देश के सबसे उन्नत ट्रांसफॉर्मर अब बनेंगे रायपुर में 300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्ताव

देश के सबसे उन्नत ट्रांसफॉर्मर अब बनेंगे रायपुर में 300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्ताव

छत्तीसगढ़ से होगा अब पूरे देश को ट्रांसफॉर्मर सप्लाई विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ एक और बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। देश की प्रतिष्ठित कंपनी करमवीर इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने रायपुर में अत्याधुनिक ट्रांसफॉर्मर निर्माण इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष प्रस्तुत किया। इस इकाई में 300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा, जिससे छत्तीसगढ़ का नाम देश के सबसे बड़े ट्रांसफॉर्मर निर्माण केंद्रों में शामिल हो जाएगा।

इस अवसर पर कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री विवेक जैन ने मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ सदन, नई दिल्ली में मुलाकात की। बैठक में प्रस्तावित परियोजना की रूपरेखा, निवेश संभावनाएं और रोजगार सृजन के आयामों पर विस्तार से चर्चा हुई। श्री जैन ने बताया कि यह यूनिट तकनीकी दृष्टि से देश की सबसे उन्नत ट्रांसफॉर्मर निर्माण इकाई होगी, जो भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र की ज़रूरतों को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निवेश प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा, “हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़, विकसित भारत 2047 के निर्माण में एक मजबूत स्तंभ बने। यह निवेश सिर्फ एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम है। राज्य सरकार इस परियोजना को हरसंभव सहायता प्रदान करेगी।”

यह परियोजना राज्य में बिजली क्षेत्र के आधुनिकीकरण, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, और उद्योग आधारित विकास को गति देगी। विशेष रूप से यह पहल “मेक इन छत्तीसगढ़” के नारे को मजबूती देती है, जहां अब अत्याधुनिक तकनीक से बने ट्रांसफॉर्मर पूरे देश को रोशन करने का कार्य करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के इनवेस्टमेंट कमिश्नर  ऋतु सेन भी उपस्थित थी ।

सरपंचों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने प्रशिक्षण का हुआ आयोजन

सरपंचों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने प्रशिक्षण का हुआ आयोजन

भारत सरकार, नीति आयोग नई दिल्ली द्वारा आकांक्षी जिला/ब्लॉक कार्यक्रम के तहत् नैस्कॉम फाउण्डेशन द्वारा जनपद पंचायत कोरबा के अंतर्गत समस्त ग्राम पंचायतों के सरपंचों को डिजिटली साक्षरता कार्यक्रम के तहत् डिजिटल रूप से सशक्त बनाने व उनके दैनिक कार्य को सरल बनाने के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन जनपद पंचायत कोरवा के सभाकक्ष में किया गया। यह पहल प्रधानमंत्री डिजिटल साक्षरता अभियान के अंतर्गत आती है. जिसका उद्देश्य ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना है।

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों के सरपंचों को डिजिटल उपकरणों और ई-गवर्नेस सेवाओं के उपयोग में सक्षम बनाना है, ताकि वे अपने दैनिक कार्यों को अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से कर सकें। नैस्कॉम फाउंडेशन की पहल, “डिजी-साक्षर“ विशेष रूप से वंचित समुदायों को डिजिटल कौशल प्रदान करने के लिए डिजाइन की गई है। इस कार्यक्रम के तहत, सरपंचों को कंप्यूटर कौशल, साइबर सुरक्षा और इंटरनेट के प्रभावी उपयोग जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन श्रीमती कौशाम्बी गबेल, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत कोरवा, और श्रीमती महेश्वरी साव, विकास विस्तार अधिकारी जनपद पंचायत कोरबा द्वारा किया गया। संस्था की तरफ से श्री लोकेश तिवारी प्रोजेक्ट फिल्ड ऑफिसर तथा प्रोग्राम के मास्टर ट्रेनर श्रीमती अनुसुईया ने डिजिटल साक्षरता का प्रशिक्षण दिया। इसमें 65 ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने भाग लिया, जो स्थानीय शासन और प्रशासन में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

श्रीमती गवेल के द्वारा आज के युग में डिजिटल साक्षरता के महत्व एवं आवश्यकता को बताया गया। वही श्री लोकेश जी ने डिजिटल प्लेटफार्म के सुरक्षित उपयोग पर जोर देते हुए, प्रशिक्षण के माध्यम से कई उपयोगी टिप्स साझा किये।

नैस्कॉम फाउंडेशन ने वर्ष 2022 में “आकांक्षी जिला कार्यक्रम“ की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य 55 आकांक्षी जिलों में डिजिटल साक्षरता, ई-गवर्नेस और कौशल विकास के माध्यम से अधिक लोगों को सशक्त बनाना है। इस पहल के तहत, डिजिटल संसाधन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो समुदायों को आवश्यक डिजिटल उपकरणों और सेवाओं तक पहुंच प्रदान करते हैं।

 

पर्यावरण व प्रकृति को सुरक्षित रखना सबसे बड़ा कर्म युवाओं को स्काउट, गाईड्स हमेशा आदर्श व जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देता है -श्री डेका

पर्यावरण व प्रकृति को सुरक्षित रखना सबसे बड़ा कर्म युवाओं को स्काउट, गाईड्स हमेशा आदर्श व जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देता है -श्री डेका

भारत स्काउट्स गाइड्स के अलंकरण समारोह में शामिल हुए राज्यपाल

सर्वश्रेष्ठ रोवर, रेंजर, स्काउट, गाइडर एवं स्काउट-गाइड को दिया गया राज्यपाल पुरस्कार राज्यपाल श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में आज राजभवन में स्काउट्स और गाइड्स छत्तीसगढ़ राज्यस्तरीय अलंकरण समारोह आयोजित किया गया। समारोह में राज्यपाल श्री डेका ने राज्य के सर्वश्रेष्ठ स्काउटर, गाइडर, रोवर, रेंजर, एवं स्काउट-गाइड को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की समस्या को देखते हुए प्रकृति और पर्यावरण को सुरक्षित रखना हम सबकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। स्काउट्स एवं गाइड्स को इसमें अपना सक्रिय योगदान देना होगा। उन्होंने सभी से एक पेड़ मां के नाम पर लगाने और दोस्तों एवं परिजनों को भी इसकेे लिए प्रेरित करने की बात कही।

श्री डेका ने सम्मान प्राप्त होने पर स्काउट्स एवं गाइड्स को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत स्काउट्स एवं गाइड्स अपने आदर्श वाक्य ‘‘तैयार हो‘‘ के अनुरूप हमेशा अपने कर्तव्य और जिम्मेदारी के साथ देश और समाज की मदद हेतु तत्पर रहते हैं। देश के युवाओं को अच्छे नागरिक बनने, आत्मनिर्माण करने और सेवा कार्य हेतु सदा तैयार रहने की प्रेरणा देते हैं। आज भारत के युवा, अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उसी दिशा में कदम बढ़ाते हैं जहां उन्हें अपना करियर बनाना है। उसके लिए कठिन परिश्रम और लगन के साथ समय प्रबंधन बहुत जरूरी है। अगर किसी कारण से अपने लक्ष्य से चूक भी गए तो निराश मत हो बल्कि उन असफलताओं और पिछले अनुभवों से सीख लेकर आगे बढ़ें। हार नहीं मानते हुए पुनः अपने आप को तैयार करें और लक्ष्य की ओर बढें, सफलता जरूर मिलेगी। अनुशासन,

दृढ़ संकल्प और स्वयं पर विश्वास, सफलता की ओर ले जाता है।श्री डेका ने छत्तीसगढ़ के स्काउट्स, गाइड्स, रोवर्स, रेंजर्स द्वारा आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, पेड़ लगाने और उन्हें संरक्षित रखने, साइबर अपराध, जाति भेदभाव जैसे अन्य विषयों पर विभिन्न माध्यमों से समाज को जागरूक करने की दिशा में हो रहे कार्यों सराहना की और राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में रोवर्स, रेंजर्स दलों का पंजीयन और गठन होने पर प्रसन्नता व्यक्त की।

समारोह में सर्वश्रेष्ठ स्काउट श्री दीपक सिंह, श्री नितिश कुमार यादव, श्री लोमेश कुमार सर्वश्रेष्ठ गाइड कु. दीक्षा पटेल, कुु. हंसनी, कु. झरना साहू सर्वश्रेष्ठ रोवर श्री अनुज साहू, सर्वश्रेष्ठ रेंजर कु. नेहा सेन व कु. प्रियंका यादव को राज्यपाल ने पुरस्कृत किया। इसी तरह सर्वश्रेष्ठ स्काउटर श्री गोपाल राम वर्मा व श्री मिलन सिंह सिन्हा एवं सर्वश्रेष्ठ गाइडर श्रीमती पुष्पा शांडिल्य व सुश्री रजनीकला पाटकर सम्मानित हुए। दीर्घ सेवा अलंकरण स्काउटर श्री रोमन लाल साहू व गाइडर श्रीमती बीना यादव को प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में स्वागत भाषण भारत स्काउट्स एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ के राज्य आयुक्त डॉ. सोमनाथ यादव एवं आभार प्रदर्शन राज्य सचिव श्री कैलाश सोनी ने दिया।

कार्यक्रम में  राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर प्रसन्ना, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, छत्तीसगढ़ स्काउट गाइड के कार्यकारी अध्यक्ष श्री राजेश अग्रवाल, राज्य के अन्य पदाधिकारी, विभिन्न जिलों से आये हुए स्काउट्र, गाइडर, रोवर, रेंजर एवं स्काउट-गाइड उपस्थित थे।

 

रायपुर में जल्द स्थापित होगा देश का प्रमुख AI डेटा सेंटर- ESDS करेगी 600 करोड़ रुपये का निवेश

रायपुर में जल्द स्थापित होगा देश का प्रमुख AI डेटा सेंटर- ESDS करेगी 600 करोड़ रुपये का निवेश

छत्तीसगढ़ देश के डिजिटल परिदृश्य में बड़ा कदम रखने जा रहा है। रायपुर में अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए टेक्नोलॉजी कंपनी ESDS Software Solution Ltd ने 600 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रस्ताव मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष प्रस्तुत किया है।

मुख्यमंत्री से नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में मुलाकात के दौरान कंपनी के चेयरमैन श्री पीयूष सोमानी और उपाध्यक्ष श्री लोकेश शर्मा ने कहा कि यह सेंटर न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे भारत के डिजिटल भविष्य को गति देगा। इस प्रस्ताव के माध्यम से छत्तीसगढ़ को AI, क्लाउड टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल स्टोरेज के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में ठोस पहल होगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा, “डिजिटल इंडिया की भावना को छत्तीसगढ़ में धरातल पर उतारने के लिए यह निवेश मील का पत्थर साबित होगा। सरकार हरसंभव सहायता देगी ताकि यह परियोजना जल्द से जल्द मूर्तरूप ले।”

ESDS की यह पहल छत्तीसगढ़ को एक टेक्नोलॉजी हब बनाने के साथ-साथ युवाओं के लिए उच्च स्तरीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। यह सेंटर राज्य के IT इकोसिस्टम को मजबूती देगा और डिजिटल आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के इनवेस्टमेंट कमिश्नर  ऋतु सेन भी उपस्थित थी ।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा का किया जिक्र

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा का किया जिक्र

बस्तर क्षेत्र के बच्चों में साइंस का पैशन, खेल में भी कर रहे हैं कमालः प्रधानमंत्री दंतेवाड़ा में कभी माओवाद चरम पर था, वहां आज शिक्षा का परचम लहरा रहाः प्रधानमंत्री

बस्तर क्षेत्र और दंतेवाड़ा के जिक्र पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताया प्रधानमंत्री का आभार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपने मन की बात की 122वीं कड़ी में देश के सामने अपनी बातों को रखा। मन की बात की ये कड़ी छत्तीसगढ़ के लिए काफी खास रही। प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में किए जा रहे कार्यों की तारीफ करते हुए कहा कि जिस दंतेवाड़ा में कभी माओवाद चरम पर था, वहां आज शिक्षा का परचम लहरा रहा है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ में हुए बस्तर ओलंपिक  और माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में साइंस लैब के बारे मे जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों में साइंस का पैशन है और वो खेलों में भी कमाल कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने बस्तर क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा है कि इस तरह के प्रयासों से पता चलता है कि इन इलाकों में रहने वाले लोग कितने साहसी होते हैं। इन लोगों ने तमाम चुनौतियों के बीच अपने जीवन को बेहतर बनाने की राह चुनी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे यह जानकार भी बहुत खुशी हुई कि 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में दंतेवाड़ा जिले के नतीजे बहुत शानदार रहे हैं। करीब पंचानबे ( नाइंटी पाइव) प्रतिशत रिजल्ट ये जिला 10वीं के नतीजों में टॉप पर रहा, वहीं 12वीं की परीक्षा में इस जिले ने छत्तीसगढ़ में छठा स्थान हासिल किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से बस्तर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे बदलाव हम सभी को गर्व से भर देते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा मन की बात की 122वीं कड़ी में बस्तर क्षेत्र और दंतेवाड़ा का जिक्र करने पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की सरकार प्रधानमंत्री के विकसित भारत के नक्शे कदम पर चल रही है और विकसित छत्तीसगढ़ इस अभियान में अपना महत्वपूर्ण योगदान निभाएग

बसना – जनप्रतिनिधि सम्मान” से सम्मानित हुए सभापति प्रकाश सिन्हा.

श्याम बिहारी जायसवाल ने कलार समाज महासभा में की शिरकत

बसना। छत्तीसगढ़ कलार समाज द्वारा प्रदेश स्तरीय खंड महासभा 2025 का आयोजन शनिवार को मंडी प्रांगण अभनपुर में आयोजित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव एवं नगर निगम/पंचायतों में निर्वाचित हुए स्वजाति बंधुओं का “जनप्रतिनिधि सम्मान” समारोह का आयोजन किया गया।

 

कार्यक्रम में मुख्य रूप से केबिनेट मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, श्री रूपनारायण सिन्हा अध्यक्ष छत्तीसगढ़ योग आयोग एवं कलार समाज के प्रांताध्यक्ष श्री युवराज सिन्हा समेत प्रदेश, जिला व परिक्षेत्र के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।

 

 

गौरतलब है कि उक्त कार्यक्रम में बसना जनपद पंचायत से सभापति एवं अंकोरी जनपद क्षेत्र से जनपद सदस्य निर्वाचित होने पर प्रकाश सिन्हा का खंड महासभा में प्रांताध्यक्ष ने आत्मीय रूप से स्वागत कर “जनप्रतिनिधि सम्मान” से सम्मानित किया गया।

मंत्री जायसवाल ने दिया एकजुटता का संदेश

अपने संबोधन में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि- “कलार समाज की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत गौरवशाली रही है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने पारंपरिक मूल्यों के साथ-साथ आधुनिकता को अपनाते हुए समाज के हर वर्ग को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करें।” उन्होंने समाज के युवाओं को जागरूकता, शिक्षा और तकनीकी दक्षता की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह करते हुए कहा कि राज्य सरकार समाज के हर वर्ग के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे आयोजनों से समाज की सकारात्मक भूमिका को मजबूती मिलती है।

पीएम आयुष्मान वय-वंदना कार्ड बनाने में छत्तीसगढ़ देश में 5वें स्थान पर

पीएम आयुष्मान वय-वंदना कार्ड बनाने में छत्तीसगढ़ देश में 5वें स्थान पर

राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार जैसे राज्यों से बेहतर स्थिति में है छत्तीसगढ़ राज्य के 3 लाख 60 हजार से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को मिला पीएम आयुष्मान वय-वंदना कार्ड

अक्टूबर 2024 से देश में प्रारंभ वय-वंदना कार्ड पंजीयन में राज्य में नवंबर के बाद तेजी से किया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू की गई पीएम आयुष्मान वय-वंदना योजना से 70 वर्ष व अधिक आयु के नागरिकों को निः शुल्क इलाज मिल रहा है। छत्तीसगढ मे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अगुवाई और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में राज्य के 3 लाख 60 हजार  से अधिक 70 वर्ष व अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के आयुष्मान वय-वंदना कार्ड बन चुके हैं। इसकी वजह से छत्तीसगढ़ पूरे देश में वय वंदना कार्ड बनाने के मामले में  पांचवें स्थान पर पहुँच गया है। इस मामले में राज्य ने राजस्थान, महाराष्ट्र , ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों से आगे निकलकर कीर्तिमान रच दिया है ।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर राज्य के सभी जिलों में विशेष अभियान चलाकर लगातार आयुष्मान वय-वंदना कार्ड बनाए जा रहे हैं। जिससे कि कोई भी पात्र वरिष्ठ नागरिक योजनांतर्गत् निःशुल्क इलाज लाभ पाने से वंचित ना रह जाए।  जिलों में आयुष्मान वय-वंदना पंजीयन हेतु विभिन्न शासकीय विभागों के अतिरिक्त, सामाजिक संस्थाओं, पेंशनर संथाओं, शियान-सदन, वरिष्ठ-जन कल्याण संघों, वृद्धाश्रमों, निजी आवासीय सोसायटियों, इत्यादि से लगातार संपर्क कर शिविर लगाए जा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि, कोई भी व्यक्ति जिसके माता-पिता या अन्य सदस्य यदि 70 वर्ष व अधिक आयु के हैं एवं उनके पास आधार कार्ड उपलब्ध है तो वे नजदीकी शासकीय चिकित्सालय, सी.एम.एच.ओ./ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय या शासकीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता के माध्यम से निःशुल्क आयुष्मान कार्ड बनवा सकते हैं या टोल फ्री टेलीफोन नंबर 104 पर बात कर अधिक जानकारी ले सकते हैं। व्यक्ति चाहे तो गूगल प्ले स्टोर से आयुष्मान भारत एप व आधार फेस आई.डी. एप डाउनलोड कर आधार वेरीफिकेशन से अपना सामान्य आयुष्मान कार्ड या घर के वरिष्ठ सदस्य का आयुष्मान वय-वंदना कार्ड दोनों पंजीयन स्वयं भी कर सकता है। उल्लेखनीय है कि माह अक्टूबर 2024 से देश में प्रारंभ वय-वंदना कार्ड पंजीयन में राज्य में नवंबर के बाद तेजी से कार्य किया जा सका है।

राज्य शासन द्वारा 6 जिलों जहां 60 प्रतिशत से अधिक आयुष्मान वय-वंदना कार्ड पंजीयन कवरेज कर लिया गया है, को “वय-मित्र” जिलों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके तहत् इन जिलों में वरिष्ठ नागरिकों को जिला अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ‘वय-मित्र स्वास्थ्य परीक्षण शिविर’ का आयोजन, ‘मोबाइल मेडिकल यूनिट’ के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन, आयुष्मान-आरोग्य मंदिर में टेली-मेडिसीन व मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग व प्रत्येक बृहस्पतिवार ‘सियान-जतन शिविर’ का आयोजन, आयुष पद्धति से इलाज की सुविधा, मोतियाबिंद जांच, इत्यादि विशेष स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान से गर्भवती महिलाओं को मिल रही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान से गर्भवती महिलाओं को मिल रही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं

अभियान की सघन निगरानी हेतु आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं, सभी जिलों के कलेक्टर और स्वास्थ्य अधिकारी उतरे फील्ड में

सभी जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व चिन्हांकित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में हर माह 9 और 24 को की जा रही गर्भवती महिलाओं  की जांच, हाई रिस्क मामलों की पहचान पर ज़ोर

आयोजित अभियान के दौरान कुल 800 से अधिक PMSMA जांच सत्र आयोजित कर लगभग 30 हज़ार गर्भवती महिलाओं की जांच की गई व 9000 से अधिक उच्च जोखिम महिलाओं को स्वास्थ्य लाभ प्रदाय किया गया प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत राज्य की गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने हेतु निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में राज्य के समस्त जिलों में अभियान के तहत प्रत्येक माह की 9 और 24 तारीख को गर्भवती महिलाओं की जांच व उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की पहचान की जा रही है।  इस दौरान गर्भवती महिलाओं की नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था (High Risk Pregnancy – HRP) की पहचान और समुचित प्रबंधन व चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है।

इस अभियान के प्रभावस्वरूप छत्तीसगढ़ में मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2004-06 में राज्य का मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) 335 प्रति एक लाख जीवित जन्म था, जो अब घटकर 132 पर आ गया है। हालांकि यह आंकड़ा अभी भी राष्ट्रीय औसत (93) से अधिक है, जिसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने इस दिशा में और अधिक ठोस और योजनाबद्ध प्रयासों की रूपरेखा तैयार की है।

जिलों से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के अंतर्गत कुल 800 से अधिक सत्रों का सफल आयोजन किया गया। इन सत्रों में से 360 PMSMA सत्रों की निगरानी राज्य तथा जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा प्रभावी रूप से की गई तथा आयोजित सत्रों के दौरान लगभग 30 हज़ार गर्भवती महिलाओं ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्राप्त किया। इनमें से लगभग 9000 से अधिक महिलाएं उच्च जोखिम गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेग्नेंसी) की श्रेणी में चिन्हित की गईं, जिन्हें विशेष चिकित्सकिया देखभाल प्रदान किया गया ।

गौरतलब है कि अधिकांश मातृ मृत्यु के पीछे उच्च जोखिम गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताएं प्रमुख कारण हैं। ऐसे में समय रहते HRP की पहचान, उचित उपचार एवं सतत निगरानी अभियान के प्रमुख उद्देश्य बनाए गए हैं।

इस संदर्भ में राज्य के समस्त जिलों में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं कलेक्टरों द्वारा अस्पतालों का निरीक्षण किया गया। चिकित्सकीय व्यवस्थाओं की समीक्षा के साथ-साथ मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए गए।

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा, “हर गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व का अधिकार है, और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान इस दिशा में एक सशक्त एवं प्रभावी कदम है। राज्य सरकार की प्रतिबद्धता है कि छत्तीसगढ़ की हर महिला को सुरक्षित प्रसव की सुविधा मिले।”

उन्होंने आगे कहा कि इस अभियान के माध्यम से न केवल प्रसवपूर्व जांच, रक्त की जांच, अल्ट्रासाउंड, वजन एवं रक्तचाप की निगरानी जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं दी जा रही हैं, बल्कि पोषण संबंधी परामर्श भी प्रदान किया जा रहा है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की महिलाओं को बड़ा लाभ मिल रहा है।

अभियान के दौरान अब तक हजारों महिलाओं को लाभ मिला है, जिनमें से कई उच्च जोखिम गर्भावस्था की समय रहते पहचान होने से समुचित उपचार प्राप्त कर सकीं। राज्य सरकार का मानना है कि यदि इस पहल का धरातल पर बेहतर व  सुचारु क्रियान्वयन किया जाए तो छत्तीसगढ़ में मातृ मृत्यु दर को राष्ट्रीय औसत से भी नीचे लाया जा सकता है। अभियान की सघन निगरानी सुनिश्चित करने हेतु सभी जिला कलेक्टरों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे प्रत्येक अस्पताल की गुणवत्ता की निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी गर्भवती महिलाओं को समय पर समुचित सेवाएं प्राप्त हों। छत्तीसगढ़ सरकार मातृत्व स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कटिबद्ध है।

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में बस्तर के नवाचारों की खुलकर सराहना

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में बस्तर के नवाचारों की खुलकर सराहना

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया—कैसे बस्तर बना संस्कृति, सहभागिता और विकास का मॉडल राजधानी दिल्ली स्थित अशोक होटल में आयोजित मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन मॉडल, नवाचारों और जनभागीदारी आधारित योजनाओं ने विशेष पहचान बनाई। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा प्रस्तुत बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे अभिनव आयोजनों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों का ध्यान आकर्षित किया। बैठक में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव एवं श्री विजय शर्मा भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने प्रस्तुतीकरण की शुरुआत राज्य में सुशासन की संस्थागत पहल से की। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन एवं अभिसरण विभाग’ का गठन कर योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। ‘अटल मॉनिटरिंग पोर्टल’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से योजनाओं की निगरानी की जा रही है, जिससे शिकायतों का समाधान निर्धारित समय में संभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर ईमानदारी व संवेदनशीलता से लागू करना है।

बैठक में केंद्र की फ्लैगशिप योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं को छत्तीसगढ़ में ग्रामसभा, जनसंवाद और तकनीक के माध्यम से आमजन तक पहुँचाया गया है।

बैठक का सबसे प्रेरक क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री ने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम पर विशेष प्रजेंटेशन दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के ‘खेलोगे इंडिया, जीतोगे इंडिया’ मंत्र को उद्धृत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने इसे धरातल पर साकार किया है। बस्तर ओलंपिक अब सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति बन चुका है — जिसने युवाओं के हाथों से बंदूकें छीनकर गेंद, भाला और तीर थमा दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया इस आयोजन में 7 जिलों के 32 विकासखंडों से 1.65 लाख प्रतिभागियों ने भाग लिया। तीन चरणों — विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर आयोजित यह प्रतियोगिता 11 पारंपरिक खेलों जैसे तीरंदाजी, खो-खो, कबड्डी, दौड़, रस्साकसी आदि पर केंद्रित थी। चार श्रेणियों — जूनियर, सीनियर, महिला और दिव्यांग — में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।

मुख्यमंत्री साय ने दोरनापाल के पुनेन सन्ना का उदाहरण साझा किया, जो कभी नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्र से थे, पर आज व्हीलचेयर दौड़ में पदक जीतकर पूरे समाज के लिए प्रेरणास्तंभ बन गए हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में बस्तर ओलंपिक की प्रशंसा करते हुए कहा था कि यह आयोजन केवल खेल नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा का उत्सव है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम उत्सव के माध्यम से छत्तीसगढ़ ने न केवल आदिवासी संस्कृति, लोककलाओं और परंपराओं को संरक्षित किया, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय मंच भी प्रदान किया। इस आयोजन में 7 जिलों के 32 विकासखंडों की 1,885 ग्राम पंचायतों के 1,743 सांस्कृतिक दलों और 47,000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। लोकनृत्य, गीत-संगीत, हाट-बाजार, पकवान प्रतियोगिताएं जैसे विविध रंगों से सजा यह उत्सव बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक को जोड़ते हुए बस्तर की एकता, पहचान और विकास का प्रतीक बन गया। सरकार द्वारा 2.4 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इस आयोजन ने उत्सव और खेल के माध्यम से सकारात्मक भविष्य की नई चेतना जगाई है।

बैठक में जिन राज्यों को अपनी योजनाओं के प्रस्तुतीकरण का अवसर मिला, उनमें छत्तीसगढ़ का ‘बस्तर मॉडल’ बेहद प्रभावशाली रहा।जनभागीदारी, संस्कृति और विकास के इस अनोखे मेल ने सभी को प्रभावित किया। बैठक में सुझाव दिया गया कि जनभागीदारी व सांस्कृतिक जुड़ाव पर आधारित ऐसे मॉडल्स को अन्य राज्यों में भी अपनाया जा सकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इन पहलों को अनुकरणीय बताते हुए सुझाव दिया कि ऐसे नवाचार, जो समाज की जड़ों से जुड़ते हों और विकास की दिशा तय करते हों, उन्हें  विस्तार दिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ के ‘बस्तर मॉडल’ को जिस तरह सराहा गया, उसने यह स्पष्ट किया कि जनसहभागिता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और विकास के समन्वय से किस तरह दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी बदलाव की मजबूत नींव रखी जा सकती है।

 

26 मई को 4 स्थानों पर समाधान शिविर का होगा आयोजन

महासमुंद : 26 मई को 4 स्थानों पर समाधान शिविर का होगा आयोजन

सुशासन तिहार के तृतीय चरण अंतर्गत जिले में समाधान शिविर 30 मई तक आयोजित होगा। जिले में कुल 49 समाधान शिविर का आयोजन किया जाना हैं| अब तक 39 समाधान शिविर का आयोजन किया जा चुका है।                                                              जिसमें नगरीय निकाय में 07 एवं जनपद पंचायत अंतर्गत 32 शिविर आयोजित हुआ है। आगामी शिविर 26 मई को 4 स्थानों पर पिथौरा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत भुरकोनी हाई स्कूल, बागबाहरा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत नर्रा, महासमुंद विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत रायतुम हाई स्कूल, सरायपाली विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत पाटसेंदरी हाई स्कूल में आयोजित होगा।                                                                                                     इसी तरह 27 मई को बसना विकासखण्ड अंतर्गत भंवरपुर स्वामी आत्मानंद स्कूल, 28 मई को दो स्थानों पर पिथौरा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत पथरला मिडिल स्कूल के सामने, महासमुंद विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत सिरपुर हाई स्कूल, 29 मई को सरायपाली विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत गेर्रा मिडिल स्कूल तथा 30 मई को दो स्थानों पर पिथौरा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत परसवानी हाई स्कूल एवं बागबाहरा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत हाथीबाहरा में समाधान शिविर का आयोजन किया जाएगा।