महासमुंद : हादसे में राजनीतिक हलचल, विधायक ने जताई हत्या की आशंका — बोले, ‘यह सामान्य एक्सीडेंट नहीं ’ जनपद उपाध्यक्ष के पति की सड़क हादसे

CG : महासमुंद हादसे में राजनीतिक हलचल, विधायक ने जताई हत्या की आशंका — बोले, ‘यह सामान्य एक्सीडेंट नहीं’जनपद उपाध्यक्ष के पति की सड़क हादसे में मौत, विधायक बोले—यह एक्सीडेंट नहीं हत्या है जिले में रविवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने जनपद पंचायत महासमुंद की उपाध्यक्ष हुलसी चंद्राकर के परिवार को गहरे शोक में डाल दिया। नेशनल हाईवे-353 पर साराडीह मोड़ के पास हुई इस दुर्घटना में उनके पति जितेंद्र चंद्राकर (46 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि स्कूटी पर सवार उनके साथी अशोक साहू गंभीर रूप से घायल हो गए।

जानकारी के अनुसार, बेलसोंड़ा निवासी जितेंद्र चंद्राकर और उनके मित्र अशोक साहू रविवार शाम स्कूटी से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान महासमुंद की ओर से तेज रफ्तार में आ रही टाटा सफारी (क्रमांक CG 04 QH 5836) ने स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों सड़क पर दूर जा गिरे और स्कूटी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल 108 एंबुलेंस की मदद से दोनों को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने जितेंद्र चंद्राकर को मृत घोषित कर दिया।

घटना के बाद क्षेत्र में शोक और आक्रोश दोनों का माहौल है। ग्रामीणों ने बताया कि हादसे की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के घरों से लोग बाहर निकल आए। मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई।विधायक ने उठाए सवाल, कहा—यह सुनियोजित हत्या हो सकती है घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा अस्पताल पहुंचे। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह महज सड़क हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या हो सकती है। विधायक ने दावा किया कि मृतक की किसी अमर अग्रवाल नामक व्यक्ति से पुरानी रंजिश थी, और यह घटना उसी विवाद से जुड़ी हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई उजागर की जाए।

ग्रामीणों का आक्रोश, सफारी पर पथराव हादसे की खबर फैलते ही बेलसोंड़ा और आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने आक्रोश में आकर टाटा सफारी पर पथराव कर दिया, जिससे वाहन के शीशे टूट गए। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को नियंत्रित किया और दोनों वाहनों को जब्त कर सिटी कोतवाली थाना पहुंचाया।

चालक ने किया सरेंडर, पुलिस जांच में जुटी इस बीच, हादसे में शामिल टाटा सफारी चालक अग्रवाल नामक व्यक्ति ने खुद को सिटी कोतवाली पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया है। उसने प्रारंभिक पूछताछ में बताया कि घटना अनजाने में हुई। हालांकि पुलिस इस पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही है।

अस्पताल में उमड़ा जनसैलाब
दुर्घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल में विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, नगर पालिका उपाध्यक्ष देवीचंद राठी, पूर्व अध्यक्ष राशि त्रिभुवन महिलांग, और बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि व ग्रामीण पहुंचे। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। बताया गया कि हुलसी चंद्राकर भाजपा से जनपद पंचायत महासमुंद की उपाध्यक्ष हैं और पूर्व में ग्राम पंचायत बेलसोंड़ा की उपसरपंच रह चुकी हैं।

पुलिस ने कहा—जांच के बाद ही स्पष्ट होगा सच

इस पूरे मामले पर पुलिस का कहना है कि फिलहाल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और वाहन की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह साधारण हादसा था या किसी षड्यंत्र का परिणाम। पुलिस ने घटनास्थल से वाहन के टुकड़े और CCTV फुटेज भी जब्त किए हैं। फिलहाल बेलसोंड़ा गांव में शोक की लहर है और लोग जितेंद्र चंद्राकर को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं।

CG बसना: दो साल पुराने आधार कार्ड की चौंकाने वाली कहानी भारतीय डाक विभाग का क्या है कनेक्शन

 

CG NEWS बसना/महासमुंद।भारतीय डाक विभाग की लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने आम नागरिकों के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत बरतियाभांठा के सामने सड़क किनारे एक महत्वपूर्ण दस्तावेज — आधार कार्ड — फाड़कर फेंका हुआ मिला। यह वही आधार कार्ड था, जो 2 जुलाई 2023 को हेड ऑफिस से डिस्पैच हुआ था, परंतु 26 सितंबर 2025 की रात गांव के एक युवक को लावारिस हालत में पड़ा हुआ दिखाई दिया। इस घटना ने न केवल डाक विभाग की जिम्मेदारी पर प्रश्नचिह्न लगाया है, बल्कि दस्तावेज़ सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा कर दी है।

ग्राम बरतियाभांठा निवासी युवक ने जब दस्तावेज़ देखा तो उस पर लिखे नाम से पता चला कि यह करुणाकर के बेटे का आधार कार्ड है। युवक ने तत्काल करुणाकर उपाध्याय को फोन कर इसकी जानकारी दी। करुणाकर जब मौके पर पहुंचे तो देखा कि आधार कार्ड फाड़ा हुआ था और कीचड़ में सना पड़ा हुआ था। यह देखकर वे हैरान रह गए, क्योंकि यह वही दस्तावेज था जिसका वे महीनों से इंतज़ार कर रहे थे।

करुणाकर उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे का नया आधार कार्ड आवेदन मई 2023 में किया था, जिसके बाद जुलाई में डाक विभाग से डिस्पैच होने की सूचना मिली थी। लेकिन दस्तावेज न मिलने पर उन्होंने कई बार डाकघर में पूछताछ की, जहां हर बार उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि “आपका कार्ड जल्द पहुंच जाएगा।” अब जब वही कार्ड दो साल दो महीने बाद फटा और फेंका हुआ मिला, तो पूरे गांव में डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जताई जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज, जो किसी व्यक्ति की पहचान, बैंकिंग, राशन, शिक्षा और सरकारी योजनाओं से सीधे जुड़े होते हैं, उन्हें इतनी लापरवाही से हैंडल करना एक गंभीर लापरवाही है। किसी दस्तावेज का फाड़कर फेंका जाना न केवल विभागीय चूक है, बल्कि यह नागरिक अधिकारों से खिलवाड़ भी है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस घटना की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर आधार जैसे संवेदनशील दस्तावेज़ इस तरह खुले में पड़े मिल सकते हैं, तो यह किसी की भी निजी जानकारी के दुरुपयोग की आशंका को जन्म देता है।

करुणाकर ने बताया कि वे अब डाक विभाग के उच्चाधिकारियों को शिकायत पत्र भेजने की तैयारी में हैं। उन्होंने कहा —

> “हम आम लोग सरकारी संस्थाओं पर भरोसा करते हैं, लेकिन जब हमारे पहचान-पत्रों के साथ इस तरह का व्यवहार होता है तो विश्वास डगमगा जाता है। अगर कोई गलत हाथों में यह दस्तावेज़ चला जाता, तो इसका दुरुपयोग भी हो सकता था।”

 

डाक विभाग के सूत्रों का कहना है कि अगर पत्र या पार्सल बीच में क्षतिग्रस्त हो जाए या खो जाए, तो इसकी जानकारी संबंधित शाखा से दी जानी चाहिए थी। फिलहाल विभाग ने मामले की जानकारी लेने और जांच शुरू करने की बात कही है।

यह पूरा मामला इस ओर इशारा करता है कि तकनीकी युग में भी सिस्टम की लापरवाही और निगरानी की कमी से आम नागरिकों को कितनी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। एक ओर सरकार डिजिटल इंडिया की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे उदाहरण लोगों के भरोसे को कमजोर करते हैं।

इस घटना ने ग्राम बरतियाभांठा और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बना दिया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषी कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई अन्य नागरिक ऐसी स्थिति का शिकार न हो।

प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना से बदल रही ग्रामीणों की जिंदगी पिंकी मुद्रा लोन से बनी आत्मनिर्भर

पिंकी ने अपने किराना व्यवसाय को आगे बढ़ाने का सपना देखा। इस सपने को साकार करने के लिए उन्होंने पीएम मुद्रा लोन के तहत 70 हजार रुपये का स्वयंसिद्धा लोन लिया और अपनी दुकान का विस्तार किया। दुकान बड़ी होने से न केवल उनकी आय बढ़ी, बल्कि ग्राहकों का विश्वास और पहुँच भी मजबूत हुई और वह आर्थिक विकास करने साथ ही आत्मनिर्भर बन गई।

प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक नई उम्मीद जगाई है। इस योजना के जरिए महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे अपने व्यवसाय की शुरुआत कर अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड की ग्राम पंचायत मनोरा की रहने वाली श्रीमती पिंकी सोनी बिहान महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें शासन की योजनाओं की जानकारी मिली और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाने का अवसर प्राप्त हुआ।

कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध
पिंकी सोनी कहती हैं “समूह से जुड़ने के बाद मेरे जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं की जानकारी मिली और आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी हासिल हुआ।” प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना का उद्देश्य स्वयं .सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। यह योजना स्वयं .सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराकर सक्षम बनाना है।

बिहान महिला स्व सहायता समूह से मिली मदद प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का लक्ष्य छोटे व्यवसायों और उद्यमियों के बीच उद्यमशीलता गतिविधियों को बढ़ावा देना है। यह योजना विभिन्न चरणों में व्यवसायों को पूरा करने और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार वित्तीय सहायता प्रदान करता है। इस योजना का लाभ लेकर आज पिंकी जी अपने परिवार की मजबूत आर्थिक सहारा बनी हैं। उनकी मेहनत और बिहान महिला स्व-सहायता समूह से मिली मदद ने उन्हें आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाया है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को धन्यवाद भी दिया हैं

CG: सिंघोड़ा में फिल्मी अंदाज में धरपकड़: उड़ीसा से नागपुर ले जा रहे थे गांजा, एक्सीडेंट के बाद दबोचे गए दो तस्कर

 

 

CG news महासमुंद/सिंघोड़ा।
अवैध मादक पदार्थ तस्करी पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अंतरराज्यीय गांजा तस्करों को गिरफ्तार किया है। घटना के दौरान आरोपी तेज रफ्तार में भागते हुए अपनी कार को ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा बैठे, जिससे दोनों घायल हो गए। पुलिस ने कार से 10 किलो अवैध गांजा बरामद किया है।

जानकारी के अनुसार, थाना सिंघोड़ा में पदस्थ सउनि नीलाम्बर सिंह नेताम हमराह आरक्षक क्रमांक 799, 517, 785, 933 के साथ 04 अक्टूबर 2025 को शासकीय बोलेरो वाहन (क्रमांक CG03A1086) से देहात पेट्रोलिंग एवं अवैध मादक पदार्थ रेड कार्यवाही हेतु निकले थे।

ग्राम चिवराकुटा पहुंचने पर सुबह 08:30 बजे मुखबिर से सूचना मिली कि एक सफेद आई-10 कार (MH 01 BG 6629) में दो व्यक्ति उड़ीसा से छत्तीसगढ़ की ओर गांजा लेकर आ रहे हैं। सूचना पर SDOP सरायपाली को अवगत कराया गया और एनएच-53 गनियारीपाली चौक पर नाकाबंदी की गई।

कुछ समय बाद वही कार दिखाई दी, जिसे रोकने पर आरोपियों ने तेज रफ्तार से भगा दिया। पीछा करने पर कार ग्राम सिंघोड़ा बाजार चौक के पास खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया।
इस हादसे में चालक अब्दुल नदीम के दोनों हाथों में चोट आई, जबकि साथी मोहम्मद खतीफ की कमर में चोट पहुंची। दोनों को पुलिस ने मौके पर ही पकड़ लिया।

पूछताछ में दोनों ने बताया कि कार की डिक्की में सफेद बोरी में भरा 10 किलोग्राम गांजा रखा है, जिसे वे अंगुल (उड़ीसा) से नागपुर (महाराष्ट्र) ले जा रहे थे।
मौके पर गवाहों की उपस्थिति में तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की गई। पुलिस ने आरोपियों से —
10 किलो अवैध गांजा (कीमत ₹1,50,000)
आई-10 कार (कीमत ₹1,00,000)
दो मोबाइल फोन (कीमत ₹20,000)
कुल ₹2,70,000 की संपत्ति जप्त की है।

आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई —
1️⃣ अब्दुल नदीम पिता अब्दुल रहीम (29 वर्ष), निवासी यशोधरा नगर, लालझंडा चौक, थाना यशोधरा नगर, नागपुर (महाराष्ट्र)
2️⃣ मोहम्मद खतीफ पिता अब्दुल गफूर (26 वर्ष), निवासी कालाझंडा मोमीनपुरा, नागपुर (महाराष्ट्र)।

दोनों के खिलाफ धारा 20(ख)(ii)(b) नारकोटिक्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया गया है।
संपूर्ण कार्रवाई सउनि नीलाम्बर सिंह नेताम के नेतृत्व में की गई, जिसमें पुलिस स्टाफ और स्थानीय गवाहों का सहयोग रहा।

बसना:  मामा-भाँचा मेला 6 अक्टूबर को, गूंजेगी श्रद्धा की घंटियां ऋषि-मुनियों की तपोभूमि पर उमड़ेगा भक्तों का सैलाब

संवाददाता अनुराग नायक बसना:  मामा-भाँचा मेला 6 अक्टूबर को, लोहडीपुर में गूंजेगी श्रद्धा की घंटियां ऋषि-मुनियों की तपोभूमि पर उमड़ेगा भक्तों का सैलाब आस्था, परंपरा और अध्यात्म का अनूठा संगम एक बार फिर देखने को मिलेगा। सदियों से चली आ रही मान्यता के अनुसार, श्री मामा-भाँचा मेला इस वर्ष दिनांक 06 अक्टूबर 2025, दिन सोमवार को बड़े धूमधाम से आयोजित किया जा रहा है। यह ऐतिहासिक मेला भंवरपुर से 5 किलोमीटर दूर, उत्तर दिशा में स्थित लोहढ़ीपुर के घने जंगलों में स्थित मामा-भाँचा पहाड़ पर हर साल कुंवर (शरद पूर्णिमा) के अवसर पर मनाया जाता है।

किवदंतियों के अनुसार, यह स्थल न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि इसे ऋषि-मुनियों की तपोभूमि भी कहा गया है। यहां मुनि गुप्ता, बारस पीपर, भीम बांध, ऋषि सरोवर, बारह सीला (प्रखर), लंबी सुरंग, सीता बाबा और मामा-भाँचा मंदिर जैसे पवित्र स्थल मौजूद हैं।

हर वर्ष की तरह इस बार भी यहां साँईं बाबा मंदिर के पास हरि कीर्तन और श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में मेले को लेकर उत्साह चरम पर है। पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में तब्दील हो चुका है — जगह-जगह साफ-सफाई, रोशनी और व्यवस्था के कार्य पूरे किए जा चुके हैं।

यज्ञकर्ता समिति में रूपेश पंडा (8720824452), ताराचंद पंडा (8120258991) और ऋषिकेश वैष्णव (6261245271) के नेतृत्व में तैयारियां की जा रही हैं।सहयोगी: देवकी पुरुषोत्तम दीवान (कृषि सभापति महासमुंद),महेश्वर प्रीतम सिंह सिदार (जनपद सदस्य बसना),

हरकुमार पटेल (समिति प्रबंधक उडे़ला),
संतराम निषाद (अध्यक्ष कृषि साख सहकारी समिति उडे़ला),
केवती हरियंद पटेल (सरपंच ग्राम पंचायत लोढ़ीपुर),
लीलामणि देवकुमार सिदार (पूर्व सरपंच ग्राम पंचायत लोढ़ीपुर)।
आयोजक:
समस्त ग्रामवासी लोढ़ीपुर

 

छत्तीसगढ़ -/ मामा भाचा मेला तो सब जानते है लेकिन क्या है इसके पीछे का कारण की मामा भाचा और मुनि पहाड़ पर्वत के रूप में परिवर्तित हो गए कुछ सालों तक प्रेमी जोड़ा भागने को लेकर भी यह स्थान मशहूर हुवा था ?

छत्तीसगढ़ में एक से एक जगह है और हर जगह का अलग अलग मान्यताएं है आस्था इतना ज्यादा है कि आज भी सालों बीत जाने के बाद भी आस्था पर कोई कमी नही आई है बात कर रहे है हम छत्तीसगढ़ के महासमुन्द जिले अंतर्गत आने वाले बसना ब्लॉक के भंवरपुर क्षेत्र में आता है खोखसा लोहड़ी पुर और आस पास के कई गांव के मध्य एक पहाड़ है जिसका नाम है मामा भाचा जंगल यहां पर मामा भाचा के नाम से हर साल

 

सरदपूर्णिमा पर यहाँ मेला लगता है कई हजार के संख्या में लोग यहां आते है रात भर कार्यक्रम और पूजा पाठ होता है रात को लोग पहाड़ मे चढते है चांदनी रात में पहाड़ों पर हजारो के संख्या में दिखाई देते है बताया तो यह भी जाता है कि मामा भाचा जंगलों में भालू और अन्य हिंसक जानवर भी है लेकिन इस दिन ये दिखाई नही देते और आज तक किसी को नुकसान नही पहुचाया यह बात तो सभी को पता है लेकिन मामा भाचा नाम कैसे विख्यात हुवा यह एक बड़ा सलाल है बता दें आस पास के गांव वाले मिलकर इस मेले को आयोजीत करते है और कानून व्यवस्था बनाने पुलिस प्रशासन का भी सहायता मिलता है ।

स्थानीय लोगो मे कई सालों में यह मान्यता है की इस जंगल में तीन पहाड़ हैं, जिसे मामा, भांजा और शीत बाबा के रूप में जाना जाता है यहां के लोगों के मुताबिक ये तीनों कभी आदमी थे, लेकिन बाद में वे पहाड़ पर्वत डोंगरी के रूप में परिवर्तित हो गए. लोग इन्हें देवओ के रूप में पूजते हैं और हर साल यहां सरदपूर्णिमा पर बड़े मेले का आयोजन किया जाता है हालांकि, इस घटना का कहीं कोई लिखित प्रमाण नहीं है,

 

लेकिन गांववालों की वर्षों पुरानी मान्यताएं इस जंगल को भी हरा-भरा किए हुए हैं और आस्था आज भी जीवित है ।

मामा-भांजा जंगलों के आस पास रह रहे ग्रामीणों के अनुसार कई सालों पहले मामा-भांजा दो शिकारी खोकसा गांव के पास अपनी फसल की रखवाली कर रहे थे वहीं पर, शीत बाबा जंगली सुअर का रूप धारण कर मामा-भांजा के खेत में लगी फसलों को खाने लगे कहा जाता है की शिकारी मामा-भांजा जंगली सुअर का पीछा करते हुए एक स्थान पर पहुंचे, जैसे ही मामा-भांजा ने जंगली सुअर को मारना चाहा तो वह अपने अपने असली रूप (शीत बाबा) के रूप में आ गए बाबा ने मामा-भांजा से कहा कि तुम शिकारी का काम छोड़ दो और हम तीनों यहां एक साथ रहेंगे बाबा ने मामा-भांजा से कहा कि लोग हमारी पूजा करेंगे और मामा-भांजा का नाम लेकर कोई मनोकामना मांगेगा तो उसकी मनोकामना पूरी होगी. फिर तीनों अलग-अलग पहाड़ के रूप में हमेशा के लिए वहीं खड़े हो गए और यह मान्यता आज भी चली आ रही है

गौरतलब है कि ये मेला केवल 24 घंटे ही लगता है जिसमें शामिल होने बहुत दूर दूर से लोग बड़ी संख्या मेंआते हैं जिस जगह ये मेला लगता है उस जगह को प्राचीन काल के ऋषियों की तपोभूमि कहते हैं जहाँ आज भी ऋषियों के कुछ अवशेष मौजूद हैं जैसे ऋषि सरोवर ,ऋषि गुफा, मुनि धुनि ,वराह शीला, चूल्हा ,बारस पीपल ,भीम बाँध इत्यादि बड़े बुजुर्ग बताते हैं के यहाँ डोंगरी के अंदर में झरना है झील के जैसा छोटा तालाब है हरा भरा मैदान है जो हर समय ठण्ड और ताजगी से भरा रहता है ।

 

यहाँ शिव का प्राचीन मंदिर है और लंबी लंबी अथाह सुरंगें हैं जहाँ पत्थरों को हाथ से रगड़ने पर आज भी भभूत मिल जाती है यही नहीं इस डोंगरी पर आयुर्वेदिक औषधियों का भी भंडार है. जहाँ आज भी वैद्यो को कई दुर्लभ प्रजाति की औषधियों तथा जड़ी बुटी के पौधे आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं और डोगरी के बाहर विशाल जलाशय है जो बारह महीने पानी से भरा रहता है. जो कि नहाने वाले को ताजगी से भर देता है कहते हैं की इस जगह पर रात को जाने और डोंगर पर चढ़कर मामा भांचा मंदिर के दर्शन कर आशिर्वाद लेने वाले को बहुत ही आत्मिक शान्ति की अनुभूति होती है.

 

चांदनी रात में बिना किसी लाइट के इस पहाड़ी की बड़ी बड़ी चट्टानों को पार करते हुए इसकी चोटी पर चढ़ना किसी रोमांच से कम नहीं है. और चोटी पर चढ़कर वहां से आस पास के क्षेत्रो का नजारा तो रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है ये मेला इसलिए भी प्रसिद्ध है क्योंकि इस मेले से हर वर्ष अनेक प्रेमी युगल अन्यत्र पलायन कर जाते हैं जिसे छत्तीसगढ़ी भाषा में उढ़रिया भाग जाना कहते हैं और इसलिए इस मेले को जंगल में मंगल भी कहते हैं.

 

बता दें कि सालों पहले मामा भाचा मेला से प्रेमी जोड़ा भागने का भी प्रचलन जोरो था ऐसा किसी के पास अभी पुख्ता प्रमाण तो नही है लेकिन सालों पहले मामा भाचा मेला से प्रेमी जोड़ा भागने का अफवाह हर साल रहता था लेकिन अब ऐसा सुनने को नही मिलता है ।

सरकार की उदासीनता..

इस जगह को ऐतिहासिक स्थल घोषित कर इसका संरक्षण करने तथा यहाँ सुविधाएं विकसित करने की मांग आस पास की जनता के द्वारा सरकार से कई वर्षों से की जा रही है तथा हर वर्ष मेले के वक़्त आस पास के जन प्रतिनिधियों को यहां मुख्य अतिथि के रूप में बुलाकर उनसे भी विनती की जाती है. पर उसे आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिला है यदि यहाँ जाने हेतु पहुँच मार्ग तथा ऊपर चढ़ने हेतु सीढ़ियों का निर्माण करवा दिया जाए तो यहाँ पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं जो इस क्षेत्र के विकास में काफी मदद गार हो सकती हैं

 

कैसे पहुंचे.

ये जगह जिला मुख्यालय महासमुंद से 130 KM ब्लाक मुख्यालय बसना से 20 KM जबकि भंवरपुर से 5 KM की दुरी पर उत्तर में स्थित है वैसे तो इस जगह पर पंहुचने के लिए चारों तरफ से रास्ता है मगर भंवरपुर से बनडबरी पतरापाली जाने वाले रास्ते पर तथा भंवरपुर से बरतियाभाँटा होते हुए संतपाली जाने वाले रास्ते पर जाना ज्यादा बेहतर है भंवरपुर लोहड़ीपुर मार्ग जो थोडा दुर्गम तो है मगर ठीक है.

छत्तीसगढ़ को मिला पहला राष्ट्रीय राजमार्ग टनल : सिर्फ 12 महीनों में निर्माण कार्य पूरा, विकास की राह में ऐतिहासिक उपलब्धि

छत्तीसगढ़ को मिला पहला राष्ट्रीय राजमार्ग टनल : सिर्फ 12 महीनों में निर्माण कार्य पूरा, विकास की राह में ऐतिहासिक उपलब्धि रायपुर : छत्तीसगढ़ को मिला पहला राष्ट्रीय राजमार्ग टनल : सिर्फ 12 महीनों में निर्माण कार्य पूरा, विकास की राह में ऐतिहासिक उपलब्धि
छत्तीसगढ़ को मिला पहला राष्ट्रीय राजमार्ग टनल : सिर्फ 12 महीनों में निर्माण कार्य पूरा, विकास की राह में ऐतिहासिक उपलब्धि
प्रदेश की प्रगति की रीढ़ है सड़क अधोसंरचना, 2.79 किमी लंबी सुरंग बनेगी विकास की नई राह – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

प्रदेश की प्रगति की रीढ़ है सड़क अधोसंरचना, 2.79 किमी लंबी सुरंग बनेगी विकास की नई राह – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
प्रदेश की प्रगति की रीढ़ है सड़क अधोसंरचना, 2.79 किमी लंबी सुरंग बनेगी विकास की नई राह – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय प्रदेश की प्रगति की रीढ़ है सड़क अधोसंरचना, 2.79 किमी लंबी सुरंग बनेगी विकास की नई राह – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
छत्तीसगढ़ ने आज बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने सिर्फ 12 महीनों में राज्य की पहली राष्ट्रीय राजमार्ग सुरंग (लेफ्ट हैंड साइड) का निर्माण कर लिया है। यह ब्रेकथ्रू इंजीनियरिंग की दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ आमजन के जीवन और राज्य के आर्थिक विकास को नई दिशा देने वाला है।

2.79 किलोमीटर लंबी यह टनल रायपुर–विशाखापट्टनम आर्थिक गलियारे (NH-130CD) का हिस्सा है, जिसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अभनपुर परियोजना कार्यान्वयन इकाई द्वारा निर्मित किया जा रहा है। यह ट्विन ट्यूब टनल जब पूरी तरह तैयार होगी, तो रायपुर से विशाखापट्टनम तक यात्रा का समय काफी कम होगा, व्यापार एवं उद्योग को गति मिलेगी और छत्तीसगढ़, ओडिशा तथा आंध्र प्रदेश के बीच संपर्क और मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह टनल समृद्ध और सशक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क एवं परिवहन अधोसंरचना का विकास प्रदेश की प्रगति की रीढ़ है। इस टनल से छत्तीसगढ़ में पर्यटन और सामाजिक–आर्थिक जुड़ाव के नए अवसर भी खुलेंगे।

उन्होंने केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की टीम को इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत विजन के अनुरूप यह परियोजना आने वाली पीढ़ियों के लिए भी विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।

महतारी वंदन योजना की 20वीं किस्त जारी : 65 लाख महिलाओं के बैंक खातों में पहुँचे 606.94 करोड़ रुपये

 

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की ‘मोदी की गारंटी’ के तहत शुरू की गई महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ की बहनों के जीवन में नई रोशनी लाई है। यह योजना केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने वाला ऐतिहासिक कदम है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने आज जगदलपुर में बस्तर दशहरा एवं मुरिया दरबार के अवसर पर माई दंतेश्वरी की धरती से राज्य की 64 लाख 94 हजार 768 हितग्राही महिलाओं को महतारी वंदन योजना की 20वीं किस्त के रूप में 606 करोड़ 94 लाख रुपये की राशि अंतरित करते हुए यह बात कही।

केंद्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी का सपना है कि हर महिला सशक्त और आत्मनिर्भर बने तथा देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में बराबरी की भागीदारी निभाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने जिस पारदर्शिता और प्रतिबद्धता से इस योजना को लागू किया है, वह पूरे देश के लिए एक आदर्श है। यह योजना आने वाले वर्षों में प्रदेश के सतत विकास और महिला सशक्तिकरण की मजबूत नींव साबित होगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ की बहनों के जीवन में आत्मविश्वास और सम्मान की नई ऊर्जा का संचार कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की ‘मोदी की गारंटी’ के रूप में मिली यह सौगात हमारे प्रदेश की महिलाओं को न केवल आर्थिक सहयोग दे रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर समाज और परिवार में एक नई पहचान भी दिला रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार की प्राथमिकता है कि छत्तीसगढ़ की हर महिला सशक्त बने और विकास की यात्रा में बराबरी की भागीदार बने। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ सरकार की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और स्वावलंबी बनाने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। महतारी वंदन योजना ने प्रदेश की महिलाओं को न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने का साधन दिया है, बल्कि उन्हें समाज में आत्मसम्मान और आर्थिक स्वतंत्रता के साथ जीने का अवसर भी प्रदान किया है।

उल्लेखनीय है कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में क्रांतिकारी पहल कही जाने वाली महतारी वंदन योजना की शुरुआत 1 मार्च 2024 को हुई थी। इस योजना का उद्देश्य 21 वर्ष से अधिक आयु की विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। अब तक योजना की 19 किस्तों में लाभार्थी महिलाओं को कुल 12376 करोड़ 19 लाख रुपये की राशि दी जा चुकी थी। आज 20वीं किस्त जारी होने के साथ यह आंकड़ा बढ़कर 12983 करोड़ 13 लाख रुपये से अधिक हो गया है।

CG : संकट के समय सहारा बनी गढ़फुलझर की सुरंगें, जो जाती थीं भंवरपुर-पिरदा-सारंगढ़ तक खंडहरों में छिपा इतिहास, किले की सुरंगों का अनसुना सच

CG : संकट के समय सहारा बनी गढ़फुलझर की सुरंगें, जो जाती थीं भंवरपुर-पिरदा-सारंगढ़ तकखं डहरों में छिपा इतिहास, किले की सुरंगों का अनसुना सच, गढ़फुलझर का किला, जिसे सुरक्षा की दृष्टि से अभेद्य माना जाता था, राजा अनंतसाय द्वारा बनवाया गया था. स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि राजा अनंतसाय एक महापराक्रमी योद्धा थे. उन्होंने अपने सैनिकों और प्रजा की सुरक्षा के लिए इस किले का निर्माण करवाया था.

महासमुन्द. छत्तीसगढ़ में राजा-महाराजाओं का गौरवशाली इतिहास है, लेकिन इनमें से कई कहानियां समय के साथ गुमनामी में खो गई है. महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक के गढ़फुलझर गांव में स्थित एक ऐसा ही ऐतिहासिक स्थल है, जो आज एक वीरान और खंडहर में बदल चुका है. यह किला या महल अपने भीतर कई रहस्यों को समेटे हुए है और छत्तीसगढ़ के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
गढ़फुलझर का अभेद्य किला

खंडहरों में छिपा इतिहास, गढ़फुलझर किले की सुरंगों का अनसुना सच
गढ़फुलझर महल का इतिहास
गढ़फुलझर का किला, जिसे सुरक्षा की दृष्टि से अभेद्य माना जाता था, गौड़ वंश के राजा अनंतसाय द्वारा बनवाया गया था. स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि राजा अनंतसाय एक महापराक्रमी योद्धा थे. उन्होंने अपने सैनिकों और प्रजा की सुरक्षा के लिए इस किले का निर्माण करवाया था. यह किला बाहरी आक्रमणों से निपटने के लिए बनाया गया था, और इसे इस प्रकार डिजाइन किया गया था कि दुश्मनों को इसके अंदर का पता न चल सके. किले की दीवारों में छिपे हुए ऐसे गुप्त स्थान थे जहां से सैनिक आसानी से हथियार चला सकते थे,    लेकिन बाहर से आने वाले आक्रमणकारियों को इसका कोई अंदाजा नहीं होता था. जब भी किले पर हमला होता, दुश्मनों के हथियार किले की दीवारों पर ही आकर रुक जाते, जबकि सैनिक पूरी तरह से सुरक्षित रहते. इस तरह का अभेद्य किला उस समय के लिए बेहद उन्नत सुरक्षा तंत्र का उदाहरण था, उसका कुछ सबूत आज भी गढ़फुलझर के खंडहरों में देखे जा सकते हैं.

सुरंगों का रहस्यमय इतिहास
गढ़फुलझर किले के बारे में एक और दिलचस्प तथ्य इसकी गुप्त सुरंगें हैं, जिनका उपयोग राजा और उनके सैनिक युद्ध और अन्य संकटों के समय किया करते थे. स्थानीय ग्रामीणों और बुजुर्गों के अनुसार, गढ़फुलझर से भंवरपुर, पिरदा, और सारंगढ़ तक ये सुरंगें जाती थीं. इसके अलावा, राजा के कुलदेवी के मंदिर से भी गुप्त रास्ते बने हुए थे, जिनका उपयोग राजा और उनके सैनिक सुरक्षा के लिए किया करते थे.
हालांकि समय के साथ ये सुरंगें बंद हो चुकी हैं, लेकिन लोगों का मानना है कि गढ़फुलझर और भंवरपुर के तालाबों में बने कुओं से इन सुरंगों की शुरुआत होती थी. इन कुओं का इस्तेमाल राजा और उनके सैनिक गुप्त रूप से बाहर निकलने के लिए करते थे. स्थानीय लोग बताते हैं कि सालों पहले गढ़फुलझर के रानी सागर तालाब में मछलियां पकड़ने के दौरान कुछ ऐसे सुराग मिले थे, जो इन सुरंगों के अस्तित्व की पुष्टि करते हैं.

गौड़ वंश के अंतिम राजा भैना थे, जिन्होंने इस किले और महल की देखभाल की थी. उनके बारे में कहा जाता है कि वे अपनी रानी पद्मावती से बेहद प्रेम करते थे. राजा भैना ने अपनी रानी के लिए विशेष रूप से ‘रानी महल’ और ‘रानी सरोवर’ का निर्माण करवाया था. यह सरोवर केवल रानी के स्नान के लिए था, और राजपरिवार के किसी अन्य सदस्य को इसमें नहाने की अनुमति नहीं थी. यह उनकी प्रेम की गहरी भावना का प्रतीक था, जो आज भी लोगों के दिलों में जीवित है.

गढ़फुलझर का ऐतिहासिक महत्व
गढ़फुलझर का किला न केवल गौड़ वंश के गौरव का प्रतीक है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास और संस्कृति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. किले की वास्तुकला और संरचना इस बात की गवाही देती है कि उस समय सुरक्षा और तकनीकी दृष्टि से यह किला कितना उन्नत था. स्थानीय बुजुर्ग आज भी राजा अनंतसाय और राजा भैना के वीरता और प्रेम के किस्से सुनाते हैं, जो इस किले को और भी रहस्यमय बनाते हैं. हालांकि, आज यह किला खंडहर में बदल चुका है और इसे पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की जरूरत है, लेकिन इसका ऐतिहासिक महत्व कभी कम नहीं हो सकता. गढ़फुलझर किला छत्तीसगढ़ की धरोहर का वह हिस्सा है जिसे संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों को इसके बारे में बताने की जरूरत है.

कैसा होगा आपका दिन, किसे मिलेगा प्यार, किसका चलेगा व्यापार, करियर में किसे मिलेगी उड़ान, किसे मिलेगा धन अपार… हर वर्ग के लिए जानिए दैनिक राशिफल पंडित भूपेंद्र श्रीधर सतपति ज्योतिषाचार्य

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सूर्योदय: 🌄 ०६:२६
सूर्यास्त: 🌅 ०६:०५
चन्द्रोदय: 🌝 १६:५०
चन्द्रास्त: 🌜२९:०३
अयन 🌘 दक्षिणायणे (उत्तरगोलीय)
ऋतु: 🏔️ शरद
शक सम्वत: 👉 १९४७ (विश्वावसु)
विक्रम सम्वत: 👉 २०८२ (सिद्धार्थी)
मास 👉 आश्विन
पक्ष 👉 शुक्ल
तिथि 👉 त्रयोदशी (१५:०३ से चतुर्दशी)
नक्षत्र 👉 शतभिषा (०८:०१ से पूर्वाभाद्रपद)
योग 👉 गण्ड (१६:३४ से वृद्धि)
प्रथम करण 👉 तैतिल (१५:०३ तक)
द्वितीय करण 👉 गर (२५:४७ तक)
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॥ गोचर ग्रहा: ॥
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सूर्य 🌟 कन्या
चंद्र 🌟 मीन (२४:४५ से)
मंगल 🌟 तुला (उदित, पूर्व, मार्गी)
बुध 🌟 तुला (उदय, पूर्व, मार्गी)
गुरु 🌟 मिथुन (उदित, पूर्व, मार्गी)
शुक्र 🌟 सिंह (उदित, पश्चिम, मार्गी)
शनि 🌟 मीन (उदय, पूर्व, वक्री)
राहु 🌟 कुम्भ
केतु 🌟 सिंह
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शुभाशुभ मुहूर्त विचार
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अभिजित मुहूर्त 👉 ११:४१ से १२:२८
अमृत काल 👉 २२:५१ से २४:२०
रवि योग 👉 ०८:०१ से ३०:१३
विजय मुहूर्त 👉 १४:०२ से १४:४९
गोधूलि मुहूर्त 👉 १७:५७ से १८:२२
सायाह्न सन्ध्या 👉 १७:५७ से १९:११
निशिता मुहूर्त 👉 २३:४१ से २४:३०
राहुकाल 👉 १६:२९ से १७:५७
राहुवास 👉 उत्तर
यमगण्ड 👉 १२:०५ से १३:३३
दुर्मुहूर्त 👉 १६:२३ से १७:१०
होमाहुति 👉 शनि (०८:०१ से चन्द्र)
दिशा शूल 👉 पश्चिम
नक्षत्र शूल 👉 दक्षिण (०८:०१ से)
अग्निवास 👉 पृथ्वी
चन्द्र वास 👉 पश्चिम (उत्तर २४:४५ से)
शिववास 👉 नन्दी पर (१५:०३ से भोजन में)
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☄चौघड़िया विचार☄
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॥ दिन का चौघड़िया ॥
१ – उद्वेग २ – चर
३ – लाभ ४ – अमृत
५ – काल ६ – शुभ
७ – रोग ८ – उद्वेग
॥रात्रि का चौघड़िया॥
१ – शुभ २ – अमृत
३ – चर ४ – रोग
५ – काल ६ – लाभ
७ – उद्वेग ८ – शुभ
नोट👉 दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
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शुभ यात्रा दिशा
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उत्तर-पश्चिम (पान का सेवन कर यात्रा करें)
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तिथि विशेष
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आज जन्मे शिशुओं का नामकरण
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आज ०८:०१ तक जन्मे शिशुओ का नाम शतभिषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (सू) तथा इसके बाद जन्मे शिशुओ का नाम पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (से, सो, द, दि) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है।
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उदय-लग्न मुहूर्त
कन्या – २८:५४ से ०७:१२
तुला – ०७:१२ से ०९:३३
वृश्चिक – ०९:३३ से ११:५२
धनु – ११:५२ से १३:५६
मकर – १३:५६ से १५:३७
कुम्भ – १५:३७ से १७:०२
मीन – १७:०२ से १८:२६
मेष – १८:२६ से २०:००
वृषभ – २०:०० से २१:५५
मिथुन – २१:५५ से २४:१०+
कर्क – २४:१०+ से २६:३१+
सिंह – २६:३१+ से २८:५०+
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पञ्चक रहित मुहूर्त
रोग पञ्चक – ०६:१२ से ०७:१२
शुभ मुहूर्त – ०७:१२ से ०८:०१
मृत्यु पञ्चक – ०८:०१ से ०९:३३
अग्नि पञ्चक – ०९:३३ से ११:५२
शुभ मुहूर्त – ११:५२ से १३:५६
रज पञ्चक – १३:५६ से १५:०३
शुभ मुहूर्त – १५:०३ से १५:३७
चोर पञ्चक – १५:३७ से १७:०२
शुभ मुहूर्त – १७:०२ से १८:२६
शुभ मुहूर्त – १८:२६ से २०:००
चोर पञ्चक – २०:०० से २१:५५
शुभ मुहूर्त – २१:५५ से २४:१०+
रोग पञ्चक – २४:१०+ से २६:३१+
शुभ मुहूर्त – २६:३१+ से २८:५०+
मृत्यु पञ्चक – २८:५०+ से ३०:१३+
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पंडित भूपेंद्र श्रीधर सतपति ज्योतिषाचार्य एम ए संस्कृत हस्तरेखा वास्तु शास्त्र भूमि भवन में वास्तु दोष निवारण पारिवारिक जीवन में तनाव बच्चों को पढ़ाई में मन नहीं लगता विवाह विलम्ब राज़ योग भाग्योदय व्यापार व्यवसाय में वृद्धि जन्म कुंडली निर्माण कालसर्प योग मांगलिक योग पितृ दोष निवारण भविष्य में होने वाले घटनाक्रम में सफ़लता पति-पत्नी में मतभेद प्रेम प्रसंग में सफलता ज्योतिष परामर्श ज्योतिष कार्यालय जोगनीपाली तहसील पोस्ट थाना सरायपाली जिला महासमुंद 9926826570
फोन पेय 8889391334
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आज का राशिफल
🐐🐂💏💮🐅👩
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मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आपका आज का दिन सामाजिक कार्यो में समर्पित रहेगा आज आप परोपकार एवं स्वार्थ सिद्धि के बीच उलझे रहेंगे अपने नियत कार्यो में फेरबदल कर मित्र परिचितों के आवश्यक कार्यो में समय देना पड़ेगा लेकिन प्रशंशा की जगह आज अपमान हो सकता है विशेषकर सार्वजनिक क्षेत्र पर विपरीत लिंगीय से सावधानीपूर्वक व्यवहार करें लांक्षन लगने की संभावना है। कार्य व्यवसाय में सहकर्मी अथवा अधीनस्थों के ऊपर निर्भर रहना पड़ेगा जिससे लाभ की संभावना भी आज कम ही रहेगी। आत्मनिर्बर होकर जोभी कार्य करेंगे उसमे आरंभिक परेशानी के बाद आकस्मिक लाभ होने की संभावना है। सेहत भी अकस्मात ही नरम होगी।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन आपको किसी ना किसी रूप में धन अथवा अन्य लाभ कराएगा लेकिन आज भी मन मे चल रही कामना पूर्ति होने में कोई व्यवधान अवश्य आएगा। दिन के आरम्भ में आलसी स्वभाव के कारण दिनचार्य धीमी चलेगी लेकिन मध्यान के समय कही से लाभ की संभावना बनने पर कार्य के प्रति गंभीरता आएगी। कार्य क्षेत्र पर पुरानी योजना से लाभ होगा नए कार्यो में भी निवेश कर सकते है निकट भविष्य में लाभ देगा। महिलाओ की मानसिकता आज सुखोपभोग की रहेगी जिस कारण घर के कार्य अस्त व्यस्त होंगे। आज अचल संपत्ति सम्पति संबंधित अधूरे कार्य को प्रथमिकता दे सफलता की संभावना अधिक है। विपरीत लिंगीय के प्रति शीघ्र आकर्षित हो जाएंगे।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज के दिन आप धार्मिक कार्यो में अधिक रुचि लेंगे दिन के आरंभिक भाग में व्यस्तता में भी पूजा पाठ के लिये समय निकाल लेंगे दिन का आरंभ ऊर्जावान रहने से शेष भाग में भी मानसिक रूप से शांति बनी रहेगी। मध्यान के बाद स्वभाव में ईर्ष्या आएगी जिससे लोगो मे आपके प्रति हीनभावना बढ़ सकती है लेकिन आपके परोपकारी स्वभाव के चलते लोग छोटी मोटी बातो को अनदेखा करेंगे। कार्य व्यवसाय में लाभ के अवसर मिलेंगे यहाँ लोभ से बचे अन्यथा थोड़े बहुत लाभ से भी वंचित हो जाएंगे। घर मे आज वैचारिक मतभेद रहने के बाद भी आपके कद में वृद्धि होगी। अपच के कारण अन्य शारीरिक समस्या बन सकती है खान पान में संयम बरते।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज परिस्थियां आपके अनुकूल तो नहीं फिर भी मन को संतोष अवश्य देंगी। सुबह से ही आलस्य प्रमाद में रहेंगे कार्य क्षेत्र को लेकर किसी विशेष सोच में समय खराब होगा मौके की तलाश में रहेंगे परन्तु आज भाग दौड़ से बचने का प्रयास होने वाले लाभ में कमी लाएगा। कार्य क्षेत्र पर मंदी के कारण मन कम ही लगेगा फिर भी संध्या के आसपास कामचलाऊ धन की आमद हो जाएगी। घर मे आपका उदासीन व्यवहार परिजनों को पसंद नही आएगा बड़े बुजुर्गों से मार्गदर्शन के साथ ताने भी सुनने को मिलेंगे। सरकारी क्षेत्र से आज संभावना होने पर भी लाभ नहीं मिल सकेगा। संध्या का समय राहत वाला रहेगा किसी समारोह में सम्मिलित होंगे प्रियजनों से भेंट मन हल्का करेगी।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन आपके लिये किसी बहुप्रतीक्षित कामना की पूर्ति कराएगा लेकिन इसके लिये व्यवहार में मिठास भी रखनी पड़ेगी अन्यथा परिणाम विपरीत भी हो सकते है। दिन के आरंभ से ही किसी जरूरी कार्य को लेकर व्यस्त रहेंगे दोपहर के बाद इसके पूर्ण होने पर राहत मिलेगी। आज किसी सार्वजनिक कार्य को लेकर भी दिनचार्य में बदलाव करना पड़ेगा। कार्य व्यवसाय स्थल पर अनुकूल वातावरण कुछ समय के लिये ही मिलेगा इसका समय रहते लाभ उठाएं अन्यथा बाद में पछताना पड़ेगा। धन की आमद आज बिना मेहनत के ही हो जाएगी जिससे स्वभाव में आलस्य रहेगा। महिलाओ का दिमाग बिना मेहनत सफलता मिलने पर सातवे आसमान पर रहेगा। संध्या के समय सेहत थोड़ी नरम रहने पर भी मनोरंजन के अवसर तलाशेंगे।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन आपके लिये खर्चीला रहेगा। आपका स्वभाव भी दिखावा पसन्द रहने के कारण आवश्यकता से अधिक खर्च करेंगे। कार्य क्षेत्र पर भाग्य का साथ कम ही मिलेगा मध्यान के बाद लाभ के अवसर मिलेंगे जिन्हें लापरवाही के चलते हाथ से निकाल सकते है। धन की आमद को लेकर आज बेपरवाह रहेंगे फिर भी काम चलाऊ हो ही जायेगी। कोर्ट कचहरी अथवा अन्य सरकारी कार्यो के ऊपर भी खर्च करना पड़ेगा आज जितना हो सके व्यर्थ के खर्च से बचे नही तो बाद में आर्थिक उलझने परेशान करेंगी। नौकरी पेशाओ का अधिकारी वर्ग से अनबन होने की संभावना है जिसका परिणाम बाद में परेशान करेगा जल्दबाजी में कोई निर्णय ना लें। पति-पत्नी में किसी न किसी बात को लेकर मतभेद रहेंगे।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज के दिन आप अधिकांश कार्य बुद्धि विवेक के साथ करेंगे लेकिन स्वार्थ सिद्धि की भावना अधिक रहने के कारण अपना हित साधने के लिये किसी अन्य को परेशानी में डालने में संकोच नही करेंगे। घर अथवा बाहर पिता अथवा किसी वरिष्ठ व्यक्ति का जिद्दी स्वभाव क्रोध दिलाएगा लेकिन ध्यान रखें आज धैर्य रखने पर ही इनसे लाभ और सम्मान मिलेगा। महिलाए के मन मे कोई गुप्त युक्ति लगी रहेगी स्वभाव भी सनकियो जैसा रहने के कारण आस पास के लोगो को पसंद नही आएगा। अचल संपत्ति के कार्यो में आज ढील देना ही बेहतर है सरकारी पचड़ों से स्वयं को दूर रखें। संध्या के समय कही से आकस्मिक धन अथवा शुभ समाचार मिल सकता है। आवश्यक कार्य आज पूरा कर लें इसके बाद कलह क्लेश की भेंट चढ़ेगा। शरीर मे छोटी मोटी व्यादि लगी रहेगी।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन विपरीत फलदायी रहेगा स्वभाव में रखापन और बात बात पर क्रोध आने से आसपास के लोग आपके साथ व्यवहार करने में असहज अनुभव करेंगे। मध्यान तक ज्यादा आवश्यकता पड़ने पर ही बोले इसके बाद स्वभाव में नरमी आने लगेगी। कार्य क्षेत्र पर कोई भी भला बुरा निर्णय लेने से पहले अवश्य विचार करें शीघ्र ही इसकी पुनरावृति होगी। कार्य व्यवसाय को लेकर भी मध्यान तक कोई न कोई दुविधा लगी रहेगी इसके बाद कहि से आकस्मिक लाभ मिलने पर शान्ति मिलेगी। सहकर्मी अथवा किसी स्वजन पर अनैतिक दबाव ना बनाये अन्यथा स्वयं ही मुसीबत में फसेंगे। पति पत्नी एक दूसरे की भावनाओ को समझे छोटी बातों पर कलह हो सकती है। पेट संबधित संमस्या लगी रहेगी।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज के दिन से आप कुछ ना कुछ लाभ अवश्य उठाएंगे आपका निखारा हुआ व्यक्तित्त्व भी कठिन कार्यो को आसान बनाने में सहायता करेगा। जिस भी कार्यो को करेंगे पूर्ण समर्पित भाव से ही करेंगे इसलिये किसी का भी गैरजिम्मेदार व्यवहार पसंद नही करेंगे। आज छोटे भाई बहन को आपसे अथवा आपको उनसे किसी भी रूप में लाभ होने की सम्भवना है। शत्रु पक्ष अपनी ही गलतियों के कारण आपके सामने आने की हिम्मत नही कर पाएंगे। व्यावसायिक स्थल पर आपकी बातों को महत्त्व मिलेगा प्रतिस्पर्धा कम रहने का पूरा लाभ उठाये लेकिन आज अतिआत्मविश्वाश और अहम की भावना से बचे अन्यथा परिणाम विपरीत हो सकते है। आर्थिक अथवा पारिवारिक कारणों से यात्रा करनी पड़ सकती है इसमे सतर्कता बरते।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज के दिन आपका व्यवहार अनाड़ियों जैसा रहेगा सेहत आज लगभग सामान्य बनी रहेगी कार्य क्षेत्र पर अथवा अन्य कारणों से जमा पूंजी खर्च करेंगे। मध्यान तक कि दिनचार्य अस्त व्यस्त रहेगी इसके बाद ही थोड़ी स्थिरता आ पाएगी। काम धंधे को लेकर कोई नई संमस्या खड़ी होगी इसका आज निपटारा सम्भव नही जोर जबरदस्ती भी ना करें अन्यथा बात बिगड़ सकती है। आज अपने बलबूते ही कार्य करने का प्रयास करे अन्य के भरोसे बैठकर हानि हो सकती है धन की आमद खर्च से कम रहने के कारण आर्थिक विषमताओं का सामना करना पड़ेगा। शादी विवाहादि के कार्य में सहभागिता देनी पड़ेगी। महिलाए आज अपने मन की करेंगी।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज के दिन आपका व्यवहार बच्चों जैसा रहेगा अपनी बचकाना हरकतों से नाराज लोगो को भी हंसने पर मजबूर करेंगे। दिन के आरम्भ से मध्यान तक लगभग सभी कार्यो में लापरवाही दिखाएंगे किसी की डांट फटकार सुनने के बाद ही स्वभाव में गंभीरता आएगी। मीठा बोलने वालों से आज विशेष सावधानी बरतें पीठ पीछे आपको हानि पहुँचा सकते है। कार्य व्यवसाय में दोपहर के बाद लाभ की संभावना बनेगी लेकिन टलते टलते संध्या के समय आकस्मिक रूपनसे होगी। धन आज आएगा लेकिन टिकेगा नही रूठो को मनाने अथवा पारिवारिक व्यवहारों पर खर्च करना पड़ेगा। शाम के समय थकान बनने से उत्साह हीनता बढ़ेगी। संचित कोष में कमी आएगी।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आपको आज का दिन सावधानी से बिताने की सलाह है। जाने अनजाने कोई ऐसा काम हो सकता है जिसका भुगतान लंबे समय तक करना पड़ेगा साथ ही किसी प्रियजन से संबंधों में खटास भी बनेगीं। कार्य व्यवसाय से आज जो भी उम्मीद लगाएंगे परिणाम उसके विपरीत ही रहने वाले है इसलिए आर्थिक मामलों में अधिक सतर्कता बरते। उधार लिया धन शीघ्र लौटाने का प्रयास करें अन्यथा मान हानि हो सकती हैं। परिजन का व्यवहार भी अनापेक्षित रहेगा जिससे बात बात पर गुस्सा आएगा आज धैर्य और विवेक का परिचय दें कल से परिस्थिति सुधरने लगेगी। किसी भी प्रकार के जोखिम से बचें हानि ही निश्चित है। यात्रा टालने के प्रयास करे सेहत बिगड़ने की संभावना है

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में बस्तर दशहरा महोत्सव को संबोधित किया

 

 

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित बस्तर दशहरा महोत्सव को संबोधित किया। इससे पहलेश्री अमित शाह ने प्रसिद्ध दंतेश्वरीमंदिर में दर्शन और पूजन किया। बस्तर दशहरा महोत्सवअवसर में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री डॉ. विजय शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि 75 दिनों तक चलने वाला विश्व का सबसे बड़ा और अनूठा बस्तर दशहरामेला न केवल आदिवासी समाज, बस्तर, छत्तीसगढ़ या भारत बल्कि पूरे विश्व में सबसे बाद सांस्कृतिक महोत्सव है। श्री शाह ने कहा कि आज माँ दंतेश्वरी के दर्शन-पूजन के दौरान उन्होंने प्रार्थना की कि वे हमारे सुरक्षा बलों को शक्ति दें ताकि वे 31 मार्च, 2026 तक बस्तर क्षेत्र को लाल आतंक से मुक्त कर सकें। श्री शाह ने कहा कि दिल्ली में कुछ लोग वर्षों तक यह भ्रांति फैलाते रहे कि नक्सलवाद का जन्म विकास की लड़ाई है, जबकि सच यह है कि बस्तर के विकास से वंचित रहने का मूल कारण नक्सलवाद ही है। उन्होंने कहा कि आज देश के हर गाँव में बिजली, पेयजल, सड़क, हर घर में शौचालय, पाँच लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा और पाँच किलो मुफ्त अनाज के साथ-साथ चावल को 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदने की व्यवस्था पहुँच चुकी है, लेकिन बस्तर प्रगति की इस दौड़ में पीछे रह गया है।

गृह मंत्री ने कहा कि वे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की ओर से यह आश्वासन देना चाहते हैं कि 31 मार्च, 2026 के बाद नक्सलवादी न तो बस्तर के विकास और न ही बस्तर के लोगों के अधिकारों को रोक पाएंगे। श्री शाह ने कहा कि बस्तर क्षेत्र के जो बच्चे भटक कर नक्सलवाद से जुड़ गए हैं, वे स्थानीय गांवों के ही हैं। श्री शाह ने बस्तर के लोगों से अपील की कि वे भटके हुए इन बच्चों को हथियार छोड़ कर मुख्यधारा में शामिल होने की बात समझाएं, ताकि वे बस्तर के विकास में सहभागी बनें।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन ने देश की सबसे बेहतर सरेंडर नीति बनाई है। पिछले एक महीने में ही 500 से अधिक लोग सरेंडर कर चुके हैं। उन्होंने नक्सलियों से अपील की कि वे सरेंडर कर दें। श्री शाह ने कहा कि जिस गाँव में नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा, वहाँ छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गाँव के विकास के लिए 1 करोड़ रुपए दिए जाएँगे। श्री शाह ने कहा कि नक्सलवाद से किसी का भला नहींहुआ है और यह समस्या अब काफी हद तक कम हो चुकी है।

श्री अमित शाह ने कहा कि कि केन्द्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर सहित सभी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए पूर्णतः समर्पित हैं और इसके लिए आकर्षक नीतियाँ बनाई गई हैं।प्रधानमंत्री मोदी जी ने छत्तीसगढ़ के विकास के लिए पिछले 10 वर्षों में लगभग 4 लाख 40 हजार करोड़ रुपए की धनराशि प्रदान की है। छत्तीसगढ़ का विकास दिन-दूनी,रात-चौगुनी गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योग स्थापित हो रहे हैं, शिक्षा के संस्थान बन रहे हैं, और स्वास्थ्य संस्थानों का विकास हो रहा है। साथ ही, हमारे लघु उद्योगों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

केन्द्रीय गृह मंत्री नेकहा कि हमने बहुत मोहक आत्मसमर्पण नीति बनाई है। उन्होंने नक्सलियों से अपील की कि वे हथियार डाल दें। श्री शाह ने साथ ही चेताया भी कि यदि हथियारों के जरिए बस्तर की शांति को भंग करने का प्रयास किया गया, तो हमारे सशस्त्र बल, CRPF, और छत्तीसगढ़ पुलिस मिलकर इसका करारा जवाब देंगी। उन्होंने कहा कि 31 मार्च, 2026 की तिथि तय है, जब नक्सलवाद को इस देश से पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि इस बार बस्तर ओलंपिक में देशभर के आदिवासी भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि बस्तर का पंडुम उत्सव, खान-पान, वेश-भूषा, कला, और वाद्य यंत्र न केवल बस्तर में, बल्कि पूरे विश्व में आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी का यही संकल्प है कि हमारी संस्कृति, भाषा, खान-पान, वेश-भूषा और वाद्य यंत्र सदियों तक न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व के लिए संरक्षित रहें। इस संकल्प को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार और भारत सरकार कटिबद्ध हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर में 1874 से आज तक मुरिया दरबार में सक्रिय भागीदारी, न्यायिक व्यवस्था, आदिवासी संस्कृति को संरक्षित करने का चिंतन और जनसंवाद की ऐतिहासिक परंपरा किसी वैश्विक धरोहर से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि मुरिया दरबार पूरे देश के लिए प्रेरणा और जानकारी का विषय है।

श्री अमित शाह ने स्वदेशी जागरण मंच द्वारा आयोजित स्वदेशी मेला का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने लंबे समय से स्वदेशी पर जोर दिया है। स्वदेशी जागरण मंच कई वर्षों से स्वदेशी को जन-आंदोलन के रूप मेंचला रहा है। अब मोदी जी ने सभी से आह्वान किया है कि प्रत्येक घर को यह संकल्प लेना है कि हम केवल अपने देश में बनी वस्तुओं का उपयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यापारी को यह संकल्प लेना है कि उनकी दुकान या शॉपिंग मॉल में विदेशी वस्तुएँ उपलब्ध नहीं होंगी। श्री शाह ने कहा कि यदि 140 करोड़ की आबादी स्वदेशी के इस संकल्प को आत्मसात कर ले, तो भारत को विश्व की सर्वोच्च आर्थिक शक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मोदी जी ने हाल ही में छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश की माताओं-बहनों को 395 वस्तुओं पर जीएसटी में भारी छूट देकर बड़ी राहत प्रदान की है। खाने-पीने की लगभग सभी चीजों को कर-मुक्त कर दिया गया है, और रोजमर्रा की उपयोग की वस्तुओं पर केवल पाँच प्रतिशत कर रखा गया है। उन्होंने कहा कि देश में इतनी बड़ी कर कटौती पहले कभी नहीं हुई, जितनी मोदी जी ने की है। इसके साथ ही, यदि हम स्वदेशी के संस्कारों को अपनाते हैं, तो हमारे देश की अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व गति मिलेगी। श्री शाह ने कहा कि बस्तर दशहरा महोत्सव में 300 से अधिक स्वदेशी कंपनियाँ हिस्सा ले रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वदेशी वॉकथॉन स्वदेशी भावना को नई पहचान देने का एक प्रभावी माध्यम बन गया है। आज देशभर में आयोजित हो रहे स्वदेशी मेलों के माध्यम से स्वदेशी अभियान को और गति मिल रही है।

श्री अमित शाह ने कहा कि श्रावण अमावस्या से अश्विन शुक्ल त्रयोदशी तक चलने वाला बस्तर का 75 दिनों का दशहरा हम सभी के लिए गौरव, पहचान और अभिमान का विषय है। उन्होंने कहा कि 14वीं शताब्दी से शुरू हुई रथ यात्रा ने इस पूरे क्षेत्र में सांस्कृतिक जागृति की शुरुआत की। श्री शाह ने कहा कि माँ दंतेश्वरी की रथ यात्रा में 66 आदिवासी और कई गैर-आदिवासी समूह भाग लेते हैं। श्री शाह ने कहा कि बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार आदिवासियों को जोड़ने का कार्य करते हैं और पूरे बस्तर को एक सूत्र में पिरोते हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने आदिवासियों के सम्मान में अनेक योजनाएँ शुरू की हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी ने पहली बार देश के सर्वोच्च पद पर आदिवासी समुदाय की बेटी श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर गौरवपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने कहा कि जब महामहिम द्रौपदी मुर्मू जी विश्व के राष्ट्राध्यक्षों से मिलती हैं, तो न केवल आदिवासी समाज, बल्कि हम सभी का हृदय गर्व से भर जाता है। लोकतंत्र के सर्वोच्च पद पर ओडिशा के एक गरीब परिवार की बेटी का महामहिम के रूप में आसीन होना हम सभी के लिए गौरव का विषय है। श्री शाह ने कहा कि मोदी जी ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती को जनजातीय गौरव वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया। उनकी जयंती को आदिवासी गौरव दिवस के रूप में स्थापित किया गया। बस्तर संभाग के सातों जिलों में नक्सलवाद छोड़कर सरेंडर करने वाले व्यक्तियों और नक्सली हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए 15,000 से अधिक प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत करने का कार्य भी प्रधानमंत्री मोदी जी ने किया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि नारायणपुर जिले के पंडी राम मंडावी और हेमचंद मांझी, तथा कांकेर के अजय कुमार मंडावी को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा महोत्सव के अवसर पर आज ‘महतारी वंदन योजना’ की 20वीं किस्त के रूप में 70 लाख छत्तीसगढ़ी माताओं को 607 करोड़ रुपए वितरित किए गए। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का शुभारंभ किया गया है। यह योजना बस्तर और सरगुजा संभागों में लागू की गई है और इसके तहत 250 गाँव समाहित किए गए हैं।