रायपुर : प्रधानमंत्री जी का संकल्प हवाई चप्पल पहनने वाले भी हवाई यात्रा कर सकें : मुख्यमंत्री ने बिलासपुर-दिल्ली और बिलासपुर-कोलकाता सीधी हवाई सेवा का वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर किया शुभारंभ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय रायपुर से वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर बिलासा देवी केंवट विमानतल, बिलासपुर से बिलासपुर-दिल्ली और बिलासपुर-कोलकाता सीधी हवाई सेवा का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव सहित अनेक जनप्रतिनिधि बिलासा देवी केंवट विमानतल पर तथा मुख्यमंत्री निवास पर लोकसभा सांसद श्री सुनील सोनी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे प्रधानमंत्री जी का संकल्प है कि हवाई चप्पल पहनने वाले भी हवाई यात्रा कर सकें। इस उद्देश्य से पूरे देश में हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज न्यायधानी बिलासपुरवासियों की लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी मांग पूरी हो रही है। बिलासपुर से कोलकाता और बिलासपुर से नई दिल्ली के लिए सीधी हवाई सेवा प्रारंभ हो रही है। मेरी ओर से इसके लिए बिलासपुर वासियों को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए खुशी की बात है। इस हवाई सेवा का लाभ बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने नई हवाई सेवा प्रारंभ करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से बधाई देते हुए उनके प्रति आभार प्रकट किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज जगदलपुर के लिए भी बड़ी खुश खबरी है, आज जगदलपुर से जबलपुर के लिए भी हवाई सेवा प्रारंभ हो रही है। इस हवाई सेवा का लाभ बस्तर क्षेत्र के लोगों को मिलेगा। यहां व्यापार और पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग आदि क्षेत्रों में नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिलासपुर हवाई अड्डे को अपग्रेड करने का काम चल रहा है। जल्द ही यहां नाइट लैंडिंग की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। बिलासा देवी केंवट विमानतल चकरभाटा बिलासपुर को 3सीव्हीएफआर लायसेंस प्राप्त हुआ है। यहां 72 सीटर प्लेन का संचालन होगा। विमानन विभाग द्वारा इस हवाई अड्डे पर नाईट लैंडिंग की सुविधा के लिए 3सीआईएफआर के लिए आवेदन किया गया है। यह सुविधा भी बिलासपुर विमानतल पर जल्द प्रारंभ होगी। एलायंस एयर द्वारा आज छत्तीसगढ़ में तीन हवाई सेवाएं प्रारंभ की जा रही हैं। इनमें से बिलासपुर से दो हवाई सेवाएं-दिल्ली-बिलासपुर-दिल्ली और कोलकाता-बिलासपुर-कोलकाता तथा जबलपुर-जगदलपुर-जबलपुर
आज कोलकाता से पहली सीधी उड़ान 8.55 बजे बिलासपुर आकर 9.40 बजे कोलकाता के लिए रवाना हुई। इसी तरह दिल्ली से दूसरी उड़ान 9.30 बजे बिलासपुर आकर 10.10 बजे दिल्ली के लिए रवाना हुई। उप मुख्यमंत्री श्री श्री अरुण साव ने बिलासा देवी केंवट एयरपोर्ट चकरभाटा में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि बिलासपुर से एक साथ नई दिल्ली और कोलकाता के लिए नियमित विमान सेवा शुरू होना बिलासपुर के विकास के लिए एक बड़ा पड़ाव है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयासों से बिलासपुर से हवाई सेवा प्रारंभ होने की मांग पूरी हुई। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विमान सेवा को नियमित रूप से चलने में राज्य सरकार की ओर से पूरा सहयोग किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही बिलासपुर से हैदराबाद के लिए भी नियमित विमान सेवा शुरू हो जाएगी। बिल्हा विधायक श्री धरमलाल कौशिक ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर बिलासपुर को एक साथ दो नियमित विमान सेवा की सौगात मिली है। उन्होंने कहा पहले दिन से ही पर्याप्त यात्री टिकट लिए हैं। उन्होंने कहा कि बिलासपुर एयरपोर्ट को जल्द ही नाइट लैंडिंग की सुविधा मिलने पर विमान रद्द अथवा डायवर्ट होने की नौबत नहीं आएगी। नगर के विधायक श्री अमर अग्रवाल ने नियमित विमान सेवा शुरू होने पर खुशी जाहिर करते हुए नागरिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बिलासपुर के नागरिकों का वर्षों पुराना सपना आज पूर्ण हो गया। तखतपुर विधायक श्री धर्मजीत सिंह ने उम्मीद जताई कि आज से शुरू हुई विमान सेवा लगातार लोगों की सेवा में कार्यरत रहेगी। बेलतरा विधायक श्री श्री सुशांत शुक्ला ने कहा की बिलासपुर के जनता की बहुप्रतीक्षित मांग आज पूरी हुई है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को बधाई दी। श्री शुक्ल ने कहा बिलासपुर की हवाई सेवा एटीसी मानचित्र में सदैव के लिए अंकित हो गई है। कलेक्टर अवनीश शरण ने स्वागत भाषण दिया।
यात्रियों ने कहा: फ्लाईट पकड़ने कहीं और दूसरे शहर नहीं जाना पड़ेगा लोरमी से दिल्ली यात्रा में जा रही दिव्या वैष्णव ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि विमान सेवा शुरू होने से बिलासपुर संभाग की जनता को बहुत फायदा हुआ है। हमें अब दिल्ली कोलकाता व अन्य जगह जाने के लिए रायपुर जाना नहीं पड़ेगा। इससे हमारे समय और धन दोनों की बचत होगी। उन्होंने नियमित रूप से दिल्ली और कोलकाता विमान सेवा शुरू होने पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव को धन्यवाद दिया। इस अवसर पर कोटा विधायक श्री अटल श्रीवास्तव, महापौर बिलासपुर श्री रामशरण यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष बिलासपुर श्री अरुण सिंह चौहान, कमिश्नर श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी, कलेक्टर अवनीश शरण, एसपी रजनेश सिंह, निगम आयुक्त श्री अमित कुमार, निगम में नेता प्रतिपक्ष श्री राजेश सिंह, जिला अध्यक्ष श्री रामदेव कुमावत सहित बड़ी संख्या में यात्री और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। मुख्यमंत्री निवास में सचिव विमानन श्री दयानंद पी., संचालक विमानन श्री नीलम नामदेव एक्का सहित अनेक अधिकारी उपस्थित थे।













हुए कई अवशेष यहां मौजूद हैं। इन्हीं में से एक प्रतीक है राजिम का कुलेश्वर महादेव मंदिर। महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के त्रिवेणी संगम पर स्थित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि जिस जगह मंदिर स्थित है, वहां कभी वनवास काल के दौरान मां सीता ने देवों के देव महादेव के प्रतीक रेत का शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा की थी। आज जो मंदिर यहां मौजूद है उसका निर्मांण आठवीं शताब्दी में हुआ था।कहा जाता है कि नदियों के संगम पर मौजूद इस मंदिर के अंदर एक गुप्त गुफा मौजूद है जो नजदीक ही स्थित लोमस ऋषि के आश्रम तक जाती है। कल से सावन शुरू हो रहा है अब इस ऐतिहासिक मंदिर में भगवान कुलेश्वर
महादेव के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगेगा। बारिश के बाद तीनों नदियों का जलस्तर काफी ऊपर है और मंदिर पानी से घिरा हुआ है, लेकिन महादेव पर आस्था रखने वाले भक्त नाव के सहारे उनके दर्शन के लिए मंदिर तक जाएंगे। स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना, हैरान कर देती है नींव की मजबूती
होती हैं। इसके बीच अपनी मजबूत नींव के साथ मंदिर सदियों से टिका हुआ है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से मात्र 45 किलोमीटर दूर स्थित राजिम में नदी पर बना पुल 40 साल भी नहीं टिक पाया, जबकि वहां आठवीं सदी का कुलेश्वर महादेव मंदिर आज भी खड़ा है। जैसे ही शिवलिंग को छूता है बाढ़ का पानी… मंदिर का दर्शन करने देशभर से लोग यहां पहुंचते हैं। राजिम में नदी के एक किनारे पर भगवान राजीवलोचन का मंदिर है और बीच में कुलेश्वर महादेव का मंदिर। किनारे पर एक और महादेव मंदिर है, जिसे मामा का मंदिर कहा जाता है। कुलेश्वर महादेव मंदिर को भांजे का मंदिर कहते हैं।
किंवदंती है कि बाढ़ में जब कुलेश्वर महादेव का मंदिर डूबता था तो वहां से मामा बचाओ आवाज आती है। इसी मान्यता के कारण यहां आज भी नाव पर मामा-भांजे को एक साथ सवार नहीं होने दिया जाता है। नदी किनारे बने मामा के मंदिर के शिवलिंग को जैसे ही नदी का जल छूता है उसके बाद बाढ़ उतरनी शुरू हो जाती है। तराशे गए पत्थरों से बना है विशाल मंदिर मंदिर का आकार 37.75 गुना 37.30 मीटर है। इसकी ऊंचाई 4.8 मीटर है मंदिर का अधिष्ठान भाग तराशे हुए पत्थरों से बना है। रेत एवं चूने के गारे से चिनाई की गई है। इसके विशाल चबूतरे पर तीन तरफ से सीढ़ियां बनी हैं। इसी चबूतरे पर पीपल
का एक विशाल पेड़ भी है। चबूतरा अष्टकोणीय होने के साथ ऊपर की ओर पतला होता गया है। मंदिर निर्माण के लिए लगभग 2 किलोमीटर चौड़ी नदी में उस समय निर्माताओं ने ठोस चट्टानों का भूतल ढूंढ निकाला था। यह मंदिर और राजिम अब कुंभ के रूप में प्रसिद्ध हो चला है। अब यहां देशभर के साधु-संत इकठ्ठा होते हैं।