पिथौरा : धान नहीं बिकने से भड़के किसान, 50 से अधिक ट्रैक्टरों के साथ तहसील घेराव आंदोलन मे बीजेपी नेता भी शामिल
पिथौरा।
समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी नहीं हो पाने से आक्रोशित ग्रामीण सेवा सहकारी समिति मर्यादित राजाडेरा के सैकड़ों किसानों ने सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने धान से लदे 50 से अधिक ट्रैक्टरों के साथ तहसील कार्यालय पहुंचकर शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान नगर क्षेत्र में लगभग आधा किलोमीटर तक ट्रैक्टरों की लंबी कतारें देखी गईं।
बताया गया कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से 30 जनवरी तक निर्धारित की गई थी, लेकिन मंडी समिति कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कई खरीदी केंद्रों में 1 दिसंबर के बाद ही खरीदी सुचारू हो सकी। वहीं सीमित आवक लिमिट के चलते राजाडेरा धान खरीदी केंद्र के 52 किसान पूरी तरह से समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित रह गए। इन किसानों का एक दाना भी सरकारी खरीदी में नहीं लिया गया। इसके अलावा करीब 99 किसान दूसरे चरण में खरीदी की आस लगाए बैठे रहे, लेकिन उन्हें भी निराशा हाथ लगी।
किसानों के अनुसार केवल राजाडेरा केंद्र में ही करीब 6 हजार क्विंटल धान की खरीदी नहीं हो सकी। किसानों का आरोप है कि उन्होंने कई बार खरीदी तिथि बढ़ाने और लिमिट हटाने की मांग की, लेकिन शासन-प्रशासन ने इस ओर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, जिससे किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
तहसील कार्यालय पहुंचने पर पुलिस प्रशासन ने मुख्य गेट पर बैरिकेडिंग कर किसानों को रोक दिया, जिससे आक्रोश और बढ़ गया। किसानों ने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया, हालांकि एक तरफ से यातायात व्यवस्था चालू रखी गई।
इस आंदोलन में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े कई नेता भी शामिल रहे। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भाजपा नेता सादराम पटेल एवं प्रेमशंकर पटेल ने कहा कि वे पहले किसान हैं, बाद में राजनीतिक कार्यकर्ता। सादराम पटेल ने कहा कि जिन किसानों ने धान नहीं बेचा है, उन पर बैंक ऋण का भारी बोझ है और अब उसकी भरपाई कैसे होगी, यह सबसे बड़ा सवाल है।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों ने आरोप लगाया कि इस वर्ष प्रशासन द्वारा बार-बार दबाव बनाया गया और कुछ स्थानों पर घरों से धान जब्ती की कार्रवाई भी की गई, जिससे किसानों में भारी रोष है। इस दौरान किसानों ने “गांजा नहीं, हम धान उगाते हैं” जैसे नारों के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया।
बाद में तहसीलदार मनीषा देवांगन ने मौके पर पहुंचकर किसानों से चर्चा की और उनकी मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इसके बाद किसान तहसील परिसर में धरने पर बैठ गए। आंदोलन में अरण्ड, टेका, सोनासिल्ली, खुटेरी, कौहाकुड़ा, बरेकेल, पिथौरा, सुखीपाली, बगारपाली, राजाडेरा, जम्हर, खुशरूपाली, गोडबहाल, कोकोभाठा, छिबर्रा और कोचर्रा सहित आसपास के गांवों के किसान बड़ी संख्या में शामिल रहे।

इस दौरान एसडीएम बजरंग सिंह वर्मा और तहसीलदार लगातार उच्च अधिकारियों से दूरभाष पर चर्चा करते रहे। किसानों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनका धान समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष पूरे छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के मामले में महासमुंद जिला प्रदेश में अव्वल रहा है, इसके बावजूद जिले के सैकड़ों किसानों का लाखों क्विंटल धान तिथि और लिमिट की वजह से नहीं बिक सका, जिससे किसानों में भारी नाराजगी है।
बयान
कलेक्टर, डीएमओ, मार्कफेड के अधिकारी, डीआरसीएच और सीसीपी नोडल को मामले की जानकारी दे दी गई है। यह उच्च स्तर पर निर्णय का विषय है। किसानों की मांगें वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा दी गई हैं।
— बजरंग सिंह वर्मा, एसडीएम पिथौरा



