महासमुंद आर्थिक कमजोरी न्याय में बाधा नहीं बनेगी, सभी को मिलेगा समान न्याय: एडीजे संघपुष्पा भतपहरी
महासमुंद। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण महासमुंद द्वारा विधिक जागरूकता अभियान के तहत स्थानीय मौहारी भाठा स्थित प्री-मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास में कानूनी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सुश्री संघपुष्पा भतपहरी ने छात्राओं को बाल विवाह, बाल श्रम, दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा तथा महिलाओं एवं बच्चों से जुड़े अपराधों के संबंध में सरल भाषा में कानूनी जानकारी दी। उन्होंने छात्राओं के कानूनी सवालों के जवाब देते हुए कानून के सामान्य प्रावधानों और उनके अधिकारों के बारे में विस्तार से बताया।
इस अवसर पर एडीजे संघपुष्पा भतपहरी ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य सभी के लिए न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना है, ताकि आर्थिक या अन्य किसी अक्षमता के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39(ए) के तहत गरीब एवं समाज के कमजोर वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1987 में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम के तहत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) का गठन किया गया, जो देशभर में कानूनी सहायता कार्यक्रमों के संचालन, मूल्यांकन और निगरानी का कार्य करता है। इसी व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक राज्य में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण तथा प्रत्येक जिले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं तहसील स्तर पर तालुका विधिक सेवा समितियों का गठन किया गया है, जो जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता एवं सलाह उपलब्ध कराते हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना तथा आवश्यकता पड़ने पर विधिक सेवा प्राधिकरण से मिलने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता की जानकारी देना रहा। अधिकार मित्र हरिचंद साहू ने बताया कि जिले में न्यायिक अधिकारियों एवं अधिकार मित्रों द्वारा समय-समय पर ऐसे विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।



