महासमुन्द/जी.एन.एन. प्रशिक्षण संस्था की छात्राओं के लिए हेपेटाइटिस बी एवं सी से बचाव हेतु स्क्रीनिंग एवं टीकाकरण शिविर का किया गया आयोजन

महासमुन्द/जी.एन.एन. प्रशिक्षण संस्था की छात्राओं के लिए हेपेटाइटिस बी एवं सी से बचाव हेतु स्क्रीनिंग एवं टीकाकरण शिविर का किया गया आयोजन

महासमुन्द/ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव के निर्देशन में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत तृतीय वर्ष में अध्ययनरत जी.एन.एन. प्रशिक्षण संस्था की छात्राओं के लिए हेपेटाइटिस बी एवं सी से बचाव हेतु स्क्रीनिंग एवं टीकाकरण शिविर का आयोजन किया गया।

इस शिविर का उद्देश्य छात्राओं को हेपेटाइटिस बी संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए टीकाकरण के माध्यम से बचाव सुनिश्चित करना एवं जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम का संचालन जिला नोडल अधिकारी (एन वी एच पी) डॉ. छत्रपाल चन्द्राकर एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती नीलू धृतलहरे के मार्गदर्शन में किया गया।

शिविर में कुल 39 छात्राओं की हेपेटाइटिस बी एवं सी की स्क्रीनिंग की गई। सभी छात्राओं की जांच रिपोर्ट निगेटिव प्राप्त होने के पश्चात उन्हें हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण किया गया। यह आयोजन भा. चि. महाविद्यालय संबद्ध चिकित्सालय, जिला महासमुन्द में संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. बसंत महेश्वरी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

महासमुंद/अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी ने किया जिला जेल का निरीक्षण भोजन व्यवस्था सहित चिकित्सकीय सुविधाओं का लिया जायजा

महासमुंद/अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी ने किया जिला जेल का निरीक्षण भोजन व्यवस्था सहित चिकित्सकीय सुविधाओं का लिया जायजा

महासमुंद/अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी महासमुंद द्वारा 19 मार्च को बेमचा स्थित जिला जेल महासमुंद का निरीक्षण किया गया। माननीय छ0ग0 उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशानुसार एवं छ0ग0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर द्वारा दिए गए निर्देशों के पालन में बेमचा स्थित जिला जेल में अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी के पदाधिकारों द्वारा निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती अनिता डहरिया, पुलिस अधीक्षक श्री प्रभात कुमार, प्राधिकरण की सचिव एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट महासमुंद सुश्री चेतना ठाकुर द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेश के पालन में बंदियो को दी जाने वाली विधिक सहायता, जेल में स्थापित व्हीसी कक्ष, बैरकों की व्यवस्था, जेल बिल्डिंग की व्यवस्था, नए बैरको का निर्माण, मुलाकात कक्ष, विधिक सहायता कक्ष, बंदियों को प्रदत्त सुविधा, टॉयलेट की व्यवस्था, भोजन की गुणवत्ता, बंदियों के कपड़ो की दशा, पेयजल की व्यवस्था के साथ-साथ बंदियों को दी जा रही प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था आदि का भी जायजा लिया।

अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी द्वारा बंदियों से प्रत्यक्ष रूप से जेल में उनके रहन-सहन, दिए जाने वाली औपचारिक सुविधा तथा न्यायालय में लंबित उनके प्रकरण और उनके अधिवक्ता तथा उनके समस्याओं के संबंध में जानकारी ली गई तथा नवनिर्मित अतिरिक्त बैरको का भी जायजा लिया गया। कमेटी के निरीक्षण के दौरान अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सुश्री अक्षा गुप्ता, तहसीलदार श्री जुगल किशोर, जेल अधीक्षक अश्विनी पूजा तिर्की, सहायक जेल अधीक्षक उदय राज गायकवाड़, एलएडीसीएस के अधिवक्ता श्रीमती रीना जैन, डोलामनी पटेल, जेल चिकित्सा अधिकारी महेन्द्र चैधरी, थाना प्रथारी महासमुंद नरेन्द्र राठौर, जेल स्टाफ सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारीगण उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ : आबकारी आरक्षक के 200 पदों पर भर्ती हेतु अंतिम चयन परिणाम जारी 

छत्तीसगढ़ : आबकारी आरक्षक के 200 पदों पर भर्ती हेतु अंतिम चयन परिणाम जारी

आबकारी विभाग के अंतर्गत आबकारी आरक्षक के रिक्त 200 पदों की पूर्ति हेतु सीधी भर्ती के माध्यम से छत्तीसगढ़ व्यवसायिक परीक्षा मण्डल रायपुर (व्यापम) द्वारा 27 जुलाई 2025 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। उक्त भर्ती परीक्षा का अंतिम उत्तर तथा परीक्षा परिणाम व्यापम की वेबसाइट पर 19 सितम्बर 2025 को प्रदर्शित किया गया।

आबकारी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभाग को उपलब्ध कराये गये परीक्षा परिणाम की प्राप्तांक सूची एवं परीक्षा से संबंधित अन्य अभिलेखों के आधार पर विज्ञापन में उल्लेखित वर्गवार, प्रवर्गवार रिक्तियों की संख्या के लगभग तीन गुना अभ्यर्थियों को मेरिट क्रम में चिन्हांकित किया गया। उनके मूल प्रमाण पत्रों (दस्तावेजों) का सत्यापन एवं शारीरिक मापदण्ड की जॉच के लिए बुलाया गया, किन्तु पर्याप्त अवसर दिये जाने के बाद भी सत्यापन में अनुपस्थित एवं शारीरिक मापदण्ड में अपात्र पाये गये कुल 128 अभ्यर्थियों के नामों पर चयन प्रक्रिया में विचार नहीं करने संबंधी 12 मार्च 2026 को पत्र  जारी किया गया। शेष पात्र अभ्यर्थियों में से व्यापम द्वारा जारी मेरिट क्रम के आधार पर वर्गवार, प्रवर्गवार आबकारी आरक्षक पद के कुल 200 पदों के विरूद्ध 200 पदों पर अभ्यर्थियों की उपलब्धता अनुसार चयन सूची तथा 43 अनुपूरक (प्रतीक्षा) सूची जारी गई है।

अधिकारियों ने बताया कि आबकारी आरक्षक पद हेतु छत्तीसगढ़ व्यापम द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा में व्यापम द्वारा जारी मेरिट सूची के आधार पर विभाग में दस्तावेज सत्यापन एवं शारीरिक मापदण्ड में पात्र पाये गये अभ्यर्थियों में से चयन हेतु उपयुक्त पाये गये अभ्यर्थियों की सूची मंडल की वेबसाईट  पर अपलोड कर दी गई है।

 

 

छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित धार्मिक स्वतंत्रता के संरक्षण और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम

छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित धार्मिक स्वतंत्रता के संरक्षण और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम

छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 को विस्तृत चर्चा और विचार-विमर्श के बाद पारित कर दिया गया। यह विधेयक मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य राज्य में धर्मांतरण से संबंधित गतिविधियों को सुव्यवस्थित करना और नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करना है। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि यह विधेयक सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है और यह कानून उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि बदलते समय के साथ कानूनों का अद्यतन आवश्यक हो जाता है। वर्ष 1968 से लागू प्रावधान वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप पर्याप्त नहीं रह गए थे। बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में धर्मांतरण से जुड़े विवादों के कारण सामाजिक तनाव और वर्ग संघर्ष की स्थितियां बनीं, जो कई बार प्रशासन और न्यायालय तक पहुंचीं। ऐसे परिदृश्य में एक स्पष्ट, पारदर्शी और प्रभावी कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की गई, जिससे समाज में बार-बार उत्पन्न होने वाले विवादों को रोका जा सके और समरसता को बनाए रखा जा सके।

विधेयक में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। अब धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष आवेदन देना होगा, जिसके बाद निर्धारित समय-सीमा में सूचना सार्वजनिक की जाएगी और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। जांच के उपरांत ही प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी इच्छा से धर्म चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता रहे, लेकिन यह परिवर्तन किसी दबाव, प्रलोभन या भय के कारण न हो, इसकी जांच अनिवार्य होगी।

इस कानून में धर्मांतरण कराने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए पंजीयन अनिवार्य किया गया है। इसके लिए प्राधिकृत अधिकारी को हर वर्ष विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें धर्मांतरण से संबंधित जानकारी का विवरण शामिल होगा। ग्राम सभा को भी इस प्रक्रिया में भागीदारी दी गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। विवाह को धर्मांतरण का आधार नहीं माना गया है, और विवाह के बाद भी धर्म परिवर्तन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा।

अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए विधेयक में कड़े दंड के प्रावधान किए गए हैं। जिसमें अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए सामान्य अवैध धर्मांतरण पर 7 से 10 वर्ष तक कारावास एवं न्यूनतम 5 लाख रुपए तक जुर्माना, विशेष वर्ग जिसमें महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति, नाबालिग आदि शामिल है, के अवैध धर्मांतरण पर 10 से 20 वर्ष तक कारावास एवं न्यूनतम 10 लाख रुपए जुर्माना, सामूहिक अवैध धर्मांतरण पर 10 वर्ष से आजीवन कारावास एवं न्यूनतम 25 लाख रुपए जुर्माना का प्रावधान है। इसी तरह लोक सेवक द्वारा इस प्रकार का अपराध किया जाता है तो उसे 10 से 20 वर्ष कारावास एवं 10 लाख रुपए तक जुर्माना का प्रावधान किया गया है, वैसे ही धन के माध्यम से धर्मांतरण किए जाने संबंधित व्यक्ति को 10 से 20 वर्ष कारावास एवं 20 लाख रुपए तक जुर्माना का प्रावधान किया गया है। भय या प्रलोभन द्वारा धर्मांतरण पर 10 से 20 वर्ष कारावास एवं न्यूनतम 30 लाख रुपए जुर्माना का भी प्रावधान है। इन अपराधों की पुनरावृत्ति किए जाने पर संबंधित को आजीवन कारावास और पीड़ितों के लिए प्रतिकार व्यवस्था विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है।

इस विधेयक में पीड़ितों के हितों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन दबाव, धोखे या लालच के कारण किया गया पाया जाता है, तो उसे पीड़ित मानते हुए न्यायालय द्वारा क्षतिपूर्ति दिलाने का प्रावधान किया गया है। इससे न केवल पीड़ित को न्याय मिलेगा, बल्कि ऐसे कृत्यों पर प्रभावी रोक भी लगेगी। जांच प्रक्रिया को भी सुदृढ़ किया गया है, जिसमें केवल सक्षम अधिकारी ही मामलों की जांच करेंगे और न्यायालयों को इस अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई के लिए अधिसूचित किया जाएगा। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ेगा।

उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कानून सामाजिक समरसता को मजबूत करेगा, विवादों को कम करेगा और राज्य में एक संतुलित एवं शांतिपूर्ण वातावरण स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा। यह विधेयक धार्मिक स्वतंत्रता को सुरक्षित रखते हुए कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम है।

इस विधेयक में प्रतिकार व्यवस्था के तहत यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन दबाव, प्रलोभन या धोखे से किया गया हो, तो उसे स्पष्ट रूप से पीड़ित माना जाएगा। ऐसे मामलों में न्यायालय आरोपी को पीड़ित को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दे सकता है। इसका भी प्रावधान किया गया है। इस अधिनियम के तहत मामलों की जांच उप निरीक्षक या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाएगी। ऐसे मामलों में प्रमाण का भार आरोपी पर होगा। मामलों की सुनवाई के लिए निर्धारित न्यायालयों को अधिसूचित किया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कानून राज्य में सामाजिक समरसता को मजबूत करेगा तथा विवादों को कम करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि स्पष्ट कानूनी व्यवस्था से अनावश्यक तनाव और संघर्ष की स्थिति से बचा जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह विधेयक पारंपरिक सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के साथ-साथ नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता को भी सुनिश्चित करेगा।

 

पिथौरा: जंघोरा के संगवारी और बरतुंगा ढाबा के पास अवैध शराब भंडारण पर पुलिस की कार्रवाई

पिथौरा। थाना पिथौरा पुलिस द्वारा अवैध शराब के खिलाफ 18 मार्च 2026 को दो अलग-अलग मामलों में सख्त कार्रवाई की गई। एक मामले में ढाबा में अवैध शराब बिक्री करते हुए आरोपी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया, जबकि दूसरे मामले में खेत में लावारिस हालत में भारी मात्रा में शराब बरामद कर अज्ञात आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है।

पहली कार्रवाई के तहत थाना पिथौरा में पदस्थ सउनि बिसालीराम ध्रुव द्वारा टाउन पेट्रोलिंग के दौरान मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम जंघोरा स्थित संगवारी ढाबा में अवैध रूप से शराब बिक्री की जा रही है। सूचना की तस्दीक हेतु हमराह स्टाफ एवं गवाह नरेश यादव व मोहन वासुदेव को साथ लेकर मौके पर पहुंचकर रेड कार्रवाई की गई। मौके पर ढाबा का नौकर बलीराम पटेल (उम्र 53 वर्ष, निवासी जंघोरा) मिला, जिसे मुखबिर सूचना से अवगत कराकर विधिवत तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से एक काले रंग के झोले में रखे 33 पौवा देशी प्लेन शराब (प्रत्येक 180 एमएल, कुल 5 लीटर 940 एमएल, कीमत 2640 रुपये) बरामद किए गए।

आरोपी को शराब रखने एवं बिक्री के संबंध में वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत करने हेतु धारा 94 बीएनएसएस के तहत नोटिस दिया गया, जिस पर उसने बताया कि वह ढाबा में नौकर है तथा उक्त शराब ढाबा संचालक द्वारा बिक्री हेतु रखी गई है। कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर पुलिस द्वारा मौके पर बरामदगी पंचनामा तैयार कर शराब को जप्त कर सीलबंद किया गया, घटनास्थल का नजरी नक्शा तैयार किया गया तथा संपूर्ण कार्रवाई की ऑडियो-वीडियोग्राफी भी की गई। आरोपी का कृत्य धारा 34(2) आबकारी एक्ट का पाए जाने पर देहाती नालसी कायम कर उसे मौके पर गिरफ्तार किया गया। मामले में ढाबा संचालक फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है।

दूसरी कार्रवाई में थाना पिथौरा में पदस्थ प्रधान आरक्षक प्रदीप पाढी द्वारा दिवासाधिकारी ड्यूटी के दौरान मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि बरतुंगा ढाबा/होटल के पास खेत में अवैध रूप से शराब रखकर बिक्री की जाती है।

सूचना की तस्दीक हेतु हमराह स्टाफ आरक्षक क्रमांक 555, 690 तथा गवाह मोहन वासुदेव व नरेश यादव को साथ लेकर मौके पर दबिश दी गई। मौके पर बरतुंगा ढाबा/होटल के बगल खेत में लावारिस हालत में एक काले रंग का थैला मिला। गवाहों के समक्ष थैले की तलाशी लेने पर उसमें 35 पौवा शोले देशी प्लेन शराब (प्रत्येक 180 एमएल, कुल 6300 एमएल, कीमत 2800 रुपये) तथा 03 पौवा 20-20 व्हिस्की (प्रत्येक 180 एमएल, कुल 540 एमएल, कीमत 360 रुपये) कुल 38 पौवा शराब (कीमत 3160 रुपये) बरामद किए गए।

उक्त शराब को लावारिस हालत में बरामद कर विधिवत बरामदगी पंचनामा तैयार किया गया तथा जप्ती पत्रक के माध्यम से गवाहों के समक्ष जप्त कर मौके पर सीलबंद किया गया। आसपास के क्षेत्र में संबंधित आरोपी की तलाश की गई, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इस पर अज्ञात आरोपी के विरुद्ध धारा 34(2) आबकारी एक्ट के तहत देहाती नालसी पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।
दोनों ही मामलों में पुलिस द्वारा वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्रवाई की गई है तथा कायमी की सूचना न्यायालय को प्रेषित की जा रही है। पिथौरा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में अवैध शराब के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

महासमुंद/कलेक्टर ने की मातृ मृत्यु निगरानी एवं शिशु मृत्यु अंकेक्षण की समीक्षा

महासमुंद/कलेक्टर ने की मातृ मृत्यु निगरानी एवं शिशु मृत्यु अंकेक्षण की समीक्षा

महासमुंद/ कलेक्टर श्री विनय लंगेह ने आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक लेकर मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया तथा शिशु मृत्यु अंकेक्षण की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए समयबद्ध, संवेदनशील एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

कलेक्टर श्री लंगेह ने निर्देश दिए कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाले प्रकरणों की समय पर पहचान कर उनका सतत फॉलोअप किया जाए। गर्भावस्था के साथ-साथ पोस्ट प्रेग्नेंसी (डिलीवरी के बाद) केयर पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की जटिलता को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सभी गर्भवती महिलाओं को निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार नियमित जांच, पोषण परामर्श एवं आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाए।

बैठक में कलेक्टर ने विशेष रूप से नर्सिंग केयर की गुणवत्ता पर जोर देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय संवेदना का समावेश अनिवार्य है। उन्होंने निर्देशित किया कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाए और उनकी देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। साथ ही उन्होंने कहा कि मरीजों को विशेष काउंसलिंग की आवश्यकता होती है। अतः इसे व्यवहार में लाएं। भर्ती कक्ष में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के बेहतर परिणाम के लिए समुदाय के साथ सतत भागीदारी भी आवश्यक है। कलेक्टर ने कहा कि एम्बुलेंस सेवा को भी ज्यादा सुलभ और लोगों की पहुंच तक आसानी से उपलब्ध कराया जाएगा।

समीक्षा के दौरान सीएमएचओ डॉ. आई. नागेश्वर राव ने बताया कि पिछले एक वर्ष में जिले में अब तक कुल 09 मातृ मृत्यु के प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिनका विस्तृत ऑडिट किया गया है। कलेक्टर ने सभी मामलों का गहन विश्लेषण करते हुए कारणों की समीक्षा की। जिसमें लगभग 70 से 75 प्रतिशत मामलों में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी प्रमुख कारण रही है। इस पर उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में रेफरल सिस्टम को और मजबूत किया जाए, तथा समय पर उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों में उपचार सुनिश्चित किया जाए।

कलेक्टर श्री लंगेह ने कहा कि प्रत्येक मातृ एवं शिशु मृत्यु के प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए उसका वैज्ञानिक तरीके से अंकेक्षण किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देशित किया कि डेटा आधारित मॉनिटरिंग, नियमित समीक्षा एवं फील्ड स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी श्री आई. नागेश्वर राव, जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती नीलू धृतलहरे, टीकाकरण अधिकारी श्री अरविंद गुप्ता सहित स्वास्थ्य विभाग के बीएमओ, चिकित्सा अधिकारी उपस्थित थे।

महासमुंद/किफायती जन आवास नियम 2025 गरीब एवं मध्यम वर्ग के लिए सस्ती दर, सुरक्षित एवं वैध कॉलोनियों में आवास उपलब्ध कराया जाएगा

महासमुंद/किफायती जन आवास नियम 2025 गरीब एवं मध्यम वर्ग के लिए सस्ती दर, सुरक्षित एवं वैध कॉलोनियों में आवास उपलब्ध कराया जाएगा

महासमुंद/ छत्तीसगढ़ शासन के आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा किफायती जन आवास नियम 2025 को राज्यभर में लागू किया गया है। इस नियम का उद्देश्य गरीब एवं मध्यम वर्ग के लोगों को सस्ती दरों पर व्यवस्थित, सुरक्षित एवं वैध कॉलोनियों में आवास उपलब्ध कराना है।

सहायक संचालक नगर तथा ग्राम निवेश श्री संजू लाल सिंघ ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत छोटे भू-स्वामी भी लाभान्वित होंगे। जिनकी भूमि अधिकतम 2 एकड़ तक है, वे किफायती आवास योजना के तहत कॉलोनी विकसित कर सकेंगे। इसके लिए भूमि का न्यूनतम क्षेत्रफल 2 एकड़ एवं अधिकतम 10 एकड़ निर्धारित किया गया है। वहीं कॉलोनियों में विकसित किए जाने वाले भू-खण्डों का आकार 90 वर्ग मीटर से 150 वर्ग मीटर तक रखा गया है, जिससे मध्यम एवं निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए आवास सुलभ हो सके।

नियम के लागू होने से राज्य में अवैध प्लाटिंग पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा तथा अवैध कॉलोनियों को वैध बनाने की प्रक्रिया भी सरल होगी। इससे आम नागरिकों को कानूनी सुरक्षा प्राप्त होगी और शासन को राजस्व हानि से भी बचाया जा सकेगा।

कॉलोनी विकास के नियमों में व्यावहारिक संशोधन करते हुए छोटे एवं मध्यम भूखण्डों के लिए मुख्य मार्ग की चौड़ाई 7.5 मीटर एवं आंतरिक मार्ग की चौड़ाई 6 मीटर निर्धारित की गई है। साथ ही कॉलोनियों में सामुदायिक भवन, उद्यान, व्यावसायिक क्षेत्र एवं खुले स्थान जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डेवलपर्स को नक्शा स्वीकृति के समय घोषित सभी सुविधाओं का निर्माण अनिवार्य रूप से करना होगा, जिससे आम नागरिकों को किसी प्रकार की धोखाधड़ी से बचाया जा सके।

किफायती जन आवास योजना के तहत अनुमोदन हेतु इच्छुक आवेदकों को निर्धारित प्रारूप में ऑफलाइन आवेदन आवश्यक दस्तावेजों एवं निर्धारित शुल्क के साथ कार्यालय, सहायक संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश, महासमुंद में प्रस्तुत करना होगा। योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी संबंधित कार्यालय में संपर्क कर प्राप्त किया जा सकता है।

महासमुंद/कलेक्टर ने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज का किया निरीक्षण, जून तक पूर्ण करने के निर्देश

महासमुंद/कलेक्टर ने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज का किया निरीक्षण, जून तक पूर्ण करने के निर्देश

महासमुंद/ कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने आज निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज भवन का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी को निर्देश दिए है कि किसी भी स्थिति में मेडिकल कॉलेज भवन का निर्माण कार्य आगामी जून माह तक पूर्ण किया जाए।

इस दौरान अधिकारियों ने जानकारी दी कि मेडिकल कॉलेज भवन का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है तथा शेष कार्य तेजी से किया जा रहा है। इस पर कलेक्टर ने संतोष व्यक्त करते हुए शेष कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने परिसर में निर्माणाधीन विभिन्न घटकों में मेडिकल कॉलेज भवन, डॉक्टर एवं स्टाफ क्वार्टर, गर्ल्स एवं बॉयज़ हॉस्टल, प्रशासनिक कार्यालय तथा फैकल्टी कार्यालय का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने, समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने तथा कार्य में और अधिक गति लाने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को नियमित रूप से स्थल निरीक्षण कर कार्यों की सतत मॉनिटरिंग करने तथा निर्माण एजेंसी को पर्याप्त श्रमिकों और आवश्यक निर्माण सामग्री उपलब्ध रखने के निर्देश दिए, ताकि कार्य निर्धारित समय में पूर्ण हो सके।

निरीक्षण के दौरान ग्राम पंचायत खरोरा की सरपंच श्रीमती वीणा चंद्राकर ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मेडिकल कॉलेज परिसर के बाहर से अप्रोच रोड निर्माण की मांग रखी। इस पर कलेक्टर ने आश्वस्त किया कि उक्त कार्य को शासन स्तर पर शीघ्र पूर्ण कराया जाएगा, जिससे क्षेत्र के किसानों एवं आमजन को आवागमन में सुविधा मिल सके। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव, मेडिकल कॉलेज के एमएस डॉ. बसंत माहेश्वरी, एसडीएम सुश्री अक्षा गुप्ता, सब इंजीनियर श्री लेखराज, साइट इंजीनियर सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। निर्माण कार्य से संबंधित एजेंसियों में एम/एस कल्याण टोल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड तथा ब्रिज एंड रूफ कंपनी (इंडिया) लिमिटेड के प्रतिनिधि श्री रूपेश बसेना एवं श्री आशीष कुमार साहू भी मौजूद रहे।

सरायपाली/ चिरायु दल की तत्परता ने एक और चेहरे की मुस्कान लौटाई

सरायपाली/ चिरायु दल की तत्परता ने एक और चेहरे की मुस्कान लौटाई

सरायपाली मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आई नागेश्वर राव एवं डीपीएम नीलू धृत लहरे जी के निर्देशन एवं डॉ कुणाल नायक बीएमओ तथा बीपीएम शीतल सिंह सरायपाली के सतत मार्गदर्शन में चिरायु दल द्वारा बच्चों का स्वास्थ्य जांच कर उनका निशुल्क इलाज कराया जाता रहा है इसी तारतम्य में में लिमउगुड़ा निवासी गुणनिधि एवं सुजाता निषाद की पुत्री गाम्या निषाद उम्र 5 वर्ष आंगनबाड़ी लिमउगुड़ा में पढ़ती है चिरायु दल के नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान बच्ची में हृदय रोग की आशंका दल द्वारा जताई गई तथा उनके माता-पिता को तुरंत स्थिति से अवगत कराया गया उसके माता-पिता भी तुरंत उसे बाहर ले जाने के लिए तैयार हो गए चिरायु दल द्वारा गाम्या को रायपुर के एक निजी अस्पताल में ले जाकर उसका उच्च जांच कराया गया जिसमें हृदय में कुछ समस्या पाई गई तथा गाम्या का निशुल्क ऑपरेशन भी सफल हुआ यह सभी कार्य 13 दिन के अंदर ही पूर्ण हो गए जांच से लेकर ऑपरेशन 13 दिन के अंदर ही पूर्ण कराए गए बच्ची अभी पूरी तरह से स्वस्थ हैं एवं उसके माता-पिता बहुत ही प्रसन्न है।

इस सफलता के पीछे चिरायु दल के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ अनुपा दास, डॉ राजेश सिंह, डॉ जनक कुमार जेरी, डॉ.जयश्री दूत्कामड़ी फार्मासिस्ट भीष्म प्रताप राणा एएनएम सुनीता साव देवकी पटेल एम‌एलटी परमेश्वर सेन उसत पटेल तथा वाहन चालक रूपेश प्रधान का विशेष योगदान रहा…

महासमुंद/शालाओं में बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने समीक्षा बैठक आयोजित

महासमुंद/शालाओं में बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने समीक्षा बैठक आयोजित

महासमुंद/ शालाओं में बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार लाने हेतु मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री हेमंत नंदनवार की अध्यक्षता में समग्र शिक्षा की जिला स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक जिला पंचायत के सभाकक्ष में आयोजित हुई। जिसमें जिले के सभी विकासखंडों के बीआरसीसी, बीआरपी एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान सीईओ श्री नंदनवार ने प्रत्येक ब्लॉक में संकुल स्तर पर उत्कृष्ट शिक्षकों की टीम गठित करने के निर्देश दिए, ताकि छात्रों के अधिगम स्तर में प्रभावी सुधार किया जा सके। उन्होंने मेंटर शिक्षकों के चयन, छात्रों का अधिगम आधारित वर्गीकरण तथा संकुल समन्वयकों के दायित्व निर्धारण जैसी तैयारियां अप्रैल माह तक पूर्ण करने को कहा, जिससे लक्ष्य महासमुंद विशेष अभियान स्कूल खुलते ही प्रारंभ किया जा सके। उन्होंने सभी बीआरसीसी को गुणवत्तापूर्ण मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने, अपार आईडी एवं यू-डाइस डाटा का शत-प्रतिशत संधारण पूर्ण करने के निर्देश भी दिए।

जिला शिक्षा अधिकारी श्री विजय लहरे ने कक्षा 5वीं एवं 8वीं की केंद्रीकृत परीक्षा के उपरांत उत्तर पुस्तिकाओं का गोपनीयता के साथ समय-सीमा में मूल्यांकन कार्य पूर्ण करने पर जोर दिया।

जिला मिशन समन्वयक श्री रेखराज शर्मा ने इस वर्ष नवोदय चयन परीक्षा में सफल विद्यार्थियों, शिक्षकों, शाला प्रबंधन समितियों एवं पालकों को बधाई देते हुए आने वाले वर्षों में शासकीय विद्यालयों से अधिकतम चयन सुनिश्चित करने हेतु विशेष कार्ययोजना पर बल दिया। उन्होंने स्मार्ट क्लास के नियमित उपयोग की मॉनिटरिंग करने के निर्देश भी दिए, ताकि विद्यार्थियों को तकनीक आधारित रोचक शिक्षा का लाभ मिल सके। इसके साथ ही विशेष आवश्यकता वाले दिव्यांग बच्चों के सटीक चिन्हांकन एवं उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। आगामी शिक्षण सत्र से कक्षा 1 से 8 तक सभी विषयों में गतिविधि आधारित अध्यापन को अनिवार्य करते हुए शिक्षक दैनंदिनी में उसका संधारण सुनिश्चित करने को कहा गया।

बैठक में समग्र शिक्षा के एपीसी श्रीमती विद्या साहू, श्रीमती संपा बोस, श्री सुबोध कुमार तिवारी सहित सरायपाली, बसना, पिथौरा, बागबाहरा एवं महासमुंद के बीआरसीसी, अकाउंटेंट, ऑपरेटर एवं स्पेशल एजुकेटर्स उपस्थित रहे।