CG मुख्यमंत्री साय राष्ट्रीय मछुवारा जागरूकता सम्मेलन में हुए शामिल सामाजिक विकास का मूलमंत्र है शिक्षा, शिक्षा के बिना है जीवन अधूरा – मुख्यमंत्री श्री साय

CG मुख्यमंत्री साय राष्ट्रीय मछुवारा जागरूकता सम्मेलन में हुए शामिल
सामाजिक विकास का मूलमंत्र है शिक्षा, शिक्षा के बिना है जीवन अधूरा – मुख्यमंत्री श्री साय

शिक्षा के बिना जीवन अधूरा है। शिक्षा केवल नौकरी प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि सफल जीवन का मार्ग है। सामाजिक विकास का मूलमंत्र शिक्षा है। चाहे जीवन जीने की कला हो, व्यापार हो, कृषि हो या कोई अन्य क्षेत्र — हर क्षेत्र में सफलता के लिए शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित बलबीर सिंह जुनेजा इनडोर स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय मछुवारा जागरूकता सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।

 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार प्रारंभ से ही राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। राज्य गठन के समय जहां केवल एक मेडिकल कॉलेज हुआ करता था, वहीं आज प्रदेश में लगभग 15 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं। इसी तरह हमने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संस्थान जैसे आईआईटी, ट्रिपल-आईटी, आईआईएम, लॉ यूनिवर्सिटी, एम्स और सिपेट जैसे संस्थान छत्तीसगढ़ में स्थापित किए हैं, जिनका लाभ राज्य के स्थानीय विद्यार्थियों को मिल रहा है।

रायपुर : सामाजिक विकास का मूलमंत्र है शिक्षा, शिक्षा के बिना है जीवन अधूरा – मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में नालंदा परिसर के निर्माण का कार्य चल रहा है, जिससे युवाओं को दिशा और अवसर दोनों मिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज समाज को संगठित होने की आवश्यकता है, क्योंकि संगठित समाज से ही राष्ट्र मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि नशाखोरी समाज के विकास में बाधक है और इस बुराई से दूर रहना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने समाज से नशा मुक्ति का संकल्प लेने की अपील की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने मत्स्य संपदा योजना प्रारंभ की, जो मछुआरों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध हुई है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में गंगरेल बांध ठेका प्रथा को समाप्त कर पुनः डुबान क्षेत्रों के किसानों को मत्स्य पालन की अनुमति प्रदान की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार मछुआ समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मत्स्य पालन के क्षेत्र में अनेक योजनाएँ प्रारंभ की गई हैं। प्रदेश का पहला एक्वा पार्क हसदेव बांगो जलाशय में लगभग ₹37 करोड़ की लागत से निर्मित किया जा रहा है। यह एक्वा पार्क मछली उत्पादन, प्रोसेसिंग, निर्यात और टूरिज़्म— इन चारों क्षेत्रों में नए अवसर सृजित करेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में यहाँ 800 केजों में मत्स्य पालन किया जा रहा है, जिससे अनेक पंचायतों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह हमारे मछुआ भाइयों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने राष्ट्रीय मछुवारा संघ के सभी पदाधिकारियों और देशभर से पधारे मेहनतकश मछुआ भाइयों-बहनों को राष्ट्रीय सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी निषाद ने कहा कि निषाद समाज का गौरवशाली इतिहास और परंपरा रही है। हमारे इतिहास और परंपरा के बारे में नई पीढ़ी को बताना और सिखाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने सदैव निषाद समाज को अग्रणी स्थान दिया है।
उन्होंने बताया कि जब अयोध्या में प्रभु श्री रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण किया गया, तब उसी के सामने सरयू नदी के तट पर निषाद राज मंदिर का निर्माण कर समाज को उचित सम्मान दिलाने का कार्य प्रधानमंत्री श्री मोदी ने किया है। इस हेतु निषाद समाज सदैव उनका ऋणी रहेगा।

उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि निषाद समाज अत्यंत मेहनतकश और परिश्रमी समाज है। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति में निषाद समुदाय का योगदान अनुकरणीय है।

इस अवसर पर विधायक श्री सुनील सोनी, छत्तीसगढ़ मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री भरत मटियारा, सहित प्रदेश और अन्य राज्यों से आए समाज के पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

पिथौरा: आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मंडल सांकरा, खण्ड पिथौरा में शस्त्र पूजन एवं भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया।

पिथौरा: आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मंडल सांकरा, खण्ड पिथौरा में शस्त्र पूजन एवं भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर सांकरा मंडल के विभिन्न ग्रामों से आए सैकड़ों स्वयंसेवकों ने भाग लिया। यह क्षण केवल संघ के लिए ही नहीं, अपितु पूरे नगर एवं समाज के लिए भी गर्व का विषय बना। स्वयंसेवकों के घोष की ताल पर कदम से कदम मिलाते हुए नगर का वातावरण राष्ट्रभक्ति से सराबोर हो उठा।

पथ संचलन नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। मार्ग में जगह-जगह महिलाओं, पुरुषों एवं बच्चों द्वारा पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। स्वयंसेवकों की अनुशासित चाल, एक समान गणवेश ने नगरवासियों को प्रभावित किया।

संचलन के उपरांत आयोजित सभा में मुख्य अतिथि के रूप में राजेश साव (पत्रकार एवं साहू समाज परिक्षेत्र सचिव), मुख्य वक्ता के रूप में गुलाब ठाकुर (जिला महाविद्यालयीन कार्य प्रमुख) तथा बोधीराम चौधरी (खण्ड संघ चालक) मंचासीन रहे।

मुख्य अतिथि राजेश साव ने कहा कि “संघ का शताब्दी वर्ष राष्ट्र निर्माण में संघ के सतत कार्य, अनुशासन और समर्पण का प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि संघ की प्रेरणा से समाज में एकता, संस्कार एवं राष्ट्रभक्ति की भावना निरंतर सशक्त हो रही है।

मुख्य वक्ता गुलाब ठाकुर ने अपने उद्बोधन में ‘संघ पंच परिवर्तन’ तथा संघ के समृद्ध इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संघ शताब्दी वर्ष में सात विशेष कार्यों को लेकर समाज में व्यापक जनजागरण का अभियान चला रहा है ।

उन्होंने बताया कि संघ भारत में सांस्कृतिक जागरण और सामाजिक सद्भाव के लिए निरंतर कार्यरत है। संघ के विभिन्न प्रेरणादायी संगठन — विद्या भारती, सेवा भारती, ग्राम भारती, क्रीड़ा भारती, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, विश्व हिंदू परिषद, दुर्गा वाहिनी एवं राष्ट्रीय सेविका समिति जैसे संगठनों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आज तक के 100 वर्षों में संघ ने सामाजिक कुरीतियों को दूर करने, युवाओं को राष्ट्रनिर्माण के लिए प्रेरित करने और समाज को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शताब्दी वर्ष का यह उत्सव संघ की इसी गौरवशाली यात्रा का प्रतीक है।

इस कार्यक्रम में राजिम विभाग से नंद कुमार साहू, जिला के विवेक दीक्षित एवं पिथौरा खण्ड की कार्यकारिणी उपस्थित रही, जिनमें टिकेंद्र साहू, कृष्ण कुमार शर्मा, चंद्रशेखर नायडू, प्रकाश चंद्र वर्मा शामिल थे एवं सहभागी मंडल मेमरा, सलडीह, परसवानी, भगतदेवरी के स्वयंसेवक एवं नगर के अनेक गणमान्य नागरिक एवं मातृशक्ति की उपस्थिति रही।

यह जानकारी पिथौरा खण्ड कार्यवाह प्रेमसागर साहू, हितेश प्रधान एवं सांकरा मंडल कार्यवाह कमलेश डडसेना द्वारा दी गई।

महासमुंद : हादसे में राजनीतिक हलचल, विधायक ने जताई हत्या की आशंका — बोले, ‘यह सामान्य एक्सीडेंट नहीं ’ जनपद उपाध्यक्ष के पति की सड़क हादसे

CG : महासमुंद हादसे में राजनीतिक हलचल, विधायक ने जताई हत्या की आशंका — बोले, ‘यह सामान्य एक्सीडेंट नहीं’जनपद उपाध्यक्ष के पति की सड़क हादसे में मौत, विधायक बोले—यह एक्सीडेंट नहीं हत्या है जिले में रविवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने जनपद पंचायत महासमुंद की उपाध्यक्ष हुलसी चंद्राकर के परिवार को गहरे शोक में डाल दिया। नेशनल हाईवे-353 पर साराडीह मोड़ के पास हुई इस दुर्घटना में उनके पति जितेंद्र चंद्राकर (46 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि स्कूटी पर सवार उनके साथी अशोक साहू गंभीर रूप से घायल हो गए।

जानकारी के अनुसार, बेलसोंड़ा निवासी जितेंद्र चंद्राकर और उनके मित्र अशोक साहू रविवार शाम स्कूटी से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान महासमुंद की ओर से तेज रफ्तार में आ रही टाटा सफारी (क्रमांक CG 04 QH 5836) ने स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों सड़क पर दूर जा गिरे और स्कूटी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल 108 एंबुलेंस की मदद से दोनों को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने जितेंद्र चंद्राकर को मृत घोषित कर दिया।

घटना के बाद क्षेत्र में शोक और आक्रोश दोनों का माहौल है। ग्रामीणों ने बताया कि हादसे की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के घरों से लोग बाहर निकल आए। मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई।विधायक ने उठाए सवाल, कहा—यह सुनियोजित हत्या हो सकती है घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा अस्पताल पहुंचे। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह महज सड़क हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या हो सकती है। विधायक ने दावा किया कि मृतक की किसी अमर अग्रवाल नामक व्यक्ति से पुरानी रंजिश थी, और यह घटना उसी विवाद से जुड़ी हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई उजागर की जाए।

ग्रामीणों का आक्रोश, सफारी पर पथराव हादसे की खबर फैलते ही बेलसोंड़ा और आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने आक्रोश में आकर टाटा सफारी पर पथराव कर दिया, जिससे वाहन के शीशे टूट गए। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को नियंत्रित किया और दोनों वाहनों को जब्त कर सिटी कोतवाली थाना पहुंचाया।

चालक ने किया सरेंडर, पुलिस जांच में जुटी इस बीच, हादसे में शामिल टाटा सफारी चालक अग्रवाल नामक व्यक्ति ने खुद को सिटी कोतवाली पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया है। उसने प्रारंभिक पूछताछ में बताया कि घटना अनजाने में हुई। हालांकि पुलिस इस पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही है।

अस्पताल में उमड़ा जनसैलाब
दुर्घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल में विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, नगर पालिका उपाध्यक्ष देवीचंद राठी, पूर्व अध्यक्ष राशि त्रिभुवन महिलांग, और बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि व ग्रामीण पहुंचे। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। बताया गया कि हुलसी चंद्राकर भाजपा से जनपद पंचायत महासमुंद की उपाध्यक्ष हैं और पूर्व में ग्राम पंचायत बेलसोंड़ा की उपसरपंच रह चुकी हैं।

पुलिस ने कहा—जांच के बाद ही स्पष्ट होगा सच

इस पूरे मामले पर पुलिस का कहना है कि फिलहाल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और वाहन की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह साधारण हादसा था या किसी षड्यंत्र का परिणाम। पुलिस ने घटनास्थल से वाहन के टुकड़े और CCTV फुटेज भी जब्त किए हैं। फिलहाल बेलसोंड़ा गांव में शोक की लहर है और लोग जितेंद्र चंद्राकर को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं।

CG बसना: दो साल पुराने आधार कार्ड की चौंकाने वाली कहानी भारतीय डाक विभाग का क्या है कनेक्शन

 

CG NEWS बसना/महासमुंद।भारतीय डाक विभाग की लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने आम नागरिकों के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत बरतियाभांठा के सामने सड़क किनारे एक महत्वपूर्ण दस्तावेज — आधार कार्ड — फाड़कर फेंका हुआ मिला। यह वही आधार कार्ड था, जो 2 जुलाई 2023 को हेड ऑफिस से डिस्पैच हुआ था, परंतु 26 सितंबर 2025 की रात गांव के एक युवक को लावारिस हालत में पड़ा हुआ दिखाई दिया। इस घटना ने न केवल डाक विभाग की जिम्मेदारी पर प्रश्नचिह्न लगाया है, बल्कि दस्तावेज़ सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा कर दी है।

ग्राम बरतियाभांठा निवासी युवक ने जब दस्तावेज़ देखा तो उस पर लिखे नाम से पता चला कि यह करुणाकर के बेटे का आधार कार्ड है। युवक ने तत्काल करुणाकर उपाध्याय को फोन कर इसकी जानकारी दी। करुणाकर जब मौके पर पहुंचे तो देखा कि आधार कार्ड फाड़ा हुआ था और कीचड़ में सना पड़ा हुआ था। यह देखकर वे हैरान रह गए, क्योंकि यह वही दस्तावेज था जिसका वे महीनों से इंतज़ार कर रहे थे।

करुणाकर उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे का नया आधार कार्ड आवेदन मई 2023 में किया था, जिसके बाद जुलाई में डाक विभाग से डिस्पैच होने की सूचना मिली थी। लेकिन दस्तावेज न मिलने पर उन्होंने कई बार डाकघर में पूछताछ की, जहां हर बार उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि “आपका कार्ड जल्द पहुंच जाएगा।” अब जब वही कार्ड दो साल दो महीने बाद फटा और फेंका हुआ मिला, तो पूरे गांव में डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जताई जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज, जो किसी व्यक्ति की पहचान, बैंकिंग, राशन, शिक्षा और सरकारी योजनाओं से सीधे जुड़े होते हैं, उन्हें इतनी लापरवाही से हैंडल करना एक गंभीर लापरवाही है। किसी दस्तावेज का फाड़कर फेंका जाना न केवल विभागीय चूक है, बल्कि यह नागरिक अधिकारों से खिलवाड़ भी है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस घटना की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर आधार जैसे संवेदनशील दस्तावेज़ इस तरह खुले में पड़े मिल सकते हैं, तो यह किसी की भी निजी जानकारी के दुरुपयोग की आशंका को जन्म देता है।

करुणाकर ने बताया कि वे अब डाक विभाग के उच्चाधिकारियों को शिकायत पत्र भेजने की तैयारी में हैं। उन्होंने कहा —

> “हम आम लोग सरकारी संस्थाओं पर भरोसा करते हैं, लेकिन जब हमारे पहचान-पत्रों के साथ इस तरह का व्यवहार होता है तो विश्वास डगमगा जाता है। अगर कोई गलत हाथों में यह दस्तावेज़ चला जाता, तो इसका दुरुपयोग भी हो सकता था।”

 

डाक विभाग के सूत्रों का कहना है कि अगर पत्र या पार्सल बीच में क्षतिग्रस्त हो जाए या खो जाए, तो इसकी जानकारी संबंधित शाखा से दी जानी चाहिए थी। फिलहाल विभाग ने मामले की जानकारी लेने और जांच शुरू करने की बात कही है।

यह पूरा मामला इस ओर इशारा करता है कि तकनीकी युग में भी सिस्टम की लापरवाही और निगरानी की कमी से आम नागरिकों को कितनी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। एक ओर सरकार डिजिटल इंडिया की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे उदाहरण लोगों के भरोसे को कमजोर करते हैं।

इस घटना ने ग्राम बरतियाभांठा और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बना दिया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषी कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई अन्य नागरिक ऐसी स्थिति का शिकार न हो।

प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना से बदल रही ग्रामीणों की जिंदगी पिंकी मुद्रा लोन से बनी आत्मनिर्भर

पिंकी ने अपने किराना व्यवसाय को आगे बढ़ाने का सपना देखा। इस सपने को साकार करने के लिए उन्होंने पीएम मुद्रा लोन के तहत 70 हजार रुपये का स्वयंसिद्धा लोन लिया और अपनी दुकान का विस्तार किया। दुकान बड़ी होने से न केवल उनकी आय बढ़ी, बल्कि ग्राहकों का विश्वास और पहुँच भी मजबूत हुई और वह आर्थिक विकास करने साथ ही आत्मनिर्भर बन गई।

प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक नई उम्मीद जगाई है। इस योजना के जरिए महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे अपने व्यवसाय की शुरुआत कर अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड की ग्राम पंचायत मनोरा की रहने वाली श्रीमती पिंकी सोनी बिहान महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें शासन की योजनाओं की जानकारी मिली और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाने का अवसर प्राप्त हुआ।

कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध
पिंकी सोनी कहती हैं “समूह से जुड़ने के बाद मेरे जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं की जानकारी मिली और आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी हासिल हुआ।” प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना का उद्देश्य स्वयं .सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। यह योजना स्वयं .सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराकर सक्षम बनाना है।

बिहान महिला स्व सहायता समूह से मिली मदद प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का लक्ष्य छोटे व्यवसायों और उद्यमियों के बीच उद्यमशीलता गतिविधियों को बढ़ावा देना है। यह योजना विभिन्न चरणों में व्यवसायों को पूरा करने और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार वित्तीय सहायता प्रदान करता है। इस योजना का लाभ लेकर आज पिंकी जी अपने परिवार की मजबूत आर्थिक सहारा बनी हैं। उनकी मेहनत और बिहान महिला स्व-सहायता समूह से मिली मदद ने उन्हें आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाया है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को धन्यवाद भी दिया हैं

CG: सिंघोड़ा में फिल्मी अंदाज में धरपकड़: उड़ीसा से नागपुर ले जा रहे थे गांजा, एक्सीडेंट के बाद दबोचे गए दो तस्कर

 

 

CG news महासमुंद/सिंघोड़ा।
अवैध मादक पदार्थ तस्करी पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अंतरराज्यीय गांजा तस्करों को गिरफ्तार किया है। घटना के दौरान आरोपी तेज रफ्तार में भागते हुए अपनी कार को ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा बैठे, जिससे दोनों घायल हो गए। पुलिस ने कार से 10 किलो अवैध गांजा बरामद किया है।

जानकारी के अनुसार, थाना सिंघोड़ा में पदस्थ सउनि नीलाम्बर सिंह नेताम हमराह आरक्षक क्रमांक 799, 517, 785, 933 के साथ 04 अक्टूबर 2025 को शासकीय बोलेरो वाहन (क्रमांक CG03A1086) से देहात पेट्रोलिंग एवं अवैध मादक पदार्थ रेड कार्यवाही हेतु निकले थे।

ग्राम चिवराकुटा पहुंचने पर सुबह 08:30 बजे मुखबिर से सूचना मिली कि एक सफेद आई-10 कार (MH 01 BG 6629) में दो व्यक्ति उड़ीसा से छत्तीसगढ़ की ओर गांजा लेकर आ रहे हैं। सूचना पर SDOP सरायपाली को अवगत कराया गया और एनएच-53 गनियारीपाली चौक पर नाकाबंदी की गई।

कुछ समय बाद वही कार दिखाई दी, जिसे रोकने पर आरोपियों ने तेज रफ्तार से भगा दिया। पीछा करने पर कार ग्राम सिंघोड़ा बाजार चौक के पास खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया।
इस हादसे में चालक अब्दुल नदीम के दोनों हाथों में चोट आई, जबकि साथी मोहम्मद खतीफ की कमर में चोट पहुंची। दोनों को पुलिस ने मौके पर ही पकड़ लिया।

पूछताछ में दोनों ने बताया कि कार की डिक्की में सफेद बोरी में भरा 10 किलोग्राम गांजा रखा है, जिसे वे अंगुल (उड़ीसा) से नागपुर (महाराष्ट्र) ले जा रहे थे।
मौके पर गवाहों की उपस्थिति में तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की गई। पुलिस ने आरोपियों से —
10 किलो अवैध गांजा (कीमत ₹1,50,000)
आई-10 कार (कीमत ₹1,00,000)
दो मोबाइल फोन (कीमत ₹20,000)
कुल ₹2,70,000 की संपत्ति जप्त की है।

आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई —
1️⃣ अब्दुल नदीम पिता अब्दुल रहीम (29 वर्ष), निवासी यशोधरा नगर, लालझंडा चौक, थाना यशोधरा नगर, नागपुर (महाराष्ट्र)
2️⃣ मोहम्मद खतीफ पिता अब्दुल गफूर (26 वर्ष), निवासी कालाझंडा मोमीनपुरा, नागपुर (महाराष्ट्र)।

दोनों के खिलाफ धारा 20(ख)(ii)(b) नारकोटिक्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया गया है।
संपूर्ण कार्रवाई सउनि नीलाम्बर सिंह नेताम के नेतृत्व में की गई, जिसमें पुलिस स्टाफ और स्थानीय गवाहों का सहयोग रहा।

बसना:  मामा-भाँचा मेला 6 अक्टूबर को, गूंजेगी श्रद्धा की घंटियां ऋषि-मुनियों की तपोभूमि पर उमड़ेगा भक्तों का सैलाब

संवाददाता अनुराग नायक बसना:  मामा-भाँचा मेला 6 अक्टूबर को, लोहडीपुर में गूंजेगी श्रद्धा की घंटियां ऋषि-मुनियों की तपोभूमि पर उमड़ेगा भक्तों का सैलाब आस्था, परंपरा और अध्यात्म का अनूठा संगम एक बार फिर देखने को मिलेगा। सदियों से चली आ रही मान्यता के अनुसार, श्री मामा-भाँचा मेला इस वर्ष दिनांक 06 अक्टूबर 2025, दिन सोमवार को बड़े धूमधाम से आयोजित किया जा रहा है। यह ऐतिहासिक मेला भंवरपुर से 5 किलोमीटर दूर, उत्तर दिशा में स्थित लोहढ़ीपुर के घने जंगलों में स्थित मामा-भाँचा पहाड़ पर हर साल कुंवर (शरद पूर्णिमा) के अवसर पर मनाया जाता है।

किवदंतियों के अनुसार, यह स्थल न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि इसे ऋषि-मुनियों की तपोभूमि भी कहा गया है। यहां मुनि गुप्ता, बारस पीपर, भीम बांध, ऋषि सरोवर, बारह सीला (प्रखर), लंबी सुरंग, सीता बाबा और मामा-भाँचा मंदिर जैसे पवित्र स्थल मौजूद हैं।

हर वर्ष की तरह इस बार भी यहां साँईं बाबा मंदिर के पास हरि कीर्तन और श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में मेले को लेकर उत्साह चरम पर है। पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में तब्दील हो चुका है — जगह-जगह साफ-सफाई, रोशनी और व्यवस्था के कार्य पूरे किए जा चुके हैं।

यज्ञकर्ता समिति में रूपेश पंडा (8720824452), ताराचंद पंडा (8120258991) और ऋषिकेश वैष्णव (6261245271) के नेतृत्व में तैयारियां की जा रही हैं।सहयोगी: देवकी पुरुषोत्तम दीवान (कृषि सभापति महासमुंद),महेश्वर प्रीतम सिंह सिदार (जनपद सदस्य बसना),

हरकुमार पटेल (समिति प्रबंधक उडे़ला),
संतराम निषाद (अध्यक्ष कृषि साख सहकारी समिति उडे़ला),
केवती हरियंद पटेल (सरपंच ग्राम पंचायत लोढ़ीपुर),
लीलामणि देवकुमार सिदार (पूर्व सरपंच ग्राम पंचायत लोढ़ीपुर)।
आयोजक:
समस्त ग्रामवासी लोढ़ीपुर

 

छत्तीसगढ़ -/ मामा भाचा मेला तो सब जानते है लेकिन क्या है इसके पीछे का कारण की मामा भाचा और मुनि पहाड़ पर्वत के रूप में परिवर्तित हो गए कुछ सालों तक प्रेमी जोड़ा भागने को लेकर भी यह स्थान मशहूर हुवा था ?

छत्तीसगढ़ में एक से एक जगह है और हर जगह का अलग अलग मान्यताएं है आस्था इतना ज्यादा है कि आज भी सालों बीत जाने के बाद भी आस्था पर कोई कमी नही आई है बात कर रहे है हम छत्तीसगढ़ के महासमुन्द जिले अंतर्गत आने वाले बसना ब्लॉक के भंवरपुर क्षेत्र में आता है खोखसा लोहड़ी पुर और आस पास के कई गांव के मध्य एक पहाड़ है जिसका नाम है मामा भाचा जंगल यहां पर मामा भाचा के नाम से हर साल

 

सरदपूर्णिमा पर यहाँ मेला लगता है कई हजार के संख्या में लोग यहां आते है रात भर कार्यक्रम और पूजा पाठ होता है रात को लोग पहाड़ मे चढते है चांदनी रात में पहाड़ों पर हजारो के संख्या में दिखाई देते है बताया तो यह भी जाता है कि मामा भाचा जंगलों में भालू और अन्य हिंसक जानवर भी है लेकिन इस दिन ये दिखाई नही देते और आज तक किसी को नुकसान नही पहुचाया यह बात तो सभी को पता है लेकिन मामा भाचा नाम कैसे विख्यात हुवा यह एक बड़ा सलाल है बता दें आस पास के गांव वाले मिलकर इस मेले को आयोजीत करते है और कानून व्यवस्था बनाने पुलिस प्रशासन का भी सहायता मिलता है ।

स्थानीय लोगो मे कई सालों में यह मान्यता है की इस जंगल में तीन पहाड़ हैं, जिसे मामा, भांजा और शीत बाबा के रूप में जाना जाता है यहां के लोगों के मुताबिक ये तीनों कभी आदमी थे, लेकिन बाद में वे पहाड़ पर्वत डोंगरी के रूप में परिवर्तित हो गए. लोग इन्हें देवओ के रूप में पूजते हैं और हर साल यहां सरदपूर्णिमा पर बड़े मेले का आयोजन किया जाता है हालांकि, इस घटना का कहीं कोई लिखित प्रमाण नहीं है,

 

लेकिन गांववालों की वर्षों पुरानी मान्यताएं इस जंगल को भी हरा-भरा किए हुए हैं और आस्था आज भी जीवित है ।

मामा-भांजा जंगलों के आस पास रह रहे ग्रामीणों के अनुसार कई सालों पहले मामा-भांजा दो शिकारी खोकसा गांव के पास अपनी फसल की रखवाली कर रहे थे वहीं पर, शीत बाबा जंगली सुअर का रूप धारण कर मामा-भांजा के खेत में लगी फसलों को खाने लगे कहा जाता है की शिकारी मामा-भांजा जंगली सुअर का पीछा करते हुए एक स्थान पर पहुंचे, जैसे ही मामा-भांजा ने जंगली सुअर को मारना चाहा तो वह अपने अपने असली रूप (शीत बाबा) के रूप में आ गए बाबा ने मामा-भांजा से कहा कि तुम शिकारी का काम छोड़ दो और हम तीनों यहां एक साथ रहेंगे बाबा ने मामा-भांजा से कहा कि लोग हमारी पूजा करेंगे और मामा-भांजा का नाम लेकर कोई मनोकामना मांगेगा तो उसकी मनोकामना पूरी होगी. फिर तीनों अलग-अलग पहाड़ के रूप में हमेशा के लिए वहीं खड़े हो गए और यह मान्यता आज भी चली आ रही है

गौरतलब है कि ये मेला केवल 24 घंटे ही लगता है जिसमें शामिल होने बहुत दूर दूर से लोग बड़ी संख्या मेंआते हैं जिस जगह ये मेला लगता है उस जगह को प्राचीन काल के ऋषियों की तपोभूमि कहते हैं जहाँ आज भी ऋषियों के कुछ अवशेष मौजूद हैं जैसे ऋषि सरोवर ,ऋषि गुफा, मुनि धुनि ,वराह शीला, चूल्हा ,बारस पीपल ,भीम बाँध इत्यादि बड़े बुजुर्ग बताते हैं के यहाँ डोंगरी के अंदर में झरना है झील के जैसा छोटा तालाब है हरा भरा मैदान है जो हर समय ठण्ड और ताजगी से भरा रहता है ।

 

यहाँ शिव का प्राचीन मंदिर है और लंबी लंबी अथाह सुरंगें हैं जहाँ पत्थरों को हाथ से रगड़ने पर आज भी भभूत मिल जाती है यही नहीं इस डोंगरी पर आयुर्वेदिक औषधियों का भी भंडार है. जहाँ आज भी वैद्यो को कई दुर्लभ प्रजाति की औषधियों तथा जड़ी बुटी के पौधे आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं और डोगरी के बाहर विशाल जलाशय है जो बारह महीने पानी से भरा रहता है. जो कि नहाने वाले को ताजगी से भर देता है कहते हैं की इस जगह पर रात को जाने और डोंगर पर चढ़कर मामा भांचा मंदिर के दर्शन कर आशिर्वाद लेने वाले को बहुत ही आत्मिक शान्ति की अनुभूति होती है.

 

चांदनी रात में बिना किसी लाइट के इस पहाड़ी की बड़ी बड़ी चट्टानों को पार करते हुए इसकी चोटी पर चढ़ना किसी रोमांच से कम नहीं है. और चोटी पर चढ़कर वहां से आस पास के क्षेत्रो का नजारा तो रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है ये मेला इसलिए भी प्रसिद्ध है क्योंकि इस मेले से हर वर्ष अनेक प्रेमी युगल अन्यत्र पलायन कर जाते हैं जिसे छत्तीसगढ़ी भाषा में उढ़रिया भाग जाना कहते हैं और इसलिए इस मेले को जंगल में मंगल भी कहते हैं.

 

बता दें कि सालों पहले मामा भाचा मेला से प्रेमी जोड़ा भागने का भी प्रचलन जोरो था ऐसा किसी के पास अभी पुख्ता प्रमाण तो नही है लेकिन सालों पहले मामा भाचा मेला से प्रेमी जोड़ा भागने का अफवाह हर साल रहता था लेकिन अब ऐसा सुनने को नही मिलता है ।

सरकार की उदासीनता..

इस जगह को ऐतिहासिक स्थल घोषित कर इसका संरक्षण करने तथा यहाँ सुविधाएं विकसित करने की मांग आस पास की जनता के द्वारा सरकार से कई वर्षों से की जा रही है तथा हर वर्ष मेले के वक़्त आस पास के जन प्रतिनिधियों को यहां मुख्य अतिथि के रूप में बुलाकर उनसे भी विनती की जाती है. पर उसे आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिला है यदि यहाँ जाने हेतु पहुँच मार्ग तथा ऊपर चढ़ने हेतु सीढ़ियों का निर्माण करवा दिया जाए तो यहाँ पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं जो इस क्षेत्र के विकास में काफी मदद गार हो सकती हैं

 

कैसे पहुंचे.

ये जगह जिला मुख्यालय महासमुंद से 130 KM ब्लाक मुख्यालय बसना से 20 KM जबकि भंवरपुर से 5 KM की दुरी पर उत्तर में स्थित है वैसे तो इस जगह पर पंहुचने के लिए चारों तरफ से रास्ता है मगर भंवरपुर से बनडबरी पतरापाली जाने वाले रास्ते पर तथा भंवरपुर से बरतियाभाँटा होते हुए संतपाली जाने वाले रास्ते पर जाना ज्यादा बेहतर है भंवरपुर लोहड़ीपुर मार्ग जो थोडा दुर्गम तो है मगर ठीक है.

छत्तीसगढ़ को मिला पहला राष्ट्रीय राजमार्ग टनल : सिर्फ 12 महीनों में निर्माण कार्य पूरा, विकास की राह में ऐतिहासिक उपलब्धि

छत्तीसगढ़ को मिला पहला राष्ट्रीय राजमार्ग टनल : सिर्फ 12 महीनों में निर्माण कार्य पूरा, विकास की राह में ऐतिहासिक उपलब्धि रायपुर : छत्तीसगढ़ को मिला पहला राष्ट्रीय राजमार्ग टनल : सिर्फ 12 महीनों में निर्माण कार्य पूरा, विकास की राह में ऐतिहासिक उपलब्धि
छत्तीसगढ़ को मिला पहला राष्ट्रीय राजमार्ग टनल : सिर्फ 12 महीनों में निर्माण कार्य पूरा, विकास की राह में ऐतिहासिक उपलब्धि
प्रदेश की प्रगति की रीढ़ है सड़क अधोसंरचना, 2.79 किमी लंबी सुरंग बनेगी विकास की नई राह – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

प्रदेश की प्रगति की रीढ़ है सड़क अधोसंरचना, 2.79 किमी लंबी सुरंग बनेगी विकास की नई राह – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
प्रदेश की प्रगति की रीढ़ है सड़क अधोसंरचना, 2.79 किमी लंबी सुरंग बनेगी विकास की नई राह – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय प्रदेश की प्रगति की रीढ़ है सड़क अधोसंरचना, 2.79 किमी लंबी सुरंग बनेगी विकास की नई राह – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
छत्तीसगढ़ ने आज बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने सिर्फ 12 महीनों में राज्य की पहली राष्ट्रीय राजमार्ग सुरंग (लेफ्ट हैंड साइड) का निर्माण कर लिया है। यह ब्रेकथ्रू इंजीनियरिंग की दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ आमजन के जीवन और राज्य के आर्थिक विकास को नई दिशा देने वाला है।

2.79 किलोमीटर लंबी यह टनल रायपुर–विशाखापट्टनम आर्थिक गलियारे (NH-130CD) का हिस्सा है, जिसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अभनपुर परियोजना कार्यान्वयन इकाई द्वारा निर्मित किया जा रहा है। यह ट्विन ट्यूब टनल जब पूरी तरह तैयार होगी, तो रायपुर से विशाखापट्टनम तक यात्रा का समय काफी कम होगा, व्यापार एवं उद्योग को गति मिलेगी और छत्तीसगढ़, ओडिशा तथा आंध्र प्रदेश के बीच संपर्क और मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह टनल समृद्ध और सशक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क एवं परिवहन अधोसंरचना का विकास प्रदेश की प्रगति की रीढ़ है। इस टनल से छत्तीसगढ़ में पर्यटन और सामाजिक–आर्थिक जुड़ाव के नए अवसर भी खुलेंगे।

उन्होंने केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की टीम को इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत विजन के अनुरूप यह परियोजना आने वाली पीढ़ियों के लिए भी विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।

महतारी वंदन योजना की 20वीं किस्त जारी : 65 लाख महिलाओं के बैंक खातों में पहुँचे 606.94 करोड़ रुपये

 

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की ‘मोदी की गारंटी’ के तहत शुरू की गई महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ की बहनों के जीवन में नई रोशनी लाई है। यह योजना केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने वाला ऐतिहासिक कदम है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने आज जगदलपुर में बस्तर दशहरा एवं मुरिया दरबार के अवसर पर माई दंतेश्वरी की धरती से राज्य की 64 लाख 94 हजार 768 हितग्राही महिलाओं को महतारी वंदन योजना की 20वीं किस्त के रूप में 606 करोड़ 94 लाख रुपये की राशि अंतरित करते हुए यह बात कही।

केंद्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी का सपना है कि हर महिला सशक्त और आत्मनिर्भर बने तथा देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में बराबरी की भागीदारी निभाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने जिस पारदर्शिता और प्रतिबद्धता से इस योजना को लागू किया है, वह पूरे देश के लिए एक आदर्श है। यह योजना आने वाले वर्षों में प्रदेश के सतत विकास और महिला सशक्तिकरण की मजबूत नींव साबित होगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ की बहनों के जीवन में आत्मविश्वास और सम्मान की नई ऊर्जा का संचार कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की ‘मोदी की गारंटी’ के रूप में मिली यह सौगात हमारे प्रदेश की महिलाओं को न केवल आर्थिक सहयोग दे रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर समाज और परिवार में एक नई पहचान भी दिला रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार की प्राथमिकता है कि छत्तीसगढ़ की हर महिला सशक्त बने और विकास की यात्रा में बराबरी की भागीदार बने। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ सरकार की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और स्वावलंबी बनाने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। महतारी वंदन योजना ने प्रदेश की महिलाओं को न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने का साधन दिया है, बल्कि उन्हें समाज में आत्मसम्मान और आर्थिक स्वतंत्रता के साथ जीने का अवसर भी प्रदान किया है।

उल्लेखनीय है कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में क्रांतिकारी पहल कही जाने वाली महतारी वंदन योजना की शुरुआत 1 मार्च 2024 को हुई थी। इस योजना का उद्देश्य 21 वर्ष से अधिक आयु की विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। अब तक योजना की 19 किस्तों में लाभार्थी महिलाओं को कुल 12376 करोड़ 19 लाख रुपये की राशि दी जा चुकी थी। आज 20वीं किस्त जारी होने के साथ यह आंकड़ा बढ़कर 12983 करोड़ 13 लाख रुपये से अधिक हो गया है।

CG : संकट के समय सहारा बनी गढ़फुलझर की सुरंगें, जो जाती थीं भंवरपुर-पिरदा-सारंगढ़ तक खंडहरों में छिपा इतिहास, किले की सुरंगों का अनसुना सच

CG : संकट के समय सहारा बनी गढ़फुलझर की सुरंगें, जो जाती थीं भंवरपुर-पिरदा-सारंगढ़ तकखं डहरों में छिपा इतिहास, किले की सुरंगों का अनसुना सच, गढ़फुलझर का किला, जिसे सुरक्षा की दृष्टि से अभेद्य माना जाता था, राजा अनंतसाय द्वारा बनवाया गया था. स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि राजा अनंतसाय एक महापराक्रमी योद्धा थे. उन्होंने अपने सैनिकों और प्रजा की सुरक्षा के लिए इस किले का निर्माण करवाया था.

महासमुन्द. छत्तीसगढ़ में राजा-महाराजाओं का गौरवशाली इतिहास है, लेकिन इनमें से कई कहानियां समय के साथ गुमनामी में खो गई है. महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक के गढ़फुलझर गांव में स्थित एक ऐसा ही ऐतिहासिक स्थल है, जो आज एक वीरान और खंडहर में बदल चुका है. यह किला या महल अपने भीतर कई रहस्यों को समेटे हुए है और छत्तीसगढ़ के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
गढ़फुलझर का अभेद्य किला

खंडहरों में छिपा इतिहास, गढ़फुलझर किले की सुरंगों का अनसुना सच
गढ़फुलझर महल का इतिहास
गढ़फुलझर का किला, जिसे सुरक्षा की दृष्टि से अभेद्य माना जाता था, गौड़ वंश के राजा अनंतसाय द्वारा बनवाया गया था. स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि राजा अनंतसाय एक महापराक्रमी योद्धा थे. उन्होंने अपने सैनिकों और प्रजा की सुरक्षा के लिए इस किले का निर्माण करवाया था. यह किला बाहरी आक्रमणों से निपटने के लिए बनाया गया था, और इसे इस प्रकार डिजाइन किया गया था कि दुश्मनों को इसके अंदर का पता न चल सके. किले की दीवारों में छिपे हुए ऐसे गुप्त स्थान थे जहां से सैनिक आसानी से हथियार चला सकते थे,    लेकिन बाहर से आने वाले आक्रमणकारियों को इसका कोई अंदाजा नहीं होता था. जब भी किले पर हमला होता, दुश्मनों के हथियार किले की दीवारों पर ही आकर रुक जाते, जबकि सैनिक पूरी तरह से सुरक्षित रहते. इस तरह का अभेद्य किला उस समय के लिए बेहद उन्नत सुरक्षा तंत्र का उदाहरण था, उसका कुछ सबूत आज भी गढ़फुलझर के खंडहरों में देखे जा सकते हैं.

सुरंगों का रहस्यमय इतिहास
गढ़फुलझर किले के बारे में एक और दिलचस्प तथ्य इसकी गुप्त सुरंगें हैं, जिनका उपयोग राजा और उनके सैनिक युद्ध और अन्य संकटों के समय किया करते थे. स्थानीय ग्रामीणों और बुजुर्गों के अनुसार, गढ़फुलझर से भंवरपुर, पिरदा, और सारंगढ़ तक ये सुरंगें जाती थीं. इसके अलावा, राजा के कुलदेवी के मंदिर से भी गुप्त रास्ते बने हुए थे, जिनका उपयोग राजा और उनके सैनिक सुरक्षा के लिए किया करते थे.
हालांकि समय के साथ ये सुरंगें बंद हो चुकी हैं, लेकिन लोगों का मानना है कि गढ़फुलझर और भंवरपुर के तालाबों में बने कुओं से इन सुरंगों की शुरुआत होती थी. इन कुओं का इस्तेमाल राजा और उनके सैनिक गुप्त रूप से बाहर निकलने के लिए करते थे. स्थानीय लोग बताते हैं कि सालों पहले गढ़फुलझर के रानी सागर तालाब में मछलियां पकड़ने के दौरान कुछ ऐसे सुराग मिले थे, जो इन सुरंगों के अस्तित्व की पुष्टि करते हैं.

गौड़ वंश के अंतिम राजा भैना थे, जिन्होंने इस किले और महल की देखभाल की थी. उनके बारे में कहा जाता है कि वे अपनी रानी पद्मावती से बेहद प्रेम करते थे. राजा भैना ने अपनी रानी के लिए विशेष रूप से ‘रानी महल’ और ‘रानी सरोवर’ का निर्माण करवाया था. यह सरोवर केवल रानी के स्नान के लिए था, और राजपरिवार के किसी अन्य सदस्य को इसमें नहाने की अनुमति नहीं थी. यह उनकी प्रेम की गहरी भावना का प्रतीक था, जो आज भी लोगों के दिलों में जीवित है.

गढ़फुलझर का ऐतिहासिक महत्व
गढ़फुलझर का किला न केवल गौड़ वंश के गौरव का प्रतीक है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास और संस्कृति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. किले की वास्तुकला और संरचना इस बात की गवाही देती है कि उस समय सुरक्षा और तकनीकी दृष्टि से यह किला कितना उन्नत था. स्थानीय बुजुर्ग आज भी राजा अनंतसाय और राजा भैना के वीरता और प्रेम के किस्से सुनाते हैं, जो इस किले को और भी रहस्यमय बनाते हैं. हालांकि, आज यह किला खंडहर में बदल चुका है और इसे पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की जरूरत है, लेकिन इसका ऐतिहासिक महत्व कभी कम नहीं हो सकता. गढ़फुलझर किला छत्तीसगढ़ की धरोहर का वह हिस्सा है जिसे संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों को इसके बारे में बताने की जरूरत है.