना की कथा विस्वाश घात के कारण हत्या

आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के जानकारी के अनुसार पिरदा गढ में हीराचंद भैना राजा सुनने को मिलती है जिनकी रानी परम सुंदरी थी गोंड़ आक्रमण के फलस्वरूप विश्वासघात के कारण उनकी हत्या हो गई किंतु रानी का कोई उल्लेख सुनने को नही मिलता सम्भवत रानी ने भी वंश परम्परा के अनुसार सती धर्म का पालन किया होगा ग्राम भोथल डीह में दहना पाट नामक एक देवी की सामान्य स्थापना है जिनकी पूजा ग्राम वासियों के द्वारा की जाती है इसी प्रकार ग्राम तोरेसिंहा में जगदलेनपाट देवी की प्रमुखता से पूजा की जाती है सम्भवतः ये महान महिलाएं भैना कालीन शाशन में वैभवर्ण गरिमामयि स्थान रखती थी जिससे लोग उन्हें देवी के रूप में मानते आ रहे है पूर्व काल मे राजा रानी को भगवान के रूप में मानने की परंपरा थी लोग उन्हें पाट प्रमुख के रूप में मानते थे पूर्व में बलिदान के रूप में बकरों की बलि दी जाती थी क्योंकि उक्त कालखण्डों में बलिदान को सम्मान के रूप में माना जाता है ।

 

 

चुकी उस समय कोई राजा हार जाता था तो रानियों को दुर्व्यवहार एवं कब्जे में लेकर मुगल शासक करते थे अपमान बताया जाता है कि जब राजा खास तौर पर मुगल शासक युद्ध में विजय प्राप्त करने के पश्चात किले में प्रवेश करते थे तो वह महारानी के साथ ही सुंदर सुंदर औरतों पर अपना कब्जा चाहते थे। इसके लिए वह महिलाओं का अपमान भी किया करते थे। लेकिन इसके पूर्व वह सभी स्त्रियां या तो जहर खाकर प्राण दे देती थी या फिर जौहर कर लेती थी।

करते थे क्रूरता

इतिहास में ऐसे भी हमलावर मुगल शासक हुए हैं जिन्होंने विजय के पश्चात जब किले में कब्जा किया तो और रानी को मरा हुआ पानी पर गुस्से से पागल हो जाते थे। कई बार तो यह भी बताया गया है कि उस मृत शरीर के साथ क्रूरता की जाती थी।

कई बार मृत शरीर के शरीर के अंगों को काट डाला जाता था। यह तब होता था जब महिलाएं तथा महारानियां जहर खाकर अपना प्राण देती थी। ऐसे में महिलाओं ने अपने शरीर को समूल पंचतत्व में विलीन कर देने जौहर करने लगी।

लेकिन ये भी मानना जरूरी है कि राजघराने की रानियों का जौहर भारतवर्ष में सैकड़ों साल पहले की सती प्रथा की याद दिलाता है। हालांकि जौहर और सती प्रथा एक-दूसरे से जरा भी मेल नहीं खाते। लोग सती प्रथा को सिर्फ सतही तौर पर जानते हैं लेकिन वो इस प्रथा के पीछे छिपे पूरे तथ्य से अनभिज्ञ हैं। पति की मृत्यु के बाद उसकी चिता के साथ जलना सती प्रथा है और दुश्मनों के चंगुल में फंसे अपने वीर पतियों के स्वाभिमान की रक्षा के लिए आत्मदाह करना जौहर है। दोनों को समझने के लिए इतिहास के कुछ पन्ने पलटने की जरूरत है।

 

आज आम लोग घोड़ा धार तक ही पहुंच पाते है बताया जाता है कि सिसुपाल पर्वत के ऊपर में आज भी राजाओं का किला और सस्त्रागार है साथ ही साथ दंड देने का जगह भी जीर्ण शीर्ण अवस्था मे देखा जा सकता है इसके साथ ही कई गुप्त सुरंगे होने की बात बताया जाता है

शिव मंदिर

यहाँ एक प्राचीन शिव मंदिर हैं। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर के बाहर आज भी मकर संक्रांति के अवसर पर विशाल मेला लगता है। हज़ारों की संख्या में श्रृद्धालु यहां आते हैं। कहते हैं इस सूर्यमुखी मंदिर में पहले हनुमान सिक्का जड़ा हुआ था। जिसे बहुत शक्तिशाली और प्रभावशाली माना जाता था। लेकिन अब यह सिक्का यहां से गायब है।

रानी तालाब और राजा कचहरी

बताते हैं कि राजा शिशुपाल की दो रानियां थीं। दोनों के अलग-अलग सरोवर यानि तालाब थे जो अब भी हैं। वहीं राजा की कचहरी के भग्नावशेष भी हैं, जहां राजा प्रजा से मिला करते थे।

सुरंग में था शस्त्रागार

यहाँ एक बहुत लंबी सुरंग है। नदी की रेत ने अब इस सुरंग का मार्ग अवरुद्ध कर दिया है लेकिन स्थानीय निवासी बताते हैं कि सुरंग के भीतर अब भी राजा के अस्त्र-शस्त्र पड़े हुए हैं।

विशाल गुफा

यहाँ पर्वत पर एक बहुत गहरी गुफा है। गुफा इतनी विशाल है कि सैकड़ों लोग एक साथ विश्राम करने के लिए भीतर बैठ सकते हैं।

पंचमुखी हनुमान मंदिर

कुछ सौ मीटर की चढ़ाई करने के बाद आपको एक छोटा सा हनुमान मंदिर मिलेगा। स्थानीय लोग बताते हैं कि इस पंचमुखी हनुमान मंदिर तक पहुंचकर लोग थोड़ा सुस्ता सकें इसके लिए ग्रामीणों ने बड़ी मेहनत की है। वे जब मंदिर के मेले में जाते हैं तो एक थैले में रेत और एकाध ईंट ले आते हैं। और यहां उसको बिछा देते हैं। इससे पर्वत पर चढ़ने वालों के लिए थकने पर थोड़ा बैठने की जगह बन गई है।

जड़ी-बूटियाँ

 

इस पर्वत के इर्द-गिर्द बहुत सी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ देखी जा सकती हैं। शतावर और अश्वगंधा खासकर यहां बहुत अच्छी मात्रा में हैंं। शिशुपाल पर्वत को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किए जाने की तैयारियां शुरू हो ही चुकी हैं हालांकि पहले से भी यहां पर्यटक आते रहे हैं। लेकिन आगे सुविधाएं और बेहतर होंगी। यदि आप भी शिशुपाल पर्वत की ट्रिप प्लान करते हैं तो आप छत्तीसगढ़ के महासमुंद रेलवे स्टेशन पर उतर सकते हैं। या फिर विवेकानंद हवाई अड्डे, रायपुर तक आने के बाद कैब से आगे का सफ़र कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ रायपुर से इस गाना को लॉन्च किया गया था गीत जो पुरे भारत मचा रहा है धमाल गीत की पॉपुलैरिटी इतना की स्टेडियम में भारत पाकिस्तान मैच के दौरान बजाया गया था.

छत्तीसगढ़ रायपुर से लॉन्च किया गया था गाना जो पुरे भारत मे मचा रहा है धमाल!

अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर बनने के बाद पूरा देश राममय है और रामलला के जयकारों की गूंज चारों तरफ सुनाई दे रही है. इसके साथ ही भगवान राम के महिमा का गुणगान करने के भजन भी जमकर धूम मचा रहे हैं.

लेकिन सबसे खास बात यह है कि इन भजनों को गाने वाले कोई नामी-गिरामी कलाकार नहीं बल्कि छोटे-छोटे शहरों ओर कस्बो के भजन गायक हैं. मध्य प्रदेश के छोटे से शहर सिवनी लखनादौन की एक महिला गायिका का भजन आजकल सभी की जुबान पर चढ़ा है. भले ही लोगों को उसका नाम नहीं मालूम हो.चर्चाओं में राम भजन: ‘हर घर में बस एक ही नाम, एक ही नारा गूंजेगा, भारत का बच्चा-बच्चा जय श्री राम बोलेगा’

 

…ये भजन या गीत तो आपने खूब सुना होगा. लेकिन ओरिजनल इसे गाया किसने है. ये कम लोगों को ही पता होगा. श्री राम के ऊपर लिखा गया यह गाना पूरे देश में सबसे ज्यादा पॉपुलर हुआ है. तमाम लोगों ने इस गाने को गाया है लेकिन इस गाने का असली लेखक और सिंगर कौन है ये किसी को नही पता. इस गाने को असल में पहली बार गाने वाली सिंगर है सिवनी की पूजा गोल्हानी और गाने को लिखा है नंदू ताम्रकार ने. सबसे खास बात यह है की पूजा ने संगीत की किसी तरह की कोई तालीम नहीं ली है. बस शौकिया तौर पर ही उन्होंने गाना शुरू कर दिया था.

2018 में गाया था गाना:इस गाने को साल 2018 में बनाया गया था. लेकिन इसे वास्तविक पॉपुलैरिटी उस वक्त मिली जब क्रिकेट के विश्व कप के दौरान अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारत पाकिस्तान मैच के दौरान बजाया गया था. भगवान श्री राम के इस फेमस भजन को लिखने वाले भी सिवनी के नंदू ताम्रकार हैं. नंदू अभी तक 120 से अधिक भजन लिख चुके हैं जिनमें से कई बेहद पॉपुलर हुए हैं. नंदू बताते हैं कि ”इस भजन को गाने वाली प्रिया पूजा गोल्हानी एक जागरण कार्यक्रम के दौरान मिली थीं. इसके बाद नंदू ताम्रकार के लिखे भजन गाकर पूजा गोल्हानी आज स्टार बन चुकी हैं.”रायपुर से किया था लॉन्च: पूजा गोल्हानी बताती है कि ”भजन के बोल ”मेरे भारत का बच्चा-बच्चा जय श्री राम बोलेगा” यह भजन सोशल मीडिया पर इतना वायरल होगा यह उम्मीद नहीं थी. हमारे श्री रामचंद्र जी की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होने जा रही है जिसे देख कर अब लगता है कि यह भजन का सही समय आज आ गया है. इस गीत को मैंने गया था 2018 में और वह गीत लिखा था मेरे बड़े भैया नंदू ताम्रकार ने और इस गीत को जबलपुर में रिकॉर्ड किया था.

 

सुंदरानी म्यूजिक वर्ल्ड रायपुर से इसको लॉन्च किया गया था. लेकिन अब बहुत खुशी होती मुझे जब यह हर जगह यह गाना सुनती हूं.”कम वक्त में पॉप्युलर हुआ गाना: पूजा गोल्हानी के इस भजन की रिकॉर्डिंग जबलपुर के कंपोजर सचिन उपाध्याय ने की थी. सचिन बताते हैं कि ”जब यह गीत बन रहा था तब किसी ने कल्पना नहीं की थी कि यह इतना पॉप्युलर हो जाएगा. उन्होंने जब पहली बार पूजा को गाते सुना था तभी उन्हें अंदाज़ हो गया था कि यह बेहद खास आवाज है और आगे चलकर पूजा का खूब नाम होगा.”

छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में यह फल खाया जाता है शहरों की मंडियों में यह फल कम दिखता है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह खूब चाव से खाया जाता है इस फल के अलग-अलग नाम!

छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में यह फल खाया जाता है शहरों की मंडियों में यह फल कम दिखता है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह खूब चाव से खाया जाता है इस फल के अलग-अलग नाम!

 

क्या आपने कभी कुसुम फल खाया है। अगर नहीं तो इस लेख को पढ़ने के बाद खाना शुरू कर देंगे। भारत के कई इलाकों में यह फल खाया जाता है। शहरों की मंडियों में यह फल कम दिखता है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह खूब चाव से खाया जाता है। कुसुम का फल देखने में बेर की तरह होता है। यह स्वाद में खट्टा और मीठा दोनों होता है। इसके अंदर की संरचना बिल्कुल लीची की तरह होती है। जैसे लीची में एक कवर ऊपर होता है फिर उसके अंदर गूदा और फिर गूदे के अंदर बीज। वैसे ही कुसुम में होता है।    गांव वगैरह में इसके बड़े-बड़े पेड़ होते हैं। कुसुम का फल खाने से डायबिटीज, बालों का गंजापन, पेट के कीड़े मरना और कान में दर्द जैसी परेशानियां दूर होती हैं। आयुर्वेदा संजीवनी क्लीनिक के वरिष्ठ आयुर्वेदिक कंसल्टेंट एम मुफीक ने इस फल के कई फायदे बताए और नुकसान बताए। एम मुफीक के मुताबिक कुसुम का केवल फल ही फायदेमंद नहीं होता है बल्कि इसकी जड़, तेल, पत्ते व छाल भी उपयोग में लाए जाते हैं। डॉक्टर ने इस फल को खाने के फायदे और नुकसान दोनों बताए हैं।

1. डायबिटिक मरीजों के लिए फायदेमंद
कुसुम का फल वैसे अक्सर गांव में बच्चों को खाते हुए देखा जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चों का ये पसंदीदा फल बड़ों के लिए भी कितना फायदेमंद है। कुसुम के फल में एंटी डायबिटीक प्रॉपर्टीज होती हैं। जिसे खाने से डायटिबिटक मरीजों को फायदा मिलता है। यह फल छोटों का ही नहीं बल्कि बड़ों का भी पसंदीदा फल है।

बच्चों के लिए फायदेमंद
कुसुम का फल बच्चों का पसंदीदा फल है। यह बच्चों की सेहत के लिए फायदेमंद भी है। इसे खाने से बच्चों के पेट में कीडे की समस्या खत्म होती है। कुसुम का फल सीधे बच्चों को खिला देना चाहिए।

3. गंजेपन को करे दूर
कुसुम के फल में अंदर एक बीज निकलता है। यह बीज बालों के लिए बहुत अच्छा है। फल खाने के बाद इसके बीज को फेंकें न। बल्कि इसका तेल निकलवाएं और उस तेल को सिर में लगाएं। इस तेल से बालों का झड़ना बंद हो जाता है। जिस जगह गंजापन है उस जगह पर रोजाना लगाएं। धीरे-धीरे बाल आने लगेंगे।

4. कान के दर्द में सहायक
कुसुम का केवल फल ही फायदेमंद नहीं है बल्कि इसका तेल भी फायदेमंद है। इस फल का जो बीज निकलता है उसका तेल कान के दर्द में सहायक होता है। उस तेल में लहसुन मिलाकर गर्म कर लें, फिर ठंडा होने पर कान में डालें। इससे कान के दर्द में मदद मिलेगी।

5. अल्सर को करे ठीक
कुसुम के फल में विटामिन सी होता है। यह स्वाद में भी खट्टा मीठा होता है। इसके बीज के पाउडर को घाव में अल्सर में मदद करता है। कोई पुराना घाव भी इससे ठीक होता है। इसका फल एंटी बैक्टिरियल होता है जो कई बीमारियों को ठीक करने में मदद करता है 

6. शरीर रखे साफ
कुसुम फल शरीर को डिटॉक्स करता है। अब गर्मियां आने वाली हैं और पेड़ पर यह फल भरपूर मात्रा में आएगा। कुसुम के फल के बीज से साबुन भी तैयार किया जाता है। जिससे नहाने से आपका शरीर साफ रहेगा।

7. जोड़ों के दर्द में करे मदद
इस फल को खाने से जोड़ों का दर्द खत्म हो जाता है। यह फल केवल स्वाद ही नहीं देता है बल्कि शरीर से रोगों को भी खत्म करता है। हिमालय के तराई क्षेत्रों में यह फल अधिक होता है।

8. माहवारी में उपयोगी
इस फल में रोगों को खत्म करने की ताकत होती है। यह माहवारी में मदद करता है। माहवारी के दौरान होने वाले दर्द से भी राहत मिलती है। जैसे आम फल खाए जाते हैं वैसे ही इस फल को भी खाया जा सकता है। इसे खाने से बहुत अधिक नुकसान नहीं होता 

9. अंडकोष संबंधी रोग ((Scrotal Diseases)) करे ठीक
जिन लोगों को अंडकोष संबंधी रोग हो जाते हैं उन्हें यह कुसुम के फल बहुत फायदा पहुंचाते हैं। वृषण एरिया में पानी भरने पर उसमें मदद करते हैं।

10. चेहरे के लिए लाभदायक
इस फल को खाने से चेहरे से गैर जरूरी बाल हट जाते हैं। साथ ही चेहरा चमकने लगता है। चेहरे पर ग्लो आने लगता है। इस फल में विटामिन सी होता है और विटामिन सी चेहरे की खूबसरती को बढ़ाता है। इसके बीज का पाउडर जख्म वगैरह को ठीक करने में मदद करता है।

11. कैंसर में मददगार
डॉ मुफीक के मुताबिक इस फल में कैल्शियम, फाॉसफोरस, प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। इसमें वैनेलिक एसिड पाया जाता है। यह फल एंटी-इंफलामेंट्री, एंटी कैंसर होने के कारण कैंसर को पनपने से रोकता है। एंटी-ऑक्सीडेंट होने के कारण यह कैंसर में मददगार है।

12. तनाव करे दूर
कुसुम का पेड़ हरा भरा होता है। इस वजह से इसे देखने मात्र से किसी का मन उदास मन खुश हो सकता है। प्लांट थेरेपी में पौधों की सेवा की जाती है ताकि उनसे मनुष्यों की सेवा की जा सके। आजकल लोग घर में भी पौधे रखते हैं वो सिर्फ इसलिए ताकि उनका मन उदास न हो। प्लांट थेरेपी अवसाद, चिंता, डर आदि में काम आती है।

13. पत्तियों का उपयोग
कुसुम के पेड़ की पत्तियां जानवरों का भोजन बनती हैं। इसका केवल फल ही नहीं बल्कि पत्तियां, छाल भी इस्तेमाल लाई जाती है। यह पेड़ सैंपिनडेएसी परिवार का है।

कुसुम फल को खाने के नुकसान
कुसुम फल को बच्चे से लेकर बड़े सभी बड़े चाव से खाते हैं। लेकिन इसके अधिक इस्तेमाल से पेट खराब हो सकता है। तो वहीं विटामिन सी के गुणों से भरपूर यह फल गले में दर्द भी पैदा कर सकता है। इसलिए नियंत्रित रूप से फल को खाएं। दिक्कत होने पर डॉक्टर को दिखाएं।

आयुर्वेद में कुसुम फल की स्थिति
डॉ एम मुफीक के मुताबिक कुसुम फल के बारे में थनवंतरी निघंटू शास्त्र में लिखा गया है। इसका स्वाद अम्लीय होता है। इसे सिद्धा मेडिसन में उपयोग किया जाता है। इसके फल के अलावा बीज का भी उपयोग किया जातै है। इसके तेल को कुसुम ऑयल कहा जाता है। नियोग्रोदाधि काढ़ा के फॉर्मुलेश में इस फल का इस्तेमाल होता है। इसके तेल को मैकासर ऑयल ट्री कहा जाता है। इसका गुण गुरु है। यह इस्तेमाल करने में भारी होता है। यह गर्म होता है। यह फल खाने के बाद पेट में कटु रस में बदलता है। यह कफ पित्त को शांत करता है। इसमें कुछ साइटो कॉस्टीटेंड पाए जाते हैं। हिमालयन के नेपाल का तराई इलाका है वहां यह पाया जाता है। बॉटेनिकल नाम स्लेयीचेराओलियोसा। सैंपिएंडिएसी फैमिली है।

इस फल के अलग-अलग नाम
बंगाली में कुसुम या जैना

हिंदी में कुसुम

तेलुगु में पोस्कु, बुसी, पुस्कु, कोसांगी

मराठी में कुसुंब

गुजराती में कोसंब

तमिल में कुंबादिरी

मलयालम में कोट्टिलै

कन्नड में कुसुमा या ककोटा

छत्तीसगढ़ में कोस्सुम, कोसम

इस फल को नियंत्रित रूप से खाने से सेहत को कई फायदे मिलते हैं। यह फल हिमालय के तराई क्षेत्रों में पाया जाता है। इस फल को खाने से हड्डियों का दर्द, कान का दर्द, बालों के लिए कई तरह की मदद पहुंचाते हैं। कुसुम फल को हर जगह अलग-अलग नामों से जाना जाता है। यह खाने में जितना स्वादिष्ट है उतना ही सेहत के लिए फायदेमंद होता है।

, राजधानी रायपुर , सरायपाली बसना समेत कई जिलों में गरज चमक झमाझम बारिश! मौसम विज्ञानियों का कहना है कि 13 मई से बारिश, अंधड़ और गरज-चमक पड़ने की गतिविधियां बढ़ेंगी, इसका असर राज्य के सभी संभागों में नजर आएगा। 15 मई तक प्रदेश में यही हालात रहेंगे.!

छत्तीसगढ़ के 20 जिलों में येलो अलर्ट जारी, राजधानी रायपुर , सरायपाली बसना समेत कई जिलों में गरज चमक झमाझम बारिश!

arh: 5 दिन पूर्व जिले में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा रहा था। वहीं रुक रुक कर हो रही बारिश की वजह से तापमान में भारी गिरावट देखने को मिला है ।Yellow alert issued in 20 districts of Chhattisgarh : रायपुर। मौसम विभाग ने प्रदेश के 20 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि अगले तीन घंटे में गरज चमक के साथ अंधड़ चलने की संभावना है और कई जगहों पर बारिश भी हो सकती है। वहीं राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में शाम के जोरदार बारिश शुरू हो गई।

मई के महीने में अक्सर देखा जाता था भीषण गर्मी पड़ा करती थी। इस साल मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। बीते 5 दिनों से बस्तर में रुक रुक के हो रही बारिश से लोगों ने राहत की सांस ली है । दोपहर के बाद शाम से ही मौसम में गिरावट देखने के साथी अपनी देखा जा रहा है । 5 दिन पूर्व जिले में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा रहा था। वहीं रुक रुक कर हो रही बारिश की वजह से तापमान में भारी गिरावट देखने को मिला है ।

बारिश की वजह से दिन का अधिकतम तापमान जिले में 34 डिग्री तक ही चढ़ पाया एवं सप्ताह भर से अधिकांश इलाकों में रोज बारिश के साथ आंधी तूफान भी आ रहा है । तापमान में गिरावट की वजह से लोगों ने राहत की सांस तो ली ही है। वही मौसम में बदलाव से भी जशपुर जिले में हरियाली देखी जा रही है ।

जानकरी के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम राजस्थान से मध्यप्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल होते हुए दक्षिण असम तक एक द्रोणिका है. मध्यप्रदेश और आसपास 1.5 किमी की ऊंचाई पर एक चक्रवात है. इस सिस्टम की वजह से समुद्र से नमी आ रही है. राजस्थान और मध्यप्रदेश में इस वजह से बारिश हो रही है.

जिसका असर छत्तीसगढ़ में भी दिख रहा है. मौसम विभाग ने आज सरगुजा, जशपुर ,बलरामपुर, बिलासपुर, पेंड्रा, रायगढ़, मुंगेली, कोरबा, जांजगीर, रायपुर, बलौदा बाजार, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम, राजनांदगांव में हल्की बारिश की संभावना जताई हैं.

मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 5 दिनों तक छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में गरज-चमक के साथ कई इलाकों में बारिश की संभावना हैं. मौसम विज्ञानियों का कहना है कि 13 मई से बारिश, अंधड़ और गरज-चमक पड़ने की गतिविधियां बढ़ेंगी, इसका असर राज्य के सभी संभागों में नजर आएगा। 15 मई तक प्रदेश में यही हालात रहेंगे.!

आरंग- लाखोली के पास खड़ी नई मोटर सायकिल हुई चोरी

मोतीलाल नेहरू वार्ड क्रमांक 08 कचना थाना खम्हारडीह जिला रायपुर का रहने वाला हैँ एवं रोजी मजदूरी का काम कर अपना जीवन व्यापन करता हैँ मोतीलाल नेहरू ने दिनांक 10.05.2024 को श्रीराम शोरूम आरंग से स्प्लेण्डर प्लस खरीद कर अपने घर कचना जाने के लिये निकला था रात्रि करीब 08.00 बजे लखौली भट्ठी के चखना दुकान के पास गाडी को लाक करके खडा किया और नास्ता करने के लिये नास्ता ठेला के पास गया, नास्ता करने के बाद जब वह अपनी मोटर सायकल जिसका अभी नंबर नहीं आया है को देखा तो वहां पर नहीं था मोटर सायकल कि कीमत तक़रीबन 90320 रूपये (नब्बे हजार तीन सौ बीस रूपये) को कोई अज्ञात चोर चोरी कर ले गया है आसपास पता तलाश किया पता नहीं मिला । मेरी मोटर सायकल का इंजन नंबर HA11E7RHD51883 एवं चेचिस नंबर MBLHAW222RHD51401 है जिसकी सुचना थाना आरंग मे किया गया

रायपुर कोतवाली : वाईट हाउस नगर निगम गार्डन के सामने खड़ी मोटर साइकल की हुई चोरी

रायपुर कोतवाली : वाईट हाउस नगर निगम गार्डन के सामने खड़ी मोटर साइकल की हुई चोरी
मैं लल्लू राम सांडेकर कृष्णा नगर भामासा चौक गली नं. 06 पूरब हार्ड वेयर के पास गुढियारी रायपुर मे रहता हूं । नगर निगम मे पियून का काम करता हूं । पैशन प्रो मो.सा. क्रमांक CG. 04 HM 7915 मेरे नाम से परिवहन विभाग रायपुर मे पंजीकृत है । जिसे मै चलाता हूं । दिनांक 10-05-2024 के सुबह करीबन 6.30 बजे वाईट हाउस नगर निगम गार्डन के सामने रोड रायपुर मे उक्त मोटर सायकल को खडी करके गार्डन अंदर मे टहल रहा था

करीबन 7:10 बजे आकर देखा तो खडी किये जगह पर मेरा मोटर सायकल नही था जिसका आसपास पता तलाश करता रहा नही मिला । मेरा पैशन प्रो मो.सा. क्रमांक CG. 04 HM 7915 जिसका ईजन नं. HA10ETEHJ67715 चेचिस नंबर MBLHA10BJEHJ16211 मांडल 2014, रंग सिल्वर, कीमती 15000/- रु. को कोई अज्ञात चोर चोरी कर ले गया है ।

मै अपने स्तर पर पता तलाश करता रहा नही मिलने पर दिनांक 12-05-2024 को रिपोर्ट दर्ज कराने आया हूं । रिपोर्ट पढकर देखा मेरे बताये अनुसार लिखी गई है । कार्यवाही चाहता हूं। थाना में अज्ञात चोर के खिलाफ धारा 379-IPC पर मामला दर्ज किया गया।

बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस द्वारा अवैध महुआ शराब बनाने में कुख्यात पथरी डेरा के सांथ टुण्ड्रा में मारा गया छापा

बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस द्वारा अवैध महुआ शराब बनाने में कुख्यात पथरी डेरा के सांथ टुण्ड्रा में मारा गया छापा
मौके से लगभग ₹18,000 कीमत मूल्य का 1800 किलोग्राम महुआ पास (लहान) किया गया बरामद, जिसे मौके पर ही किया गया नष्ट
● साथ ही अवैध रूप से महुआ शराब बनाकर बिक्री करने वाले 01 आरोपी को गिरफ्तार कर ₹11,000 कीमत मूल्य का 55 लीटर महुआ शराब एवं बिक्री रकम ₹200 किया गया जप्त
आरोपी- भरत लाल पिता रमेश यादव उम्र 24 वर्ष निवासी टुण्ड्रा थाना गिधौरी
#ChhattisgarhPolice #Dprchhattisgarh #Dial112

रायपुर मुजगहन नाला के पास धमतरी की ओर से आ रही ट्रेक्टर का चालक तेजी व लापरवाही से लहराते हुए गलत दिशा से आकर सामने से कार को मारी ठोकर

रायपुर मुजगहन नाला के पास धमतरी की ओर से आ रही ट्रेक्टर का चालक तेजी व लापरवाही से लहराते हुए गलत दिशा से आकर सामने से कार को मारी ठोकर
मै वेगेन्द्र कुमार सोनबेर संतोषी नगर कृष्णा नगर नहर रोड रायपुर का रहने वाला हूं। खेती किसानी का काम करता हूं कि दिनांक 10/05/2024 को अपनी ई.व्ही. कार नेक्सान क्र0 CG04NT6504 से मैं अपनी मां श्रीमती ईश्वरी बाई सोनबेर के साथ सेजबहार होते सोनपैरी जा रहा था। सुबह करीबन 08.00 बजे मुजगहन नाला के पास पहुंचा था

तभी धमतरी की ओर से आ रही ट्रेक्टर क्र0 CG04PN8446 ट्राली क्रमांक CG04NH7944 के चालक ट्रेक्टर ट्राली के साथ तेजी व लापरवाही से लहराते हुए गलत दिशा से आकर मेरे कार को सामने से ठोकर मारकर एक्सीडेंट कर दिया तथा ट्रेक्टर की ट्राली मेरे कार के उपर पलट गया जिससे मेरी कार के सामने भाग का बोनट, इंजन, सामने का कांच एवं पीछे भाग डिक्की क्षतिग्रस्त हो गया है।

एक्सीडेंट से मुझे दोनों पैर के घुटने व दोनों हाथ के कलाई में चोट आया है एवं साथ में बैठी मेरी मां को सिर में चोट आयी है। मां को ईलाज हेतु गुडविल हास्पीटल टिकरापारा रायपुर में भर्ती कराने के बाद थाना रिपोर्ट दर्ज कराने आया हूं। घटना को आसपास के लोग देखे हैं। रिपोर्ट करता हूं, कार्यवाही किया जाये। थाना में धारा 279-IPC, 337-IPC पर मामला दर्ज किया गया।