महासमुंद कलेक्टर ने ली सड़क सुरक्षा समिति की बैठक संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के दिए निर्देश

महासमुंद कलेक्टर ने ली सड़क सुरक्षा समिति की बैठक संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के दिए निर्देश

महासमुंद 14 जुलाई 2026/ कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में समय सीमा की बैठक के पश्चात सड़क सुरक्षा समिति की बैठक हुई। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, यातायात व्यवस्था सुदृढ़ करने एवं आमजन में जागरूकता बढ़ाने के संबंध में संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री सचिन भूतड़ा, श्री रवि साहू, सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य एवं जिला अधिकारी मौजूद थे।

रात्रि के समय सड़कों पर विचरण करने वाले मवेशियों से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु कलेक्टर ने सीईओ, सीएमओ, एनएचआई, पशुपालन विभाग, यातायात विभाग तथा नगरीय निकायों को संयुक्त रूप से अभियान चलाकर मवेशियों को सड़कों से हटाने की कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही पशु मालिकों की पहचान कर उन्हें समझाईश देने तथा उनके विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा चिन्हित दुर्घटना संभावित स्थलों (ब्लैक स्पॉट) एवं नवीन ब्लैक स्पॉट का चिन्हांकन कर वहां आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग तथा नगरीय एवं ग्रामीण निकायों को निर्देशित किया गया। साथ ही ओवरलोड संचालित हो रहे वाहनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।

बैठक में कलेक्टर श्री लंगेह ने निर्देशित किया कि स्कूलों में विद्यार्थियों के माध्यम से पालकों से संपर्क स्थापित कर यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाएं, ताकि सड़क सुरक्षा के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी विकसित हो सके। कलेक्टर ने यातायात नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए यातायात विभाग को निर्देशित किया गया कि हेलमेट न पहनने एवं अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन पर ई-चालान की प्रभावी कार्रवाई करें।

जिला परिवहन अधिकारी श्री प्रतीक शुक्ला ने बताया कि जिले में 4 नवीन ब्लैक स्पॉट के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपाय किया जा रहा है। कलेक्टर श्री लंगेह ने सभी संबंधित विभागों को सड़क सुरक्षा से जुड़े दिशा-निर्देशों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित करने तथा समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

पिथौरा–बसना में पुलिस का बड़ा एक्शन: धान उपार्जन केंद्र चोरी का खुलासा, जुआ फड़ पर छापा, 10 आरोपी गिरफ्तार

पिथौरा–बसना में पुलिस का बड़ा एक्शन: धान उपार्जन केंद्र चोरी का खुलासा, जुआ फड़ पर छापा, 10 आरोपी गिरफ्तार

महासमुंद जिले में पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग मामलों में सफलता हासिल की है। एक ओर बसना पुलिस ने अवैध जुआ फड़ पर छापा मारकर आठ जुआरियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है, तो दूसरी ओर पिथौरा पुलिस ने धान उपार्जन केंद्र में हुई चोरी का खुलासा करते हुए दो शातिर चोरों को दबोच लिया है।

पहले बात करते हैं बसना थाना क्षेत्र की…

मुखबिर की सूचना पर ग्राम पठियापाली के तालाब मेड़ पर महुआ पेड़ के नीचे चल रहे अवैध जुआ फड़ पर पुलिस ने दबिश दी। मौके से 52 पत्ती ताश पर दांव लगाकर जुआ खेल रहे आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने 8 हजार 50 रुपये नकद, 52 पत्ती ताश और चार मोटरसाइकिलें जब्त की हैं। जब्त सामग्री की कुल कीमत 88 हजार 50 रुपये आंकी गई है। सभी आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में पुरुषोत्तम जगत, अंतर्यामी भोई, ललित दास, हिरादास मानिकपुरी, संतोष दास, राजकुमार सुरलिया, धनेश नाग और अजय साव शामिल हैं।

अब बात पिथौरा थाना क्षेत्र की…

ग्राम डिघेपुर धान उपार्जन केंद्र में हुई 78 हजार 250 रुपये की चोरी का पुलिस ने त्वरित खुलासा कर दिया है। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और दोनों संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनकी निशानदेही पर चोरी गया पूरा सामान बरामद कर लिया गया, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटे, सीसीटीवी कैमरे, केबल, इलेक्ट्रॉनिक तार, 20 किलो के बाट और अन्य सामग्री शामिल है। इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों के नाम हैं मोहित नागर और शोभु देवार। दोनों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

महासमुंद पुलिस का कहना है कि जिले में अवैध गतिविधियों और संपत्ति संबंधी अपराधों के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

 

सरायपाली/ उद्घाटन से पहले ही पहली ही बारिश में धंस कर दो फाड़ हुई सड़क सारंगढ़ के ठेकेदार और PWD के देख रेख में बनी डामरीकरण मार्ग जर्जर अब विभाग ठेकेदार के खर्च से दोबारा बनाने की बात कर रहा है

सरायपाली/ उद्घाटन से पहले ही पहली ही बारिश में धंस कर दो फाड़ हुई सड़क सारंगढ़ के ठेकेदार और PWD के देख रेख में बनी डामरीकरण मार्ग जर्जर अब विभाग ठेकेदार के खर्च से दोबारा बनाने की बात कर रहा है

हेमन्त वैष्णव
महासमुंद/ सरायपाली बसना विकासखंड के कापूडीह से बिरसिंगपाली मार्ग पर करीब 2 करोड़ 89 लाख 59 हजार रुपये की लागत से बनाई गई 2.50 किलोमीटर लंबी सड़क पहली ही बारिश में जगह-जगह से उखड़कर दो फाड़ हो गई है। इस सड़क का निर्माण लोक निर्माण विभाग (PWD) सरायपाली के माध्यम से कराया गया था और निर्माण कार्य का ठेका मनोज केडिया को दिया गया था।

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण शुरू होने के समय से ही पुलिया और सड़क में घटिया सामग्री तथा गुणवत्ता से समझौता किए जाने की लिखित शिकायत संबंधित अधिकारियों से की गई थी, लेकिन शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अब पहली ही बारिश में सड़क की हालत सामने आने के बाद ग्रामीण विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।

बता दे कि जब सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार की शिकायतें उठीं, तब कथित तौर पर सड़क पर मुरूम डालकर डामरीकरण को ढंकने का प्रयास किया गया, ताकि निर्माण की खामियां छिपाई जा सकें। इस मामले को दैनिक भास्कर ने भी पहले प्रमुखता से प्रकाशित किया था। उस समय विभागीय अधिकारियों में एसडीओ सरायपाली तिवारी ने मुरूम डाले जाने के लिए ग्रामीणों को जिम्मेदार बताते हुए गांव वालो के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी जबकि मुरूम को ठेकेदार द्वारा डलवाया गया था

अब जर्जर सड़क को लेकर दूरभाष के माध्यम से फोन से pwd के एसडीओ को फोन तथा व्हाट्सएप पर सड़क की वर्तमान स्थिति के फोटो और वीडियो भेजे गए, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। ऐसे में ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि क्या संबंधित अधिकारी इस निर्माण कार्य की जिम्मेदारी लेंगे या फिर ठेकेदार से सड़क का पुनर्निर्माण कराया जाएगा।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के दौरान खराब गुणवत्ता की सड़क का वीडियो बनाने पर ठेकेदार के एक इंजीनियर द्वारा उन्हें धमकाया गया था। इस संबंध में सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें सरायपाली विधायक और ठेकेदार के निजी इंजीनियर के बीच सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर तीखी बहस दिखाई देती है।

ग्रामीणों का कहना है कि अब जबकि पहली ही बारिश में करोड़ों रुपये की सड़क उखड़ चुकी है, ऐसे में यह स्पष्ट हो गया है कि निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही या अनियमितता हुई है। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच, दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तथा ठेकेदार के खर्च पर सड़क का दोबारा निर्माण कराने की मांग की है।

चार माह पहले ही ग्रामीणों ने जताई थी आशंका

उल्लेखनीय है कि करीब चार माह पहले ही ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), सरायपाली को लिखित शिकायत देकर सड़क निर्माण में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया था। शिकायत में कहा गया था कि 2 करोड़ 89 लाख 59 हजार रुपये की लागत से बन रही कापूडीह–बिरसिंगपाली सड़क में निर्धारित मानकों के अनुरूप डामर और अन्य निर्माण सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा है। साथ ही पुल निर्माण की गुणवत्ता, टर्निंग वॉल, तालाब किनारे सुरक्षा दीवार, सड़क किनारे पीपल के पेड़ के पास सुरक्षा संबंधी खामियां तथा बैरसमलिहा डिपा की ओर प्रस्तावित लगभग 300 मीटर सीसी सड़क का निर्माण नहीं किए जाने जैसे मुद्दे भी उठाए गए थे।

शिकायत में ग्रामीणों ने मौके पर तकनीकी जांच कराकर दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की थी। अब पहली ही बारिश में सड़क के दो फाड़ होकर उखड़ जाने के बाद ग्रामीणों का कहना है कि यदि चार माह पहले की शिकायत पर निष्पक्ष जांच और समय पर कार्रवाई की गई होती, तो करोड़ों रुपये की इस सड़क की ऐसी दुर्दशा नहीं होती। अब ग्रामीण पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कर दोष तय करने, जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई करने तथा जनता के पैसे से बनी सड़क की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।

PWD इंजीनियर का बयान: धंसे हिस्से का डामरीकरण ठेकेदार अपने खर्च पर दोबारा करेगा
कापूडीह–बिरसिंगपाली डामरीकरण मार्ग के एक हिस्से में सड़क धंसने के मामले में लोक निर्माण विभाग (PWD) के उप अभियंता मुकेश नाइक ने बताया कि नए मिट्टी वाले हिस्से में अधिक नमी (हाइड) और सेटलमेंट के कारण सड़क का कटाव हुआ है, जिससे मार्ग का एक हिस्सा धंस गया।
उन्होंने बताया कि संबंधित ठेकेदार का डामरीकरण कार्य का पूरा भुगतान फिलहाल रोक दिया गया है और उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही, धंसे हुए हिस्से का डामरीकरण ठेकेदार को अपने खर्च पर दोबारा कराना होगा। सुधार कार्य और गुणवत्ता मानकों की जांच के बाद ही भुगतान पर आगे निर्णय लिया जाएगा।
उप अभियंता ने यह भी स्पष्ट किया कि इस सड़क का अभी तक औपचारिक उद्घाटन नहीं हुआ है। विभाग की निगरानी में आवश्यक सुधार कार्य पूरा कराया जाएगा।

महासमुंद/प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना ने दिया परिवार को आर्थिक संबल

महासमुंद/प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना ने दिया परिवार को आर्थिक संबल

महासमुंद/ केंद्र सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक प्रभावी रूप से पहुंचाने जिले में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में आज कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने अपने कक्ष में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के अंतर्गत ग्राम गाड़सिवनी की निवासी श्रीमती कुलेश्वरी पुष्कर को 2 लाख रुपये की बीमा दावा राशि का चेक प्रदान किया।

इस अवसर पर कलेक्टर श्री लंगेह ने कहा कि प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना कम प्रीमियम में अधिक सुरक्षा प्रदान करने वाली जनकल्याणकारी योजना है। किसी परिवार के कमाऊ सदस्य के असामयिक निधन के बाद आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसे समय में योजना के तहत मिलने वाली बीमा सहायता राशि परिवार के लिए बड़ा सहारा बनती है। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य प्रत्येक पात्र नागरिक को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है, ताकि विपरीत परिस्थितियों में परिवारों को आर्थिक सहयोग मिल सके।

उन्होंने जिले के सभी पात्र नागरिकों से प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से जुड़ने और समय-समय पर अपने बैंक खाते के माध्यम से इसका नवीनीकरण कराने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि बैंकों की सक्रिय भागीदारी से इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है। उन्होंने बैंक अधिकारियों से अधिक से अधिक पात्र लोगों को योजना से जोड़ने तथा दावा प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बीमा सहायता राशि प्राप्त करते हुए श्रीमती कुलेश्वरी पुष्कर ने शासन एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संबंधित बैंक के अधिकारी उपस्थित थे।

महासमुंद/जन चौपाल में विधायक श्री सिन्हा ने किसानों को उड़द बीज किट का किया वितरण, आधुनिक एवं विविधीकृत खेती अपनाने का दिया गया संदेश

महासमुंद/जन चौपाल में विधायक श्री सिन्हा ने किसानों को उड़द बीज किट का किया वितरण, आधुनिक एवं विविधीकृत खेती अपनाने का दिया गया संदेश

महासमुंद/ खरीफ मौसम को ध्यान में रखते हुए महासमुंद विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत परसदा में आज आयोजित जन चौपाल कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा मुख्य अतिथि थे। उन्होंने किसानों को उड़द बीज किट का वितरण किया। इस अवसर पर किसानों को उन्नत एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने, फसल विविधीकरण तथा शासन की विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा ने कहा कि राज्य एवं केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने किसानों से परंपरागत खेती के साथ-साथ दलहन, तिलहन एवं अन्य नकदी फसलों का उत्पादन बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि धान के साथ फसल विविधीकरण अपनाने से भूमि की उर्वरता बनी रहती है, उत्पादन लागत कम होती है तथा किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। उन्होंने किसानों से शासन की योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील की।

कार्यक्रम में विधायक श्री सिन्हा ने किसानों को खरीफ फसल प्रबंधन, उन्नत कृषि तकनीकों एवं विभागीय योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को एग्रीस्टैक पंजीयन कराने के लिए प्रेरित करते हुए बताया कि भविष्य में विभिन्न शासकीय योजनाओं एवं कृषि सेवाओं का लाभ डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के पात्र किसानों को समय पर पंजीयन एवं आवश्यक दस्तावेज अद्यतन कराने की सलाह दी। साथ ही मृदा स्वास्थ्य परीक्षण कराने का आग्रह करते हुए कहा कि मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित उर्वरकों का उपयोग करने से उत्पादन बढ़ता है और लागत में कमी आती है।

कृषि विभाग के कृषि विस्तार अधिकारी अल्का सोनी ने किसानों को जैविक खेती अपनाने, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष बल दिया। उन्होंने वर्तमान मौसम परिस्थितियों एवं अल नीनो के संभावित प्रभावों की जानकारी देते हुए किसानों को मौसम आधारित कृषि प्रबंधन अपनाने की सलाह दी। अन्य कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए धान के साथ-साथ उड़द, मूंग, अरहर, तिल, सोयाबीन एवं अन्य दलहन-तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाना समय की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में किसानों को जिले में खाद एवं प्रमाणित बीज की पर्याप्त उपलब्धता की जानकारी देते हुए आवश्यकतानुसार कृषि सेवा केंद्रों से सामग्री प्राप्त करने की अपील की गई। साथ ही विभागीय अधिकारियों ने कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, तकनीकी मार्गदर्शन एवं कृषि विस्तार सेवाओं की भी जानकारी प्रदान की। जन चौपाल में बड़ी संख्या में ग्रामीण किसान, जनप्रतिनिधि, कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

महासमुंद/हरी खाद (ढैंचा) से संवर रही खेतों की सेहत, टिकाऊ खेती की ओर बढ़ रहे किसान

महासमुंद/हरी खाद (ढैंचा) से संवर रही खेतों की सेहत, टिकाऊ खेती की ओर बढ़ रहे किसान

महासमुंद/ राज्य शासन की मंशानुरूप जिले में कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार कृषि विभाग द्वारा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने हरी खाद (ढैंचा) के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। खेत बचाओ अभियान के तहत जिले के सभी विकासखंडों में किसानों को हरी खाद अपनाने के लिए प्रेरित किया गया है। अभियान के अंतर्गत जिले में 376 हेक्टेयर क्षेत्र में 103 क्विंटल ढैंचा बीज का वितरण किया गया है, जिससे 813 किसान हरी खाद (ढैंचा) का उपयोग कर रहे हैं। कृषि विभाग के मार्गदर्शन में किसानों ने ढैंचा की बुवाई कर फूल आने से पहले उसे खेत में पलट दिया है। इसके सड़ने के बाद बनने वाली जैविक खाद के माध्यम से उसी खेत में धान की खेती की जाएगी।

कृषि विभाग के मार्गदर्शन में हरी खाद तकनीक को अपनाने वाले विकासखंड बसना अंतर्गत ग्राम बड़ेसाजापाली के किसान श्री हिमांशु बंजारे ने बताया कि उन्होंने अपने 0.80 हेक्टेयर कृषि रकबे में ढैंचा की हरी खाद की फसल बोई है। किसान श्री बंजारे का कहना है कि जैविक खेती अपनाने से खेती की लागत कम होने के साथ-साथ मिट्टी का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा। इसी तरह विकासखंड पिथौरा के ग्राम कौहाकुड़ा के कृषक श्री रूक्मण नायक ने अपनी 7 एकड़ कृषि भूमि में एवं बसना के ग्राम भौंरादादर के कृषक श्री गोकुल पटेल ने अपने खेत में ढैंचा हरी खाद फसल की बुवाई की है। हरी खाद का उपयोग कर रहे सभी किसानों का कहना है कि इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी तथा भूमि की उर्वराशक्ति में सुधार होगा तथा खेती की लागत में कमी आएगी।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ढैंचा एक दलहनी हरी खाद फसल है, जो वायुमंडल से नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर मिट्टी में उपलब्ध कराती है। इसके साथ ही यह फास्फोरस, जिंक एवं आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने में भी सहायक होती है। ढैंचा के सड़ने से बनने वाला ह्यूमस मिट्टी को भुरभुरा बनाता है, जिससे हवा और पानी का संचार बेहतर होता है। इसका सीधा लाभ फसलों की जड़ों के बेहतर विकास, पौधों की स्वस्थ वृद्धि तथा अधिक उत्पादन के रूप में मिलता है। हरी खाद मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ाने में भी विषेश भूमिका निभाती है। जैविक पदार्थ स्पंज की तरह कार्य करते हुए मिट्टी में लंबे समय तक नमी बनाए रखते हैं, जिससे सिंचाई की आवश्यकता कम होती है और फसलें सूखे की स्थिति में भी बेहतर प्रदर्शन करती हैं।

उप संचालक कृषि श्री एफ.आर. कश्यप ने किसानों से अपील की है कि धान सहित अन्य खरीफ फसलों की बुवाई से पूर्व ढैंचा, सनई अथवा अन्य उपयुक्त हरी खाद वाली फसलों का उपयोग कर मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाएं। उन्होंने कहा कि हरी खाद अपनाने से रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च कम होता है, मिट्टी की दीर्घकालीन उर्वराशक्ति बनी रहती है तथा पर्यावरण अनुकूल, टिकाऊ और लाभकारी कृषि को बढ़ावा मिलता है।

महासमुंद दुग्ध उत्पादन बढ़ाने कलेक्टर सख्त, वैज्ञानिक पशुपालन और नस्ल सुधार पर दिया जोर

महासमुंद दुग्ध उत्पादन बढ़ाने कलेक्टर सख्त, वैज्ञानिक पशुपालन और नस्ल सुधार पर दिया जोर

महासमुंद जिले में दुग्ध उत्पादन बढ़ाकर पशुपालकों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की अध्यक्षता में पशुधन विकास विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार, उप संचालक पशुधन विकास विभाग, जिले के सभी पशु चिकित्सक, मैदानी अमला, दुग्ध महासंघ के सुपरवाइजर तथा पशु सखियां मौजूद रहीं।

बैठक में कलेक्टर ने कहा कि महासमुंद में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पशुपालकों तक नियमित रूप से पहुंचकर वैज्ञानिक पशुपालन, पशु स्वास्थ्य, नस्ल सुधार और संतुलित पशु आहार की जानकारी दी जाए, ताकि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाया जा सके।

कलेक्टर ने देशी गायों में सेक्स सॉर्टेड सीमेन के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए। इससे अधिक संख्या में उन्नत नस्ल की बछियों का जन्म होगा, जो भविष्य में अधिक दुग्ध उत्पादन देने वाली गायें बनेंगी।

बैठक में पशु सखियों को राष्ट्रीय एवं राज्य मार्गों से लगे गांवों में जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। पशुपालकों से कहा जाएगा कि वे अपने मवेशियों को खुला छोड़ने के बजाय सुरक्षित स्थानों पर बांधकर रखें। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सड़क पर छोड़े गए पशुओं से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है और ऐसे मामलों में नियमानुसार संबंधित पशुपालकों से जुर्माना वसूला जाएगा।

जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार ने कहा कि जिले में दुग्ध उत्पादन दोगुना करने के लिए सुनियोजित कार्ययोजना और सभी विभागों के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने मैदानी अमले, दुग्ध महासंघ के सुपरवाइजर और पशु सखियों को अधिक से अधिक पशुपालकों को वैज्ञानिक पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से जोड़ने के निर्देश दिए।

बैठक में पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि तथा पशुपालकों की आय सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत समीक्षा कर अधिकारियों को समयबद्ध कार्ययोजना के साथ प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

महासमुंद/ बाढ़ में फंसे 14 मजदूरों को रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बाहर निकाला

महासमुंद/ बाढ़ में फंसे 14 मजदूरों को रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बाहर निकाला

महासमुंद, 05 जुलाई 2026। जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच रविवार सुबह ग्राम जोगीदीपा, थाना खल्लारी क्षेत्र में पुलिया निर्माण कार्य के दौरान 14 मजदूर बाढ़ के पानी में फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष ने तत्काल नगर सेना की रेस्क्यू टीम को मौके के लिए रवाना किया।

रेस्क्यू टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बाढ़ से घिरे सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बचाए गए लोगों में 10 पुरुष और 4 महिला मजदूर शामिल हैं।

समय रहते किए गए इस रेस्क्यू अभियान के कारण किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। सुरक्षित निकाले गए सभी मजदूरों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान नदी-नालों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें

महासमुंद/ बाढ़ में फंसे 14 मजदूरों को रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बाहर निकाला

महासमुंद, 05 जुलाई 2026। जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच रविवार सुबह ग्राम जोगीदीपा, थाना खल्लारी क्षेत्र में पुलिया निर्माण कार्य के दौरान 14 मजदूर बाढ़ के पानी में फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष ने तत्काल नगर सेना की रेस्क्यू टीम को मौके के लिए रवाना किया।

रेस्क्यू टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बाढ़ से घिरे सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बचाए गए लोगों में 10 पुरुष और 4 महिला मजदूर शामिल हैं।

समय रहते किए गए इस रेस्क्यू अभियान के कारण किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। सुरक्षित निकाले गए सभी मजदूरों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान नदी-नालों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें

बसना/ कोई सीसी रोड तोड़ कर अवैध निर्माण तो कोई ‘मोर बसना’ स्वागत गेट विस्फोटक से उड़ा देता है , फिर भी FIR क्यों नहीं शासकीय संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों पर कौन मेहरबान?

शासकीय गली पर अवैध कब्जे का आरोप: अलग खसरे के दस्तावेज देकर दूसरी जगह ली भवन निर्माण अनुमति! अब कलेक्टर से FIR दर्ज कराने की मांग

बसना। नगर पंचायत बसना के पदमपुर रोड स्थित शिवाय पेट्रोल पंप के पास शासकीय गली, नाली और सीसी रोड पर कथित अतिक्रमण कर भवन निर्माण किए जाने का मामला अब और गंभीर हो गया है। आरोप बसना के ललित अग्रवाल पर है जहां शिकायत कर्ताओं ने पहले बसना मुख्य नगर पंचायत अधिकारी से शिकायत कर निर्माण कार्य पर रोक लगाने और जांच की मांग की थी। अब उन्होंने जिला कलेक्टर को शिकायत सौंपकर शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग भी की है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि भवन निर्माण की अनुमति लेने के लिए नगर पंचायत में एक स्थान के खसरा नंबर के दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जबकि निर्माण कार्य दूसरे स्थान पर किया जा रहा है, जो राजस्व अभिलेखों में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है।

अलग खसरे के दस्तावेज लगाने का आरोप

शिकायत के अनुसार, भवन निर्माण अनुज्ञा प्राप्त करने के दौरान खसरा नंबर 326/6/38, जो सिटी ग्राउंड के पास स्थित भूमि का बताया गया है, उससे संबंधित बी-1, नक्शा एवं ब्लूप्रिंट प्रस्तुत किए गए। जबकि वर्तमान में निर्माण कार्य खसरा नंबर 326/1क पर किया जा रहा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है।

शासकीय गली और नाली पर निर्माण का आरोप

शिकायतकर्ता ने बताया कि संबंधित शासकीय गली महेंद्र साव के घर से होकर पुरानी बस्ती को जोड़ती है। गली के दोनों ओर अनिल अग्रवाल और संजय गुप्ता के मकान स्थित हैं। इसी गली के बीच से पूरी बस्ती के गंदे पानी की निकासी के लिए शासकीय नाली गुजरती है। आरोप है कि निर्माण के कारण आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होगी और नाली भी बंद होने की स्थिति में पहुंच सकती है।

सीसी रोड तोड़ने का भी आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस गली पर निर्माण किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है, वहां पूर्व में शासकीय राशि से सीसी रोड का निर्माण कराया गया था। यह मार्ग वर्षों से सार्वजनिक उपयोग में रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि निर्माण के दौरान इस सीसी रोड को भी तोड़ दिया गया, जिससे शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचा है।

कलेक्टर से FIR दर्ज कराने की मांग

शिकायत कर्ता ने जिला कलेक्टर को शिकायत देकर मांग की है कि शासकीय सीसी रोड तोड़े जाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में संबंधित लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाए। उनका कहना है कि यह केवल अतिक्रमण का मामला नहीं बल्कि शासकीय संपत्ति को क्षति पहुंचाने का भी मामला है।

एक सप्ताह बाद भी नहीं हटाया गया मलबा, कार्रवाई का इंतजार

शिकायतकर्ता का आरोप है कि शिकायत किए एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद नगर पंचायत बसना के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा न तो टूटी हुई सीसी रोड का मलबा हटाया गया है और न ही अपराध दर्ज कराने की दिशा में कोई कार्रवाई की गई है। इससे नगर पंचायत की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

पहले भी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला आया था

स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ माह पहले भी “मोर बसना” स्वागत बोर्ड को विस्फोटक लगाकर उड़ाने की शिकायत सामने आई थी। उनका आरोप है कि उस मामले में भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अब शासकीय सीसी रोड तोड़कर कथित अवैध निर्माण किए जाने के आरोप के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सोशल मीडिया में चर्चाओं का बाजार गर्म

इस पूरे मामले को लेकर बसना क्षेत्र के सोशल मीडिया में  संबंधित पक्षों के बीच कथित लेन-देन की चर्चाएं भी चल रही हैं। हालांकि, इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और महाजनपद न्यूज इन दावों की पुष्टि नहीं करता।

शिकायतकर्ता की प्रमुख मांगें

शिकायतकर्ता ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—

– राजस्व विभाग की टीम के साथ तत्काल मौके का निरीक्षण कराया जाए।
– प्रस्तुत दस्तावेजों एवं वास्तविक खसरा नंबर की जांच कराई जाए।
– जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए।
– शासकीय गली, नाली एवं सीसी रोड से अतिक्रमण हटाकर सार्वजनिक मार्ग को बहाल किया जाए।
– शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में संबंधित लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

मामले को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो इससे न केवल सार्वजनिक मार्ग और जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होगी, बल्कि शासकीय संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होंगे। अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और नगर पंचायत की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।